प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Thu Jun 19, 2014 10:19 am 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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भारत के सभी मतदाताओं के लिए,

कृपया ये यू.आर.एल अपने सांसद को एस.एम.एस. द्वारा भेजें यदि आप चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि कानून (People`s representative act) में संशोधन करके चुनाव यंत्र पर बैन लगाया जाये और मतदान पत्र को वापस लाया जाये |

===== एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा सांसद को आदेश (हिंदी अक्षरों में) का आरम्भ ===

कृपया संसद में तुरंत चुनाव यंत्र रद्द करने और मतदान पत्र लाने के लिए प्रस्ताव पेश करें वरना आपको / आपकी पार्टी को वोट नहीं देंगे. देखें - tinyurl.com/banevm कृपया अपने पब्लिक मोबाइल को अपनी वेबसाइट के साथ जोड़ें ताकि सभी एस.एम.एस. आपके वेबसाईट पर दिखें भेजने वाले के वोटर आई.डी के साथ

======= सांसद को आदेश का अंत =====


बहुत से पुराने मोबाईल में केवल अंग्रेजी अक्षरों में ही टाइप करना संभव है; उस स्तिथि में अपने सांसद को निम्न आदेश भेजा जा सकता है -

===== एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा सांसद को आदेश (अंग्रेजी अक्षरों में) का आरम्भ ===

Kripya sansad mein turant chunav yantr radd karne aur matdan patr lane ka prastaav pesh karein varna aapko / aapki party ko vote nahin denge – tinyurl.com/banevm Aur apna public mobile apne website ke saath jodein taaki sabhi sms aapki website par sabhi ko bina login dikhe bhejne waale ke voter ID ke saath

======= सांसद को आदेश का अंत =====

इसके अलावा, अपनी मांग के प्रमाण को आपके वोटर आई.डी के साथ, सार्वजनिक, दिखाने के लिए एक कोड-एस.एम.एस. (0161) http://www.smstoneta.com/hindi पर भेजें साईट पर रजिस्टर होने के बाद | अधिक जानकारी के लिए http://www.smstoneta.com/hindi देखें |

सभी सांसदों के लिए,

यदि आपको ये यू.आर.एल. मिलता है, तो इसका मतलब है कि मतदाता अपना संवैधिनिक, धार्मिक और नैतिक कर्तव्य निभाने के लिए आपको एस.एम.एस द्वारा निम्न आदेश देना चाहता है कि इ.वी.एम मशीन पर प्रतिबंध/रोक लगा दी जाए और केवल कागजी मतदान पत्रों के उपयोग को कानूनी मान्‍यता दी जाए।


अधिक जानकारी :


कृपया http://www.youtube.com/watch?v=ZlCOj1dElDY पर एक वीडियो प्रदर्शन देखें जो दिखलाता है कि इवीएम मशीनों में हेराफेरी/गड़बड़ी करना कागजी मतदान पत्रों से कहीं ज्‍यादा आसान है और इन गड़बड़ियों का पता भी नहीं लगाया जा सकता। इसके अलावा, मैंने एक तरीके के बारे में लिखा है कि कैसे फैक्‍ट्री के भीतर लाखों इवीएम मशीनों में गड़बड़ी/हेराफेरी की जा सकती है।

क्‍या इवीएम मशीनों में गड़बड़ी की जा सकती है? हां। और इससे भी खतरनाक बात यह है कि हजारों इवीएम मशीनों में गड़बड़ी/हेराफेरी फैक्‍ट्री के भीतर कुछ ही लोगों द्वारा की जा सकती है। पेपर/कागज के मतदान-पत्रों का प्रयोग करने पर ऐसी गड़बड़ी/हेराफेरी नहीं की जा सकती। और कुछ प्रकार की हेराफेरी इस प्रकार की हैं कि जिनमें यह पक्का/निश्‍चित होता है कि इन हेराफेरियों का पता सारी जनता को कभी नहीं चल पाएगा। पेपर/कागजी मतदानों के मामले में कोई व्‍यक्‍ति कुल मतदान के मुश्‍किल से 0.1 प्रतिशत की ही हेराफेरी कर सकता है और ऐसा करने के लिए भी उसे हजारों अपराधियों की जरूरत पड़ेगी| ई.वी.एम मशीनों द्वारा चुनाव में , कोई व्यक्ति 10-15 ऊपर/शीर्ष के लोगों की मदद से और कलेक्टर के दफ्तर में एक छोटी सी चाल चलकर, कुल डाले गए मत में से 10 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक भी चुरा सकता है। (इसके लिए ये लिंक देखें-www.righttorecall.info/evm.h.pdf )

एक और तरीका है ,बेईमान डिस्प्ले/प्रदर्शन , जो ब्लू-टूथ द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है,जिसमें फैक्ट्री में 100 लोग चाहिए (बूथों पर रेडियो सिग्नल/इशारा देने के लिए ) और उनके उपयोग से औसत 10% चुनाव-क्षेत्रों का, तक चुराया जा सकता है | (अधिक जानकारी के लिए ये विडियो देखें-http://www.youtube.com/watch?v=ZlCOj1dElDY )

यही वह मुख्‍य कारण है कि क्‍यों जर्मनी ने इवीएम मशीनों पर प्रतिबंध/रोक लगा दी और जापान तथा आयरलैण्‍ड ने इवीएम योजनाओं को रद्द/समाप्‍त कर दिया। और अमेरिका के कई राज्यों ने भी इवीएम पर रोक/प्रतिबंध लगा दिया।

कागज/पेपर के मतदान-पत्रों के मामले में लोग मतदान-केन्‍दों पर तथाकथित कब्‍जा कर लेने की शिकायत करते हैं। देखिए, इ.वी.एम से भी मतदान-केन्‍द्र पर कब्‍जा नहीं रूकता। यह निश्‍चित रूप से पुलिस(कानून-व्यवस्था) का मामला है। इ.वी.एम मशीन से दो लगातार बार वोट देने के बीच में केवल 20 सेकेन्‍ड की देरी लगती है ,और कोई देरी नहीं होती। इस 20 सेकेन्‍ड की देरी को कागज के मतदान पत्रों में भी प्राप्‍त किया जा सकता है जिसके लिए एक मशीन का उपयोग किया जा सकता है जो मतदान पत्रों के पीछे की तरफ 15 अंकों की एक क्रमसंख्‍या डाल देगी और यह मशीन प्रत्‍येक 20 सेकेंड में केवल एक मोहर/स्‍टैंप लगाएगी।

इससे दो लगातार मतदानों के बीच 20 सेकेन्‍ड की देरी सुनिश्‍चित/पक्‍का की जा सकती है। इससे मतदान पत्र इवीएम मशीन से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा जितना है और इसमें फैक्ट्री/औद्योगिक स्‍तर के गड़बड़ी की समस्‍या बिलकुल भी नहीं आएगी। इसके अलावा सभी संवेदनशील मतदान केन्‍दों पर चुनाव आयुक्‍त 1000 से 2000 रूपए तक के कैमरे लगवा सकते हैं जो प्रत्‍येक 30 सेकेन्‍ड में चित्र/तस्‍वीर लेंगे और इन तस्‍वीरों को मोबाइल फोन लिंक/सम्‍पर्क के जरिए नियंत्रण कक्ष में भेज सकते हैं।

कुल मिलाकर मतदान केन्‍द्रों पर कब्‍जा की घटनाएं इसलिए होती हैं क्‍योंकि जज/पुलिसवाले अपराधियों को बढ़ावा दे रहे होते हैं जो इतने ताकतवर और निडर हो जाते हैं कि वे मतदान केन्‍द्रों पर कब्‍जा कर लेते हैं। इसका समाधान है – ऐसी प्रक्रिया लागू करना जिसके द्वारा नागरिक जिला पुलिस प्रमुख और जजों को बदल/बर्खास्‍त कर सकें ताकि अपराधी इतने ताकतवर ना बन सकें। एक बार यदि अपराधी कमजोर हो जाए तो मतदान केन्‍द्र पर कब्‍जे की समस्‍या कम/समाप्‍त हो जाएगी।

साथ ही, यदि चुनाव की जमानत राशि बढ़ा दी जाए (देखिए, अगले भागों/शीर्षकों में से एक) तो नकली उम्‍मीदवारों की संख्‍या कम हो जाएगी। इसलिए उम्‍मीदवारों की संख्‍या 5-10 हो जाएगी और तब (मतदानपत्र) दो पोस्‍टकार्ड से ज्‍यादा बड़े आकार का नहीं रह जाएगा। तब ऐसे मामले में मतगणना का काम एक ही दिन में समाप्‍त हो जाएगा।

एक बार यदि नागरिकों द्वारा बदले/हटाए जा सकने वाले जिला पुलिस प्रमुखों और नागरिकों द्वारा बदले/हटाए जा सकने वाले जजों को नौकरी पर रख सकें, तो अपराधियों की समस्‍या कम हो जाएगी और तब प्रति मतदान केन्‍द्र पर कैमरे के साथ एक पुलिसवाले और 10 मतदान केन्‍द्रों के क्षेत्र में 10 पुलिसवालों की एक घूमती हुई(गतिशील) ,गश्त लगाने वाली/निगरानी (वाहन) की तैनाती करके ही चुनाव आयोजित करना संभव हो जाएगा।

इसलिए 800000 मतदान केन्‍द्रों में मतदान आयोजित करने के लिए लगभग 16,00,000 पुलिसवाले पर्याप्‍त होंगे। भारत में 25,00,000 पुलिसकर्मी हैं। (केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल और अन्‍य पुलिस वालों को शामिल करके, सेना के जवानों और सीमासुरक्षा बल को छोड़कर)। और चाहे चुनाव के लिए जरूरत हो या न हो ,हमें भारत में 5000000 और पुलिसकर्मियों की जरूरत है। इसलिए पूरे देश में एक ही दिन में मतदान कराया जाना संभव है। और चुनाव होने के 3 दिनों के बाद मतगणना की जा सकती है।

इसलिए कुल मिलाकर इ.वी.एम और मतदान कराने के मामले पर मेरे प्रस्‍ताव ये हैं –

1 ‘पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का प्रयोग करके इ.वी.एम मशीन पर प्रतिबंध/रोक लगा दी जाए, केवल कागजी मतदान पत्रों के उपयोग को कानूनी मान्‍यता दी जाए।

2. ‘पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का प्रयोग करके पुलिस प्रमुख, जजों के ऊपर राईट टू रिकाल (नागरिकों द्वारा भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) कानून लागू किया जाए।

3. भारत भर में 30,00,000 और पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाए।

4. सभी पुलिसकर्मियों को कैमरा दिया जाए।(कैमरे उनके घुमती हुई गाड़ियों में लगे होंगे)

5. सभी संवेदनशील मतदान केन्‍द्रों में कैमरा लगाया जाए।

6 ‘पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का प्रयोग करके चुनाव जमानत की राशि बढ़ाई जाए।

7. ‘पारदर्शी शिकायत/प्रस्ताव प्रणाली(सिस्टम)’ का प्रयोग करके उन नागरिकों की संख्‍या बढ़ाई जाए जिन्‍हें किसी उम्‍मीदवार को स्वीकृति देने की जरूरत है ताकि उम्मीदवार को मान्यता मिल जाये और चुनाव लड़ने की इजाजत मिल सके।

कृपया पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली को सैक्शन 1.2, http://www.smstoneta.com/prajaadhinbharat, राईट टू रिकाल-पोलिस कमिश्नर को सैक्शन 22.2, http://www.smstoneta.com/prajaadhinbharat और राईट टू रिकाल-जज को सैक्शन 7.3, http://www.smstoneta.com/prajaadhinbharat में देखें |


To voters of India,

Please send this URL to MP via SMS if you wish to order MP to immediately make necessary changes in people’s representation act so that EVM gets banned and paper ballot returns

===== start of the text of the order to the MP via SMS or twitter ===

Please immediately present bill in parliament to ban EVM and bring back ballot paper Or else will not vote for you / your party. Details - tinyurl.com/banevm. Also link your public phone to your website so that all the sms sent to you are seen by all citizens along with their voter ID, without login

======= end of text of order to MP =====

Also, send code-sms (0161) to http://www.smstoneta.com to display proof of this demand along with your voter ID after registering at the site. For details, see - http://www.smstoneta.com


To MP,
If you get this URL, then it very likely means that the voter is doing his constitutional, religions, political and moral duty and sending you an order via SMS to ban EVMs using TCP and Legalize the use paper ballots only.

Background :

Please see a video demonstration that shows that rigging EVMs in untraceable way is easier that paper ballots at http://www.youtube.com/watch?v=ZlCOj1dElDY . In addition, I have written a way on how lakhs of EVMs can be rigged inside factory at http://rahulmehta.com/evm1.pdf

Can EVMs be rigged? Yes, and worse – unlike paper ballots, 10000s of EVMs can be rigged with just few people inside the factory. And some ways of rigging ensure that rigging will never become visible to citizens at large. In case of paper ballots, one can rig hardly 0.1% of total votes and that too would need 1000s of criminals.

With EVMs, one with 10-15 people at top and by playing a small trick in the Collectors’ offices, one can steal as many as 10% to 20% of the total polled votes. There is another method, which needs about 100 persons in the factory and using them one can steal about 10% of all polled votes across Constituencies. This is the main reason why Germany banned EVMs and Japan, Ireland scrapped EVM projects. And many states in US also banned EVMs.

In case of paper ballots, people complain of so called booth capture. Well, EVM doesn’t stop booth capture either. That is strictly a police problems. EVM only creates 20 second delay between two successive votes and nothing else. This 20 second delay can be achieved with paper ballot as well by having a device that puts a stamp with a 15 digit serial number on the backside of the ballot paper, and device will put only one stamp every 20 seconds. This will ensure a delay of 20 seconds between two votes. Now ballot paper is as safe as EVM and the problem of industrial scale rigging doesn’t come at all.

In addition, at all sensitive booth, EC can put a Rs 1000 to Rs 2000 camera which can take pictures every 30 seconds and send the pictures to control station via mobile phone link. All in all, booth capturing happens because judges/policemen have been encouraging criminals, who become so strong and bold that they hack booths. Solution is to enact procedures by which citizens can expel/replace District Police Chiefs and judges so that criminals don’t go so strong. Once criminals weaken the problem of booth capturing reduce.

Also, if election is deposit is raised (see one of the next topics), then number of spurious candidates will reduce. So number of candidates will become 5-10, and they will become of the size of no bigger than two post cards. In such cases, counting will be over in one day.

Once we have recallable District Police Chiefs and recallable judges, the crime problem will reduce and it would become possible to conduct elections with just 1 policemen equipped with camera per booth, and a mobile petrol of 10 policemen in an area covering 10 booths.

So to conduct polls in 800,000 booths, about 16,00,000 policemen will be enough. We have 25,00,000 policemen in India (CRPF and all police forces included, Army soldiers and BSF excluded). And election or no election, we need to recruit 50,00,000 more policemen in India. So it is possible to conduct polling in entire country in just one day, and have counting 3 days after polling day.

So all in all, our proposals on EVM and poll conducting issues are

1. Ban EVMs using TCP. Legalize the use paper ballots only.
2. Enact Right to Recall over Police Chief, judges using TCP
3. Recruit 30,00,000 policemen all over India
4. Equip all policemen with camera
5. Provide camera in all sensitive booths
6. Using TCP, raise the election deposits
7. Using TCP, raise number of citizens who need to propose the candidate

Please see draft of TCP in section 1.3, http://www.3linelaw.wordpress.com, RTR-police commissioner in section 22.2, http://www.3linelaw.wordpress.com and RTR-judges in section 7.3, http://www.3linelaw.wordpress.com


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