प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Mon Oct 20, 2014 7:41 pm 
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प्रिय नागरिक,

हमें नागरिकों की जान बचाने वाली प्रक्रिया की तुरंत आवश्यकता है जिसका नाम पारदर्शी-शिकायत प्रस्ताव प्रणाली है |

सिर्फ तीन लाइन का यह कानून गवाह, अपराध की जानकारी देने वाले कार्यकर्ताओं (सचेतकों) की जान बचायेगा, भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी आदि समस्याओं को कुछ ही महीने में कम कर देगा और देश में सच्चे लोकतंत्र की स्थापना करेगा । (ये प्रक्रिया कैसे जान बचायेगा, आदि इसके लिए कृपया आगे पढ़ें)

अगर आप इस लाइन की मांग को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राजपत्र में छापे, ऐसा चाहते है तो अपने सांसद या विधायक को निम्नलिखित आदेश एस.एम.एस. या ट्विट्टर के द्वारा देवे और इस सरकारी-आदेश को तुरंत पारित करवाने के लिए कहें - :

"Kripya apne website, twitter aadi dwara shoshan kam karne wali prakriya - tinyurl.com/TeenLineKanoon ki maang karein aur rajptr mein chhapwayein. Varna apko aur apki party ko vote nahin karenge. FileSha1Hash = 03d83b97a1180fe88cc15bd6fd9771c1b3a551d8 BitTorrentHash = e65f846014a5c823dc521392bbf57b97fcf20dcb Kripya smstoneta.com jaise public sms server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID no ke saath sabhi ko dikhe"

अपने सांसद/विधायक को एस.एम.एस. भेजने के अलावा, अपनी मांग का प्रमाण अपने वोटर आई.डी. के साथ, पब्लिक एस.एम.एस. सर्वर पर दिखाएँ 2 एस.एम.एस. भेज कर |

यदि आप ये चाहते हैं कि नागरिक-मतदाता को ये विकल्प होना चाहिए कि यदि वो चाहे, तो वो किसी भी दिन, कलेक्टर आदि सरकारी दफ्तर जाकर अपनी अर्जी, 20 रुपये प्रति पन्ने के एफिडेविट के रूप में अपने वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री वेबसाईट पर स्कैन करवा सकेगा जिससे सभी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन शब्द-शब्द पढ़ सकें, और कोई अन्य नागरिक पहले से दर्ज एफिडेविट पर अपनी हाँ/ना दर्ज कर सके और उसे कभी भी बदल सके, तो 08141277555 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया दो एस.एम.एस. भेजें (यदि आपके जिले का पब्लिक राय सर्वर बना है, तो कृपया स्थानीय कार्यकर्ता से पूछ कर, अपना एस.एम.एस वहां के पब्लिक राय सर्वर के नंबर पर भेजें) –
.
• पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में
अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)
.
*आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*
.
• दूसरा एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. (rtrg.in/tcpsms.h) का समर्थन कोड है –
.
0011
.
आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा –
.
http://smstoneta.com/tcp |
.
यदि पर्याप्त संख्या में ये इन्टरनेट वोटर आई.डी. समर्थन प्राप्त हो गया, तो ये कानून आ जायेंगे |

और कृपया अन्य नागरिकों को भी विज्ञापन, पर्चों आदि द्वारा बताएं कि वे भी अपने विधायक / सांसद को इस प्रकार का एस.एम.एस भेजें |

=================================

प्रिय सांसद/विधायक,

अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है (न कि जिसने ये लेख लिखा है)

एस.एम.एस. भेजने वाला आपको निम्नलिखित कानून-ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, ट्विट्टर आदि द्वारा बढ़ावा करने और प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आदि से मांग करने के लिए आदेश दे रहा है -

===== प्रस्तावित प्रक्रिया-ड्राफ्ट जो राजपत्र में छपवाना है, उसका आरम्भ =======

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

1.

[कलेक्टर (और उसके क्लर्क) के लिए निर्देश ]

कोई भी नागरिक मतदाता, यदि खुद हाजिर होकर, एफिडेविट पर अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी / भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद / कोई प्रस्ताव या कोई अन्य एफिडेविट कलेक्टर को देता है और प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर रखने की मांग करता है, तो कलेक्टर (या उसका क्लर्क) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर, सीरियल नंबर देकर, एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ, ताकि सभी बिना लॉग-इन के वे एफिडेविट देख सकें ।

2.

[पटवारी (तलाटी, लेखपाल)]

(2.1) कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, 3 रुपये का शुल्क (फीस) लेकर, तो पटवारी नागरिक का मतदाता कार्ड संख्या, नाम, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा ।
नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएगी । गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए फीस 1 रूपये होगी ।

(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क (फीस) के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है ।

(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप को रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |

(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |


3.

----------------

ये कोई रेफेरेनडम (जनमत-संग्रह) नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक, अदि पर अनिवार्य (जरूरी) नहीं होगी । लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, कोई एक अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं । उनका निर्णय अंतिम होगा ।

====== प्रस्तावित प्रक्रिया ड्राफ्ट जो राजपत्र में छापना है उसकी समाप्ति ==========

मांग किये गये इस टी.सी.पी - पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव सिस्टम सरकारी आदेश का सार है :-

1. यदि नागरिक चाहे, तो अपनी फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव 20 रूपये प्रति पेज देकर कलेक्टर की कचहरी जाकर अपने वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री वेबसाइट पर स्कैन करवा सकेगा । इस शिकायत को बिना लॉग-इन किये सभी आम नागरिक देख सकेगें |

2. यदि नागरिक चाहे तो 3 रुपये का शुल्क देकर धारा 1 में दी गई फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव पर अपनी हाँ/ना प्रधानमंत्री वेबसाइट पर दर्ज करवा सकेगा । और उस नागरिक की हाँ / ना पधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ दिखाई देगी | यह हाँ-ना दर्ज कराने की कीमत 3 रूपये से घटकर 10 पैसे हो जायेगी, जब यह प्रकिया एस.एम.एस. पर आ जायेगी | नागरिक अपना मत किसी भी दिन रद्द कर सकता है या बदल सकता है इस कारण ये प्रक्रिया ना तो पैसों द्वारा खरीदी जा सकती है, ना ही गुंडों या मीडिया द्वारा प्रभावित की जा सकती है |

3. हाँ / ना पधानमंत्री पर अनिवार्य नहीं है |

========================

कैसे ये प्रक्रिया नागरिकों, गवाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जान बचा सकती है ?

मान लीजिए, किसी क्षेत्र में कोई अपराध हुआ है और नागरिक उसकी एफ.आई.आर. लिखवाता है या गवाही/सबूत देता है और नागरिक को एफ.आई.आर. की कॉपी मिलती है तो उसे कोई भ्रष्ट पुलिस अफसर अपराधियों के साथ सांठ-गाँठ करके आसानी से दबा सकते हैं | क्योंकि नागरिक अपनी दर्ज एफ.आई.आर. या अर्जी जमा करने के बाद देख नहीं सकते |

और आज के सिस्टम में गवाहों को गलत तत्व आसानी से डरा-धमका सकते हैं ; यहाँ तक गवाहों को जान से भी मार दिया जाता है | क्योंकि गुंडों को मालूम है कि अधिक लोगों को तथ्य की जानकारी नहीं है और गवाह दबाने/मारने से सबूत समाप्त हो जायेंगे |

लेकिन यदि नागरिकों के पास ये नागरिक-प्रामाणिक विकल्प है कि वे अपनी बात, सबूत या राय अपनी वोटर आई.डी. नंबर के साथ सार्वजनिक रूप से दर्शा सकते हैं, तो पुलिस अफसर देखेगा कि सबूत को दबाया नहीं जा सकता है, अब तो लाखों-करोड़ों को प्रमाण प्राप्त हो गए हैं | और गुंडों को भी समझ में आएगा कि गवाह ने अपना बयान सार्वजनिक कर दिया है - इसीलिए अब गवाह को मारने से कोई लाभ नहीं है | इस प्रकार गवाह की भी जान बच जायेगी |

क्यों भारत के नागरिकों को इस कानून की सबसे ज्यादा जरुरत है ?

भारतीय राज व्यवस्था में सबसे बड़ा दोष यह है कि नागरिकों के पास शासकों के सम्मुख अपनी स्पष्ट मांग संगठित रूप से रखने की कोई नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया नहीं है ।

यदि प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री अपनी कोई बात जनता के सामने रखना चाहे तो वे ऐसा मिडिया के माध्यम से आसानी से कर सकते है, किन्तु यदि जनता अपनी कोई मांग या सुझाव् शासन के सम्मुख रखना चाहे तो उन्हें अनशन, धरने, विरोध प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान, ज्ञापन, रास्ता जाम, नारेबाजी आदि असंगठित तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है । किन्तु इन सब तरीकों से कोई 'नागरिक प्रमाणिक' प्रमाण पैदा नहीं होता, मतलब कोई भी नागरिक स्वयं जांच सके, ऐसा प्रमाण नहीं मिल पाता कि कितने नागरिक अमुक विषय के समर्थन या विरोध में हैं । नागरिक-प्रामाणिक नहीं होने से इन प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता नहीं होती और नागरिक या अफसर कोई स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं आ पाते |

http://www.pgportal.gov.in जैसी सरकारी साईट में नागरिक के वोटर आई.डी. के साथ शिकायत दर्शाने का विकल्प भी नहीं है, जिससे दूसरे नागरिक ये पता नहीं लगा सकते कि शिकायत दर्ज करने वाला व्यक्ति असली हैं कि नकली | लेकिन टी.सी.पी. में नागरिक की राय पहचान पत्र के साथ प्रधानमंत्री वेबसाईट पर आएगी ; कोई भी नागरिक वोटर आई.डी. राय वाले डाटा का सैम्पल लेकर, राय देने वाले व्यक्तियों का पता निकालकर उनसे संपर्क करके स्वयं पता लगा सकता हैं कि डाटा सही है कि नहीं |

जिन लोगों के पास इन्टरनेट नहीं भी है, वे भी इस प्रक्रिया का उपयोग कर सकेंगे, कलक्टर दफ्तर या निश्चित सरकारी दफ्तर जाकर और अपनी अर्जी प्रधानमंत्री वेबसाईट पर स्कैन करवाकर | क्योंकि इस प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति कभी भी अपनी राय बदल सकता है, ये प्रक्रिया पैसों, गुंडों, मीडिया द्वारा या अन्य किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं कि जा सकेगी | प्रक्रिया नागरिक-प्रामाणिक होने से कोई भी नागिक स्वयं जांच सकता है कि सच क्या है, क्या नहीं |

इस प्रस्तावित प्रक्रिया के लागू होने से प्रस्तावों को दबाया नहीं जा सकता है और दूसरे जनहित के प्रक्रियाओं की आने की सम्भावना बढ़ जायेगी जिससे गरीबी और भ्रष्टाचार को कुछ ही महीनों में कम किया जा सकता है |

अधिक जानकारी के लिए http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.htm देखें (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.pdf)|

प्रश्नोत्तरी के लिए http://www.righttorecall.info/007.h.htm देखें (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/007.h.pdf) |

==========================

Dear All,

We urgently need a life-saving procedure, citizen-verifiable procedure called TCP (Transparent Complaint-Proposal Procedure)

This law of only three lines will save life of witnesses and whistleblower activists, reduce corruption, poverty, illiteracy, inflation, unemployment etc. problems in few months and will help in establish a true democracy in the country (For details, how this procedure will save lives etc., please read further)

Those who want TCP, send following order to your MP / MLA via SMS or twitter to get it immediately passed ---

"Please promote via your website, twitter etc. life saving procedure - tinyurl.com/TeenLineKanoon and get it printed in gazette.FileSha1Hash = 03d83b97a1180fe88cc15bd6fd9771c1b3a551d8 BitTorrentHash = e65f846014a5c823dc521392bbf57b97fcf20dcb Or will not vote for you / your party. Please setup a server like smstoneta.com so that SMS-opinions of citizens along with their voter IDs are seen by all, without any need to login"

Besides sending your MP/MLA above mentioned SMS, also display proof of your opinion along with voter id by sending 2 SMS-es to already existing public sms server.

If you want that citizens should have the option, that if he/she wishes, then they can visit the specified government office, submit the application on a Rs.20 per page affidavit and get it scanned onto PM, CM or any specified website, so that all can see the affidavit along with citizen`s voter ID number, without logging-in and other citizens can put their yes/no at Patwari office or other specified government office and citizens can change their opinion anyday, then please send from your mobile inbox, send to 08141277555 these 2 SMS-es (If there is a Public Opinion Server for your district, please contact your local activist and send SMS to number of that Public Opinion Server) –
.
• First sms will be in this format (meaning that you have to put your voter ID number between two star symbols and send sms)
.
*YourVoterIDNumber*
.
• Second SMS will have only 4 numbers for support of TCP (righttorecall.info/tcpsms ; This issue promotes all issues) which is the support code of TCP -
.
0011
.
Your support will come on this link – http://smstoneta.com/tcp
.
If sufficient internet voter id support is received, these pro-common laws will come.

And please inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send similar sms to their MP/MLA

========================

Dear MP,

If you have received the internet link to this status via SMS from your voter, then it is order to you, to put this draft on your website, twitter etc. and order PM, CM etc. to print the following DRAFT in Gazette.

== start of draft of the proposed TCP GN ===

The draft of proposed Transparent Complaint-Proposal Gazette Notification

1. [ order to Collector or his clerk ] The President hereby orders Collector that : if ANY citizen-voter in his district submits a Right to Information application or complaint against corruption or any affidavit to the Collector and requests to be put on the website of Prime Minister, the Collector or his designated clerk will issue a serial number and SCAN that affidavit along with voter ID number of the citizen onto the website of the Prime Minister for a fee of Rs 20 per page so that anyone can see the affidavit without logging-in.

2. [ order to Talati, Patwari, Village Officer or his clerk ] The President orders Patwari that :

(.2.1) if ANY citizen-voter comes with voter ID, and specifies Yes-No on an RTI application, complaint or any affidavit submitted in clause-1, the Patwari will enter his Yes-No on the PM’s website with his voter-ID and give a printed receipt for Rs 3 fee.

(2.2) The Patwari will also allow citizen to change his Yes-No for Rs 3 fee.

(2.3) The fee will be Re 1 for BPL card holder

(2.4) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter’

(2.5) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt

(2.6) The PM may create a system where by citizens can register YES/NO via ATM using ATM-cards for a fee of 50 paise

(2.7) PM may add means to enable citizens to register YES/NO via SMS for 10 paise

3. [note to all Citizens, Officers, Ministers, judges]

(3.1) This TCP Gazette Notification is not a referendum procedure. The Yes-No count will not be a binding on PM, CMs, officers, judges etc. If over 37 crore women voters, dalit voters, senior citizen voters, poor voters, farmer voters or ANY 37 crore citizen-voters register Yes on a given affidavit, then the PM may or need not take necessary action on the RTI application affidavit ; or the PM may or need not resign. PM’s decision will be final.

(3.2) Further, the Collector may design and propose a system to collect Yes-No in clause-2 over secured SMS, and implement that system after approval of PM.

==== end of the proposed GN ====

We summarize the TCP (Transparent Complaint Procedure) law as -

1. If a citizen wants, he can visit Collector’s office and get his complete affidavit SCANNED onto PM’s website along with voter ID number of the citizenfor Rs. 20 per page fee, so that it is visible to all without any need to log-in.

2. If a citizen wants to give his opinion on a previously filed affidavit., then he visits Talati’s (Lekhpal, Patwari, V.O. etc) office, registers his YES (Support) or NO (opposition) for the affidavit & displays it on PM’s website for Rs 3 fee along with voter ID number of the citizen. The cost of giving one opinion for the citizen will be 10 paise when the system comes on SMS. Citizen can change his opinion any day, making procedure immune to money-buyout, media power & gangster power.

3. The YES-count is not a binding on PM etc.

========================

How this simple procedure will save life of citizens, witnesses and whistle-blower activists ?

Let us say, in some area there happened a crime and citizen files a FIR regarding it or gives his witness statement and citizen gets copy of FIR, then it is very easy for a corrupt officer to form a nexus with criminals and suppress evidences/witness statements. This is because in present system, citizens cannot see their own filed FIR or application once they submit the same.

And in today`s system, criminals can easily threaten the witnesses; even the witnesses are many times killed. Because the criminals know that not many persons have access or knowledge to the proofs and witness statements. Criminals know that proofs can easily be suppressed by suppressing or killing the witness.

But if citizens have a citizen-verifiable optional procedure that they can show to the public their proofs, opinion etc. along with voter ID number ; then the police officer will see that these proofs can no longer be suppressed since lakhs-crores must have seen them. And criminals also will understand that the witness has shown his statement to the public – so there is no benefit of harming or killing the witness. In this way, the life of the witness will be saved.

Why Indian citizens need this law desperately ?

Biggest flaw in present Indian administration is that citizens do not have any citizen-verifiable method to put their clear-cut demand in a collective manner.

If PM or CM wants to put his views before public, then he can do it easily via media but if public wants to put their demands in front of the administration, then they are forced to use unorganized methods like Anshan-dharna, signature campaign, memorandum, blocking roadways, sloganeering etc. But all these methods do not generate any citizen-verifiable proof, meaning there is no proof of support or oppose counts for a specific issue which other citizens can themselves cross-verify. Since these methods are not citizen-verifiable, these methods are not reliable and citizens or officials cannot make any definite conclusions based on these.

In government sites like pgportal.gov.in, citizens have no option to display their complaints, opinions etc. along with their Voter ID number and due to this other citizens cannot know whether the complaint filer is a genuine person or fake. But in TCP procedure, the opinions of citizens will come along with their Voter ID number on PM website, so that any citizen themselves can take sample of the data of Voter ID numbers, obtain address of citizens, contact them and find whether the data is true or false.

Those who do not have internet, they will also be able this procedure by going to collector office or any other specified government office and get their application as affidavit scanned onto PM website. Because any person can change their opinion any time, this procedure is immune to money-buyout, media power or gangster power or any kind of manipulation. Since the procedure is citizen-verifiable, any citizen can himself/herself verify what is the truth, what is not.

With implementation of this procedure, proposals of citizens cannot be suppressed. This increases the possibility of other pro-common procedures to be implemented which will decrease poverty, corruption in few months

For detailed explanation, please see http://www.righttorecall.info/tcpsms.htm (download link - http://www.righttorecall.info/tcpsms.pdf)

For FAQs, see http://www.righttorecall.info/007.htm (download link - http://www.righttorecall.info/007.pdf)


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