जन-लोकपाल और राईट टू रिकोल अलग अलग चीजे हे का मिथक/झूठी बात

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जन-लोकपाल और राईट टू रिकोल अलग अलग चीजे हे का मिथक/झूठी बात

Post by admin » Sun Jul 03, 2011 6:57 am

लोकपाल/जन-लोकपाल और राईट टू रिकोल अलग अलग चीजे हे का मिथक /झूठी बात

कनिष्ट/जूनियर कार्यकर्ता जभी भी राईट टू रिकोल की बात करते हे तो उनको भटकाने के लिए वरिष्ठ नेताओ ने यह मिथक या जूठी बात फेला रखी हे की लोकपाल और जन-लोकपाल अलग अलग चीजे हे और दोनों अपनी जगह हे और दोनों को लाने के लिए दो अलग-अलग क्रान्ति चाहिए |

(१) राईट टू रिकोल का सामान्य मतलब होता हे की भ्रष्ट अधिकारी/नेता को आम नागरिको द्वारा बहुमत साबित करके नौकरी में से निकलना | सभी कानून अपनी जगह अच्छे हे लेकिन अधिकारी/नेता भ्रस्त हे | यदि लोकपाल भ्रष्ट हो गया तो क्या ? ईसी लिए लोकपाल / जन-लोकपाल के कानून में ही राईट टू रिकोल लोकपाल या जन लोकपाल होना चाहिए | तो यह भी जाहिर सी बात हे की अगर हम लोकपाल / जन-लोकपाल की मांग कर रहे हे तो भ्रस्त लोकपाल / जन-लोकपाल को निकालने का तरीका भी लोकपाल / जन-लोकपाल के कानून में ही होना चाहिए |

(२) कुछ कार्यकर्ता को बेवकूफ बनाने के लिए वरिष्ठ नेता केहते हे की लोकपाल के कानून में ही राईट टू रिकोल हे | लेकिन पढ़ने पर पता चलता हे की लोकपाल को सिर्फ न्यायाधीश ही निकल सकता हे तो यह राईट तो रिकोल के नाम पर हमें कुछ भी कचरा हाथ में दे रहे हे | तो मेरी आपसे विनती हे की आप नीचे दी गई लिंक पर ध्यान से देखे और यदि आपको पसंद आये तो बाकि लोगो को भी बताए |

http://www.righttorecall.info/406.pdf (हिंदी)

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