प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Thu Sep 04, 2014 2:32 pm 
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प्रिय भारत के नागरिक,

यदि आप चाहते हैं कि सेना में सुधार हो और भारत के आम-नागरिकों को अपनी आत्म-सुरक्षा के लिए हथियार रखने और बनाने की छूट हो, ऐसे प्रक्रिया-ड्राफ्ट लागू हों, तो कृपया ये आदेश अपने सांसद को एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा भेजें -

" Kripya ye draft -tinyurl.com/atamsuraksha ko apne website, niji bill aadi dwara badhava karein aur rajptr mein chhapwayein. Nahin to aapki/aapki party ko vote nahin karunga. Kripya smstoneta.com jaise public sms server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID ke saath sabhi ko bina login dikhe"

अपने विधायक को एस.एम.एस. भेजने के अलावा, अपनी मांग का प्रमाण अपने वोटर आई.डी. के साथ, पब्लिक एस.एम.एस. सर्वर पर दिखाएँ 3 एस.एम.एस. भेज कर | यदि आप ये चाहते हैं कि भारत के आम-नागरिकों को अपनी आत्म-सुरक्षा के लिए हथियार रखने और बनाने की छूट हो और सेना में सुधार हो ऐसे कानून-ड्राफ्ट लागू हों, तो 08141277555 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया तीन एस.एम.एस. भेजें –
.
• पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में
अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)
.
*आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*
.
• दूसरा एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. (rtrg.in/tcpsms.h) का समर्थन कोड है –
.
0011
.
• तीसरा एस.एम्.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो नागरिकों और देश की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कानूनों का समर्थन कोड है –
.
0151
.
आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा –
.
http://smstoneta.com/tcp |
.
यदि पर्याप्त संख्या में ये इन्टरनेट वोटर आई.डी. समर्थन प्राप्त हो गया, तो ये कानून आ जायेंगे |
.

और कृपया अन्य नागरिकों को भी विज्ञापन, पर्चों आदि द्वारा बताएं कि वे भी अपने विधायक को इस प्रकार का एस.एम.एस भेजें |

=================================

प्रिय सांसद/विधायक,

अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा ये यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है (न कि जिसने ये लेख लिखा है)

एस.एम.एस. भेजने वाला आपको लेख के `C` सैक्शन में कानून-ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निजी बिल आदि द्वारा बढ़ावा करने और मांग करने के लिए आदेश दे रहा है -

सैक्शन A. परिचय

हमारी सुरक्षा दिन बार दिन कमजोर पड़ती जा रही है और शत्रु देश जैसे पाकिस्तान, बंगलादेश, चीन आदि द्वारा नागरिकों पर आक्रमण और नक्सली, आतंकवादी, गुंडों आदि द्वारा अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है | इस कानून-ड्राफ्ट के द्वारा हर शांतिपूर्ण नागरिक इंसास के स्तर के हथियार रखने और अपराधियों और देश के दुश्मनों से अपनी सुरक्षा करने में सक्षम होंगे | इससे समाज में अपराध कम होगा और जनता आने वाले संकट, चाहे वो आईसीस हो या कोई अन्य, उससे जनता निपट सकती है |

कृपया ध्यान दें कि पाकिस्तान के पास 2 करोड़ से अधिक ऐ.के-47 स्तर के बंदूकें हैं, अफगानिस्तान के पास एक करोड़ ऐसे बंदूकें हैं | भारत के पास केवल 25 लाख ऐ.के-47 स्तर की बंदूकें हैं, जबकि चीन ऐसे करोड़ों बंदूकें बना कर पाकिस्तान, बंगलादेश आदि को दे सकता है | तो हम जितनी जल्दी अपनी स्थानीय हथियार बनाने की क्षमता बढ़ाएँ, बिना एफ.डी.आई. के, उतना ही अच्छा है |

कृपया नोट करें कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि जब किसी क्षेत्र में हर घर में नागरिकों के पास गुंडों के ऐ.के.-47 से अपनी सुरक्षा करने के लिए बंदूक हो, तो वहाँ कत्ले-आम हुआ | जबकि काफी प्रमाण है कि `बंदूकों से जानें बचती हैं` और `बंदूकों पर प्रतिबन्ध (रोक) से जानें जाती हैं` (कृपया सैक्शन-D1 में सन्दर्भ देखें)

सैक्शन B. सेना में सुधार और नागरिकों की आत्म-सुरक्षा बढ़ाने के लिए मुख्य मांगें संक्षिप्त में]

B1. पारदर्शी शिकायत प्रणाली- (ट्रांसपेरेंट कंप्लेंट प्रोसीजर-टी.सी.पी.) से आम नागरिक का शोषण तुरंत कम हो सकता है -

आज के सिस्टम से आम-नागरिक की दुर्दशा - आज हम आम नागरिक को अपनी समस्या या शिकायत या कोई जनहित के प्रस्ताव के लिए सरकारी दफ्तर में अर्जी देनी पड़ती है लेकिन भ्रष्ट अफसर उस अर्जी को आसानी से दबा देता है | क्योंकि हम या दूसरे नागरिक अपनी ही अर्जी को देख नहीं सकते एक बार अर्जी जमा हो जाये तो |

सरल सा उपाय - इसीलिए, हमने ये प्रस्ताव किया है कि नागरिक-मतदाता को ये विकल्प होना चाहिए कि यदि वो चाहे, तो वो किसी भी दिन, कलेक्टर आदि सरकारी दफ्तर जाकर अपनी अर्जी, 20 रुपये प्रति पन्ने के एफिडेविट के रूप में प्रधानमंत्री वेबसाईट पर स्कैन करवा सकेगा जिससे सभी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन शब्द-शब्द पढ़ सकेंगे |

ये प्रक्रिया कम समय में, आसानी से, सरकारी आदेश द्वारा लागू हो सकती है | इस प्रक्रिया का उन आम नागरिकों को तुरंत लाभ होगा जिनके पास कोई कनेक्शन नहीं होता है | इसके लागू होने से कोई बाबू, कोई मीडिया या अफसर उनकी अर्जी दबा नहीं सकता बिना उनकी पोल लाखों नागरिकों में खुले | और सभी के मुद्दों को इससे लाभ होगा क्योंकि अब उनको दबाना आसान नहीं होगा |

इस प्रक्रिया के द्वारा जनता प्रामाणिक और पारदर्शी रूप से जन-हित प्रक्रियाओं पर अपनी हाँ-ना दे सकती है और इस प्रकार वो थोड़े समय में उन्हें जनसमूह और प्रमाण के दबाव के कारण लागू करवाया जा सकता है |

कृपया पूरा ड्राफ्ट सैक्शन-C1 में देखें

अधिक जानकारी के लिए http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.htm देखें (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.pdf)|

प्रश्नोत्तरी के लिए http://www.righttorecall.info/007.h.htm देखें (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/007.h.pdf) |

B2. स्वदेशी हथियार एवं सैन्य उपकरण उत्पादन अधिनियम और हथियारबंद आम-नागरिक समाज अधिनियम

हमारी सुरक्षा दिन बार दिन कमजोर पड़ती जा रही है और शत्रु देश जैसे पाकिस्तान, बंगलादेश, चीन आदि द्वारा नागरिकों पर आक्रमण और नक्सली, आतंकवादी, गुंडों आदि द्वारा अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है | इस कानून-ड्राफ्ट के द्वारा सम्पूर्ण स्वदेशी कम्पनियाँ, भ्रष्ट अफसरों या भ्रष्ट कंपनियों से सताए बिना, इंसास के स्तर के हथियार बनाने में सक्षम होंगे | इससे जनता आने वाले संकट, चाहे वो आईसीस हो या कोई अन्य, उससे जनता निपट सकती है |

यदि सेना रूपी कवच टूट जाती है तो, हम नागरिकों को बहार के देश के शत्रुओं से अपनी रक्षा करने के लिए हथियार चाहिए और नागरिकों को बंदूकें चाहिए नक्सली, आतंकवादी, अपराधी और दूसरे अन्य आंतरिक खतरों से अपनी सुरक्षा करने के लिए |

कृपया नोट करें कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि जब किसी क्षेत्र में हर घर में नागरिकों के पास गुंडों के ऐ.के.-47 से अपनी सुरक्षा करने के लिए बंदूक हो, तो वहाँ कत्ले-आम हुआ | जबकि काफी प्रमाण है कि `बंदूकों से जानें बचती हैं` और `बंदूकों पर प्रतिबन्ध (रोक) से जानें जाती हैं` (कृपया सैक्शन-D1 में सन्दर्भ देखें)

इसके कृपया पूरे ड्राफ्ट सैक्शन-C2 और C6 में देखें |

B3. राईट टू रिकॉल-प्रधानमंत्री और अन्य मुख्य पद जैसे जिला हथियार अधिकारी पर राईट टू रिकॉल के कानून-ड्राफ्ट -

सेना में प्रमुख व्‍यक्‍ति प्रधान मंत्री हैं क्योंकि प्रधान मंत्री ही सेना, रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (डी. आर. डी. ओ.) आदि में वेतन तय करते हैं और प्रधान मंत्री ही उन नीतियों को तय करते हैं जो नीतियां उन नागरिक/असैनिक विभागों पर प्रभाव डालती है जिनकी जरूरत सेना को भी पड़ती है । इसलिए जब तक प्रधान मंत्री को हटाने/बदलने का अधिकार नागरिकों को नहीं होगा तब तक प्रधान मंत्री अमेरिका के हाथों बिक भी सकते हैं और ऐसी नीतियां बना सकते हैं जिससे भारत कमजोर हो ।

यदि नागरिकों के पास ऐसी प्रक्रिया हो कि वे भ्रष्ट सरकारी अफसरों को ईमानदार अफसरों से किसी भी दिन बदल सकें, तो नौकरी जाने के डर से 99% अफसर अपना कार्य सुधार देंगे और 1% जो अफसर कार्य नहीं सुधरेंगे, उनको नागरिक बदल कर ईमानदार अफसर ले आयेंगे | अफसरों में भ्रष्टाचार कम हो जाये और वे अपना काम सुधार लें, तो जनता और देश के हित में कार्य करेंगे और शत्रुओं के हाथों बिकेंगे नहीं | इन जनहित प्रक्रियाओं से दूसरे अपराधों में भी कमी आएगी |

इसके कृपया पूरे ड्राफ्ट सैक्शन-C3 और C7 में देखें |

B4. कैसे पूरी तरह से भारतीय (नागरिक) मालिकी वाली कम्‍पनी (WOIC = Wholly Owned by Indian Citizen = सम्पूर्ण स्वदेशी) अध्यादेश आने से हमारी सुरक्षा में सुधार होगा

सुरक्षा उद्योग में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर प्रतिबन्ध हमारी देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है |

उदाहरण, यदि हम किसी अमेरिकी कम्पनी जैसे नोर्टेल से टेलीकोम स्विच मंगाते हैं | इन स्विच में रेडियो-चिप होते हैं, जो रेडियो सिग्नल भेज कर बंद किये जा सकते हैं | यदि ऐसे स्विच भारत में प्रयोग किये जाते हैं, तो फिर भारत और अमेरिका के युद्ध में अमेरिका केवल एक बटन दबा कर भारत का टेलीकोम नेटवर्क (जाल) बंद कर सकता है और पूरी भारतीय सेना अंधी और बहरी हो जायेगी | इसीलिए, हमें अच्छे विदेशी कंपनियों से भी उच्च तकनीकी का सामान आयत नहीं करना चाहिए, जिसका सेना पर असर हो सकता है |

कृपया पूरा ड्राफ्ट सैक्शन-C4 में देखें |

B5. जूरी सिस्टम से कैसे हमारे स्वदेशी उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और कैसे हमारी सुरक्षा में सुधार होगा ?

जूरी सिस्टम में, कोर्ट मामले जज के द्वारा निर्णय नहीं किये जाते ; लाखों मतदाताओं में से 15 से 1500 नागरिक एक रिकॉल किये जा सकने वाले अफसर द्वारा, लॉटरी द्वारा चुने जाते हैं | जूरी सदस्यों की संख्या कोर्ट मामले की गंभीरता के अनुसार होती है और हर मामले के बाद नया लोगों का समूह चुना जाता है |

इसीलिए, जज सिस्टम की तुलना में जूरी सिस्टम में भ्रष्ट व्यक्ति को रिश्वत देकर अपने पक्ष का फैसला करवाने या मामले को लटकवाकर गवाहों को प्रभावित करने में कहीं अधिक कठिनाई होती है | इस प्रकार, जूरी सिस्टम में फैसले जल्दी और न्यायपूर्वक आते हैं | जूरी सिस्टम में फैसले कुछ ही हफ़्तों में आते हैं, जबकि जज सिस्टम में कोर्ट मामलों के फैसले आने में सालों-साल लगते हैं | जल्दी और न्यायपूर्वक फैसले आने से, स्वदेशी कंपनियों पर गलत मामलों में कमी आती है और भ्रष्ट अफसर द्वारा सताना भी कम हो जाता है और स्वदेशी कंपनियों और रक्षा उत्पादन की कार्यक्षमता बढती है |

कृपया जूरी सिस्टम का पूरा ड्राफ्ट आगे सैक्शन-C5 में देखें |

सैक्शन C. मुख्य मांगें के राजपत्र में छपवाने के लिए ड्राफ्ट -


C1. पारदर्शी शिकायत प्रणाली- (ट्रांसपेरेंट कंप्लेंट प्रोसीजर-टी.सी.पी.) -

===== प्रस्तावित प्रक्रिया-ड्राफ्ट जो राजपत्र में छपवाना है, उसका आरम्भ =======

1.

[कलेक्टर (या उसका क्लर्क) को निर्देश ]

राष्ट्रपति कलेक्टर को आदेश देता है कि यदि कोई भी नागरिक मतदाता, यदि खुद हाजिर होकर, एफिडेविट पर अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी / भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद / कोई प्रस्ताव या कोई अन्य एफिडेविट कलेक्टर को देता है और प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर रखने की मांग करता है, तो कलेक्टर (या उसका क्लर्क) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर, सीरियल नंबर देकर, एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ, ताकि सभी बिना लॉग-इन के वे एफिडेविट देख सकें ।

2.

[पटवारी अर्थात तलाटी अर्थात लेखपाल (या उसका क्लर्क) के लिए निर्देश]

(2.1) राष्ट्रपति पटवारी को आदेश देता है कि यदि कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, 3 रुपये का शुल्क (फीस) लेकर, तो पटवारी नागरिक का मतदाता कार्ड संख्या, नाम, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा ।
नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएगी । गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए शुल्क 1 रूपये होगा ।

(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है ।

(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |

(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |

3.

[सभी नागरिकों, अधिकारियों, मंत्रियों के लिए सूचना]

ये कोई रेफेरेनडम / जनमत-संग्रह नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, न्यायधीश, सांसद, विधायक, अदि पर अनिवार्य नहीं होगी । लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, कोई एक अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या इस्तीफा दे सकते हैं । उनका निर्णय अंतिम होगा ।

====== प्रस्तावित प्रक्रिया ड्राफ्ट जो राजपत्र में छापना है उसकी समाप्ति ==========

मांग किये गये इस टी.सी.पी - पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव सिस्टम सरकारी आदेश का सार है :-

1. यदि नागरिक चाहे, तो अपनी फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव 20 रूपये प्रति पेज देकर कलेक्टर की कचहरी जाकर अपने वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री वेबसाइट पर स्कैन करवा सकेगा । इस शिकायत को बिना लॉग-इन किये सभी आम नागरिक देख सकेगें |

2. यदि नागरिक चाहे तो 3 रुपये का शुल्क देकर धारा 1 में दी गई फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव पर अपनी हाँ/ना प्रधानमंत्री वेबसाइट पर दर्ज करवा सकेगा । और उस नागरिक की हाँ / ना पधानमंत्री की वेबसाइट पर दिखाई देगी | यह हाँ-ना दर्ज कराने की कीमत 3 रूपये से घटकर 10 पैसे हो जायेगी, जब यह प्रकिया एस.एम.एस. पर आ जायेगी | नागरिक अपना मत किसी भी दिन रद्द कर सकता है या बदल सकता है इस कारण ये प्रक्रिया ना तो पैसों द्वारा खरीदी जा सकती है, ना ही गुंडों या मीडिया द्वारा प्रभावित की जा सकती है |

3. हाँ / ना पधानमंत्री पर अनिवार्य नहीं है |

==========================

C2. स्वदेशी हथियार एवं सैन्य उपकरण उत्पादन अधिनियम

भारत में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रजा अधीन राजा समूह द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट :

1. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक ऐफिडेविट/हलफनामा जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

2. [तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल देगा ।

3. [सभी]
हाँ-ना की संख्या प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अफसरों और जज पर बाध्य नहीं होंगे |

4. यह क़ानून सिर्फ 'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) पर लागू होगा । (WOIC के ड्राफ्ट के लिए सैक्शन-C4 देखिये)

5. शब्द `रक्षा मंत्री` से आशय भारत सरकार के रक्षा मंत्री से या किसी निश्चित कार्य को करने के लिए उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी से है ।

6. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री या उसके द्वारा इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारी निम्न लिखित हथियारों की परिभाषाएं प्रकाशित करेगा -
(A) छोटी बंदूके।
(B) मध्यम आकार की बंदूके।
(C) बड़ी बंदूके।
(D) होवित्ज़र तथा होवित्ज़र किस्म के अन्य प्रकार।
(E) टेंक तथा टेंक के अन्य प्रकार।
(F) कारतूस, गोले तथा कारतूस व गोलों के अन्य प्रकार।
(G) प्रक्षेपास्त्र तथा प्रक्षेपास्त्र के अन्य प्रकार।
(H) लड़ाकू विमान तथा लड़ाकू विमानो के अन्य प्रकार।
(I) सेना द्वारा उपयोग किये जाने वाले अन्य उपकरण तथा उनके प्रकार।
(J) आणविक हथियार एवं उनके प्रकार।
(K) रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार।
(L) जैविक हथियार एवं उनके प्रकार।
(M) अन्य श्रेणी के हथियार एवं उनके प्रकार ।

7. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री हथियारों की निम्नलिखित तीन श्रेणियां निर्धारित करके प्रकाशित करेंगे -
(A) श्रेणी प्रथम: हथियार जिनके लिए पंजीकरण करवाना आवश्यक नहीं है ।
(B) श्रेणी द्वितीय : ऐसे हथियार जिनके लिए पंजीकरण आवश्यक हो किन्तु लाइसेंस नहीं ।
(C) श्रेणी तृतीय : ऐसे हथियार जिनके लिए लाइसेंस आवश्यक हो ।

8. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को 'श्रेणी द्वितीय' = `पंजीकरण आवश्यक, लाइसेंस जरूरी नहीं` सूची के अंतर्गत रखेंगे :
(A) छोटी बंदूके
(B) मध्यम आकार की बंदूके
(C) बड़ी बंदूके
(D) अनुमति मिले होवित्ज़र एवं उनके प्रकार ।
(E) अनुमति मिले टेंक एवं उनके प्रकार ।
(F) अनुमति मिले प्रक्षेपास्त्र एवं उनके प्रकार ।
(G) अनुमति मिले कारतूस, गोले एवं उनके प्रकार ।
(H) अनुमति मिले लड़ाकू विमान एवं उनके प्रकार ।
(I) सेना द्वारा स्वीकृत और उपयोग में लाये जाने वाले अन्य श्रेणी के हथियार एवं उनके प्रकार ।

भारत की सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो "इंसास से कम" के स्तर की हैं, उनके डिजाईन सार्वजनिक क्षेत्र पर रखेगी | कोई भी नागरिक इस डिजाईन से, बिना किसी लाइसंस के, केवल पंजीकरण करवाकर, बंदूक या बन्दुक के पुर्जे या बंदूक की गोलियाँ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर सकता है | कोई भी नागरिक गोली-रोक (बुलेट-प्रूफ) जैकेट भी बना सकता है |

9. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री निम्नलिखित हथियारों को 'श्रेणी तृतीय' = `लाइसेंस जरूरी`की सूची के अंतर्गत रखेंगे :
(A) आणविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
(B) जैविक हथियार एवं उनके प्रकार ।
(C) रासायनिक हथियार एवं उनके प्रकार ।

10. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री उन हथियारों की एक सूची जारी करेंगे जिनके लिए पंजीकरण या लाइसेंस की आवश्यकता न हो ।

11. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
जिन हथियारों के लिए सिर्फ पंजीकरण अनिवार्य है, ऐसे हथियारों के उत्पादन के लिए रक्षा मंत्री 'भारतीय नागरिकों के सम्पूर्ण स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC)' के लिए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे ।
रक्षा मंत्री सुनिश्चित करेंगे कि इन कम्पनियों द्वारा कौनसी जानकारीयां सार्वजनिक की जायेगी तथा कौनसी जानकारियाँ रक्षा मंत्रालय के पास गुप्त रहेंगीं ।
रक्षा मंत्री यह भी निर्देशित करेंगे कि कौनसी जानकारियाँ इन कम्पनियों को प्रकाशित करनी होंगी तथा कौनसी जानकारियाँ कम्पनियां स्वयं के पास गुप्त रख सकेंगी ।

12. [सभी]
जो कम्पनियां भारतीय नागरिकों के पूर्ण स्वामित्व वाली नहीं है, ऐसी कम्पनियों को तीनों श्रेणियों तथा अन्य किसी भी श्रेणी के हथियारों के उत्पादन हेतु पंजीकरण तथा लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा ।

13. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
ऐसी कम्पनियाँ जो भारतीय नागरिकों के पूर्ण स्वामित्व वाली नहीं हैं, उनके द्वारा हथियार उत्पादन को नियंत्रण करने के लिए रक्षा मंत्री आवश्यक गैजेट अधिसूचना प्रकाशित करवाएंगे |

14. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
हथियार उत्पादन कर रही सभी प्रकार की कम्पनियों पर पंजीकरण और लाइसेंस दिशा-निदेशों को लागू करवाने के लिए रक्षा मंत्री अफसरों को नियुक्त करेंगे |

15. [सभी]
हथियारों का उत्पादन कर रही कंपनियों के बीच कोई विवाद हो या कोई नागरिक या सरकारी अफसर को ये लगता है कि वो फैक्ट्री का मालिक किसी कानून को तोड़ रहा है, तो कोर्ट मामले का निपटारा जज द्वारा नहीं, जिले की जूरी द्वारा होगा, जो जिले की वोटर लिस्ट में से 30 और 55 साल के बीच में होगा | राज्य जूरी और राष्ट्रिय जूरी को अपील की जा सकती है | (जिला जूरी के ड्राफ्ट के लिए सैक्शन-C5 देखें)

C3. राईट टू रिकॉल-प्रधानमंत्री ड्राफ्ट

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-प्रधानमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट का आरम्भ =====

1. [सामान्य जानकारी]

नागरिक शब्‍द का मतलब रजिस्टर्ड वोटर/मतदाता है।

2. [जिला कलक्टर के लिए निर्देश]

30 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक जो प्रधानमंत्री बनना चाहता हो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय जा सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर उसे एक सीरियल नम्‍बर जारी करेगा और उस उम्मीदवार का नाम प्रधानमंत्री वेबसाईट पर रखेगा ।

3. [तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क)]

भारत का कोई भी नागरिक तलाटी / पटवारी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को प्रधानमंत्री के पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। तलाटी उसके अनुमोदन/स्वीकृति को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र, दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा। (गरीबी रेखा से नीचे) बी पी एल कार्डधारकों के लिए शुल्‍क/फीस 1 रूपया होगी। यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन/स्वीकृति रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए बदल देगा।

4. [तलाटी के लिए निर्देश]

वह तलाटी नागरिकों की पसंद/प्राथमिकता को प्रधानमन्त्री के वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा।

5. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]

प्रत्‍येक सोमवार को हर जिला का कलेक्टर हरेक उम्‍मीदवार की अनुमोदन/स्वीकृति-गिनती को प्रकाशित करेगा। .

6. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

आज का प्रधानमंत्री अपनी अनुमोदन/स्वीकृति–गिनती को निम्‍नलिखित दो से उच्चतर मान सकता है –

  • नागरिकों की संख्‍या, जिन्‍होंने उसका अनुमोदन/स्वीकृति किया है
  • प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले लोकसभा के सांसदों द्वारा प्राप्‍त किए गए कुल मतों का योग

7. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

यदि किसी व्‍यक्‍ति को मौजूदा प्रधानमंत्री के मुकाबले 2 प्रतिशत ज्‍यादा अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त है तो वर्तमान प्रधानमंत्री इस्‍तीफा दे सकता है और सांसदों से कह सकता है कि वे सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया प्रधानमंत्री नियुक्‍त कर दें।

8. [लोकसभा के सांसद के लिए निर्देश]

सांसदगण धारा 7 में उल्‍लिखित व्‍यक्‍ति/सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया प्रधानमंत्री नियुक्‍त कर सकते हैं ।

सैक्शन- सी.वी. (जनता की आवाज़)

9. सी वी – 1 [जिला कलेक्‍टर के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी/डी सी के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन उसको कोई भी देख सके ।

10. सी वी – 2 [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह ऊपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट पर हां – नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देगा । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद/पावती देगा। यह हां – नहीं प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाला जाएगा।

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-प्रधानमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट समाप्त =====

C4. 'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) `अध्यादेश ड्राफ्ट

`पूरी तरह से भारतीय मालिक वाली कम्पनी (WOIC)` ऐसी कम्पनी है जिसके 100 प्रतिशत शेयर केवल भरतीय नागरिक या भारतीय सरकार या कोई अन्य `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कंपनी` के पास हों, मतलब उस कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के न हों | `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी` कंपनी कानून बनाने के लिए कुछ धाराएं कंपनी अधिनियम में जोड़ने होंगे |

===== `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कंपनी` अध्यादेश ड्राफ्ट जो कम्पनी अधिनियम में जोड़ना है, उसके ड्राफ्ट का आरम्भ =======

सैक्शन - `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (व्होल्ली ओन्ड बाय इंडियन सिटीजेंस = डब्‍ल्‍यू. ओ. आई. सी = WOIC)


1. कोई भी कंपनी अपने आप को `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी`(डब्ल्यू. ओ. आई. सी.) दर्ज करवा सकती है |

2. यदि कोई कम्‍पनी `सम्पूर्ण भारतीय (नागरिक) मालिकी वाली कंपनी (डब्ल्यू. ओ. आई. सी.)` है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के निवासी भारतीय नागरिक या दूसरे देश में अस्थायी निवासी भारतीय नागरिक, उस कंपनी के शेयर (हिस्‍सेदारी) खरीद सकते हैं । इसके अलावा, कोई भी दूसरी `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (डब्ल्यू. ओ. आई. सी.) या भारतीय सरकार उस कंपनी के शेयर खरीद सकती है, लेकिन कोई गैर-डब्ल्यू. ओ. आई. सी. या गैर-भारतीय नागरिक उस कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकते |

3. केवल भारतीय नागरिक `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` का निर्देशक, अध्यक्ष या भागीदार (पार्टनर) हो सकता है |
4. गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनियाँ` भारत में कोई भी भूमि खरीद नहीं सकती या भूमि को 10 साल से अधिक के लिए किराये पर नहीं ले सकती | गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` खदानें या कृषि भूमि को खरीद नहीं सकतीं या किराये पर नहीं ले सकतीं |

5. गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनियाँ` भारत में कोई भी निर्माण को खरीद नहीं सकती या कोई भी निर्माण को 10 वर्ष से अधिक किराये पर नहीं ले सकतीं |

6. कोई भी मंत्री या सरकारी कर्मचारी गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` में शेयर खरीद नहीं सकता |

7. यदि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` का कोई हिस्सेदार किसी दूसरे देश का नागरिक या स्थायी निवासी हो जाता है, तो उसे 3 महीनों में अपने शेयर बेच देने होंगे या रजिस्ट्रार उन शेयर को नीलाम करेगा और उसे शुल्क (प्रभार) कम करके नीलामी से मिले पैसे उस नागरिक को दे देगा |

8. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही भारत में पटेंट (एकस्व अधिकार) के लिए अर्जी दे सकती है |

9. भारतीय सरकार को दिए कोई भी टेंडर (ठेका बोली) में, गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा जमा की गयी राशि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा दी गयी राशि से 20% कम होगी, तो ही उस राशि को सम मूल्य (बराबर) माना जायेगा |

10. `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` को जमा किये गए कोई टेंडर में, गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा दी गयी राशि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा 10 प्रतिशत कम हो, तो ही उस राशि को सम मूल्य (बराबर) माना जायेगा |

11. `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` हर महीने रजिस्ट्रार को कंपनी के मालिकी का सम्पूर्ण ब्यौरा (विवरण) जमा करेगी |

12. हर मंत्री, सांसद, विधायक, अफसर, जज और हर सरकारी कर्मचारी घोषित करेगा कि उसके किस `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` में कितने शेयर हैं |

13. कोई भी बैंक वाली कम्पनी या कोई वित्तीय कम्पनी जो भारत में भारत के नागरिकों से जमा राशि लेती है, वो कंपनी `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` होनी चाहिए |

14. बैंक केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` को कर्ज (लोन) देंगे |

15. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही टेलिकॉम, सेटेलाईट और अन्‍य रणनीतिक (लड़ाई सम्बन्धी) क्षेत्र में आ सकती है |

16. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही कच्‍चे तेल की खुदाई या कोई अन्य प्रकार के खनिजों की खुदाई के क्षेत्र में आ सकती है ।

17. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही खाने पीने के चीजें, जो दवा ना हों ( गैर-औषधीय खाद्यान्‍न) बना सकती है या "शून्य-तकनीक" क्षेत्र में काम कर सकती है |

18. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही बैंडविड्थ खरीद सकती है और समाचार-पत्र, समाचार-चैनल चला सकते हैं |

19. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक ऐफिडेविट/हलफनामा जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर इसे प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

20. [तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी डाल देगा ।

====== `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (डब्‍ल्‍यू. ओ. आई. सी.)` ड्राफ्ट का अंत =========

C5. निचले कोर्ट में जूरी सिस्टम का प्रक्रिया-ड्राफ्ट


निचले कोर्ट में जूरी सिस्टम लाने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित ड्राफ्ट कि आवश्यकता होगी | ये राजपत्र तभी लागू हो सकता है जब इसपर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होंगे | इसको लाने के लिए नागरिकों को अपने सांसदों या विधायकों को एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा आदेश देना चाहिए कि वे इस निम्नलिखित ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निज बिल द्वारा बढ़ावा और मांग करें और सांसद प्रधानमंत्री को आदेश करें और विधायक मुख्यमंत्री को आदेश करें कि इस ड्राफ्ट को भारतीय राजपत्र में छापें -

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

सैक्शन – 1 : जूरी प्रशासक की नियुक्‍ति और उन्‍हें बदलने की प्रक्रिया

1.

[मुख्‍यमंत्री ; जिला कलेक्टर]

इस कानून के पारित/पास किए जाने के 2 दिनों के भीतर, सभी मुख्‍यमंत्री अपने-अपने पूरे राज्‍य के लिए एक रजिस्‍ट्रार की नियुक्‍ति करेंगे और हर जिले के लिए एक जूरी प्रशासक की भी नियुक्‍ति करेंगे कोई भी भारत का नागरिक जो 30 साल या अधिक का हो, जिला कलेक्टर के दफ्तर में जा कर, सांसद के जितना शुल्क जमा कर के अपने को जूरी प्रशाशक के लिए प्रत्याशी दर्ज करा सकता है और जिला कलेक्टर प्रत्याशी का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डालेगा |

2.

[तलाटी = पटवारी = लेखपाल (या तलाटी का क्लर्क) ]

किसी जिले में रहने वाला कोई नागरिक अपना मतदाता पहचान-पत्र प्रस्‍तुत करके अपने जिले में जूरी प्रशासक के पद के लिए (ज्‍यादा से ज्‍यादा) पांच उम्‍मीदवारों के क्रमांक नंबर बताएगा जिन्हें वो अनुमोदन/स्वीकृति करता है । क्‍लर्क उनके अनुमोदनों को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ कंप्यूटर और मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डाल देगा और उस नागरिक को रसीद दे देगा। नागरिक अपनी पसंदों को किसी भी दिन बदल सकता है। क्‍लर्क तीन रूपए का शुल्‍क लेगा ।

3.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि किसी उम्‍मीदवार को सबसे अधिक नागरिक-मतदाताओं द्वारा और जिले के सभी नागरिक-मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर उस जिले के नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे। यदि किसी उम्‍मीदवार को सभी नागरिक-मतदाताओं के 25 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है और उसके अनुमोदनों की गिनती वर्तमान जूरी प्रशासक की गिनती से 5 प्रतिशत अधिक हो तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे ।

4.

[मुख्‍यमंत्री]

उस राज्य में सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से ज्‍यादा मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, मुख्‍यमंत्री क्‍लॉज/खण्‍ड 2 और क्‍लॉज/खण्‍ड 3 को रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

5.

[प्रधानमंत्री]

भारत के सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, प्रधानमंत्री क्‍लॉज/खण्‍ड 2, क्‍लॉज/खण्‍ड 3 और ऊपर लिखित क्‍लॉज/खण्‍ड 4 को पूरे राज्‍य के लिए या कुछ जिलों के लिए रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

सैक्शन – 2 : महा-जूरीमंडल का गठन

6.

[जूरी प्रशासक]

मतदाता-सूची का उपयोग करके, जूरी प्रशासक किसी आम बैठक में, क्रमरहित तरीके से / रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 40 नागरिकों का चयन महा-जूरीमंडल के सदस्‍य के रूप में करेगा, जिसमें से वह साक्षात्‍कार के बाद किन्‍हीं 10 नागरिकों को उस सूची से हटा देगा और शेष 30 लोग/नागरिक महा-जूरीमंडल के सदस्य होंगे। यदि जूरीमंडल की नियुक्‍ति मुख्‍यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री द्वारा क्‍लॉज/खण्‍ड 4 अथवा क्‍लॉज/खण्‍ड 5 के तहत की गई है तो वे 60 नागरिकों तक को चुन सकते हैं और उनमें से तीस तक को हटाकर महा-जूरीमंडल बना सकते हैं ।

(स्पष्टीकरण-
ये पूर्व चयनित महा-जूरी के लिए नागरिकों की संख्या बढाने का आशय मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री, जो राज्य और राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं, उनके अधिकार बढ़ाने के लिए है स्थानीय लोगों के बनिस्पत)

7.

[जूरी प्रशासक]

महा-जूरीमंडल के पहले समूह (सेट) में से, जूरी प्रशासक हर 10 दिनों में महा-जूरीमंडल के किन्‍हीं 10 सदस्‍यों को सेवा-निवृत्ति दे देगा/रिटायर कर देगा और क्रमरहित तरीके से/रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 10 नागरिकों का चयन कर लेगा ।

8.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक किसी यांत्रिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा किसी संख्‍या को क्रमरहित तरीके से/रैण्‍डमली चुनने के लिए। वह मुख्‍यमंत्री द्वारा विस्‍तार से बताए गए तरीके से प्रक्रिया का प्रयोग करेगा। यदि मुख्‍यमंत्री ने किसी विशिष्‍ठ/खास प्रक्रिया के बारे में नहीं बताया तो वह निम्‍नलिखित तरीके से चयन करेगा। मान लीजिए, जूरी प्रशासक को 1 और चार अंकों वाली किसी संख्‍या `क ख ग घ“ के बीच की कोई संख्‍या चुननी है।

तब जूरी प्रशासक को हर अंक के लिए चार दौर/राउन्‍ड में डायस/गोटी/पांसा फेंकनी होगी। किसी राउन्‍ड में यदि अंक, 0-5 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह केवल एक ही डायस का प्रयोग करेगा और यदि अंक, 0-9 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह दो डायसों का प्रयोग करेगा। चुनी गई संख्‍या उस संख्‍या से 1 कम होगी जो एक अकेले डायस के फेंके जाने पर आएगी और दो डायसों के फेंके जाने की स्थिति में यह 2 कम होगी। यदि डायसों/गोटियों के फेंके जाने से आयी संख्या उसके जरूरत की सबसे बड़ी संख्‍या से बड़ी है तो वह डायस को दोबारा/फिर से फेंकेगा— उदाहरण – मान लीजिए, जूरी प्रशासक को किसी किताब में से एक पृष्‍ठ/पेज का चुनाव करना है जिस किताब में 3693 पृष्‍ठ हैं। वह जूरी प्रशासक चार राउन्‍ड चलेगा। पहले दौर/राउन्‍ड में वह एक ही पांसा का प्रयोग करेगा क्‍योंकि उसे 0-3 के बीच की एक संख्‍या का चयन करना है।

यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता है तो वह पांसा फिर से/ दोबारा फेंकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी गई संख्‍या 3-1 = 2 होगी और वह जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जाएगा। दूसरे दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्‍या चुनने की जरूरत होगी। इसलिए वह दो पांसे फेंकेगा। यदि उनका योग 8 से अधिक हो जाता है तो वह दोबारा डायसों/पांसों को फेंकेगा। यदि योग/ जोड़ मान लीजिए, 6 आता है तो चुनी गई दूसरी संख्‍या 6-2 = 4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिए, चार दौरों/राउन्‍ड्स में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है तो जूरी प्रशासक (3-1), (5-2), (10-2) और (2-1) अर्थात पृष्‍ठ संख्‍या 2381 चुनेगा। जूरी प्रशासक को चाहिए कि वह अलग-अलग नागरिकों को पांसा फेंकने के लिए दे। मान लीजिए, मतदाता-सूची में ख किताबें हैं, और सबसे बड़ी किताब में पृष्‍ठों/पेजों की संख्‍या `प` है और सभी पृष्‍ठों में प्रविष्‍ठियों (एंट्री) की संख्‍या `त` है तो उपर उल्‍लिखित तरीके या मुख्‍यमंत्री द्वारा बताए गए तरीके का प्रयोग करके जूरी प्रशासक 1-ख, 1-प और 1-त के बीच की तीन संख्‍याओं को क्रमरहित/रैंडम तरीके से चुनेगा। अब मान लीजिए, चुनी गई किताब में उतने अधिक पृष्‍ठ नहीं हैं अथवा चुने गए पृष्‍ठ में बहुत ही कम प्रविष्‍टियां (एंट्री) हैं। तो वह 1-ख, 1-प और 1-त के बीच एक संख्‍या फिर से चुनेगा ।

9.

[जूरी प्रशासक]

महा–जूरीमंडल प्रत्‍येक शनिवार और रविवार को मिला करेंगे/बैठक करेंगे। यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य अनुमोदन/स्वीकृति करें तो वे अन्‍य दिनों में भी मिल सकते हैं। यह संख्‍या “15 से ज्‍यादा” उस स्‍थिति में भी होनी चाहिए जब महा-जूरीमंडल के 30 से भी कम सदस्‍य मौजूद हों। यदि बैठक होती है तो यह 11 बजे सुबह अवश्‍य शुरू हो जानी चाहिए और कम से कम 5 बजे शाम तक चलनी चाहिए। महा-जूरीमंडल के सदस्‍य जिस दिन बैठक में उपस्‍थति रहेंगे, उस दिन उन्‍हें 200 रूपए प्रति दिन की दर से वेतन मिलेगा। महा-जूरीमंडल का एक सदस्‍य एक महीने के अपने कार्यकाल में अधिकतम 2000 रूपए वेतन पा सकता है।

जूरी प्रशासक महा-जूरीमंडल के किसी सदस्‍य के कार्यकाल/अवधि पूरी कर लेने के 2 महीने के बाद उसे चेक जारी करेगा(स्पष्टीकरण-आंकने के लिए समय देने के लिए इतना समय की जरुरत है) । यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य जिले से बाहर जाता है तो उसे वहां रहने का हर दिन 400 रूपए की दर से पैसा मिलेगा और यदि वह राज्‍य से बाहर जाता है तो उसे वहां ठहरने के 800 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलेगा। इसके अतिरिक्‍त, उन्‍हें अपने घर और कोर्ट/न्‍यायालय के बीच की दूरी का 5 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से पैसा मिलेगा ।

मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री मुद्रास्‍फीति/महंगाई की दर के अनुसार क्षतिपूर्ति (मुआवजा) की रकम में परिवर्तन कर सकते हैं। सभी रकम इस कानून में जनवरी, 2008 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए `थोक मूल्य सूचकांक` के अनुसार हैं। और जूरी प्रशासक नवीनतम थोक मूल्य सूचकांक का प्रयोग करके प्रत्‍येक छह महीनों में धनराशि को बदल सकता है ।

10.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य किसी बैठक से अनुपस्‍थित रहता है तो उसे उस दिन का 100 रूपया नहीं मिलेगा और उसे अपनी भुगतान की जाने वाली राशि से तिगुनी राशि की हानि भी हो सकती है। जो व्‍यक्‍ति 30 दिनों के बाद महा-जूरीमंडल के सदस्‍य होंगे, वे ही अर्थदण्‍ड/जुर्माने के संबंध में निर्णय लेंगे ।

11.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक बैठक 11 बजे सुबह शुरू कर देगा। जूरी प्रशासक (बैठक के) कमरे में सुबह 10.30 बजे से पहले आ जाएगा। यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य सुबह 10.30 बजे से पहले आने में असफल रहता है तो जूरी प्रशासक उसे बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं देगा और उसकी अनुपस्‍थिति दर्ज कर देगा ।

सैक्शन – 3 : किसी नागरिक पर आरोप तय करना

12.

[जूरी प्रशासक]

कोई व्‍यक्‍ति, चाहे वह निजी/आम आदमी हो चाहे जिला दण्‍डाधिकारी/प्रोजिक्‍यूटर, यदि वह किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति के खिलाफ कोई शिकायत करना चाहता है तो वह महा-जूरीमंडल के सभी सदस्‍यों या कुछ सदस्‍यों को शिकायती पत्र लिखेगा। शिकायतकर्ता से उसे यह भी अवश्‍य बताना होगा कि वह क्‍या समाधान चाहता है। ये समाधान इस प्रकार के हो सकते हैं –

    किसी सम्‍पत्ति पर कब्‍जा/स्‍वामित्‍व प्राप्‍त करना
    आरोपी व्‍यक्‍ति से आर्थिक क्षतिपूर्ति या मुआवजा प्राप्‍त करना
    आरोपी व्यक्‍ति को कुछ महीने/साल के लिए कैद की सजा दिलवाना

13.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य किसी बैठक में आने के लिए बुलावा भेजते हैं तो वह नागरिक उपस्‍थित होगा। महा-जूरीमंडल आरोपी और शिकायतकर्ता को बुला भी सकते हैं या नहीं भी बुला सकते हैं ।

14.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्‍य यह स्‍पष्‍ट कर देते हैं कि शिकायत में कुछ दम/मेरिट है तो जूरी प्रशासक शिकायत की जांच कराने के लिए एक जूरी बुलाएगा जिसमें उस जिले के 12 नागरिक होंगे। जूरी प्रशासक 12 से अधिक नागरिकों का क्रमरहित/रैंडम तरीके से चयन करेगा (खंड-8 में महा-जूरीमंडल के चुनाव के सामान ही जूरीमंडल का चयन होगा) और उन्‍हें बुलावा भेजेगा। आनेवालों में से जूरी प्रशासक क्रमरहित तरीके से 12 लोगों का चयन कर लेगा।

[मान लीजिए एक जिले में सौ मामले दर्ज हुए हैं | तो कोई 3000 या अधिक लोगों को बुलावा भेजा जायेगा जब तक उनमें से 2600 लोग न आ जायें ,क्योंकि उनमें कुछ मर गए होंगे, कुछ शहर से बहार गए होंगे | ये 2600 लोग क्रमरहित तरीके से 26-26 के 100 समूहों में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे , एक मामले के लिए एक समूह | दोंनो पक्ष के वकील उन 26 लोगों में से हरेक व्यक्ति को 20 मिनट इंटरव्यू/साक्षात्कार लेगा और हर पक्ष का वकील 4 लोगों को बाहर निकाल देगा(इस तरह किसी भी पक्ष को पूर्वाग्र/पक्षपात का बहाना नहीं मिलेगा ) | इस तरह 18 लोगों का जूरी-मंडल होगा जो 12 मुख्य जूरी सदस्य और 6 विकल्प जूरी सदस्य में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे |]

15.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक मुख्‍य जिला प्रशासक से कहेगा कि वह मुकदमे की अध्‍यक्षता करने के लिए एक या एक से अधिक जजों की नियुक्‍ति कर दे। यदि विवादित संपत्‍ति का मूल्‍य लगभग 25 लाख से अधिक है अथवा दावा किए गए मुआवजे की राशि 1,00,000 (एक लाख) रूपए से अधिक है अथवा अधिकतम कारावास का दण्‍ड 12 महीने से अधिक है तो जूरी प्रशासक 24 जूरी-मंडल सदस्य का चुनाव करेगा और उस मुकदमे के लिए मुख्‍य जज से 3 जजों की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा , नहीं तो वह मुख्‍य जज से 1 जजों की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा। विवादित संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ से अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य और 5 जज होंगे |

यदि मुलजिम के खिलाफ 10 से कम मामले हैं तो, जूरी-सदस्य 12, 10-25 मामले हों तो 24 जूरी सदस्य चुने जाएँगे और 25 से अधिक मामले होने पर 50-100 जी सदस्य होंगे| यदि मुलजिम श्रेणी 4 का अफसर है तो 12 जूरी सदस्य, श्रेणी 2 या 3 का होगा तो , 24 जूरी सदस्य होंगे और श्रेणी 4 या अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे | इस मामले में नियुक्‍त किए जाने वाले जजों की संख्‍या के संबंध में मुख्‍य न्यायाधीश का फैसला ही अंतिम होगा |

सैक्शन – 4 : सुनवाई/फैसला आयोजित करना

16.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

सुनवाई 11 बजे सुबह से लेकर 4 बजे शाम तक चलेगी। सभी 12 जूरी-मंडल (जूरी समूह) और शिकायतकर्ता के आ जाने के बाद ही सुनवाई शुरू की जाएगी । यदि कोई पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है तो जो पक्ष उपस्‍थित है उसे 3 से 4 बजे शाम तक इंतजार करना होगा और तभी वे घर जा सकते हैं । यदि तीन दिन बिना कारण दिए, कोई पक्ष उपस्थित नहीं होता, तो उपस्थित पक्ष अपनी दलीलें देगा और जूरी तीन दिन और इंतजार करेगी, अनुपस्थित पक्ष को बुलावा देने के पश्चात | यदि फिर भी अनुपस्थित पक्ष बिना कारण दिए नहीं आती, तो जूरी अपना फैसला सुनाएगी |

17.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

यह जज शिकायतकर्ता को 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य बीच में नहीं बोलेगा । वह जज प्रतिवादी (वह जिसपर मुकदम्मा चलाया जा रहा है) को भी 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य व्‍यक्‍ति बोलने में बाधा/व्‍यावधान पैदा नहीं करेगा। इसी तरह, बारी-बारी से दोनों पक्षों को बोलने देगा | मुकदमा हर दिन इसी प्रकार चलता रहेगा ।

18.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

मुकद्दमा कम से कम 2 दिनों तक चलेगा। तीसरे दिन या उसके बाद यदि 7 से अधिक जूरी सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि उन्‍होंने काफी सुन लिया है तो वह मुकदमा एक और दिन चलेगा। यदि अगले दिन 12 जूरी सदस्‍यों में से 7 से ज्‍यादा सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि वे और दलीलें सुनना चाहेंगे तो यह मुकदमा तब तक चलता रहेगा जब तक 7 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍य यह नहीं कह देते कि (अब) मुकदमा समाप्‍त किया जाना चाहिए ।

19.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

अंतिम दिन जब दोनों पक्ष/पार्टी अपना-अपना पक्ष/दलील 1 घंटे प्रस्‍तुत कर देंगे तो जूरी-मंडल (जूरी समूह) कम से कम 2 घंटे तक विचार-विमर्श करेंगे। यदि 2 घंटे के बाद 7 से ज्‍यादा जूरी-मंडल (जूरी समूह) कहते हैं कि और विचार-विमर्श की जरूरत नहीं है तो जज (जूरी-मंडल के) प्रत्येक सदस्‍य से अपना-अपना फैसला बताने/घोषित करने के लिए कहेगा ।

20.

[महा-जूरीमंडल]

यदि कोई जूरी सदस्‍य अथवा कोई एक पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है या देर से उपस्‍थित होता है तो महा-जूरीमंडल 3 महीने के बाद दण्‍ड/जुर्माने पर फैसला करेंगे जो अधिकतम 5000 रूपए अथवा अनुपस्‍थित व्‍यक्‍ति की सम्‍पत्ति का 5 प्रतिशत, जो भी ज्‍यादा हो, तक हो सकता है ।

21.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

जुर्माने/अर्थदण्‍ड के मामले में, हर जूरी सदस्‍य दण्‍ड की वह राशि बताएगा जो वह उपयुक्‍त समझता है। और यह कानूनी सीमा से कम ही होनी चाहिए। यदि यह कानूनी सीमा से ज्‍यादा है तो जज उस राशि या दंड को कानूनी सीमा जितनी ही मानेगा। वह जज दण्‍ड की राशियों को बढ़ते क्रम में सजाएगा और चौथी सबसे छोटी दण्‍डराशि को चुनेगा अर्थात उस राशि को जूरी मंडल द्वारा सामूहिक रूप से लगाया गया जुर्माना/दण्‍ड माना जाएगा जो 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से ज्‍यादा सदस्‍यों ने (उतना या उससे अधिक) अनुमोदित किया हो |

उदहारण - जैसे जूरी-मंडल द्वारा लगायी हुई दण्ड-राशि यदि बदते क्रम में 400,400,500,600,700,700,800,1000,1000,1200,1200 रुपये हैं तो चौथी सबसे छोटी दण्ड-राशि 600 है और बाकी 8 जूरी-मंडल के लोगों ने इससे अधिक दण्ड-राशि का अनुमोदन/स्वीकृति किया है |

22.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

कारावास की सजा के मामले में जज, जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी गई सजा की अवधि को बढ़ते क्रम में सजाएगा जो उस कानून में उल्‍लिखित सजा से कम होगा, जिस कानून को तोड़ने का वह आरोपी है। और जज चौथी सबसे छोटी सजा-अवधि को चुनेगा यानि कारावास की वह सजा जो 12 जूरी-मंडल में से 8 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍यों द्वारा अनुमोदित हो को `कारावास की सजा जूरी-मंडल द्वारा मिलकर तय किया गया` घोषित करेगा ।

सैक्शन – 5 : निर्णय/फैसला,(फैसले का) अमल और अपील

23.

[जिला पुलिस प्रमुख]

जिला पुलिस प्रमुख या उसके द्वारा बताया गया पुलिसवाला, जुर्माना अथवा कारावास की सजा जो जज द्वारा सुनाई गई है और जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी की गई है, पर अमल करेगा/करवाएगा ।

24.

[जिला पुलिस प्रमुख]

यदि 4 या इससे अधिक जूरी सदस्‍य किसी कुर्की/जब्ती अथवा जुर्माने अथवा कारावास की सजा की मांग नहीं करते तो जज आरोपी को निर्दोष घोषित कर देगा और जिला पुलिस प्रमुख उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा ।

25.

[आरोपी, शिकायतकर्ता]

दोनो ही पक्षों को राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालय अथवा भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय होगा ।

सैक्शन – 6 : नागरिकों के मौलिक / बुनियादी (मूल/प्रमुख) अधिकारों की रक्षा

26.

[सभी सरकारी कर्मचारी]

निचली अदालतों के 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से अधिक की सहमति के बिना किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा तब तक कोई अर्थदण्‍ड अथवा कारावास की सजा नहीं दी जाएगी जब तक कि हाई-कोर्ट अथवा सुप्रीम-कोर्ट के जूरी-मंडल (जूरी समूह) इसका अनुमोदन/स्वीकृति नहीं कर देते। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी नागरिक को जिला अथवा राज्‍य के महा-जूरीमंडल के 30 में से 15 से ज्‍यादा सदस्‍यों की अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक से लिए जेल में नहीं डालेगा ।

27.

[सभी के लिए]

जूरी सदस्‍य तथ्‍यों के साथ-साथ इरादे/मंशा के बारे में भी निर्णय करेंगे और कानूनों के साथ-साथ संविधान का भी मतलब निकालेंगे ।

28.



यह सरकारी अधिसूचना (सरकारी आदेश) तभी लागू/प्रभावी होगी जब भारत के सभी नागरिकों में से 51 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इस पर हां दर्ज किया हो और उच्‍चतम न्‍यायालय के सभी न्‍यायाधीशों ने इस सरकारी अधिसूचना (आदेश) का अनुमोदन/स्वीकृति कर दिया हो ।

29.

[जिला कलेक्‍टर]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन/बदलाव का प्रस्‍ताव करता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क से परिवर्तन की मांग करते हुए एक एफिडेविट जमा करवा सकता है। नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क इसे 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के पढ़ सके ।

30.

[तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इस कानून के किसी क्‍लॉज/धारा पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है अथवा उपर्युक्‍त क्‍लॉज/खण्‍ड के बारे में दायर किए गए ऐफिडेविट पर कोई समर्थन दर्ज कराना चाहता है तो वह पटवारी के कार्यालय में 3 रूपए का शुल्‍क जमा करके अपना हां/नहीं दर्ज कर सकता है। पटवारी नागरिकों के हां/नहीं को लिख लेगा और नागरिकों के हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डाल देगा ।

======================

C6. हथियारलैस (सशस्त्र) नागरिक समाज अधिनियम

1. [जिला कलेक्‍टर के लिए निर्देश]
यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी/डी सी के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन उसको कोई भी देख सके ।

2. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल के लिए निर्देश]
यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट पर हां – नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देगा । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद/पावती देगा। यह हां – नहीं प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाला जाएगा।

3. [सभी]
हाँ-ना की संख्या प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अफसरों और जज पर बाध्य नहीं होंगे |

4. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]
प्रधानमंत्री हर जिले में एक जिला हथियार अधिकारी की नियुक्ति करेंगे।
प्रधानमन्त्री जिला हथियार अधिकारी को प्रजा अधीन करने की प्रक्रिया को गेजेट में प्रकाशित करेंगे ।
(देखिये सैक्शन C7)

5. [रक्षा मंत्री के लिए निर्देश]
रक्षा मंत्री इन श्रेणियों में हथियारों की एक सूची प्रकाशित करेगा -
(A) छोटी बंदूके।
(B) मध्यम आकार की बंदूके।
(C) बड़ी बंदूके।
(D) होवित्ज़र तथा होवित्ज़र किस्म के अन्य प्रकार।
(E) टेंक तथा टेंक के अन्य प्रकार।
(F) कारतूस, गोले तथा कारतूस व गोलों के अन्य प्रकार।
(G) प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) तथा प्रक्षेपास्त्र के अन्य प्रकार।
(H) लड़ाकू विमान तथा लड़ाकू विमानों के अन्य प्रकार।
(I) सेना द्वारा स्वीकृत और उपयोग किये जाने वाले अन्य उपकरण ।

6. [सभी]
कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 22 वर्ष से अधिक तथा कुल संपत्ति 10 लाख से अधिक हो (इस संपत्ति में एक घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा ), उस नागरिक के लिए एक छोटी बन्दूक तथा 100 कारतूस अपने घर पर रखना आवश्यक होगा ।

कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 22 वर्ष से अधिक तथा कुल संपत्ति 20 लाख से अधिक हो (इस संपत्ति में एक घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा ), उस नागरिक के लिए एक मध्यम आकार की बन्दूक तथा 100 कारतूस अपने घर पर रखना आवश्यक होगा ।

कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 22 वर्ष से अधिक तथा कुल संपत्ति 30 लाख से अधिक हो (इस संपत्ति में एक घर जिसकी कीमत 1 करोड़ तथा फर्नीचर जिसकी कीमत 10 लाख हो, को शामिल नहीं किया जाएगा ), उस नागरिक के लिए एक बड़ी बन्दूक तथा 100 कारतूस अपने घर पर रखना आवश्यक होगा ।

कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की दो बंदूके रख सकेगा ; दो से अधिक बंदूके रखने के लिए किसी व्यक्ति को जिला पुलिस कमिश्नर से लाइसेंस लेना होगा ।

7. [सभी]
कोई भी नागरिक जिसकी उम्र 22 वर्ष से अधिक तथा संपत्ति उपरोक्त धाराओं में बताई गयी से कम हो (10 लाख से कम हो), वो नागरिक छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी बन्दूक अपने घर पर रख सकेगा ।

8. [सभी]
कोई भी नागरिक जिस भी श्रेणी की बंदूक रखेगा, उसके लिए उस बन्दूक को जिला हथियार अधिकारी तथा जिला पुलिस कमिश्नर कार्यालय में रजिस्टर कराना आवश्यक होगा ।

9. [जिला हथियार अधिकारी, जिला पुलिस कमिश्नर, किसी भी नागरिक और महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) के लिए निर्देश]
जिला हथियार अधिकारी, जिला पुलिस कमिश्नर या कोई भी नागरिक, किसी भी व्यक्ति के हथियार रखने को प्रतिबंधित करने के लिए जिला महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) से ज्यूरी ट्रायल के लिए निवेदन कर सकेगा ।
महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) यह बहुमत से यह निश्चय करेगी कि क्या ज्यूरी द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए या नही, महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) जूरी सदस्यों की संख्या भी तय करेगा । जिला ज्यूरी प्रशासक को अधिकार होगा कि वह ज्यूरी सदस्यों की संख्या बढ़ा सके ।

10. [जूरी सदस्यों के लिए निर्देश]
जूरी सदस्य बहुमत से यह फैसला करेंगे कि, आरोपी के हथियार रखने को प्रतिबंधित किया जाए या नहीं, जूरी सदस्य ऐसे प्रतिबन्ध की अवधि भी निर्धारित करेंगे । तय अवधि बीत जाने पर अन्य ज्यूरी यह फैसला करेगी कि, आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं ।

11. [जिला हथियार अधिकारी तथा नागरिकों के लिए निर्देश]
यदि कोई नागरिक या जिला हथियार अधिकारी ग्रांड जूरी सदस्य को शिकायत करता है कि, कोई व्यक्ति निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) सदस्य यह फैसला कर सकेंगे कि ऐसे आरोपी पर ज्यूरी द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं ।

12. [जूरी सदस्यों के लिए निर्देश]
यदि यह आरोप सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य ऐसे व्यक्ति पर उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना (इस संपत्ति में 1 करोड़ का घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा ) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे ।
अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए यह जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा । प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा ।

13. [जिला हथियार अधिकारी के लिए निर्देश ]
जिला हथियार अधिकारी प्रतिदिन महा-जूरी मंडल (ग्रैंड जूरी) की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा | जिला हथियार अधिकारी या उसके कर्मचारी लॉटरी से चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि उन नागरिकों के पास निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं ।

14. [जिला हथियार अधिकारी के लिए निर्देश ]
नागरिकों को बन्दूक, होवित्ज़र, टेंक, विमानरोधी प्रक्षेपास्त्र, हेलिकोप्टर तथा लड़ाकू विमान आदि चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए, जिला हथियार अधिकारी उपकरणों, हथियारों और टेनिंग (प्रशिक्षण) मैदान की व्यवस्था करेगा, तथा इन गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक धन (निधि) रक्षा मंत्री से प्राप्त करेगा। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं (ट्रेनिंग लेने वाले) द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क दरें जिला हथियार अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाएँगी ।

15. [जिला हथियार अधिकारी के लिए निर्देश ]
प्रशिक्षण के लिए हथियारों तथा अन्य उपकरणों की खरीद आदि की व्यवस्थाओं के लिए जिला हथियार अधिकारी नागरिकों से अनुदान तथा चंदे स्वीकार कर सकता है ।

16. [जिला हथियार अधिकारी के लिए निर्देश ]
जिला हथियार अधिकारी सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) तथा वैकल्पिक टेनिंग (प्रशिक्षण) के नियम निर्धारित करेगा । जिला हथियार अधिकारी के अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा करने पर, जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा ।

C7. राइट-टू-रिकॉल-हथियार अधिकारी

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

सैक्शन 1 : राइट-टू-रिकॉल-हथियार अधिकारी

1.

-

जिला कलेक्‍टर शब्‍द का अर्थ होगा – इस सरकारी आदेश का पालन करने के लिए जिला कलेक्‍टर अथवा उसके द्वारा `रखा गया/`नियुक्‍त कोई अधिकारी ।

`जिला हथियार अधिकारी` का मतलब उस पूरे जिला की हथियार सम्बन्धी निर्णय करने वाला और हथियार सम्बन्धी अच्छी व्यवस्था बनवाये रखने वाला |

2.

[जिला कलेक्‍टर]

यदि भारत का कोई नागरिक जिला हथियार अधिकारी बनना चाहता है और वह जिला कलेक्‍टर के पास स्‍वयं उपस्‍थित होकर या किसी वकील के माध्‍यम से ऐफिडेविट/शपथपत्र/हलफनामा प्रस्‍तुत करता है तो जिला कलक्‍टर, सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर दाखिल शुल्‍क लेकर `जिला हथियार अधिकारी` के पद के लिए उसका आवेदन-पत्र स्‍वीकार कर लेगा और उसका नाम मुख्यमंत्री के वेबसाईट पर डाल देगा ।

3.

[पटवारी/तलाटी/लेखपाल, (अथवा उसका क्लर्क)]

यदि कोई व्‍यक्‍ति ,पटवारी के कार्यालय में स्‍वयं उपस्‍थित होकर 3 रूपए का शुल्‍क जमा करवाकर अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को जिला हथियार अधिकारी के पद के लिए पसंद/अनुमोदित करता है तो तलाटी उसके अनुमोदनों को कम्‍प्‍यूटर में दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा जिसमें उसकी मतदान पहचान-पत्र (संख्‍या), तारीख/दिन और उसके द्वारा अनुमोदित किए गए व्‍यक्‍तियों (के नाम) होंगे ।

4.

[पटवारी/तलाटी]

पटवारी मतदाता के अनुमोदन को, पसंद/अनुमोदित व्‍यक्‍ति के मतदाता पहचान-पत्र संख्या और नाम के साथ जिले की वेबसाईट पर डालेगा ।

5.

[पटवारी/तलाटी]

यदि कोई व्‍यक्‍ति अपना अनुमोदन/पसंद रद्द करवाने के लिए आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा ।

6.

[जिला कलेक्‍टर]

प्रत्‍येक महीने की 5 तारीख को, कलेक्‍टर या उसके द्वारा रखा गया/नियुक्‍त किया गया अधिकारी पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्रत्‍येक उम्‍मीदवार को मिले/प्राप्‍त पसंद/अनुमोदनों की गिनती प्रकाशित करेगा ।

7.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि कोई उम्‍मीदवार किसी जिले में सभी मतदाता (सभी, न कि केवल उनका जिन्‍होंने अपना अनुमोदन दर्ज करवाया है) के 35 प्रतिशत से अधिक मतदाता का अनुमोदन प्राप्‍त कर लेता है और वो प्राप्त अनुमोदन वर्तमान जिला हथियार अधिकारी के अनुमोदनों से 5% अधिक है, तो मुख्‍यमंत्री उसे `जिला हथियार अधिकारी` की नौकरी दे सकता है ।

8.

[मुख्‍यमंत्री, जिला हथियार अधिकारी]

कोई भी व्‍यक्‍ति मतदाता का अनुमोदन प्राप्‍त करके जिला हथियार अधिकारी बन सकता है, वह एक से अधिक जिले का भी जिला हथियार अधिकारी बन सकता है। वह किसी राज्‍य में अधिक से अधिक 5 जिलों का और भारत भर में अधिक से अधिक 20 जिलों का जिला हथियार अधिकारी बन सकता है। कोई व्‍यक्‍ति अपने जीवन काल में किसी जिले का जिला हथियार अधिकारी 8 वर्षों से अधिक समय के लिए नहीं रह सकता है। यदि वह एक से अधिक जिले का जिला हथियार अधिकारी है तो उसे उन सभी जिलों के जिला हथियार अधिकारी के पद का वेतन, भत्ता (महंगाई के लिए ज्यादा पैसा), बोनस आदि मिलेगा ।

9.

[मुख्‍यमंत्री]

जब तक किसी जिला हथियार अधिकारी को 34 प्रतिशत से अधिक मतदाता का अनुमोदन प्राप्‍त है तब तक मुख्‍यमंत्री को उसे बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि किसी जिला हथियार अधिकारी का अनुमोदन 34 प्रतिशत से नीचे चला जाता है तो मुख्‍यमंत्री उसे हटाकर/बदलकर अपनी पसंद के किसी अधिकारी को जिला हथियार अधिकारी बना सकते हैं ।

सैक्शन 2 : जनता की आवाज

1.

[जिला कलेक्टर]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून में परिवर्तन चाहता हो तो वह जिला कलेक्‍टर के कार्यालय में जाकर एक ऐफिडेविट/शपथपत्र प्रस्‍तुत कर सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्‍लर्क इस ऐफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ 20 रूपए प्रति पन्ने की फ़ीस लेकर प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन देख सके ।

2.

[तलाटी (अर्थात पटवारी/लेखपाल) या उसका क्लर्क]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी भी ऐफिडेविट/शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचानपत्र/वोटर आई डी लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का शुल्‍क/फीस जमा कराएगा। तलाटी हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल दिया जाएगा ।

===

सैक्शन-D. सन्दर्भ-

(नोट - लेख अधिकतर अंग्रेजी में हैं)

"भारत में ब्रिटेन के राज के कई दुष्कर्मों में, इतिहास में एक पूरे राष्ट्र को हथियारों से वंचित करने के कार्य को सबसे बुरा देखा जायेगा " --- महात्मा गाँधी

कृपया ये लिंक देखें -

1) चैप्टर 24, 29, http://www.righttorecall.info/301.h.pdf

2) भारत के निवासियों के लिए `हथियार रखने का अधिकार` 1931 में गांधीजी, सरदार पटेल, नेहरु आदि द्वारा माँगा गया था | ये कुछ लोगों के लिए सदमे वाली बात हो सकती है, लेकिन ये प्रमाण गाँधी के चेलों द्वारा इकट्ठे किये गए पत्र और लेखों की पुस्तक, `कलेक्टेड वोर्क्स ऑफ महात्मा गाँधी (Collected Works of Mahatma Gandhi)`, जो एक आई.ए.एस द्वारा लिखित है |

कृपया इस लिंक में लेख `कलेक्टेड वोर्क्स ऑफ महात्मा गाँधी (Collected Works of Mahatma Gandhi)`में, पन्ना नंबर 327 देखिये और ...पॉइंट नंबर 1(h) देखिये -

http://www.gandhiserve.org/cwmg/VOL051.PDF

लोगों के मौलिक अधिकार, उनमें शामिल है :
(a) किसी भी समूह से जुड़ने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता
(b) बोलने की और प्रेस (मुद्रणालय) की स्वतंत्रता
....
(h) हथियार रखने का अधिकार उसके लिए बनाये नियम और सुरक्षित अधिकार के अनुसार ;
....
(Fundamental rights of the people, including :
(a) freedom of association and combination;
(b) freedom of speech and of the Press;
....
(h) right to keep and bear arms in accordance with
regulations and reservations made in that behalf;
...)

3) `अधिक बंदूकें, कम अपराध` (`More Guns, Less Crime: Understanding Crime and Gun Control Laws`) के लेखक, जॉन आर. लोट्ट , जूनियर के साथ साक्षात्कार -

http://www.press.uchicago.edu/Misc/Chicago/493636.html

4) बिना हत्या के 25 साल `बंदूक शहर अमेरिका` में -

http://www.wnd.com/2007/04/41196/#sy8ZWb4KVfEbooQj.99

5) हजारों अपराधिक हमले हथियार-लैस नागरिकों द्वारा रोके गए -
`कातो` नामक संसथान के लेखकों ने एक हाल ही के एक अध्ययन किया कि कितनी बार नागरिकों ने बंदूकों का प्रयोग करके अपराध को रोका है, उसके अनुसार - "हजारों-हजारों अपराध हर वर्ष बंदूकों से लैस आम-नागरिकों द्वारा रोके जाते हैं "

हथियार रखने के लिए कुछ आपत्ति कि आम-नागरिक हथियार रखने और सँभालने के सक्षम नहीं है या इसके घातक परिणाम होंगे, उन आपत्तियों में कोई भी दम नहीं है | क्रेमर और बर्नेट ने लिखा है : "इस शोध से ये पता चलता है कि कुछ एक मामलों को छोड़ कर, अधिकांश बंदूक मालिक सक्षम और नैतिक हैं | "

http://lightfromtheright.com/2012/02/27 ... f-defense/

6) कर्णाटक में कोडागू जिला है, जहाँ के निवासियों को हथियार रखने का अधिकार है, बिना लाइसेंस के | ये अधिकार वहाँ के कानून के अधीन निश्चित है | लेकिन क्या हम वहाँ सामूहिक हत्या के बारे में कुछ सुनते हैं या मुझे कुछ ज्ञान नहीं है ?

http://coorg.tripod.com/coorgs.html

7) भारत में बंदूकों की मलिकी -

http://www.abhijeetsingh.com/arms/india/

8) अमेरिका में राज्य अनुसार हथियारों की मलिकी और अपराध दर -

http://www.datamasher.org/mash-ups/crim ... -ownership

http://answers.yahoo.com/question/index ... 304AAzIs3g

http://www.washingtonpost.com/wp-srv/he ... rship.html

http://www.disastercenter.com/crime/US_ ... nking.html

9) स्विस निवासी, अपराध और हथियार -

http://www.stephenhalbrook.com/articles ... teeth.html

10) "स्विट्ज़रलैंड से अमेरिका सीख सकता है कि कैसे बंदूक मालिकी की जिम्मेदारी को बढ़ावा करके बंदूकों का दुरुपयोग रोकने का सबसे अच्छा तरीका है " -

http://guncite.com/swissgun-kopel.html

11) अमेरिका में मौत के प्रमुख कारण -

http://www.cdc.gov/nchs/fastats/deaths.htm

12) मिथ्या #3: बंदूक-प्रतिबन्ध से अपराध दर कम हुई है -- अनेक देश का विश्लेषण -

http://gunowners.org/sk0703.htm

ऑस्ट्रेलिया : बंदूकों के प्रतिबन्ध के बावजूद अधिक हिंसक अपराध -

http://www.ncpa.org/sub/dpd/?Article_ID=17847

3. मिथ्या : यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया में बंदूक-प्रतिबन्ध से हिंसक अपराधों में कमी आई है -

https://mic.com/articles/24124/7-gun-co ... .8ppH64tJS

ऑस्ट्रेलिया में बंदूकों द्वारा अपराध तब से बढ़ रहे हैं जब से वहाँ बंदूकों पर प्रतिबन्ध लगा था | केवल सिडनी में, बंदूकों द्वारा लूट-पात की दरें, पिछले साल कि तुलने में, 2001 में 160% बढ़ गयीं -

http://www.smh.com.au/articles/2002/04/ ... 22771.html

जापान में अपराध-दर आसमान छू रही है -

http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/1472175.stm

बंदूक के बारे में कुछ तथ्य (गॉय स्मिथ) -

http://gunfacts.info/pdfs/gun-facts/6.1 ... screen.pdf

असफल परिक्षण -
कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेल्स में बंदूक प्रतिबन्ध और सामाजिक सुरक्षा -

https://www.fraserinstitute.org/studies ... -and-wales

13) ब्रिटेन : बुरे से और बुरे की ओर -

19वीं शताब्दी के दौरान और अधिकाँश 20वीं शताब्दी में, ब्रिटेन की छवि असाधारण रूप से एक सुरक्षित और अपराध-मुक्त राष्ट्र की रही है अमेरिका और यूरोप के बाकी के हिस्सों की तुलना में | लेकिन अब ऐसा नहीं रहा -

http://web.archive.org/web/201102141734 ... 5139.shtml

http://www.examiner.com/article/the-gun-control-myth

14) इंग्लैंड के उन हिस्सों में जहाँ बंदूकों पर प्रतिबन्ध है, वहाँ अपराध आसमान छू रहा है -

http://townhall.com/tipsheet/katiepavli ... d-n1464528

15) लैरी प़ाट्ट: ब्रिटेन के बंदूक अपराध के आंकड़े धोखा हैं -

http://www.theendrun.com/larry-pratt-br ... ats-a-sham

ब्रिटेन सरकार के अंतिम अपराध के आंकड़ों को आज टोरियों ने "वास्तव में भयानक" कहकर निंदा की क्यूंकि ये सामने आया है कि पिछले वर्ष की तुलना में इंग्लैंड और वेल्स का बंदूक द्वारा अपराध 35% बढ़ा है -

http://www.dailymail.co.uk/news/article ... z2Sk8ktS59

16) ये वीडियो भी देखें -

बंदूकों पर प्रतिबन्ध - यूनाईटीड किंगडम से चेतावनी - सुरक्षा का मिथक -

http://www.youtube.com/watch?v=xTFs6Lbq ... cw&index=2

ऑस्ट्रेलिया के बंदूक प्रतिबन्ध के कारण अपराध दर बढ़ा है -

http://www.youtube.com/watch?v=hoAFOHbi ... cw&index=1

17) “जब सरकार के पास टैंक हैं, तो नागरिकों के पास बंदूकें होने से क्या लाभ ?” -

http://bearingarms.com/what-good-is-it- ... has-tanks/

18) बंदूक के साथ एक (असैनिक) महिला ने अपने भाई को अपहरण-करता से बचाया -

https://www.facebook.com/rahularyacam/p ... 6741540087

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अधिक जानकारी के लिए चैप्टर 1, 6,7,21, 24, 26,75, http://www.prajaadhinbharat.wordpress.com देखें (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/301.h.pdf)|

प्रश्नोत्तरी के लिए http://www.righttorecall.info/004.h.htm देखें (डाउनलोड लिंक -http://www.righttorecall.info/004.h.pdf) |


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PostPosted: Fri Nov 07, 2014 2:09 pm 
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Dear citizen of India,

If you want procedure-drafts to improve our military and also for weaponization of commons in India so that commons can defend themselves from outside and inside hostilities, then please send following order to MP via SMS or twitter

"Please promote via website, private member bill etc. and get printed drafts in tinyurl.com/atamsuraksha in Gazette. Or will not vote for you/your party. Also setup a public sms server on your site like smstoneta.com so that SMS-opinions of citizens are seen along with their voter IDs by all without need to login"

Besides sending sms to your MP, also display proof of your opinion along with voter id by sending 3 SMS-es to already existing public sms server. If you want to improve military and weaponization of commons in India so that commons can defend themselves from outside and inside hostilities, then please send from your mobile inbox, send to 08141277555 these 3 SMS-es –
.
• First sms will be in this format (meaning that you have to put your voter ID number between two star symbols and send sms)
.
*YourVoterIDNumber*
.
• Second SMS will have only 4 numbers for support of TCP (righttorecall.info/tcpsms ; This issue promotes all issues) which is the support code of TCP -
.
0011
.
Third SMS will have only 4 numbers for support of laws for increasing our defences –
.
0151
.
Your support will come on this link – http://smstoneta.com/tcp
.
If sufficient internet voter id support is received, these pro-common laws will come.

And also inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send this SMS to their MP.

And also inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send this SMS to their MP

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Dear MP,

If you have received the internet link to this status via SMS etc. from your voter, then it is order from the citizen to you, to promote the following drafts in Section `C` via your website, private member bill etc. and order PM to print those DRAFTs in Gazette.

Section A. Introduction

Our defenses are growing weak day by day and hostilities on the citizens from enemy countries like Pakistan, Bangladesh, China etc. and also inside the country from Naxalites, terrorists, gangsters etc. are growing. This law-draft will enable peaceful citizens to bear INSAS level guns and protect themselves from criminals and invaders. This will reduce crime in society and enable us to deal with coming crisis, be ISIS or whatever.

Please keep in mind, that Pakistan has over 2 crore AK-47 level guns, Afghanistan has 1 crore such guns, Iran has factories to make guns etc. And India has only 25 lakh AK-47. And China can make and ship crores of AK-47 guns to Pakistan, Bangladesh etc. So earlier we improve our LOCAL gun manufacturing, without FDI (please note, WITHOUT FDI) the better.

Please note that there is no evidence that when every household has a gun to protect themselves from the AK47s of the gangsters, there is mass murder. While there is ample proof that `Guns save lives` while `Gun Control Kills` (Please full references in Section D1)

Section B. Main Demands in Short to improve defenses of military and defenses of the citizens

B1. Transparent Complaint-Proposal Procedure (TCP) can immediately reduce exploitation of the commons

Pathetic condition of common citizens in today`s system - Today, we commons have to submit an application at a government office for telling our problems, for a complaint or to give a pro-common proposal. But the corrupt officials can easily suppress that application. Why ? Because the application giver or other citizens cannot see their own application once it is submitted.

A simple solution - That is why, we have proposed that citizens should have the option, that if he/she wishes, then they can visit the specified government office, submit the application on a Rs.20 per page affidavit and get it scanned onto PM, CM or any specified website, so that all can see the affidavit without logging-in.

This procedure can be implemented in less time, easily, through a government notification in the gazette. If this government order is passed, those common citizens will immediately benefit, who do not have any connections. Due to this procedure, no official, no media or official can suppress the applications of commons without the suppressing person being exposed to masses with proof. And then, everyone`s agenda will benefit because it will not be easy to suppress them.

This procedure also can be used by the masses to give their Yes/No on a proposal and to quickly bring that proposal if it is pro-common and beneficial for the commons.

See full draft below in Section C1.

For detailed explanation, please see http://www.righttorecall.info/tcpsms.htm (download link - http://www.righttorecall.info/tcpsms.pdf)

For FAQs, see http://www.righttorecall.info/007.htm (download link - http://www.righttorecall.info/007.pdf)

B2. Weapon Manufacturing Act and Weaponization of Commons Act

Our defenses are growing weak day by day and hostilities on the citizens from enemy countries like Pakistan, Bangladesh, China etc. and also inside the country from Naxalites, terrorists, gangsters etc. are growing. This law-draft will enable Wholly Owned by Indian Citizens (WOIC) companies to manufacture weapons needed for the protection of the country in an efficient manner, without harassment from other companies or from corrupt government officials. This will enable citizens to deal with coming crisis, be ISIS or whatever and defend ourselves

We citizens need to be armed to defend ourself against external enemies in case shield of our military is insufficient and also we need guns to protect ourselves from naxals, terrorists, criminals and other internal threats.

Please note that there is no evidence that when every household has a gun to protect themselves from the AK47s of the gangsters, there is mass murder. While there is ample proof that `Guns save lives` while `Gun Control Kills`. (Please see references below in D1 for evidences)

See full drafts below in Section C2 and C6.

B3. How citizens via Right to Recall over PM and other important posts like District Weaponization Officer (DWO) can strengthen our defenses of country

The key persons in Military is PM, for PM decides salaries in Military, DRDO etc and PM decides policies which effect civilians depts. and which is also needed by the Military. So unless PM is recallable, PM may choose to sell out to US, China etc. and take policies which will weaken India`s defenses.

Using Replacement procedures, citizens can replace bad officials with better officials anyday. Due to fear of loosing job and power, 99% of the officials improve their behavior, work more efficiently, in the interest of country and commons and do not sell out to our enemies and rest 1%, who do not improve their behavior, are replaced by better officials.

See full drafts below in Sections C3 and C7

B4. How Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Ordinance draft will improve our defenses

FDI in defense or foreign companies making weapons for us, on our own soil is a threat for our security.
Eg if we import telecom equipment from a US company say Nortel. These switches have radio-receivers in them, which on receiving radio signals can be deactivated. If these switches are used in India, then during US-India war, US can disable the telecom network by merely pressing a button, and whole Indian Military will become deaf and blind. That’s why hi-tech imports which may effect Military should be prohibited even from good MNCs.

See full draft below in Sections C4

B5. How Jury System reduces inefficiency of indigenous industries and improves our defenses

In Jury system, the cases are not decided by the Judges but the cases are 15-1500 citizens randomly selected by a recallable officer from lakhs of voters. The number of Jurors depends on the severity of cases and after each case, new set of Jurors are randomly selected. So compared to Judge sysem, in Jury system, the corrupt find it much much more difficult to bribe the Jurors to get a favorable judgement or delay the case to influence the witnesses. Thereby, in Jury system the judgements are quick and fair coming in few weeks compared to years in Judge system. This reduces unfair cases on the indigenous industries and harassment from the corrupt officials and increases efficiency of indigenous industries and also defense manufacturing.

See full draft below in Section C5.

C. Drafts for the main demands to improve defenses of military and citizens

C1. Transparent Complaint-Proposal Procedure


== start of draft of the proposed TCP GN ===

The draft of proposed Transparent Complaint-Proposal Gazette Notification

1. [ order to Collector or his clerk ] The President hereby orders Collector that : if ANY citizen-voter in his district submits a Right to Information application or complaint against corruption or any affidavit to the Collector and requests to be put on the website of Prime Minister, the Collector or his designated clerk will issue a serial number and SCAN that affidavit along with voter ID number of the citizen onto the website of the Prime Minister for a fee of Rs 20 per page so that anyone can see the affidavit without logging-ini.

2. [ order to Talati, Patwari, Village Officer or his clerk ] The President orders Patwari that :

(.2.1) if a woman voter or a dalit voter or a senior citizen voter or a poor voter or a farmer voter or ANY citizen-voter comes with voter ID, and specifies Yes-No on an RTI application, complaint or any affidavit submitted in cluase-1, the Patwari will enter his Yes-No on the PM’s website with his voter-ID number and give a printed receipt for Rs 3 fee.

(2.2) The Patwari will also allow citizen to change his Yes-No for Rs 3 fee.

(2.3) The fee will be Re 1 for BPL card holder

(2.4) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter’

(2.5) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt

(2.6) The PM may create a system where by citizens can register YES/NO via ATM using ATM-cards for a fee of 50 paise

(2.7) PM may add means to enable citizens to register YES/NO via SMS for 5 paise

3. [note to all Citizens, Officers, Ministers, judges]

(3.1) This TCP Gazette Notification is not a referendum procedure. The Yes-No count will not be a binding on PM, CMs, officers, judges etc. If over 37 crore women voters, dalit voters, senior citizen voters, poor voters, farmer voters or ANY 37 crore citizen-voters register Yes on a given affidavit, then the PM may or need not take necessary action on the RTI application affidavit ; or the PM may or need not resign. PM’s decision will be final.

(3.2) Further, the Collector may design and propose a system to collect Yes-No in clause-2 over secured SMS, and implement that system after approval of PM.

==== end of the proposed GN ====

We summarize the TCP (Transparent Complaint Procedure) law as -

1. If a citizen wants, he can visit Collector’s office and get his complete affidavit SCANNED onto PM’s website along with voter ID number of the citizen for Rs. 20 per page fee, so that it is visible to all without any need to log-in.

2. If a citizen wants to give his opinion on a previously filed affidavit., then he visits Talati’s (Lekhpal, Patwari, V.O. etc) office, registers his YES (Support) or NO (opposition) for the affidavit & displays it on PM’s website for Rs 3 fee along with voter ID number of the citizen. The cost of giving one opinion for the citizen will be 10 paise when the system comes on SMS. Citizen can change his opinion any day, making procedure immune to money-buyout, media power & gangster power.

3. The YES-count is not a binding on PM etc.

C2. Weapon Manufacturing Act

1. [Instruction for District Collector]
If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit along with voter ID number of the citizen onto PM’s website for Rs 20/- per page, so that anyone can see the affidavit as it is, without any need to log-in.

2. [Instruction for Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerk)]
If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

3. [ALL]
Yes-No counts will not be binding on PM, MPs, Officers and judges.

4. [ALL]
This law is only applicable to WOIC i.e. Wholly Owned by Indian Citizens Company.
(see section C4)

5. [ALL]
The title Defence Minister in the clauses bellow will mean The Defence Minister or the officers he has appointed for the specific task in the clause.

6. [Instruction for Defence Minister or Officers he appoints]
The Defence Minister or the officers he appoints, will publish the definitions for (a) small guns (b) mid-sized guns (c) large guns (d) howitzers and various types of howitzers (e) tanks and various types of tanks (f) bullets, shells and various types of bullets and shells (g) missiles and various types of missiles (h) fighter planes and various types of fighter planes (i) other equipment used by military and their types (j) nuclear weapons and their types (k) biological weapons and their types (l) chemical weapons and their types ; and all other weapons and their types.

7. [Instruction for Defence Minister]
The Defence Minister will publish 3 lists of weapons and equipment called as “no registration required”, “no license required but registration required” and “license required”.

8. [Instruction for Defence Minister]
The Defence Minister shall put following weapons and equipments in “no license required but registration required” category.
(i) small guns (ii) mid-sized guns (iii) large guns (iv) permitted types of howitzers (v) permitted types of tanks (vi) permitted types of bullets and shells (vii) permitted types of missiles (viii) permitted types of fighter planes (ix) permitted equipment used by military

The Govt of India will put the design of INSAS rifle, 303, 202, .22 revolver and all guns used by Indian police , whose level is "below INSAS" in public domain. (INSAS is Indian version of AK-47). Anyone , without need of license, by just registration , can start a factory which makes a gun or its parts or its bullets , with the above design. Anyone may also start factory to make bullet proof jackets.

9. [Instruction for Defense Minister]
The Defense Minister shall put following weapons and equipments in “license required” category.
(i) Nuclear weapons (ii) biological weapons (iii) chemical weapons and their types.

10. [Instruction for Defense Minister]
The Defense Minister shall create a list of items to put in “no registration no license required category”.

11. [Instruction for Defense Minister]
In case of “registration required” category, the Defense Minister will issue the details that WOIC (Wholly owned by Indian Citizens) Company (See Draft of WOIC in section C4) needs to provide. The Defense Minister will decide which details will be disclosed to public and which details the Ministry will keep as confidential. The Minister will also decide which details WOIC company may publish and which details WOIC company must keep confidential.

12. [ALL]
A non-WOIC (non-Wholly Owned by Indian Citizens) company will require license as well as registration to manufacture weapons and defense equipment in any of the three category.

13. [Instruction for Defense Minister]
Defense Minister will print Gazette Notifications necessary to regulate weapon manufacturing by non-WOIC company.

14. [Instruction for Defense Minister]
The Defense Minister will appoint officers to enforce registration and licensing guidelines on the WOIC company and other companies involved in weapon manufacturing.

15. [ALL]
If there is a dispute between WOIC company or non-WOIC company involved in weapon manufacturing or if any citizen or govt officer believe that the factory owner is violating any law, then the case will be decided not by the judge, but by the District Jury, consisting of 25 Jurors chosen from voter list of the district between the age of 30 years and 55 years. Appeals can be made to State Jury and National Jury (See Draft of District Jury in section C5)

C3. Right to Recall PM Draft

===== start of the proposed Right To Recall-Prime Minister Gazette draft =======

1. [General Information]

The word citizen would mean a registered voter.

The word may means may or need not, and clearly means “not binding”.

2. [Instruction for District Collector]

If a citizen of India above 30 years wishes to be PM, he can appear before Collector. Collector would issue a serial number for a filing fee same as deposit amount for MP election and put his name on the PM’s website.

3. [Instruction for Talati = Village Officer = Patwari = Lekhpal (or Talati’s Clerks)

(3.1) If a citizen comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the PM position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved. The fee shall be Rs 1 for those with BPL card.

(3.2) If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

(3.3) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter.

(3.4) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt.

(3.5) The PM may create a system where by citizens can register approvals via ATM using ATM-cards.

(3.6) PM may add means to enable citizens to register approvals via SMS

4. [Instruction for Talati]

The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5. [Instruction for District Collector]

On every Monday, the Collectors will publish Approval counts for each candidate.

6. [Instruction for PM]

The present PM may count his approval count as higher of the following two -

number of citizens who have approved him
sum of votes obtained by Loksabha MPs who have supported him

7. [Instruction for PM]

If a candidate gets approvals 1 crore more than approvals existing PM has, then PM may resign and may ask MPs to appoint approved person as new PM.

8. [Instruction for Lok Sabha MPs]

The MPs may elect the person stated in clause-7 as new PM.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit onto PM’s website along with voter ID number of citizen for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

============= end of draft ===================

C4. Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Ordinance draft

WOIC is a company whose share holders are Indian Citizens or GoI or another WOIC. i.e. 100% shares are owned by GoI or Indian citizens and no shares is owned by any foreigners. To create WOIC, certain clauses need to be printed in the Company Act

===== start of the proposed Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Ordinance draft to be added in Company Act =======

Section - Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Company

1. A company can register itself as WOIC i.e. Wholly Owned by Indian Citizens

2. If a company is registered as WOIC, then only Indian Citizens above 18 years, residents in India, who are not permanent resident or citizen in any other country can buy shares in that company. In addition, another WOIC company or a Government body may buy shares. But a non-citizen or non-WOIC company cannot buy share in that company.

3. Only an Indian citizen can be Director, Chairman, Partner of a WOIC

4. Non-WOIC companies cannot buy lands or lease for a period longer than 10 years, Non-WOIC companies cannot buy or lease mines or agricultural lands.

5. Non-WOIC companies cannot buy buildings or lease buildings for a period longer than 10 years.

6. No minister or govt employee will buy any share in non-WOIC company

7. If any shareholder in WOIC becomes permanent resident or citizen in foreign country, he must dispose all his shares within 3 months or Registrar will auction those shares and give him amount minus charges.

8. Only a WOIC company can file a patent in India.

9. In any tender submitted to a Govt body, the amount given by non-WOIC company must be 20% less than amount given by WOIC company to be at par.

10. In any tender submitted to a WOIC company, the amount given by non-WOIC company must be 10% less than amount given by WOIC company to be at par.

11. WOIC company will submit full ownership details to Registrar every month.

12. Every Minister, MP, MLA, officer, judge and every Govt employee will disclose how many shares he owns on which WOIC company

13. A banking company or any finance company which takes deposits from citizens of India in India must be WOIC company

14. Banks will give loans only to WOIC companies.

15. Only WOIC company can enter telecom, satellite and other strategic fields

16. Only WOIC company can enter into crude oil mining or any other kind of mining

17. Only WOIC company can manufacture edible non-medicine food products and work in “zero-technology” areas

18. Only WOIC company can own bandwidth and run newspapers, news channels.

19. [Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit on PM’s website for Rs 20/- per page so that anyone can see the affidavit without any need to log-in.

20. [Instruction for Talati (= Patwari = Village Officer)]

If any citizen wants to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website.

============= end of WOIC draft ===================

C5. Jury System in Lower Courts in India

= start of the Gazette draft bring Jury System in Lower Courts in India ==

Section-1 : Appointment and replacement of Jury Administrator

1. (procedure for CM, District Collector) Within 2 days after passing this law, the CMs shall appoint one Registrar for entire State and one JA (Jury Administrator) per District

If any citizen of India above 30 years wishes to become District Jury Administrator , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the district collector, the DC would accept his candidacy for District Jury Administrator (DJA) after taking filing fee same as deposit amount for MP election. DC or his clerk will put the names of candidates on CM website.

2. (procedure Talati, Talati’s clerk) A citizen residing in a District can present his voter ID and specify the serial numbers of (at most 5) candidates he Approves for the position of Jury Administrator in his District. The clerk will enter the requests in the systems and CM website along with voter ID number of citizen and give the receipt to the citizen. The citizen to change his choices any day. The clerk shall charge a fee of Rs 3/-

3. (procedure for CM) If any candidate is approved by highest number of citizen-voters and over 50% of ALL citizen-voters, the CM will appoint him as new JA for that District within 2 days. If any candidate is approved by over 25% of ALL citizen-voters and his approval count is 5% more than existing JA, the CM will appoint him as new JA within 2 days.

4. (procedure for CM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in that State, the CM can cancel clause-2 and clause-3 and appoint his own JA for 5 years.

5. (procedure for PM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in India, the PM can cancel cluase-2, clause-3 and above clause-4 for entire state or some of the districts and appoint JA for 5 years.

Section-2 : Formation of Grand Jury

6. (procedure for JA) Using the voter list, the JA will, in a public meeting, randomly select 40 citizens from the voter-list of District, State or Nation as the Grand Jurors, from which he can exclude any 10 after interview so that finally there are 30 Grand Jurors. If the Jurors is appointed by CM or PM under clause-4 or clause-5 he may select up to 60 citizens and exclude 30.

7. (procedure for JA) In the first set of Grand Jurors, JA will retire the first 10 Grand Jurors every 10 days and select 10 more using random selection from voter list of District or State or Nation.

8. (procedure for JA) The JA cannot use any electronic device to select a number randomly. He will use the procedure detailed by CM. If CM has not specified the procedure, he will select as follows. Suppose JA has to choose a number between 1 and a four digit number - ABCD. Then JA will have 4 rounds of dice-throw for each digit. In a round if the digit he needs to select is between 0-5, then he will use only 1 dice and if the digit he needs to select is between 0-9, he will use 2 dices. The number selected will be 1 less than the number which comes in case of single-dice throw and 2 less in case of double-dice throw. If the throw of the dices exceeds the highest digit he needs, he will throw the dices again.. Example - Suppose JA needs to select a page in a book, which has 3693 pages. Then JA will execute 4 rounds. In the 1st round he will use 1 dice as he needs to select a number between 0-3.

If the dice shows 5 or 6, he will throw the dice again. If the dice show 3, the number selected is 3-1=2, and JA will proceed to second round. In the second round, he needs to select a number between 0-6. So he will throw two dices. If the sum exceeds 8, he will throw the dices again. If the sum is suppose 6, the second digit selected is 6 - 2 = 4. Like that, suppose the dices in 4 rounds show 3, 5, 10 and 2. Then JA will select digits as (3-1), (5 -2), (10-2), (2-1) i.e. page number 2381. The JA should use different citizens to throw dices. Suppose the voter-list has B books, the largest book has P pages and all pages have N entries. Then using above method or method described by CM, JA will select 3 random numbers between 1-B, 1-P and 1-N. Now suppose selected book has less than that many pages or the selected page has fewer entries. Then he will again select a numbers between 1-B, 1-P and 1-N.

9. (procedure for JA) The Grand Jurors will meet on every Saturday and Sunday. They may meet on more days if over 15 Grand Jurors approve. The number must be "over 15", even when less than 30 Grand Jurors are present. The meetings, if happen, must start at 11am and last till at least 5pm. The Grand Juror will get Rs. 200 per day he attends. The maximum payment a Grand Juror can get for his 1 month term will be Rs 2000. The JA will issue the checks 2 months after a Grand Juror completes the term. If the Grand Juror is out of district, he shall get Rs 400 per day of stay and if he is out state, he shall get Rs 800 per day of stay. In addition, they will get Rs 5 per kilometer of the distance between their home and court. The CM , PM may change the compensation as per inflation. All rupee amounts written in this clause and this law use WPI given by RBI in Jan-2008 and JA can change the amounts every six months using latest WPI.

10. (procedure for JA) If a Grand Juror is absent on a meeting, he will not get Rs 100 for that day and may loose up to thrice his amount to be paid. The individuals who are Grand Jurors 30 days later will decide the fine.

11. (procedure for JA) JA will start the meting at 11am. The JA arrive in the room before 10.30am. If a Grand Juror fails to arrive before 10:30am, JA will not allow him to attend the meeting and mark him absent.

Section 3: Charging a citizen

12. (procedure for JA) If any person, be a private person or District Prosecutor, has complaint against any other person, he can write to all or some Grand Jurors. The complainer must specify the remedy he wishes. The remedy can be· obtaining possession of a property· obtaining monetary compensation from the accused· imprisoning the accused for certain number of years/months.

13. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors, in a meeting, issue an invitation, the citizen may appear. The Grand Jurors may or may not invite the accused and complainer.

14. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors declare that there is some merit in the complaint, the JA will call a Jury consisting of 12 citizens from the district to examine the complaint. The JA will select more than 12 citizens randomly, and send them summons and of those who arrive, the JA will select 12 at random.

15. (procedure for JA) JA will ask the Chief District Judge to appoint one or more Judges to preside over the case. If the property in dispute is worth above Rs 25 lakhs or compensation claim is above Rs 100,000 and/or the maximum prison sentence is above 12 months, the JA will request Chief Judge to appoint 3 judges or else he will request Chief Judge to appoint 3 Judges for the case. The Chief Judge's decision on appointing number of Judges in the case will be final.

Section-4 : Conducting a trial

16. (procedure for Presiding Judge) The trial will go from 11am to 4pm. The trial will start only after all 12 Jurors and the complainer have arrived. If any party has not arrived, the parties who have arrived must wait till 4pm and then only they can go home.

17. (procedure for Presiding Judge) The Judge will allow the complainer to speak for 1 hour, during which no can interrupt. Then Judge will allow the employee to speak for 1 hour during which no one can interrupt. Like this, the Judge will alternate case. The case will go on like this on every day.

18. (procedure for Presiding Judge ) The case will go for at least 2 days. On the 3rd or later, if over 7 Jurors declare that they have heard enough, the case will go on for 1 more day. If on the next day, over 7 out of 12 Jurors declare that they would like to hear more arguments, the case will go on till over 7 say that case should end.

19. (procedure for Presiding Judge) On the last day, after both parties have presented the case for 1 hour each, the Jurors will deliberate for at least 2 hours. If after 2 hours, over 7 Jurors say that they need no more deliberation, the Judge will ask each to declare his verdict.

20. (procedure for Grand Jurors) In case a Juror or a party does not show up or shows up late, the Grand Jurors after 3 months will decide the fine, which can be up to Rs 5000 or 5% of his wealth, whichever is higher.

21. (procedure for Presiding Judge) In case of fine, each Juror will state the fine he thinks is appropriate, and MUST be less than the legal limit. If it is higher than legal limit, the Judge shall take it as legal limit. The Judge will arrange the fine amounts stated in increasing order, and take the 4th lowest fine, i.e. fine that is approved by over 8 out of 12 Jurors, as the fine collectively imposed by the Jury.

22. (procedure for Presiding Judge) In case of prison sentence, the Judge will arrange the sentence lengths cited by Jurors which must be below the maximum sentence as stated in the Law accused is charged with breaking, in increasing order. And the Judge will take the 4th lowest sentence i.e. prison sentence approved by over 8 out 12 Jurors, as the prison sentence collectively decided by the Jury.

Section-5 : The judgment, execution and appeal

23. (procedure for District Police Chief) The District Police Chief or policemen designated by him will execute the fine and/or imprisonments as given by the Judge and approved by the Jurors.

24. (procedure for District Police Chief) If 4 or more Jurors do NOT ask for any confiscation or fine or prison sentence, the Judge will declare the accused as innocent and the District Police Chief will take no action against him.

25. (procedure for Accused, Complainer) Either party will have 30 days to appeal against the verdict in the State's High Court or the Supreme Court of India.

Section-6 : Protection of a Fundamental Rights of the Citizens .

26. (procedure for All Govt Employees) No Govt employee will impose any fine or prison sentence without consent of over 8 out of 12 Jurors of the Lower Courts, unless approved by the Jurors of High Courts or the Jurors of Supreme Court. No Govt employee will imprison any citizen for more than 24 hours without approval of over 15 out of 30 District or State Grand Jurors.

27. (procedure for To everyone) The Jurors will decide the facts as well as intentions, and shall also interpret the laws as well the Constitution.

28. This GN will come into force only after over 51% of all citizens in India have registered YES and every SCj has approved this GN.

29. (procedure for DC) If a citizen wants to propose any change in this law, then the citizen can submit an affidavit demanding the change to District Collector or his clerk who will post it on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20 per page along with voter ID number of the citizen.

30. (procedure for Talati aka Patwari) If a citizen wants to register his opposition to this law or any clause of this law or wants to register any support to affidavit filed in the above clause, then he may register his YES/No for a Rs 3 fee at Patwari’s office. The Patwari will note the citizen’s YES/NO and will also post the citizen’s YES/NO on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

============= end of draft ====

Footnotes:
These footnotes are not part of the draft. They are for understanding of reader only.

1. The State Jury system and National Jury System will be similar except that Jurors will be chosen from voter list of the State and India respectively and the State Jury Administrator and National Jury Administrator will be appointed by the CM and PM respectively.

2. This draft does not create Right to Recall Defense Minister procedure. Using Right to Recall PM, citizens can exercise control over defense minister. And if Right To Recall Defense Minister procedure is needed, then activists or citizens may create it using Transparent Complaint Procedure (TCP) described previously in section C1.
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C6. Weaponization of Commons Act

1. [Instruction for District Collector]
If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit onto PM’s website for Rs 20/- per page, so that anyone can see the affidavit as it is, along with voter ID number of the citizen, without any need to log-in.

2. [Instruction for Talati also known as Village Officer or Patwari (or Talati’s Clerks]
If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

3. [ALL]
Yes-No counts will not be binding on PM, MPs, Officers and judges.

4. [Instruction for PM]
PM will appoint one officer per district called as DWO = District Weaponization Officer. The PM will print gazette notification to create Right to Recall procedure on DWO. (see foot note 1)

5. [Instruction for Defense Minister]
The Defence Minister will publish list of weapons in following categories.
(i) small guns (ii) mid-sized guns (iii) large guns (iv) permitted types of howitzers (v) permitted types of tanks (vi) permitted types of bullets and shells (vii) permitted types of missiles (viii) permitted types of fighter planes (ix) permitted equipment used by military

6. [ALL]
(a) Any citizens above the age of 22 years, who has wealth of Rs 10 lakhs (not counting 1 home upto Rs. 1 crore and furniture up to 10 lakhs) will be required to keep one small gun at home and atleast 100 bullets.

(b) Any citizens will over wealth of Rs 20 lakhs (not counting 1 home upto Rs. 1 crore and furniture up to 10 lakhs) will be required to have 1 mid-sized gun and 100 bullets at home.

(c) Any citizens will over wealth of Rs 30 lakhs (not counting 1 home upto Rs. 1 crore and furniture up to 10 lakhs) will be required to have 1 large-sized gun and 100 bullets at home.

(d) A person can possess almost 2 guns in each category. For possessing more than 2 guns would require license from both DPC = District Police Commissioner.

(e) A citizen above 22 years having less wealth then mentioned in above clauses may also keep small, mid-size or large guns at home.

7. [ALL]
A citizen who is possessing gun will be required to register the gun he has with DPC = District Police Commissioner and DWO = District Weaponization Officer.

8. [Instruction for DPC, DWO, any citizen, Grand Jurors]
DPC or DWO or any citizen can approach District Grand Jury and request for a Jury Trial to prohibit a citizen from possessing gun. The Grand Jurors with majority will decide if Jurors should be called or not and will decide size of the Jury Trials. The DJA = District Jury Administration may increase the size of the Jury.

9. [Instruction for Jurors]
The Jurors with majority will decide if accused can be prohibited from possessing guns and will decide the duration. After that duration, second Jury will be called to decide if the accused should be permitted or prohibited from possessing guns.

10. [Instruction for DWO, Any citizens]
If DWO or any citizen complaints to Grand Jurors that an accused is not possessing guns and required number of bullets at his home then Grand Jurors may or may not initiate Jury Trials on the accused.

11. [Instruction for Jurors]
If the accused is found guilty of not possessing guns he was required to possess then Jurors may fine him up to 5% of his wealth (not counting 1 home up to Rs. 1 crore and furniture up to 10 lakhs) and or impose 2 months of imprisonment. The fine for the first offence will be almost 2%, for second offence will be 4% and third and subsequent offence will be 5%. There will be no prison sentence for first offence.

12. [Instruction for DWO]
DWO will select 0.01% of adult citizens from voter list every day at random before Grand Jurors. DWO or his staff will visit the premises of the randomly chosen citizens and make sure that they possess the required guns and bullets.

13. [Instruction for DWO]
From the Funds obtained from The Defence Minister, DWO will buy equipment, weapons and setup grounds to train citizens for using guns, howitzers, tanks, rocket launchers, anti-aircraft missiles, helicopters, fighter plane etc. The training will be paid by those who wish to acquire training. DWO will decide the rates.

14. [Instruction for DWO]
DWO may accept donations from citizens for the purpose of buying equipment and weapons.

15. [Instruction for DWO]
DWO can decide compulsory training for all citizens and option training for those who wish. Every citizens in the District between 22 years and 50 years must take compulsory training atleast once within 2 years after DWO announces compulsory training course.

C7. Right To Recall District Weaponisation Officer (DWO)

== start of draft of the proposed RTR-DEO GN ===

The exact draft, which will come into effect when PM signs this law is as follows:

Section-1 : Right to Recall District Weaponisation Officer

1. The word 'voter` means a registered voter in that district

2. (procedure for Collector) If any citizen of India wishes to become DWO (District Weaponisation Officer) , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the DC (or officer he deputes), the DC (or officer he deputes) would accept his application to become DWO after taking filing fee same as deposit amount for MP election. Collector or his clerk will put the name of the candidates on CM website.

3. (procedure for Talati also known as Village officer or Patwari (or Talati’s Clerks)) If any voter comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the DWO position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

4. (procedure for Talati) The Talati will put the approvals of the parent on district’s website with citizen’s voter-ID number and names of the persons he approved.

5. (procedure for Talati) If a the parent comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6. (procedure for Collector) On every 5th of month, the Collector or officer he deputes will publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.

7. (procedure for CM) If a candidate gets approval of over 35% of ALL voters (ALL, not just those who have filed their approval) in a district, and it is 5% more than approval existing DWO has, then CM may appoint him as DWO

8 (procedure for CM , DWO) A person may become DWO with approval of voters, he may become DEO of more than one Districts. He may become DWO of at most 5 districts in the State and at most 20 districts in India. A person cannot be DWO of one District for over 8 years in his life. In case he is DWO of more than one district, he will get salaries , allowances, perks etc for the DWO positions of all those districts.

9 (procedure for CM ) As long as a DWO has approvals of more than 34% parents, CM need not replace him. But if a DWO’s approval goes below 34%, the CM can replace him with the officer of his choice.

Section - 2 - Citizens` Voice

1. Citizens Voice (CV ) 1

[District Collector (DC)]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20/- per page so that anyone can see the affidavit along with voter ID number of the citizen without logging-in.

2. Citizens Voice (CV ) 2

[Talati (= Village Officer = Patwari)]

If any citizens want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister along with voter ID number of the citizen.

==== end of draft ====

===

Section D. References -

"Among the many misdeeds of the British rule in India, history will look upon the act of depriving a whole nation of arms, as the blackest." -- Mahatma Gandhi

कृपया ये लिंक देखें -
Please see these links-

1) चैप्टर 24, 29, http://www.righttorecall.info/301.h.pdf
Chapter 24, 29, http://www.righttorecall.info/301.pdf

2) Right to bear guns was demanded by Gandhiji, Sardar, Nehru et al in 1931. This may be shock to some, but here is the documentary proof from a book written an IAS from Collected Works of Mahatma Gandhi, a book having Gandhi`s own letters, collected by his own followers.

Please see page 327 and see ...item 1(h) in the document attached. Following is the link from "Collected works of Mahtma Gandhi"

http://www.gandhiserve.org/cwmg/VOL051.PDF

Fundamental rights of the people, including :
(a) freedom of association and combination;
(b) freedom of speech and of the Press;
....
(h) right to keep and bear arms in accordance with
regulations and reservations made in that behalf;
...

3) An interview with John R. Lott, Jr.
author of More Guns, Less Crime: Understanding Crime and Gun Control Laws -

http://www.press.uchicago.edu/Misc/Chicago/493636.html

4) 25 years murder free town in `Gun Town USA` -

http://www.wnd.com/2007/04/41196/#sy8ZWb4KVfEbooQj.99

5) Thousands of Criminal Attacks Thwarted by Armed Citizens -
According to the authors of Cato Institute's recently released study on how often guns are used by citizens to prevent crime, "tens of thousands of crimes are prevented each year by ordinary citizens with guns."

Some objections to gun ownership include concerns that ordinary citizens aren't capable of owning and handling a gun responsibly or that they will be likely to engage in "road rage" with potentially tragic consequences. Such objections hold little water. Cramer and Burnett wrote: "This paper finds that such cases represent an exceedingly small minority of gun uses by otherwise law-abiding citizens.... Those assumptions are false. The vast majority of gun owners are ethical and competent."

http://lightfromtheright.com/2012/02/27 ... f-defense/

6) the kodagu region in Karnataka is a place where people have the right to bear guns. The right is guaranteed under the law. But we do not hear anything about massacres etc in that region or am I missing something.

http://coorg.tripod.com/coorgs.html

7) Gun Ownership in India -

http://www.abhijeetsingh.com/arms/india/

8) US state wise Per Capita Gun Ownership versus crime rate-

http://www.datamasher.org/mash-ups/crim ... -ownership

http://answers.yahoo.com/question/index ... 304AAzIs3g

http://www.washingtonpost.com/wp-srv/he ... rship.html

http://www.disastercenter.com/crime/US_ ... nking.html

9) Guns, Crime, and the Swiss -

http://www.stephenhalbrook.com/articles ... teeth.html

10) "What America can learn from Switzerland is that the best way to reduce gun misuse is to promote responsible gun ownership." -

http://guncite.com/swissgun-kopel.html

11) Leading causes of death in US -

http://www.cdc.gov/nchs/fastats/deaths.htm

12) Myth #3: Gun Control Has Reduced The Crime Rates In Other Countries -

http://gunowners.org/sk0703.htm

AUSTRALIA: MORE VIOLENT CRIME DESPITE GUN BAN -

http://www.ncpa.org/sub/dpd/?Article_ID=17847

3. Myth: The UK and Australia gun bans have reduced violent crime.-

https://mic.com/articles/24124/7-gun-co ... .8ppH64tJS

Gun crimes have been rising throughout Australia since guns were banned. In Sydney alone, robbery rates with guns rose 160% in 2001, more in the previous year.-

http://www.smh.com.au/articles/2002/04/ ... 22771.html

Japan's crime rate soars -

http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/1472175.stm

Gun Facts version 6.1 (Guy Smith) -

http://gunfacts.info/pdfs/gun-facts/6.1 ... screen.pdf

The Failed Experiment
Gun Control and Public Safety in Canada,
Australia, England and Wales -

https://www.fraserinstitute.org/studies ... -and-wales

13) Britain: From Bad to Worse -

During the 19th century, and most of the 20th, Britain enjoyed a well-deserved reputation as an unusually safe and crime-free nation, compared to the United States or continental Europe. No longer.

http://web.archive.org/web/201102141734 ... 5139.shtml

http://www.examiner.com/article/the-gun-control-myth

14) Gun Crime Soars in England Where Guns Are Banned -

http://townhall.com/tipsheet/katiepavli ... d-n1464528

15) Larry Pratt: British Gun Crime Stats are a "Sham" -

http://www.theendrun.com/larry-pratt-br ... ats-a-sham

The Government's latest crime figures were condemned as "truly terrible" by the Tories today as it emerged that gun crime in England and Wales soared by 35% last year.

Read more: http://www.dailymail.co.uk/news/article ... z2Sk8ktS59

16) Also watch these videos -

Gun Control - Warning from the UK - the myth of safety

http://www.youtube.com/watch?v=xTFs6Lbq ... cw&index=2

Crime Rate Increases with Australia's gun Ban

http://www.youtube.com/watch?v=hoAFOHbi ... cw&index=1

17) “What good is it for citizens to have guns when the government has tanks?”

http://bearingarms.com/what-good-is-it- ... has-tanks/

18) An armed lady (civilian) saves her brother-in-law from kidnappers. -

https://www.facebook.com/rahularyacam/p ... 6741540087

===============

For detailed explanation, please see chapter 1,6,7, 20, 21, 24 of http://www.3linelaw.wordpress.com (download link - http://www.righttorecall.info/301.pdf)

For FAQs, see http://www.righttorecall.info/004.htm (download link - http://www.righttorecall.info/004.pdf)


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