प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Thu Nov 20, 2014 1:15 am 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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प्रिय नागरिक,

यदि आप चाहते हैं कि भारत में स्वदेशी बढ़े और देश में अन्यायपूर्ण विदेशी कंपनियों का एकाधिकार (वर्चस्व) कम हो, तो कृपया अपने सांसद को एस.एम.एस या ट्विट्टर द्वारा ये मैसेज भेजें ---

" Kripya Swadeshi ko badhane ke kaanonon ka badhava va maang website, niji bil aadi dwara karein. Draft - tinyurl.com/SwadeshiBadhao varna apko aur apki party ko vote nahin karenge. Kripya smstoneta.com jaise public sms server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID ke saath sabhi ko dikhe"

अपने सांसद/विधायक को एस.एम.एस. भेजने के अलावा, अपनी मांग का प्रमाण अपने वोटर आई.डी. के साथ, पब्लिक एस.एम.एस. सर्वर पर दिखाएँ 3 एस.एम.एस. भेज कर | यदि आप स्वदेशी - 100% भारतियों द्वारा उत्पादन - बढ़ाना और अन्यायपूर्ण विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को कम करने के लिए प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट चाहते हैं तो,
08141277555 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया तीन एस.एम.एस. भेजें –
.
• पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में
अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)
.
*आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*
.
• दूसरा एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. (rtrg.in/tcpsms.h) का समर्थन कोड है –
.
0011
.
• तीसरा एस.एम्.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो स्वदेशी बढ़ाने के लिए कानूनों का समर्थन कोड है –
.
0101
.
आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा –
.
http://smstoneta.com/tcp |
.
यदि पर्याप्त संख्या में ये इन्टरनेट वोटर आई.डी. समर्थन प्राप्त हो गया, तो ये कानून आ जायेंगे |
.
और कृपया अन्य नागरिकों को भी विज्ञापन, पर्चों आदि द्वारा बताएं कि वे भी अपने विधायक को इस प्रकार का एस.एम.एस भेजें |

=================================

प्रिय सांसद/विधायक,

अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है (न कि जिसने ये लेख लिखा है)

एस.एम.एस. भेजने वाला आपको लेख के `C` सैक्शन में कानून-ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निजी बिल आदि द्वारा बढ़ावा करने और मांग करने के लिए आदेश दे रहा है |

सैक्शन A. भूमिका

क्या हमें सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करना चाहिए ? नहीं । तो हमें कौनसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विरोध करना चाहिए, और क्यों ?

माइक्रोसोफ्ट, मोटोरोला, इंटेल तथा इन जैसी सैकड़ो कम्पनियां सही तरीके से संपत्तियों की रचना करती हैं, किन्तु कई भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ जिनमें कुछ भारतीय शीर्ष कम्पनियां भी शामिल हैं, बैंक, खनिज, इलेक्ट्रोनिक प्रिंट मिडिया आदि को कब्ज़े में लेने के एजेंडे पर कार्य करती हैं और व्यापार और समाज में अपना एकाधिकार जमाती हैं, जो कि भविष्य में देश की आर्थिक एवं सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुचाती हैं । ऐसी कम्पनियां देश में सम्पत्तियो की रचना नहीं बल्कि उनका हरण करती हैं ।

यहाँ तक कि अच्छी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भी संवेदनशील क्षेत्रो में व्यापार की अनुमति देना हमारी सुरक्षा व्यवस्था को गहरे संकट में डाल सकता है । उदाहरण के लिए, मान लीजिये कि हम एक अमेरिकी कंपनी जैसे नोर्टेल से संचार के औजार आयात करते हैं (विदेश से मंगवाते हैं) तथा इन आयातित औजारों में ये विदेशी कम्पनियाँ जिन रेडियो रिसीवर का प्रयोग करती हैं, उन्हें सिग्नल भेजकर निष्क्रिय किया जा सकता है | ऐसे भ्रष्ट, आयात किए गए औजारों का प्रयोग यदि हम करते हैं, तो अमेरिका से युद्ध के दौरान विदेशी कम्पनी सिर्फ एक बटन दबा कर हमारे पूरे संचार नेटवर्क को ठप कर सकती है, जिससे हमारी सेना गूंगी और बहरी हो जायेगी, यानी सेना में अंदरूनी संपर्क साधन समाप्त हो जायेगा और हमें युद्ध में हार का सामना करना पड़ेगा । इसीलिए उच्च तकनीक से सम्बंधित ऐसे औजार जिनसे कि हमारी सुरक्षा में कमी आ सकती है, हमें किसी भी प्रकार की विदेशी कम्पनी से मंगवाने से बचना चाहिए ।

भ्रष्ट लॉबियों (कंपनियों के समूह) द्वारा प्रायोजित और बिकाऊ मीडिया द्वारा प्रचारित `भारत में बनाओ (मेक इन इंडिया)` या तथाकथित (कहे जाने वाला) `पूर्ण स्वदेशी` वास्तव में केवल पुर्जों को विदेश से मंगवा कर उन्हें भारत में जोड़ना है | और अधिकतर बड़ी कम्पनियाँ अपनी फिटिंग की लाइन के लिए मशीन बहार से मंगवाती हैं | मतलब, हम अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए भ्रष्ट लॉबियों पर निर्भर हैं | इस निर्भरता का लाभ उठाकर ये भ्रष्ट लॉबियों उद्योगपतियों, नेता, मंत्रियों आदि को ब्लैक-मेल करके अपने लिए लाभदायक कानून आदि - अपना काम करवाती हैं | अपना कार्य करवाने के लिए भ्रष्ट लॉबियां `लड्डू या डंडा` का तरीका अपनाती हैं (मतलब - यदि उद्योगपति, नेता, मंत्री आदि भ्रष्ट लॉबियों के कहे अनुसार काम करेंगे तो उन्हें इनाम दिया जायेगा और यदि उद्योगपति आदि लॉबियों के कहे अनुसार नहीं कार्य करेंगे, तो उन्हें हानि होगी) |

अत: हमें ऐसी सरकारी आदेश (राजपत्र अधिसूचना) की आवश्यकता है, जो कि व्यापार के लिए उन अच्छी कंपनियों को व्यापार की अनुमति दे जो कि रोजगार, सम्पति तथा समृद्धि की रचना करती है, न कि उन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को जो कि एकाधिकार स्थापित करके राष्ट्रीय संपत्ति को हड़प लेती है । साथ ही हमें ऐसी अधिसूचना की भी आवश्यकता है, जो यह सुनिश्चित करे कि अच्छी कंपनियों से होने वाले सुरक्षा आदि को नुक्सान को भी कम किया जा सके ।

हमें भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण को कम करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए ?

इसके लिए जरुरी है कि हम अपनी उत्पादकता और तकनिकी कुशलता को बढ़ाएँ तथा यह भी सुनिश्चित करें कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के देश में बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सके ।

हमारी उत्पादकता और ताकत बढ़ाने के लिए हमें राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स द्वारा टैक्स संग्रह प्रभावशाली बनाना, आदि कानूनों की आवश्यकता है, जिससे हमारी न्याय व्यवस्था, पुलिस प्रशासन तथा राजनैतिकता क्षेत्र की कार्यकुशलता में वृद्धि हो । साथ ही हमें ऐसे कानूनों की भी आवश्यकता है जो कि भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारत में बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगा सके ।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि, यदि हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को खदेड़ देते हैं, किन्तु ऐसे कानूनों को लागू नहीं करते है जिनसे हमारी सैन्य शक्ति बढ़े, तो अमेरिकी सेना के आक्रमण का हम सामना नहीं कर पायेंगे और हार जायेंगे । क्योंकि यह तय बात है कि, यदि हम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश में व्यापार के नाम पर लूटने की खुली छूट नहीं देते है, तो हमें उनकी सेना का हमला झेलना पड़ेगा ।

उदाहरण के लिए, मान लीजिये कि हम भ्रष्ट कम्पनियों को कानून बना कर देश से बाहर निकाल देते है, किन्तु जब अपने देश की कंपनियों के व्यापार के हित के लिए अमेरिकी सेना हमला करेगी तो हम इन्हें किसी भी क़ानून द्वारा नही रोक सकेंगे । ऐसी परिस्थिति में देश को सिर्फ स्वदेशी हथियार और सेना की शक्ति ही बचा सकती है । यदि हमें स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन करना है तो हमें न्याय व्यवस्था और भ्रष्टाचार को सुधारने के लिए राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम जैसे कानूनों की आवश्यकता है | केवल वे ही कानून लाना जिनसे भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश के बहार निकाला जा सके हमारी सुरक्षा और स्वदेशी को बढ़ावा करने के लिए अपर्याप्त हैं |

स्वदेशी को बढ़ावा करने के लिए हमें कौनसे क़ानून चाहिए, इसके लिए आगे पढ़ें...

सैक्शन B. मुख्य मांग संक्षिप्त में

B1. नागरिक-प्रामाणिक, पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली (टी.सी.पी.)

बिकाऊ मीडिया और पाठ्य-पुस्तक माफिया (गिरोह) की तुलना में आम-नागरिकों की सीमित पहुँच -
आज, बिकाऊ मीडिया, पाठ्य-पुस्तक माफिया (गिरोह) का प्रयोग करके, भ्रष्ट लॉबियां झूठा या अधूरा समाचार फैलाती हैं और सच्चा समाचार दबा देती हैं और वो जानकारी जो आम-नागरिकों के लिए हितकारी और स्वदेशी को बढ़ावा करने के लिए हितकारी हो, उस जानकारी को दबा देती है | बिकाऊ मीडिया की पहुँच लाखों-करोड़ों में है, जो कि `मुंह-जबानी` से कहीं अधिक है और कुछ नागरिक, जो बिना किसी वास्ता के या बिना बिकाऊ मीडिया के मदद के, स्वदेशी की जानकारी फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके पहुँच से कहीं अधिक है | इस कारण से, स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए जानकारी अधिक नागरिकों तक नहीं फैल पाती |

एक सरल उपाय - नागरिक प्रामाणिक, पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली (टी.सी.पी.) एक आम-नागरिक का मीडिया है, जिसमें नागरिक के पास विकल्प है कि वो अपनी जानकारी एफिडेविट के रूप में नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करवा सके ताकि जनसमूह उस जानकारी को बिना लॉग-इन देख सके | इस वैकल्पिक प्रक्रिया से ये सुनिश्चित होगा कि गलत तत्वों द्वारा वेबसाईट पर जानकारी के साथ छेड़-छाड़ नहीं होगा,; छेड़-छाड़ का प्रयास करने वाले की पोल जनता में प्रमाण सहित खुल जायेगी |

ये प्रक्रिया, यदि लागू हो तो, आम-नागरिकों की पहुँच दूसरे नागरिकों तक और नेता तक बढ़ा देगी | इस नागरिक-प्रामाणिक जानकारी वाली नागरिक के मीडिया के कारण, बिकाऊ मीडिया का एकाधिकार समाप्त होगा और भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव कम होगा और मीडिया को मजबूर होकर बिकाऊ, झूठा समाचार के बदले सही, सच्चा समाचार डालना होगा या ऐसा नहीं करने पर अपना धंधा बंद करना होगा | इस सच्चे समाचार से प्रशासन और न्यायतंत्र का निकम्मापन कम होगा और फिर स्वदेशी इकाइयों की कार्य-क्षमता और प्रभावशालिता बढ़ेगी |

कृपया पारदर्शी-शिकायत प्रणाली का पूरा ड्राफ्ट नीचे सैक्शन C1 में देखें |

B.2 'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) `प्रस्तावित अधिनियम

प्रिय नागरिक,

'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) `अधिनियम स्वदेशी को बढ़ावा करने और विदेशी कंपनी-मालिकों के गलत एकाधिकार को कम करने के कोई भी सार्थक प्रयास करने से पहले आवश्यक है | उदहारण, मान लीजिए हम सभी को किसी "भारतीय" कंपनी के उत्पादों का प्रयोग करने के लिए कहते हैं | लेकिन क्या यदि वो साझा कोश (म्यूचुअल फंड) या विदेशी अप्रत्यक्ष निवेश या वचन-पत्र (=प्रोमिसरी नोट ; इन नोट की मालिकी के बारे में सेबी, जो शेयर की नियंत्रक सरकारी संस्था है, उसको भी पता नहीं है) द्वारा विदेशी कम्पनियाँ "भारतीय" कंपनी के शेयर के मालिक हों ? लेकिन एक बार `सम्पूर्ण भारतीय मालिकी वाली कंपनी` की श्रेणी कंपनी अधिनियम में जोड़ दिया जाये, तो नागरिक पता लगा सकता है कि कोई कंपनी भारतीय है या विदेशी क्यूंकि `सम्पूर्ण भारतीय` श्रेणी के शेयर-मालिकों का नाम इन्टरनेट पर सार्वजानिक करना आवश्यक होगा, ताकि सभी को उसका प्रमाण मिले |

कृपया 'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) `प्रस्तावित अधिनियम का पूरा ड्राफ्ट आगे सैक्शन C2 में देखें |

B3. कैसे राईट टू रिकॉल-प्रधानमंत्री, राईट टू रिकॉल-जज आदि से भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों का गलत एकाधिकार कम होगा

भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय / विदेशी कंपनियों को गरीब देशों में नेताओं को रिश्वत देकर सफलता मिलती है और/या बिकाऊ मीडिया - टी.वी. चैनल / समाचार-पत्रों का प्रयोग करके और उन नेताओं का बढ़ावा/विरोध करके, जिन्हें वे पसंद/नापसंद करते हैं, सफलता मिलती है | और उतना ही महत्वपूर्ण तरीका भ्रष्ट लॉबियां प्रयोग करती हैं कि वे उच्च पद के जजों के रिश्तेदारों को अपना कर्मचारी बनाती हैं और ऊँचा वेतन देती हैं | इन रिश्तेदार वकीलों के द्वारा, भ्रष्ट विदेशी कम्पनियाँ अपने लिए लाभदायक फैसला पाती हैं | नागरिकों को इसके बारे में, कभी न कभी तो पता चलता है, लेकिन कोई जनहित, नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया के अभाव में, नागरिक केवल चर्चा पर चर्चा ही कर सकते हैं, अफसरों को भ्रष्टाचार करने से नहीं रोक सकते | लेकिन, यदि नागरिकों के पास अपने प्रधानमंत्री, जज आदि को किसी भी दिन बदलने की प्रक्रिया हो तो फिर वे ये सब गलत कार्य थोड़े ही समय में रोक सकते हैं | कैसे ?

यदि ये बदलने की प्रक्रियाएँ (जो हटाने या बदलने की प्रक्रिया भी कहलाती हैं) लागू हों तो, और जैसे ही प्रधानमंत्री या कोई अफसर या जज कोई देश-विरोधी, भ्रष्ट विदेशी कंपनी के मालिक के हित में कोई कार्य करती हैं, तो उस अफसर या नेता के विरोधी जो उसको पद से हटाना चाहते हैं और स्वयं वो पद पाना चाहते हैं, वे विरोधी नागरिकों को जानकारी और प्रमाण देना शुरू कर देंगे | और इस प्रमाण को देख कर, नागरिक जिनको अपने साथ धोखा हुआ लगेगा, वे नागरिक भ्रष्ट अफसरों को बदल देंगे | और नौकरी जाने के डर से 99% अफसर अपना व्यवहार और काम सुधार देंगे और बाकी 1% अफसर जो अपना व्यवहार और कार्य नहीं सुधारते, तो आम-नागरिक उन अफसरों को अधिक अच्छे अफसरों से बदल देंगे |

कुल मिलकर, बदलने की प्रक्रियाएँ भ्रष्ट विदेशी कंपनियों को मंत्री, मुख्यमंत्री, लोकपाल आदि को रिश्वत या उपहार देकर अपना कार्य निकालने को कठिन बनाकर रोकती हैं |

इसके अलावा, बदलने की प्रक्रियाएँ प्रशासन और न्यायतंत्र में भ्रष्टाचार और अन्याय को कम करती हैं और इससे भारतीय कम्पनियाँ सशक्त होंगी |

कृपया ये प्रस्तावित `आम-नागरिकों द्वारा अफसरों को बदलने की प्रक्रियाओं` के पूरे ड्राफ्ट आगे सैक्शन C3, C4, C7 और C8 में देखें |

B4. कैसे जूरी सिस्टम भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों के गलत एकाधिकार को कम करेगा और स्वदेशी को बढ़ावा देगा

जूरी सिस्टम में जज के बदले क्रम-रहित (लॉटरी द्वारा) चुने गए 15 से 1500 नागरिक मामले का फैसला करते हैं और हर मामले के बाद नए लोग चुने जाते हैं | दोष और सजा की अवधि (समय) तय करने के लिये जज द्वारा कोर्ट मामले की जगह ज्यूरी द्वारा मुकदमा होना चाहिये क्यूंकि ज्यूरी सिस्टम में जज सिस्टम की तुलना में फैसला जल्दी और न्यायपूर्वक आता है (पूरा ड्राफ्ट आगे देखें) ।

जज सिस्टम में, केवल कुछ गिनती के जज ही सभी कोर्ट के फैसले करते हैं जबकि जूरी सिस्टम में फैसले करने वाले व्यक्ति 12-15 गुना अधिक नहीं बल्कि हजारों गुना अधिक होते हैं | कैसे ? जज सिस्टम में, मान लीजिए कि एक जज 30 वर्ष के लिए कार्य करता है और एक वर्ष में 100 मुकदमों का फैसला करता है ; यानी अपने पूरे कार्यकाल में एक जज लगभग 3000 मुकदमों का फैसला करता है | जूरी सिस्टम में इन मुकदमों का फैसला कुछ 36,000 लोग करेंगे | तो फैसला करने वाले व्यक्तियों की संख्या 36000 गुना बढ़ी, ना कि केवल 12 गुना !!

तो जज सिस्टम में, भ्रष्ट बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ होता है क्यूंकि उनको केवल कुछ सौ लोगों को ही रिश्वत देनी होती है या उन्हें संभालना होता है ( उन लोगों के रिश्तेदारों को वकील को अपना कर्मचारी बनाकर) | जूरी सिस्टम में, भ्रष्ट को जिन लोगों को रिश्वत देनी है, उनकी गिनती करोड़ों में जायेगी; इतने लोगों को संभाल पाने की संभावना लगभग शून्य है | इसीलिए, हम ये समाधान बताते हैं कि जज सिस्टम को समाप्त करके निचली अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी जूरी सिस्टम का प्रयोग करना चाहिए | जूरी सिस्टम यदि लागू है तो भ्रष्ट लॉबियों के लिए कोर्ट में रिश्वत या उपहार देकर अपना कार्य निकालना असंभव हो जायेगा | इसके अलावा, जूरी सिस्टम प्रशासन में अन्याय और भ्रष्टाचार को भी कम करेगा और इससे भी भारतीय कंपनियों को शक्ति मिलेगी |

कृपया जूरी सिस्टम का पूरा ड्राफ्ट नीचे सैक्शन C5 में देखें |

B5. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(FDI) विदेशी मुद्रा निवेश वापस विदेश भेजने के नियंत्रण (Repatriation Regulation) के लिए राजपत्र अधिसूचना ( प्रस्तावित )

भारतीय नागरिकों,

जब कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश करती है तो उसे व्यवसाय के लिए जमाराशि, शेयर, भूमि, श्रम आदि की आवश्यकता होती है ।

इन गतिविधियों को करने के लिए विदेशी कंपनी को भारतीय मुद्रा की आवश्यकता होती है, इसीलिए कोई विदेशी कम्पनी रिज़र्व बैंक ऑफ इण्डिया को डॉलर जमा करके उसी अनुपात में भारतीय मुद्रा अर्थात रुपया प्राप्त करती है ।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया दो शर्तो के साथ डॉलर जमा करके रूपये का भुगतान करता है :

1. विदेशी मुद्रा निवेश वापस विदेश ली जा सकती है (पुनर्भर्णिय) : इस व्यवस्था के तहत व्यक्ति रिजर्व बैंक ऑफ़ इण्डिया में रूपये जमा करके फिर से डॉलर की मांग कर सकता है ।

2. विदेशी मुद्रा निवेश वापस विदेश नहीं ली जा सकती है (अपुनर्भरणीय) : इस व्यवस्था में व्यक्ति रिजर्व बैंक ऑफ़ इण्डिया में रूपये जमा करके डॉलर की मांग नहीं कर सकता है ।

मौजूदा समय में संस्थागत विदेशी निवेश (FII) या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तहत कम्पनियों द्वारा विदेशी मुद्रा निवेश के सूद और ब्याज को विदेश वापस ले जाने (पुन:भरण) का विकल्प दिया गया है । किन्तु ऐसी स्थिति में जबकि हमारे पास डॉलर या विदेशी मुद्रा का पर्याप्त कोष नहीं है, विदेशी मुद्रा की यह कमी हमारे लिए कभी भी गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का कारण बन जायेगी | या हमें और कर्ज लेना पड़ेगा तथा हम विदेशी मुद्रा के क़र्ज़ के कुचक्र में लगातार डूबते जायेंगे ।

इसीलिए यह आवश्यक है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिये आने वाले विदेश मुद्रा निवेश को वापस विदेश नहीं लिया जा सके (अपुन:भरणीय) नियम के अंतर्गत ही स्वीकार किया जाए । इसलिए, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया या भारत सरकार को विदेशी कम्पनियों द्वारा दिए रुपयों के बदले में डॉलर के भुगतान का कोई वादा नहीं करना चाहिए, बल्कि यह निर्धारित करना चाहिए कि वे कम्पनियां विदेशी मुद्रा या डॉलर खुले बाजार से खरीदें ।

यह व्यवस्था लागू करने से भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी समय खड़े हो सकने वाले इस गंभीर संकट से बच जायेगी ।

इसके अलावा निजी व्यक्ति को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की अनुमति से विदेशी बेंको के खाते में डॉलर या विदेशी मुद्रा रखने की छूट दी जानी चाहिए । निर्यात (माल विदेश भेजना) से मिली विदेशी मुद्रा को वे विदेशी बेंक के खाते में रख सकेंगे, और यदि वे ये विदेशी मुद्रा रिज़र्व बैंक को देते हैं, तो उनके आयकर में छूट मिलेगी ।

कृपया पूरा ड्राफ्ट सैक्शन C6 में देखें |

C. स्वदेशी - 100% भारतियों द्वारा उत्पादन - को बढ़ाने के लिए ड्राफ्ट

C1. पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली

===== प्रस्तावित प्रक्रिया-ड्राफ्ट जो राजपत्र में छपवाना है, उसका आरम्भ =======

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

1.

[कलेक्टर (और उसके क्लर्क) के लिए निर्देश ]

कोई भी नागरिक मतदाता, यदि खुद हाजिर होकर, एफिडेविट पर अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी / भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद / कोई प्रस्ताव या कोई अन्य एफिडेविट कलेक्टर को देता है और प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर रखने की मांग करता है, तो कलेक्टर (या उसका क्लर्क) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर, सीरियल नंबर देकर, एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ, ताकि सभी बिना लॉग-इन के वे एफिडेविट देख सकें ।

2.

[पटवारी (तलाटी, लेखपाल)]

(2.1) कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, 3 रुपये का शुल्क (फीस) लेकर, तो पटवारी नागरिक का मतदाता कार्ड संख्या, नाम, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा ।
नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएगी । गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए शुल्क 1 रूपये होगा ।

(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है ।

(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |

(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |


3.

----------------

ये कोई रेफेरेनडम / जनमत-संग्रह नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, न्यायधीश, सांसद, विधायक, अदि पर अनिवार्य नहीं होगी । लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, कोई एक अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या इस्तीफा दे सकते हैं । उनका निर्णय अंतिम होगा ।

====== प्रस्तावित प्रक्रिया ड्राफ्ट जो राजपत्र में छापना है उसकी समाप्ति ==========

मांग किये गये इस टी.सी.पी - पारदर्शी शिकायत / प्रस्ताव सिस्टम सरकारी आदेश का सार है :-

1. यदि नागरिक चाहे, तो अपनी फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव 20 रूपये प्रति पेज देकर कलेक्टर की कचहरी जाकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री वेबसाइट पर स्कैन करवा सकेगा । इस शिकायत आदि को बिना लॉग-इन किये सभी आम नागरिक देख सकेगें |

2. यदि नागरिक चाहे तो 3 रुपये का शुल्क देकर धारा 1 में दी गई फरियाद / शिकायत / प्रस्‍ताव पर अपनी हाँ/ना प्रधानमंत्री वेबसाइट पर दर्ज करवा सकेगा । और उस नागरिक की हाँ / ना प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ दिखाई देगी | यह हाँ-ना दर्ज कराने की कीमत 3 रूपये से घटकर 10 पैसे हो जायेगी, जब यह प्रकिया एस.एम.एस. पर आ जायेगी | नागरिक अपना मत किसी भी दिन रद्द कर सकता है या बदल सकता है इस कारण ये प्रक्रिया ना तो पैसों द्वारा खरीदी जा सकती है, ना ही गुंडों या मीडिया द्वारा प्रभावित की जा सकती है |

3. हाँ / ना पधानमंत्री पर अनिवार्य नहीं है |

C2. 'सम्पूर्ण रूप से भारतीय नागरिको के स्वामित्व वाली कम्पनियों (WOIC) `अध्यादेश ड्राफ्ट

`पूरी तरह से भारतीय मालिक वाली कम्पनी (WOIC)` ऐसी कम्पनी है जिसके 100 प्रतिशत शेयर केवल भरतीय नागरिक या भारतीय सरकार या कोई अन्य `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कंपनी` के पास हों, मतलब उस कम्पनी के कोई भी शेयर विदेशियों के न हों | `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी` कंपनी कानून बनाने के लिए कुछ धाराएं कंपनी अधिनियम में जोड़ने होंगे |

===== `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कंपनी` अध्यादेश ड्राफ्ट जो कम्पनी अधिनियम में जोड़ना है, उसके ड्राफ्ट का आरम्भ =======

सैक्शन - `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (व्होल्ली ओन्ड बाय इंडियन सिटीजेंस = डब्‍ल्‍यू. ओ. आई. सी = WOIC)


1. कोई भी कंपनी अपने आप को `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी`(डब्ल्यू. ओ. आई. सी.) दर्ज करवा सकती है |

2. यदि कोई कम्‍पनी `सम्पूर्ण भारतीय (नागरिक) मालिकी वाली कंपनी (डब्ल्यू. ओ. आई. सी.)` है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के निवासी भारतीय नागरिक या दूसरे देश में अस्थायी निवासी भारतीय नागरिक, उस कंपनी के शेयर (हिस्‍सेदारी) खरीद सकते हैं । इसके अलावा, कोई भी दूसरी `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (डब्ल्यू. ओ. आई. सी.) या भारतीय सरकार उस कंपनी के शेयर खरीद सकती है, लेकिन कोई गैर-डब्ल्यू. ओ. आई. सी. या गैर-भारतीय नागरिक उस कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकते |

3. केवल भारतीय नागरिक `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` का निर्देशक, अध्यक्ष या भागीदार (पार्टनर) हो सकता है |

4. गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनियाँ` भारत में कोई भी भूमि खरीद नहीं सकती या भूमि को 10 साल से अधिक के लिए किराये पर नहीं ले सकती | गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` खदानें या कृषि भूमि को खरीद नहीं सकतीं या किराये पर नहीं ले सकतीं |

5. गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनियाँ` भारत में कोई भी निर्माण को खरीद नहीं सकती या कोई भी निर्माण को 10 वर्ष से अधिक किराये पर नहीं ले सकतीं |

6. कोई भी मंत्री या सरकारी कर्मचारी गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` में शेयर खरीद नहीं सकता |

7. यदि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` का कोई हिस्सेदार किसी दूसरे देश का नागरिक या स्थायी निवासी हो जाता है, तो उसे 3 महीनों में अपने शेयर बेच देने होंगे या रजिस्ट्रार उन शेयर को नीलाम करेगा और उसे शुल्क (प्रभार) कम करके नीलामी से मिले पैसे उस नागरिक को दे देगा |

8. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही भारत में पटेंट (एकस्व अधिकार) के लिए अर्जी दे सकती है |

9. भारतीय सरकार को दिए कोई भी टेंडर (ठेका बोली) में, गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा जमा की गयी राशि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा दी गयी राशि से 20% कम होगी, तो ही उस राशि को सम मूल्य (बराबर) माना जायेगा |

10. `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` को जमा किये गए कोई टेंडर में, गैर-`सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा दी गयी राशि `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` द्वारा 10 प्रतिशत कम हो, तो ही उस राशि को सम मूल्य (बराबर) माना जायेगा |

11. `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` हर महीने रजिस्ट्रार को कंपनी के मालिकी का सम्पूर्ण ब्यौरा (विस्तृत जानकारी ; विवरण) जमा करेगी |

12. हर मंत्री, सांसद, विधायक, अफसर, जज और हर सरकारी कर्मचारी घोषित करेगा कि उसके किस `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` में कितने शेयर हैं |

13. कोई भी बैंक वाली कम्पनी या कोई वित्तीय कम्पनी जो भारत में भारत के नागरिकों से जमा राशि लेती है, वो कंपनी `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` होनी चाहिए |

14. बैंक केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` को कर्ज (लोन) देंगे |

15. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही टेलिकॉम, सेटेलाईट और अन्‍य रणनीतिक (लड़ाई सम्बन्धी) क्षेत्र में आ सकती है |

16. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही कच्‍चे तेल की खुदाई या कोई अन्य प्रकार के खनिजों की खुदाई के क्षेत्र में आ सकती है ।

17. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही खाने पीने के चीजें, जो दवा ना हों ( गैर-औषधीय खाद्यान्‍न) बना सकती है या "शून्य-तकनीक" क्षेत्र में काम कर सकती है |

18. केवल `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` ही बैंडविड्थ खरीद सकती है और समाचार-पत्र, समाचार-चैनल चला सकते हैं |

19. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक ऐफिडेविट/हलफनामा जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर नागरिक के एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

20. [तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी डाल देगा ।

====== `सम्पूर्ण भारतीय नागरिक मालिकी वाली कम्पनी` (डब्‍ल्‍यू. ओ. आई. सी.)` ड्राफ्ट का अंत =========

C3. राईट टू रिकॉल-प्रधानमंत्री ड्राफ्ट

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-प्रधानमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट का आरम्भ =====

1. [सामान्य जानकारी]

नागरिक शब्‍द का मतलब रजिस्टर्ड वोटर/मतदाता है।

2. [जिला कलक्टर के लिए निर्देश]

30 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक जो प्रधानमंत्री बनना चाहता हो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय जा सकता है। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर उसे एक सीरियल नम्‍बर जारी करेगा और उस उम्मीदवार का नाम प्रधानमंत्री वेबसाईट पर रखेगा ।

3. [तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क)]

भारत का कोई भी नागरिक तलाटी / पटवारी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को प्रधानमंत्री के पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। तलाटी उसके अनुमोदन/स्वीकृति को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र, दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा। (गरीबी रेखा से नीचे) बी पी एल कार्डधारकों के लिए शुल्‍क/फीस 1 रूपया होगी। यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन/स्वीकृति रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए बदल देगा।

4. [तलाटी के लिए निर्देश]

वह तलाटी नागरिकों की पसंद/प्राथमिकता को प्रधानमन्त्री के वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा।

5. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]

प्रत्‍येक सोमवार को हर जिला का कलेक्टर हरेक उम्‍मीदवार की अनुमोदन/स्वीकृति-गिनती को प्रकाशित करेगा। .

6. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

आज का प्रधानमंत्री अपनी अनुमोदन/स्वीकृति–गिनती को निम्‍नलिखित दो से उच्चतर मान सकता है –

  • नागरिकों की संख्‍या, जिन्‍होंने उसका अनुमोदन/स्वीकृति किया है
  • प्रधानमंत्री का समर्थन करने वाले लोकसभा के सांसदों द्वारा प्राप्‍त किए गए कुल मतों का योग

7. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

यदि किसी व्‍यक्‍ति को मौजूदा प्रधानमंत्री के मुकाबले 2 प्रतिशत ज्‍यादा अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त है तो वर्तमान प्रधानमंत्री इस्‍तीफा दे सकता है और सांसदों से कह सकता है कि वे सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया प्रधानमंत्री नियुक्‍त कर दें।

8. [लोकसभा के सांसद के लिए निर्देश]

सांसदगण धारा 7 में उल्‍लिखित व्‍यक्‍ति/सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया प्रधानमंत्री नियुक्‍त कर सकते हैं ।

सैक्शन- सी.वी. (जनता की आवाज़)

9. सी वी – 1 [जिला कलेक्‍टर के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी/डी सी के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन उसको कोई भी देख सके ।

10. सी वी – 2 [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह ऊपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट पर हां – नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देगा । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद/पावती देगा। यह हां – नहीं प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाला जाएगा।


===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-प्रधानमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट समाप्त =====

C4. राइट-टू-रिकॉल – जिले का प्रधान जज का कानून-ड्राफ्ट

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया/अनुदेश

1. `नागरिक` शब्द का अर्थ जिले का पंजीकृत मतदाता होगा |

2. [कलेक्टर के लिए निर्देश] यदि भारत का कोई नागरिक जो 35 साल से अधिक हो और जिसके पास एल.एल.बी की शैक्षिक उपाधि हो और जिले का प्रधान जज बनना चाहता है, तो वो स्वयं या उसके वकील द्वारा एफिडेविट के साथ जिला कमिश्नर (या उसके द्वारा नियुक्त अफसर) के समक्ष आये, तो जिला कमिश्नर (या उसके द्वारा नियुक्त अफसर) सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर, उसकी जिले का प्रधान जज उम्मीदवार बनने की अर्जी को स्वीकार करेगा | जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क उम्मीदवारों के नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रखेगा |

3. [तलाटी या तलाटी के क्लर्क के लिए निर्देश] यदि उस जिले का नागरिक तलाटी/ पटवारी के कार्यालय में स्‍वयं जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को जिला सरकारी वकील के पद के लिए अनुमोदित करता है तो तलाटी उसके अनुमोदन को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसका मतदाता पहचान-पत्र, दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा ।

4. [तलाटी के लिए निर्देश] वह तलाटी नागरिकों की पसंद को जिले के वेबसाइट पर उनके मतदाता पहचान-पत्र और उनकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा ।

5. [तलाटी के लिए निर्देश] यदि कोई नागरिक अपनी स्वीकृति रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा ।

6. [कलेक्टर के लिए निर्देश] प्रत्‍येक महीने की पांचवी तारीख को जिला कलेक्टर प्रत्‍येक उम्‍मीदवार की अनुमोदन/स्वीकृति-गिनती पिछले महीने की अंतिम तिथि की स्‍थिति के अनुसार प्रकाशित करेगा ।

7. [हाई कोर्ट प्रधान जजों के लिए निर्देश] यदि किसी उम्मीदवार को जिले के सभी मतदाताओं के 35% से अधिक अनुमोदन मिलते हैं (सभी, न कि केवल जिन्होंने अपने अनुमोदन दिए हैं), और वे अनुमोदन वर्तमान जिला प्रधान जज के अनुमोदनों से जिले के मतदाता संख्या के 5% से अधिक है, तो हाई कोर्ट के प्रधान जज उसे जिले का प्रधान जज नियुक्त कर सकते हैं |

8. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश] जब तक जिला सरकारी वकील के पास जिले के 34% से अधिक मतदातों का अनुमोदन है, मुख्यमंत्री उसको बदलेगा नहीं | लेकिन यदि जिला सरकारी वकील के अनुमोदन 34% से कम हो जाते हैं, तो मुख्यमंत्री उसको अपने पसंद के अफसर से बदल देगा |

9. (जिले के प्रधान जज के लिए निर्देश) जिले का प्रधान जज, हाई कोर्ट के प्रधान जज की स्वीकृति से या पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली का उपयोग करके उस राज्य के नागरिकों की स्वीकृति से, अपने प्रस्तावित जूरी सिस्टम के ड्राफ्ट को लागू करने का निर्णय कर सकता है |

10. जनता की आवाज़ (सी वी ) 1

[जिला कलेक्टर (डी सी)]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक एफिडेविट जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पेज का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

11. जनता की आवाज़ (सी वी ) 2

[तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी डाल देगा ।

C5. निचले कोर्ट में जूरी सिस्टम का प्रक्रिया-ड्राफ्ट


निचले कोर्ट में जूरी सिस्टम लाने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित ड्राफ्ट की आवश्यकता होगी | ये राजपत्र तभी लागू हो सकता है जब इसपर प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होंगे | इसको लाने के लिए नागरिकों को अपने सांसदों या विधायकों को एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा आदेश देना चाहिए कि वे इस निम्नलिखित ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निज बिल द्वारा बढ़ावा और मांग करें और सांसद प्रधानमंत्री को आदेश करें और विधायक मुख्यमंत्री को आदेश करें कि इस ड्राफ्ट को भारतीय राजपत्र में छापें -

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

सैक्शन – 1 : जूरी प्रशासक की नियुक्‍ति और उन्‍हें बदलने की प्रक्रिया

1.

[मुख्‍यमंत्री ; जिला कलेक्टर]

इस कानून के पारित/पास किए जाने के 2 दिनों के भीतर, सभी मुख्‍यमंत्री अपने-अपने पूरे राज्‍य के लिए एक रजिस्‍ट्रार की नियुक्‍ति करेंगे और हर जिले के लिए एक जूरी प्रशासक की भी नियुक्‍ति करेंगे कोई भी भारत का नागरिक जो 30 साल या अधिक का हो, जिला कलेक्टर के दफ्तर में जा कर, सांसद के जितना शुल्क जमा कर के अपने को जूरी प्रशाशक के लिए प्रत्याशी दर्ज करा सकता है और जिला कलेक्टर प्रत्याशी का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डालेगा |

2.

[तलाटी = पटवारी = लेखपाल (या तलाटी का क्लर्क) ]

किसी जिले में रहने वाला कोई नागरिक अपना मतदाता पहचान-पत्र प्रस्‍तुत करके अपने जिले में जूरी प्रशासक के पद के लिए (ज्‍यादा से ज्‍यादा) पांच उम्‍मीदवारों के क्रमांक नंबर बताएगा जिन्हें वो अनुमोदन/स्वीकृति करता है । क्‍लर्क उनके अनुमोदनों को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ कंप्यूटर और मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डाल देगा और उस नागरिक को रसीद दे देगा। नागरिक अपनी पसंदों को किसी भी दिन बदल सकता है। क्‍लर्क तीन रूपए का शुल्‍क लेगा ।

3.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि किसी उम्‍मीदवार को सबसे अधिक नागरिक-मतदाताओं द्वारा और जिले के सभी नागरिक-मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर उस जिले के नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे। यदि किसी उम्‍मीदवार को सभी नागरिक-मतदाताओं के 25 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है और उसके अनुमोदनों की गिनती वर्तमान जूरी प्रशासक की गिनती से 5 प्रतिशत अधिक हो तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे ।

4.

[मुख्‍यमंत्री]

उस राज्य में सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से ज्‍यादा मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, मुख्‍यमंत्री क्‍लॉज/खण्‍ड 2 और क्‍लॉज/खण्‍ड 3 को रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

5.

[प्रधानमंत्री]

भारत के सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, प्रधानमंत्री क्‍लॉज/खण्‍ड 2, क्‍लॉज/खण्‍ड 3 और ऊपर लिखित क्‍लॉज/खण्‍ड 4 को पूरे राज्‍य के लिए या कुछ जिलों के लिए रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

सैक्शन – 2 : महा-जूरीमंडल का गठन

6.

[जूरी प्रशासक]

मतदाता-सूची का उपयोग करके, जूरी प्रशासक किसी आम बैठक में, क्रमरहित तरीके से / रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 40 नागरिकों का चयन महा-जूरीमंडल के सदस्‍य के रूप में करेगा, जिसमें से वह साक्षात्‍कार के बाद किन्‍हीं 10 नागरिकों को उस सूची से हटा देगा और शेष 30 लोग/नागरिक महा-जूरीमंडल के सदस्य होंगे। यदि जूरीमंडल की नियुक्‍ति मुख्‍यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री द्वारा क्‍लॉज/खण्‍ड 4 अथवा क्‍लॉज/खण्‍ड 5 के तहत की गई है तो वे 60 नागरिकों तक को चुन सकते हैं और उनमें से तीस तक को हटाकर महा-जूरीमंडल बना सकते हैं ।

(स्पष्टीकरण-
ये पूर्व चयनित महा-जूरी के लिए नागरिकों की संख्या बढाने का आशय मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री, जो राज्य और राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं, उनके अधिकार बढ़ाने के लिए है स्थानीय लोगों के बनिस्पत)

7.

[जूरी प्रशासक]

महा-जूरीमंडल के पहले समूह (सेट) में से, जूरी प्रशासक हर 10 दिनों में महा-जूरीमंडल के किन्‍हीं 10 सदस्‍यों को सेवा-निवृत्ति दे देगा/रिटायर कर देगा और क्रमरहित तरीके से/रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 10 नागरिकों का चयन कर लेगा ।

8.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक किसी यांत्रिक उपकरण का प्रयोग नहीं करेगा किसी संख्‍या को क्रमरहित तरीके से/रैण्‍डमली चुनने के लिए। वह मुख्‍यमंत्री द्वारा विस्‍तार से बताए गए तरीके से प्रक्रिया का प्रयोग करेगा। यदि मुख्‍यमंत्री ने किसी विशिष्‍ठ/खास प्रक्रिया के बारे में नहीं बताया तो वह निम्‍नलिखित तरीके से चयन करेगा। मान लीजिए, जूरी प्रशासक को 1 और चार अंकों वाली किसी संख्‍या `क ख ग घ“ के बीच की कोई संख्‍या चुननी है।

तब जूरी प्रशासक को हर अंक के लिए चार दौर/राउन्‍ड में डायस/गोटी/पांसा फेंकनी होगी। किसी राउन्‍ड में यदि अंक, 0-5 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह केवल एक ही डायस का प्रयोग करेगा और यदि अंक, 0-9 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह दो डायसों का प्रयोग करेगा। चुनी गई संख्‍या उस संख्‍या से 1 कम होगी जो एक अकेले डायस के फेंके जाने पर आएगी और दो डायसों के फेंके जाने की स्थिति में यह 2 कम होगी। यदि डायसों/गोटियों के फेंके जाने से आयी संख्या उसके जरूरत की सबसे बड़ी संख्‍या से बड़ी है तो वह डायस को दोबारा/फिर से फेंकेगा— उदाहरण – मान लीजिए, जूरी प्रशासक को किसी किताब में से एक पृष्‍ठ/पेज का चुनाव करना है जिस किताब में 3693 पृष्‍ठ हैं। वह जूरी प्रशासक चार राउन्‍ड चलेगा। पहले दौर/राउन्‍ड में वह एक ही पांसा का प्रयोग करेगा क्‍योंकि उसे 0-3 के बीच की एक संख्‍या का चयन करना है।

यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता है तो वह पांसा फिर से/ दोबारा फेंकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी गई संख्‍या 3-1 = 2 होगी और वह जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जाएगा। दूसरे दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्‍या चुनने की जरूरत होगी। इसलिए वह दो पांसे फेंकेगा। यदि उनका योग 8 से अधिक हो जाता है तो वह दोबारा डायसों/पांसों को फेंकेगा। यदि योग/ जोड़ मान लीजिए, 6 आता है तो चुनी गई दूसरी संख्‍या 6-2 = 4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिए, चार दौरों/राउन्‍ड्स में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है तो जूरी प्रशासक (3-1), (5-2), (10-2) और (2-1) अर्थात पृष्‍ठ संख्‍या 2381 चुनेगा। जूरी प्रशासक को चाहिए कि वह अलग-अलग नागरिकों को पांसा फेंकने के लिए दे। मान लीजिए, मतदाता-सूची में ख किताबें हैं, और सबसे बड़ी किताब में पृष्‍ठों/पेजों की संख्‍या `प` है और सभी पृष्‍ठों में प्रविष्‍ठियों (एंट्री) की संख्‍या `त` है तो उपर उल्‍लिखित तरीके या मुख्‍यमंत्री द्वारा बताए गए तरीके का प्रयोग करके जूरी प्रशासक 1-ख, 1-प और 1-त के बीच की तीन संख्‍याओं को क्रमरहित/रैंडम तरीके से चुनेगा। अब मान लीजिए, चुनी गई किताब में उतने अधिक पृष्‍ठ नहीं हैं अथवा चुने गए पृष्‍ठ में बहुत ही कम प्रविष्‍टियां (एंट्री) हैं। तो वह 1-ख, 1-प और 1-त के बीच एक संख्‍या फिर से चुनेगा ।

9.

[जूरी प्रशासक]

महा–जूरीमंडल प्रत्‍येक शनिवार और रविवार को मिला करेंगे/बैठक करेंगे। यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य अनुमोदन/स्वीकृति करें तो वे अन्‍य दिनों में भी मिल सकते हैं। यह संख्‍या “15 से ज्‍यादा” उस स्‍थिति में भी होनी चाहिए जब महा-जूरीमंडल के 30 से भी कम सदस्‍य मौजूद हों। यदि बैठक होती है तो यह 11 बजे सुबह अवश्‍य शुरू हो जानी चाहिए और कम से कम 5 बजे शाम तक चलनी चाहिए। महा-जूरीमंडल के सदस्‍य जिस दिन बैठक में उपस्‍थति रहेंगे, उस दिन उन्‍हें 200 रूपए प्रति दिन की दर से वेतन मिलेगा। महा-जूरीमंडल का एक सदस्‍य एक महीने के अपने कार्यकाल में अधिकतम 2000 रूपए वेतन पा सकता है।

जूरी प्रशासक महा-जूरीमंडल के किसी सदस्‍य के कार्यकाल/अवधि पूरी कर लेने के 2 महीने के बाद उसे चेक जारी करेगा(स्पष्टीकरण-आंकने के लिए समय देने के लिए इतना समय की जरुरत है) । यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य जिले से बाहर जाता है तो उसे वहां रहने का हर दिन 400 रूपए की दर से पैसा मिलेगा और यदि वह राज्‍य से बाहर जाता है तो उसे वहां ठहरने के 800 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलेगा। इसके अतिरिक्‍त, उन्‍हें अपने घर और कोर्ट/न्‍यायालय के बीच की दूरी का 5 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से पैसा मिलेगा ।

मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री मुद्रास्‍फीति/महंगाई की दर के अनुसार क्षतिपूर्ति (मुआवजा) की रकम में परिवर्तन कर सकते हैं। सभी रकम इस कानून में जनवरी, 2008 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए `थोक मूल्य सूचकांक` के अनुसार हैं। और जूरी प्रशासक नवीनतम थोक मूल्य सूचकांक का प्रयोग करके प्रत्‍येक छह महीनों में धनराशि को बदल सकता है ।

10.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य किसी बैठक से अनुपस्‍थित रहता है तो उसे उस दिन का 100 रूपया नहीं मिलेगा और उसे अपनी भुगतान की जाने वाली राशि से तिगुनी राशि की हानि भी हो सकती है। जो व्‍यक्‍ति 30 दिनों के बाद महा-जूरीमंडल के सदस्‍य होंगे, वे ही अर्थदण्‍ड/जुर्माने के संबंध में निर्णय लेंगे ।

11.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक बैठक 11 बजे सुबह शुरू कर देगा। जूरी प्रशासक (बैठक के) कमरे में सुबह 10.30 बजे से पहले आ जाएगा। यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य सुबह 10.30 बजे से पहले आने में असफल रहता है तो जूरी प्रशासक उसे बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं देगा और उसकी अनुपस्‍थिति दर्ज कर देगा ।

सैक्शन – 3 : किसी नागरिक पर आरोप तय करना

12.

[जूरी प्रशासक]

कोई व्‍यक्‍ति, चाहे वह निजी/आम आदमी हो चाहे जिला दण्‍डाधिकारी/प्रोजिक्‍यूटर, यदि वह किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति के खिलाफ कोई शिकायत करना चाहता है तो वह महा-जूरीमंडल के सभी सदस्‍यों या कुछ सदस्‍यों को शिकायती पत्र लिखेगा। शिकायतकर्ता से उसे यह भी अवश्‍य बताना होगा कि वह क्‍या समाधान चाहता है। ये समाधान इस प्रकार के हो सकते हैं –

    किसी सम्‍पत्ति पर कब्‍जा/स्‍वामित्‍व प्राप्‍त करना
    आरोपी व्‍यक्‍ति से आर्थिक क्षतिपूर्ति या मुआवजा प्राप्‍त करना
    आरोपी व्यक्‍ति को कुछ महीने/साल के लिए कैद की सजा दिलवाना

13.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य किसी बैठक में आने के लिए बुलावा भेजते हैं तो वह नागरिक उपस्‍थित होगा। महा-जूरीमंडल आरोपी और शिकायतकर्ता को बुला भी सकते हैं या नहीं भी बुला सकते हैं ।

14.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्‍य यह स्‍पष्‍ट कर देते हैं कि शिकायत में कुछ दम/मेरिट है तो जूरी प्रशासक शिकायत की जांच कराने के लिए एक जूरी बुलाएगा जिसमें उस जिले के 12 नागरिक होंगे। जूरी प्रशासक 12 से अधिक नागरिकों का क्रमरहित/रैंडम तरीके से चयन करेगा (खंड-8 में महा-जूरीमंडल के चुनाव के सामान ही जूरीमंडल का चयन होगा) और उन्‍हें बुलावा भेजेगा। आनेवालों में से जूरी प्रशासक क्रमरहित तरीके से 12 लोगों का चयन कर लेगा।

[मान लीजिए एक जिले में सौ मामले दर्ज हुए हैं | तो कोई 3000 या अधिक लोगों को बुलावा भेजा जायेगा जब तक उनमें से 2600 लोग न आ जायें ,क्योंकि उनमें कुछ मर गए होंगे, कुछ शहर से बहार गए होंगे | ये 2600 लोग क्रमरहित तरीके से 26-26 के 100 समूहों में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे , एक मामले के लिए एक समूह | दोंनो पक्ष के वकील उन 26 लोगों में से हरेक व्यक्ति को 20 मिनट इंटरव्यू/साक्षात्कार लेगा और हर पक्ष का वकील 4 लोगों को बाहर निकाल देगा(इस तरह किसी भी पक्ष को पूर्वाग्र/पक्षपात का बहाना नहीं मिलेगा ) | इस तरह 18 लोगों का जूरी-मंडल होगा जो 12 मुख्य जूरी सदस्य और 6 विकल्प जूरी सदस्य में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे |]

15.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक मुख्‍य जिला प्रशासक से कहेगा कि वह मुकदमे की अध्‍यक्षता करने के लिए एक या एक से अधिक जजों की नियुक्‍ति कर दे। यदि विवादित संपत्‍ति का मूल्‍य लगभग 25 लाख से अधिक है अथवा दावा किए गए मुआवजे की राशि 1,00,000 (एक लाख) रूपए से अधिक है अथवा अधिकतम कारावास का दण्‍ड 12 महीने से अधिक है तो जूरी प्रशासक 24 जूरी-मंडल सदस्य का चुनाव करेगा और उस मुकदमे के लिए मुख्‍य जज से 3 जजों की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा , नहीं तो वह मुख्‍य जज से 1 जजों की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा। विवादित संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ से अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य और 5 जज होंगे |

यदि मुलजिम के खिलाफ 10 से कम मामले हैं तो, जूरी-सदस्य 12, 10-25 मामले हों तो 24 जूरी सदस्य चुने जाएँगे और 25 से अधिक मामले होने पर 50-100 जी सदस्य होंगे| यदि मुलजिम श्रेणी 4 का अफसर है तो 12 जूरी सदस्य, श्रेणी 2 या 3 का होगा तो , 24 जूरी सदस्य होंगे और श्रेणी 4 या अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे | इस मामले में नियुक्‍त किए जाने वाले जजों की संख्‍या के संबंध में मुख्‍य न्यायाधीश का फैसला ही अंतिम होगा |

सैक्शन – 4 : सुनवाई/फैसला आयोजित करना

16.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

सुनवाई 11 बजे सुबह से लेकर 4 बजे शाम तक चलेगी। सभी 12 जूरी-मंडल (जूरी समूह) और शिकायतकर्ता के आ जाने के बाद ही सुनवाई शुरू की जाएगी । यदि कोई पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है तो जो पक्ष उपस्‍थित है उसे 3 से 4 बजे शाम तक इंतजार करना होगा और तभी वे घर जा सकते हैं । यदि तीन दिन बिना कारण दिए, कोई पक्ष उपस्थित नहीं होता, तो उपस्थित पक्ष अपनी दलीलें देगा और जूरी तीन दिन और इंतजार करेगी, अनुपस्थित पक्ष को बुलावा देने के पश्चात | यदि फिर भी अनुपस्थित पक्ष बिना कारण दिए नहीं आती, तो जूरी अपना फैसला सुनाएगी |

17.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

यह जज शिकायतकर्ता को 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य बीच में नहीं बोलेगा । वह जज प्रतिवादी (वह जिसपर मुकदम्मा चलाया जा रहा है) को भी 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य व्‍यक्‍ति बोलने में बाधा/व्‍यावधान पैदा नहीं करेगा। इसी तरह, बारी-बारी से दोनों पक्षों को बोलने देगा | मुकदमा हर दिन इसी प्रकार चलता रहेगा ।

18.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

मुकद्दमा कम से कम 2 दिनों तक चलेगा। तीसरे दिन या उसके बाद यदि 7 से अधिक जूरी सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि उन्‍होंने काफी सुन लिया है तो वह मुकदमा एक और दिन चलेगा। यदि अगले दिन 12 जूरी सदस्‍यों में से 7 से ज्‍यादा सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि वे और दलीलें सुनना चाहेंगे तो यह मुकदमा तब तक चलता रहेगा जब तक 7 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍य यह नहीं कह देते कि (अब) मुकदमा समाप्‍त किया जाना चाहिए ।

19.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

अंतिम दिन जब दोनों पक्ष/पार्टी अपना-अपना पक्ष/दलील 1 घंटे प्रस्‍तुत कर देंगे तो जूरी-मंडल (जूरी समूह) कम से कम 2 घंटे तक विचार-विमर्श करेंगे। यदि 2 घंटे के बाद 7 से ज्‍यादा जूरी-मंडल (जूरी समूह) कहते हैं कि और विचार-विमर्श की जरूरत नहीं है तो जज (जूरी-मंडल के) प्रत्येक सदस्‍य से अपना-अपना फैसला बताने/घोषित करने के लिए कहेगा ।

20.

[महा-जूरीमंडल]

यदि कोई जूरी सदस्‍य अथवा कोई एक पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है या देर से उपस्‍थित होता है तो महा-जूरीमंडल 3 महीने के बाद दण्‍ड/जुर्माने पर फैसला करेंगे जो अधिकतम 5000 रूपए अथवा अनुपस्‍थित व्‍यक्‍ति की सम्‍पत्ति का 5 प्रतिशत, जो भी ज्‍यादा हो, तक हो सकता है ।

21.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

जुर्माने/अर्थदण्‍ड के मामले में, हर जूरी सदस्‍य दण्‍ड की वह राशि बताएगा जो वह उपयुक्‍त समझता है। और यह कानूनी सीमा से कम ही होनी चाहिए। यदि यह कानूनी सीमा से ज्‍यादा है तो जज उस राशि या दंड को कानूनी सीमा जितनी ही मानेगा। वह जज दण्‍ड की राशियों को बढ़ते क्रम में सजाएगा और चौथी सबसे छोटी दण्‍डराशि को चुनेगा अर्थात उस राशि को जूरी मंडल द्वारा सामूहिक रूप से लगाया गया जुर्माना/दण्‍ड माना जाएगा जो 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से ज्‍यादा सदस्‍यों ने (उतना या उससे अधिक) अनुमोदित किया हो |

उदहारण - जैसे जूरी-मंडल द्वारा लगायी हुई दण्ड-राशि यदि बदते क्रम में 400,400,500,600,700,700,800,1000,1000,1200,1200 रुपये हैं तो चौथी सबसे छोटी दण्ड-राशि 600 है और बाकी 8 जूरी-मंडल के लोगों ने इससे अधिक दण्ड-राशि का अनुमोदन/स्वीकृति किया है |

22.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

कारावास की सजा के मामले में जज, जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी गई सजा की अवधि को बढ़ते क्रम में सजाएगा जो उस कानून में उल्‍लिखित सजा से कम होगा, जिस कानून को तोड़ने का वह आरोपी है। और जज चौथी सबसे छोटी सजा-अवधि को चुनेगा यानि कारावास की वह सजा जो 12 जूरी-मंडल में से 8 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍यों द्वारा अनुमोदित हो को `कारावास की सजा जूरी-मंडल द्वारा मिलकर तय किया गया` घोषित करेगा ।

सैक्शन – 5 : निर्णय/फैसला,(फैसले का) अमल और अपील

23.

[जिला पुलिस प्रमुख]

जिला पुलिस प्रमुख या उसके द्वारा बताया गया पुलिसवाला, जुर्माना अथवा कारावास की सजा जो जज द्वारा सुनाई गई है और जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी की गई है, पर अमल करेगा/करवाएगा ।

24.

[जिला पुलिस प्रमुख]

यदि 4 या इससे अधिक जूरी सदस्‍य किसी कुर्की/जब्ती अथवा जुर्माने अथवा कारावास की सजा की मांग नहीं करते तो जज आरोपी को निर्दोष घोषित कर देगा और जिला पुलिस प्रमुख उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा ।

25.

[आरोपी, शिकायतकर्ता]

दोनो ही पक्षों को राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालय अथवा भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय होगा ।

सैक्शन – 6 : नागरिकों के मौलिक / बुनियादी (मूल/प्रमुख) अधिकारों की रक्षा

26.

[सभी सरकारी कर्मचारी]

निचली अदालतों के 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से अधिक की सहमति के बिना किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा तब तक कोई अर्थदण्‍ड अथवा कारावास की सजा नहीं दी जाएगी जब तक कि हाई-कोर्ट अथवा सुप्रीम-कोर्ट के जूरी-मंडल (जूरी समूह) इसका अनुमोदन/स्वीकृति नहीं कर देते। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी नागरिक को जिला अथवा राज्‍य के महा-जूरीमंडल के 30 में से 15 से ज्‍यादा सदस्‍यों की अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक से लिए जेल में नहीं डालेगा ।

27.

[सभी के लिए]

जूरी सदस्‍य तथ्‍यों के साथ-साथ इरादे/मंशा के बारे में भी निर्णय करेंगे और कानूनों के साथ-साथ संविधान का भी मतलब निकालेंगे ।

28.



यह सरकारी अधिसूचना (सरकारी आदेश) तभी लागू/प्रभावी होगी जब भारत के सभी नागरिकों में से 51 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इस पर हां दर्ज किया हो और उच्‍चतम न्‍यायालय के सभी न्‍यायाधीशों ने इस सरकारी अधिसूचना (आदेश) का अनुमोदन/स्वीकृति कर दिया हो ।

29.

[जिला कलेक्‍टर]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन/बदलाव का प्रस्‍ताव करता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क से परिवर्तन की मांग करते हुए एक एफिडेविट जमा करवा सकता है। नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क इसे 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के पढ़ सके ।

30.

[तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इस कानून के किसी क्‍लॉज/धारा पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है अथवा उपर्युक्‍त क्‍लॉज/खण्‍ड के बारे में दायर किए गए ऐफिडेविट पर कोई समर्थन दर्ज कराना चाहता है तो वह पटवारी के कार्यालय में 3 रूपए का शुल्‍क जमा करके अपना हां/नहीं दर्ज कर सकता है। पटवारी नागरिकों के हां/नहीं को लिख लेगा और नागरिकों के हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डाल देगा ।

C6. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(FDI) विदेशी मुद्रा निवेश वापस विदेश भेजने के नियंत्रण (Repatriation Regulation) के लिए राजपत्र अधिसूचना ( प्रस्तावित )

ड्राफ्ट का प्रारम्भ :


[1] जिला कलेक्टर के लिए निर्देश :
यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में बदलाव चाहता है, तो वह मनचाहा बदलाव के लिए एक एफिडेविट जिला कलेक्टर कार्यालय में दे सकेगा । इस एफिडेविट को जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क प्रति पेज 20 रू शुल्क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्राधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ।

[2] पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश :
यदि कोई नागरिक मतदाता धारा 1 के अनुसार दर्ज एफिडेविट पर या उसमें लिखित किसी धारा में बदलाव के लिए हां/ना दर्ज कराता है, तो पटवारी ऐसी राय को 3 रू लेकर दर्ज करेगा तथा इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल देगा ।

[3] हाँ या ना की संख्या के आधार पर प्रधानमन्त्री/मुख्यमंत्री फैसला लेने के लिए बाध्य नही होंगे ।

[4] परिभाषाएं

इस अधिनियम में 'कंपनी' शब्द किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय कंपनी या कोई भारतीय गैर सरकारी संस्था जैसे ट्रस्ट आदि या कोई विदेशी नागरिक या विदेशी कंपनी या विदेशी सरकार या विदेशी गैर सरकारी संस्था जैसे कि कोई विदेशी ट्रस्ट आदि के लिए प्रयोग किया गया है ।

इस अधिनियम में 'भारतीय कंपनी' शब्द किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय कंपनी या भारतीय गैर सरकारी संस्था जैसे ट्रस्ट आदि के लिए प्रयोग किया गया है ।

इस अधिनियम में 'विदेशी कंपनी' शब्द किसी भी विदेशी नागरिक या विदेशी कंपनी या विदेशी सरकार या विदेशी गैर सरकारी संस्था जैसे कोई ट्रस्ट आदि के लिए प्रयोग किया गया है ।

[5] सभी के लिए निर्देश :

भारतीय कम्पनियाँ व भारतीय नागरिक अपने निर्यात व् स्थानांतरण से अर्जित डॉलर कितने भी दिनों के लिए (असीमित दिनों के लिए) भारतीय बैंकों में जमा कर सकेंगे।
विदेशी कंपनी अपने निर्यात व ट्रांसफर (स्थानांतरण) से अर्जित डॉलर भारतीय या विदेशी बैंक में असीमित दिनों तक रख सकेगी।
भारतीय नागरिक, रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया की अनुमति के बिना विदेशी बैंकों में डॉलर नहीं रख सकेंगे हालाँकि लौटे हुए अप्रवासी भारतीय विदेशी बैंको में दस वर्ष तक अपने खाते संचालित कर सकेंगे/ रख सकेंगे।

[6] भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश :

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया व भारतीय बैंक रूपए के बदले डॉलर नहीं देंगे हालाँकि भारत सरकार के आयात (विदेश से माल मंगवाना) की स्थिति में ऐसा किया जा सकेगा।
यदि निजी नागरिक आयात करना चाहे तो नागरिक को उन भारतीय या विदेशी कम्पनियों, जिनके पास भारतीय या विदेशी बैंकों में डॉलर है, से डॉलर प्राप्त करना होगा।

[7] भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश :

यदि किसी भारतीय नागरिक अथवा कंपनी को निर्यात अथवा ट्रांसफर (स्थानांतरण) के द्वारा डॉलर मिले हैं और रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया को डॉलर बेचे हैं, तो उन नागरिकों और कंपनियों को बेचे हुए डॉलर की मात्रा के अनुपात में 30 % तक आयकर में छूट मिलेगी।

[8] आयकर की गणना में आयात (विदेश से माल मंगवाना) को कटौती योग्य खर्चो में शामिल नहीं किया जाएगा ।

[9] कस्टम बोर्ड चेयरमेन (सीमा-शुल्क विभाग अध्यक्ष) के लिए निर्देश:

हीरे के आयात को किम्बरली प्रक्रिया, प्रमाण देने वाली योजना (KPCS) या किसी अन्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी।

[10] भारतीय नागरिकों के लिए निर्देश:

कोई भी कंपनी जो सोना या चाँदी आयात करती है वह आयातित सोने या चांदी की मात्रा के अनुपात में `सोना आयातित अंक` अथवा `चाँदी आयातित अंक`अर्जित करेगी। अंक हस्तांतरणीय होंगे (दूसरे नागरिक को दिए जा सकते हैं) ।

अंकों के खातों की रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा बताये गए बैंकों द्वारा देखरेख/ निगरानी की जाएगी ।

[11] भारतीय नागरिको के लिए निर्देश :

कोई भारतीय नागरिक जो कि स्वर्ण या चांदी या मिश्रित गहनों का निर्यात करता है, उसको उस सीमा तक स्वर्ण या चांदी के निर्यात की अनुमति होगी, जिस सीमा तक उसने स्वर्ण या चांदी के `आयात अंक` मिले हैं या `आयात अंको` को स्थानान्तरण/हस्तांतरण द्वारा प्राप्त किया है ।

[12] सभी के लिए निर्देश :

कोई भी भारतीय या विदेशी कंपनी स्वर्ण या चांदी या धातु या धात्विक अयस्क (कच्चा धातु) का निर्यात प्रधानमन्त्री कार्यालय या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी की अनुमति बिना नहीं कर सकेगी ।

[13] कस्टम बोर्ड चेयरमेन ( सीमा-शुल्क विभाग अध्यक्ष) के लिए निर्देश :

यदि किसी तैयार माल (समाप्य सामग्री) का निर्यात किया जाता है, जिसमे कि स्वर्ण या चांदी सम्मिलित है, तो ऐसे स्वर्ण या चांदी की कुल कीमत निर्यातित सामग्री के 1% मूल्य से अधिक की नहीं हो सकेगी ।
सभी धातुओ के तैयार माल के लिए निर्यात शुल्क निर्यातित सामग्री के 30% के बराबर होगा ।

[14] सभी के लिए निर्देश :

यदि निर्यातक द्वारा रिज़र्व बेंक ऑफ़ इंडिया को डॉलर बेचे गए हैं, तब बेचे गए डॉलर की कीमत के 30% की सीमा तक उन्हें आय-कर में छूट प्राप्त होगी, अन्य सभी परिस्थितियों में निर्यात द्वारा मिली आय पूरी तरह से कर योग्य होगी (उस पर टैक्स लगेगा) ।

[15] भारतीय नागरिको के लिए निर्देश :

ऐसी भारतीय कंपनी जो कि विदेशी मुद्रा रखती है, उस भारतीय कंपनी को रखी गयी विदेशी मुद्रा पर महीने की आखिरी तारीख को 0.1% की दर से संपत्ति-कर का भुगतान करना होगा ।

[16] भारतीय नागरिको के लिए निर्देश :

कोई भी भारतीय कम्पनी जो कि विदेशी मुद्रा रखती है, उस भारतीय कंपनी को रखी गयी विदेशी मुद्रा पर अर्जित किये गए लाभ पर महीने की आखिरी तारीख को 30% पूंजीगत-कर का भुगतान करना होगा, जबकि पूंजीगत हानि को आगे आने वाले 36 माह तक अग्रेषित किया जा सकेगा (आगे किया जा सकेगा)।

=== ड्राफ्ट का अंत ===

C7. राइट-टू-रिकॉल – मुख्यमंत्री का कानून-ड्राफ्ट (अपने मुख्यमंत्री को किसी भी दिन बदलने का आम-नागरिकों की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया)

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-मुख्यमंत्री राज्य राजपत्र ड्राफ्ट का आरम्भ =====

1. [सामान्य जानकारी]

नागरिक शब्‍द का मतलब रजिस्टर्ड वोटर/मतदाता है।

2. [जिला कलेक्टर को निर्देश]

30 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक जो मुख्‍यमंत्री बनना चाहता हो वह जिला कलेक्टर के समक्ष/कार्यालय जा सकता है। जिला कलेक्टर विधायक के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर उसे एक सीरियल नम्‍बर जारी करेगा और उस उम्मीदवार का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रखेगा ।

3. [तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क)]

भारत का कोई भी नागरिक पटवारी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को मुख्‍यमंत्री के पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। तलाटी उसके अनुमोदन/स्वीकृति को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र, दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा । (गरीबी रेखा से नीचे) बी पी एल कार्डधारकों के लिए शुल्‍क/फीस 1 रूपया होगी। यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन/स्वीकृति रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा।

4. [तलाटी के लिए निर्देश]

वह तलाटी नागरिकों की पसंद/प्राथमिकता को मुख्यमंत्री के वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी/मतदाता पहचान-पत्र और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा ।

5. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]

प्रत्‍येक सोमवार को हर जिला का कलेक्टर हरेक उम्‍मीदवार की अनुमोदन/स्वीकृति-गिनती को प्रकाशित करेगा। .

6. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]

वर्तमान मुख्‍यमंत्री अपनी अनुमोदन/स्वीकृति – गिनती को निम्‍नलिखित दो से उच्चतर मान सकता है –

नागरिकों की संख्‍या जिन्‍होंने उसका अनुमोदन/स्वीकृति किया है
मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायकों द्वारा प्राप्‍त किए गए मतों का योग

7. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]

यदि किसी व्‍यक्‍ति को मौजूदा मुख्‍यमंत्री के मुकाबले (सभी रजिस्‍टर्ड मतदाताओं के) 2 प्रतिशत ज्‍यादा अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त है तो वर्तमान मुख्‍यमंत्री इस्‍तीफा दे सकता है और विधायकों से कह सकता है कि वे सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया मुख्‍यमंत्री बना दें ।

8. [विधायकगण के लिए निर्देश]

विधायकगण धारा 7 में उल्‍लिखित व्‍यक्‍ति/सबसे अधिक अनुमोदन/स्वीकृति प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया मुख्‍यमंत्री बना सकते हैं।

सैक्शन- सी.वी. (जनता की आवाज)

9. सी वी – 1 [जिला कलेक्‍टर के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी/डी सी के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन उसको कोई भी देख सके ।

10. सी वी – 2 [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट पर हां – नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देगा । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा। पटवारी या उसका क्लर्क हां – नहीं मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाला जाएगा ।

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-मुख्यमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट समाप्त =====

C8. राइट-टू-रिकॉल – विधायक का कानून-ड्राफ्ट (अपने विधायक को किसी भी दिन बदलने का आम-नागरिक की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया

=== राइट-टू-रिकॉल विधायक प्रस्तावित ड्राफ्ट का आरम्भ ====

1. (1.1) शब्द `नागरिक` का मतलब रजिस्ट्रीकृत मतदाता है |

(1.2) शब्द “कर सकता है “ का मतलब कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं है | इस का मतलब “ कर सकता है “ या “करने की जरूरत नहीं है “ है |

2. [जिला कलेक्टर को निर्देश]
प्रधानमंत्री जिला कलेक्टर को निर्देश देते हैं कि यदि भारत का कोई नागरिक जिला कलेक्टर के दफ्तर आता है और विधायक के लिए उम्मीदवार बनना चाहता है, तब जिला कलेक्टर , विधायक-चुनाव के जमा-राशि जितना शुल्क लेगा और उस व्यक्ति को `विधायक उम्मीदवार` घोषित करेगा | जिला कलेक्टर एक सीरियल नंबर/क्रम संख्या देगा और उसका नाम प्रधान मंत्री के वेबसाइट पर डालेगा |

3. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]

(3.1) प्रधानमंत्री पटवारी (या तलाटी या गाँव का अधिकारी ) को निर्देश देगा कि नागरिक यदि खुद पटवारी के दफ्तर आता है, रु. 3 शुल्क/फीस देता है, और कम से कम पांच व्यक्तियों को अनुमोदन देता है विधायक के पद के लिए, तो पटवारी उसके पसंद (अनुमोदन) कंप्यूटर में डालेगा और उसको एक रसीद देगा, जिसमें लिखा होगा ,उसकी वोटर आई.डी संख्या, तारीख/समय और जिन व्यक्तियों को उसने पसंद किया है |

(3.2) यदि पटवारी के पास कंप्यूटर आदि नहीं है, तब जिला कलेक्टर इस कार्य को तहसीलदार के दफ्तर को देगा , जब तक कि पटवारी को कंप्यूटर, आदि नहीं मिलता इस कार्य को करने के लिए |

(3.3) जिला कलेक्टर एक एस.एम.एस फीडबैक सिस्टम बना सकता है जो `क्रेडिट कार्ड लेन-देन` के फीडबैक सिस्टम के समान होगा |

(3.4) जिला कलेक्टर उपकरण/मशीन पटवारी को देगा, जो फोटो और अंगुली की छाप लेगा और रसीद देगा नागरिक के अंगुली की छाप और फोटो के साथ |

4. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]
पटवारी नागरिकों के अनुमोदन/पसंद प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर रखेगा , नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर और उन व्यक्तियों के नाम , जिनको उसने अनुमोदन (पसंद) किया है |

5. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]
यदि वोटर अपने अनुमोदन रद्द करने आता है, तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन (पसंद) को बिना कोई फीस लिए रद्द कर देगा |

6. [विधायक को निर्देश]

यदि कोई दूसरा (वैकल्पिक) उम्मीदवार को अनुमोदन (स्वीकृति) मिल जाती हैं जो इन में से कम है -

(6.1) वर्तमान विधायक के वोटों की गिनती से (सभी मतदाताओं के ) 20% अनुमोदन (स्वीकृति) से अधिक है

या

(6.2) उस चुनाव-क्षेत्र के सभी मतदाताओं के 50% से ज्यादा अनुमोदन (स्वीकृति) हों , और साथ ही में वर्तमान विधायक के प्राप्त अनुमोदन से (मतदाता की कुल संख्या का) 10% अनुमोदन/स्वीकृति ज्यादा हों |

तो, वर्तमान विधायक अपना इस्तीफा 7 दिन में दे सकता है या उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है |

7. [विधानसभा अध्यक्ष, विधायक को निर्देश]
(7.1) यदि वर्तमान विधायक 7 दिनों में इस्तीफा नहीं देता है, तो लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव बुला सकता है संसद में , उस विधायक को निकालने के लिए या ऐसा करना उसके लिए नहीं जरूरी है | विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अंतिम होगा |

(7.2) दूसरे विधायक, उस विधायक को निकालने के लिए प्रस्ताव स्वीकृत कर सकते हैं या उन्हें ऐसा करने के लिए कोई जरूरत नहीं है |

8. [चुनाव आयोग(देश में चुनाव कराने वाली सरकारी संस्था ) को निर्देश]
(8.1) यदि विधायक इस्तीफा देता है या निकाला जाता है, तो चुनाव आयोग नया चुनाव करवायेगी, कायदे के अनुसार | अगले चुनाव में, जो विधायक निकाला गया है, वो चुनाव लड़ सकता है |

(8.2) धारा-6 के प्रयोजन के लिए, मतदाताओं के अनुमोदन (स्वीकृति) जिन्होनें चुनाव के घोषित होने के बाद अपना नाम दर्ज/रेजिस्टर किया है , वे नहीं गिने जाएँगे | हर चुनाव-क्षेत्र की मतदातों की सही संख्या चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित की जायेगी और चुनाव-आयोग का फैसला आखरी होगा |

9. जनता की आवाज़-1(सी वी – 1) [जिला कलेक्टर को निर्देश]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून में बदलाव चाहता हो तो वह जिला कलेक्‍टर के कार्यालय में जाकर एक ऐफिडेविट (शपथपत्र) प्रस्‍तुत कर सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्‍लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पन्ने की फीस लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करेगा ।

10. जनता की आवाज़-2(सी वी – 2) [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल को निर्देश]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी भी ऐफिडेविट (शपथपत्र) पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचानपत्र (वोटर आई डी) लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए की फीस जमा कराएगा। तलाटी हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल दिया जाएगा ।

11. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

यदि भारत के कम से कम 40 करोड़ नागरिक-मतदाता सहमति देते हैं, तो प्रधानमंत्री राज्य में इस कानून-ड्राफ्ट को 5 वर्ष के लिए हटा सकता है |

=== राइट-टू-रिकॉल विधायक प्रस्तावित ड्राफ्ट का अंत ====


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PostPosted: Tue Mar 17, 2015 7:22 pm 
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Dear All,

Those who want that Swadeshi in India should be promoted and wrongful MNC-owner domination in the country be reduced, please send following order to your MP via SMS or twitter ---

"Please promote via website, private member bill etc. and get printed drafts in tinyurl.com/SwadeshiBadhao in Gazette. Or will not vote for you/your party. Also setup a public sms server on your site like smstoneta.com so that SMS-opinions of citizens are seen along with their voter IDs by all without need to login"

Besides sending sms to your MP, also display proof of your opinion along with voter id by sending 3 SMS-es to already existing public sms server. If you want to Promote Swadeshi - 100% manufactured by Indians and Reduce wrongful MNC (Multinational Companiy) owners’ domination, then please send from your mobile inbox, send to 08141277555 these 3 SMS-es –
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• First sms will be in this format (meaning that you have to put your voter ID number between two star symbols and send sms)
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*YourVoterIDNumber*
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• Second SMS will have only 4 numbers for support of TCP (righttorecall.info/tcpsms ; This issue promotes all issues) which is the support code of TCP -
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0011
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Third SMS will have only 4 numbers for support for increasing swadeshi –
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0101
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Your support will come on this link – http://smstoneta.com/tcp
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If sufficient internet voter id support is received, these pro-common laws will come.

And also inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send this SMS to their MP.

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Dear MP,

If you have received the internet link to this status via SMS etc. from your voter, then it is order from the citizen to you, to promote the following drafts in Section `C` via your website, private member bill etc. and order PM to print those DRAFTs in Gazette.

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Section A. Introduction

Should we oppose all Multinational companies (MNCs)? No. Oppose which MNCs, where and why?

Many foreign companies are creating wealth such as Microsoft, Oracle, Intel, Motorola and 1000s of such companies. But several corrupt MNCs, and even Indian super-corporates too, are more in the business of encroaching banks, mineral mines, TV-channels, newspapers and creating oligopolies. They are not in the business of wealth creation.

And even amongst wealth creating MNCs, dominance and oligopoly can create severe problems in the area of Military. Eg if we import telecom equipment from a US company say Nortel. These switches have radio-receivers in them, which on receiving radio signals can be deactivated. If these switches are used in India, then during US-India war, US can disable the telecom network by merely pressing a button, and whole Indian Military will become deaf and blind and we will lose. That’s why hi-tech imports which may effect Military should be prohibited even from good MNCs.

Corrupt lobbies sponsored and Paid media promoted `Make in India` or majority of so called `fully indigenous` manufacturing is in fact importing of parts and assembling them in India. And most of the assembly lines and their spare parts are imported. Meaning, we are dependent on corrupt lobbies of other countries for our basic needs. This dependency is used by corrupt MNCs to blackmail and exploit our industrialists, politicians, etc. using Carrot and stick approach (meaning - benefit if they comply to favorable laws etc. demands of corrupt lobbies and suffer if they do not comply).

We need Government Orders (Gazette Notifications) which permit wealth creating companies to flourish and curb actions of the corrupt MNC-owners who do nothing but create monopolies. And we also need Gazette Notifications to ensure that the damage good MNCs can do on Military reduces.

What can India do to get rid of corrupt MNC-owners’ controls? We need to reduce their internal influence as well as increase our strength and productivity. To increase our strength and productivity, we need to reduce injustices in courts, police, polity etc by printing Right to Recall procedures, Jury System, Streamlining Tax collection by means of wealth tax etc in the Gazette. And we also need to print drafts in Gazette that will reduce strength of MNC-owners inside India.

Please note that methods that aim to expel corrupt MNCs and not fix weaknesses in India will fail when MNC-owners send US Army. Eg using law, we can expel all MNCs like Coca-cola or McDonald etc. using law, we can also ban all missionaries. But when MNC-owners send US troops to further business interests of these companies, no law-draft will help. Only weapons will help in this case and we can`t manufacture weapons till we reduce the corruption and unfairness in our courts, police and administration. So laws to expel or demote corrupt MNC-owners are only short term and insufficient measures.

Please read further which procedure-drafts are needed to improve Swadeshi .....

Section B. Main Demands in Short

B1. Citizen-verifiable, Transparent Complaint-Proposal Procedure (TCP)

Limited reach of common citizens today compared to Paid media and Text book mafia -
Today, using the paid media, textbook mafia, many corrupt lobbies spread false or incomplete news and suppress true news and suppress information useful for the common citizens and useful for promoting Swadeshi. The REACH of paid media, textbook mafia etc. is in lakhs and crores and is much more than `word of mouth` and much more than reach of a few citizens, trying to promote info regarding Swadeshi, without any connections, with help from paid mainstream media. And so, information required for promoting Swadeshi does not spread to many.

A simple solution - Citizen-verifiable, Transparent Complaint-Proposal Procedure (TCP) is a common citizens` media, in which any citizen has option to get his/her information as an affidavit scanned onto PM website so that masses can see the same without need to log-in. This ensures that info on the website is not manipulated by vested interests without the manipulator being exposed to the masses with PROOF.

This procedure, if in place, will increase the reach of the common citizens to other citizens and also to their leaders. Due to this common citizens` media carrying citizen-verifable, cross-verifiable info, monopoly of paid media will end and wrongful influence of corrupt MNCs will reduce and media will be forced to carry true news instead of paid, false news or perish. This true news will reduce ineffectiveness of administration and judiciary and thereby also promote effectiveness of Swadeshi units.

See full draft of TCP below in Section C1.

B.2 Wholly Owned by Indian Citizens (WOIC) Act

Dear Citizens,

WOIC Act is essential before any meaningful attempt is done to promote Swadeshi and reduce MNC-owners dominations. Example - say we tell all to use products of some “Indian” company. But what if the shares of that “Indian” company are owned by foreigners via mutual funds or FDI or promissory notes (ownership of which is not known to even SEBI) ? Once WOIC category is added in the Company Act, the person can be sure that a particular company is Indian or foreign because the ownership of shares of WOIC category will be put on internet so that all can see the same.

See full draft below in Section C2.

B3. How Right to Recall PM, Right To Recall-judges etc reduce unfair domination of corrupt MNC-owners

The corrupt MNC-owners main success inside poor countries is via bribing the leaders and/or using TV-channels and newspapers to support/oppose leaders they like or dislike. And equally important way they use is to hire relatives of judges as high paid lawyers. Through the relative lawyers, the corrupt MNC-owners get favorable judgments. The citizens do always know sooner or later, but in absence of any citizen-verifiable procedure, the citizens can`t do nothing except discuss and discuss and discuss. But, if citizens have procedure to anyday Replace their PM, judges etc. can change this in just one go. How?

When these Replace (also known as Recall) procedures are in place, moment a Prime Minister or officer or judge takes anti-national pro-MNC-owner decision, his opponents who want to dislodge him and get his position will start giving information and proof to citizens. On getting this proof and using Replacement procedures, citizens who felt betrayed will replace him. And due to fear of loosing job and power, 99% of the officials improve their behavior and work and rest 1%, who do not improve their behavior and work, are replaced by better officials.

All in all, Replace (Recall) procedures make difficult for MNCs to bribe Minister, CM, Lokpal etc and get away.

Further, Replace (Recall) procedures reduce corruption and unfairness in administration and judiciary and this will strengthen Indian companies.

See full drafts of these proposed `Replacement of officials by commons` procedures below in Sections C3, C4, C7 and C8.

B4. How Jury System reduces domination of corrupt MNC-owners and promote Swadeshi

In Jury system, 15 to 1500 randomly chosen citizens decide court cases instead of judges and the jurors change after every case. In Jury system, the court decisions are more fair and quicker.

In judge system, handful of judges give all verdicts, where as in Jury System the number of verdict givers is not 12-15 times more but 1000s of times more. How? In judge system, say one judge works for 30 years in his life and give judgments in 100 important cases a year i.e. say Judge gives judgement in 3000 cases in his whole life. In Jury System, the cases will go to some 36000 citizens. So number of verdict givers increase by 36000 times, not just by 12 times !!

So in judge system, MNC-owners benefit because number of people they have to bribe (via hiring their relatives as lawyers) are few hundred only. In Jury System, the numbers will run into crores and makes it unmanageable. So solution we propose is to end the judge system, and use Jury System in Supreme Court, High Courts and Lower Courts as well. This will make it impossible for MNC-owners to bribe their way in courts. Further, Jury System reduces unfairness and corruption in administration and this will strengthen Indian companies.

See full draft of Jury system below in Section C5.

B5. Foreign Direct Investment (FDI) Repatriation Gazette Nofication (Proposed)

Dear Citizens,

When a foreign company invests into India, it needs to buy deposits, shares or land/labor etc. For this the company will need rupees, and to get rupees, it gives dollars to RBI and RBI in turns gives rupees. Now RBI gives rupees under two conditions – repatriable and non-repatriable. When it is repatriable, the person who got rupees can later give rupees back and ask for dollars. And in non-repatriation, he cannot get dollars back.

Today, Foreign Institutional Investment (FII) / Foreign Direct Investment (FDI) are given option to repatriate their capital as well as profits. But we do not have enough dollars or forex to give them and this can lead to forex crises. Or we have to keep on taking more and more debt, due to which we will fall into a debt crises. So, investments by FDI/FII should be made non-repatriable. So Reserve Bank of India (RBI) or government will not make any commitment to give them dollars back. But they can take “dollars” back by buying from the free market. This will ensure that FDI/FII does not create repayment crisis and sudden fall in rupee.

Further, private individuals should be allowed to have dollar accounts in foreign banks, with disclosure to RBI. The dollar incomes they earn from exports can be deposited in foreign banks and will be taxable at normal rates. And whatever dollars they give to RBI, for that they will get rupees as well as transferable tax-waivers.

See full draft below in Section C6.

C. Drafts for the main demands to promote Swadeshi

C1. Transparent Complaint-Proposal Procedure


== start of draft of the proposed TCP GN ===

The draft of proposed Transparent Complaint-Proposal Gazette Notification

1. [ order to Collector or his clerk ] The President hereby orders Collector that : if ANY citizen-voter in his district submits a Right to Information application or complaint against corruption or any affidavit to the Collector and requests to be put on the website of Prime Minister, the Collector or his designated clerk will issue a serial number and SCAN that affidavit along with voter ID of the citizen onto the website of the Prime Minister for a fee of Rs 20 per page so that anyone can see the affidavit without logging-in.

2. [ order to Talati, Patwari, Village Officer or his clerk ] The President orders Patwari that :

(.2.1) if ANY citizen-voter comes with voter ID, and specifies Yes-No on an RTI application, complaint or any affidavit submitted in clause-1, the Patwari will enter his Yes-No on the PM’s website with his voter-ID number and give a printed receipt for Rs 3 fee.

(2.2) The Patwari will also allow citizen to change his Yes-No for Rs 3 fee.

(2.3) The fee will be Re 1 for BPL card holder

(2.4) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter’

(2.5) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt

(2.6) The PM may create a system where by citizens can register YES/NO via ATM using ATM-cards for a fee of 50 paise

(2.7) PM may add means to enable citizens to register YES/NO via SMS for 10 paise

3. [note to all Citizens, Officers, Ministers, judges]

(3.1) This TCP Gazette Notification is not a referendum procedure. The Yes-No count will not be a binding on PM, CMs, officers, judges etc. If over 37 crore women voters, dalit voters, senior citizen voters, poor voters, farmer voters or ANY 37 crore citizen-voters register Yes on a given affidavit, then the PM may or need not take necessary action on the RTI application affidavit ; or the PM may or need not resign. PM’s decision will be final.

(3.2) Further, the Collector may design and propose a system to collect Yes-No in clause-2 over secured SMS, and implement that system after approval of PM.

==== end of the proposed GN ====

We summarize the TCP (Transparent Complaint Procedure) law as -

1. If a citizen wants, he can visit Collector’s office and get his complete affidavit SCANNED onto PM’s website along with voter ID number of the citizen for Rs. 20 per page fee, so that it is visible to all without any need to log-in.

2. If a citizen wants to give his opinion on a previously filed affidavit., then he visits Talati’s (Lekhpal, Patwari, V.O. etc) office, registers his YES (Support) or NO (opposition) for the affidavit & displays it on PM’s website for Rs 3 fee along with voter ID number of the citizen. The cost of giving one opinion for the citizen will be 10 paise when the system comes on SMS. Citizen can change his opinion any day, making procedure immune to money-buyout, media power & gangster power.

3. The YES-count is not a binding on PM etc.

For detailed explanation, please see http://www.righttorecall.info/tcpsms.htm (download link - http://www.righttorecall.info/tcpsms.pdf)

For FAQs, see http://www.righttorecall.info/007.htm (download link - http://www.righttorecall.info/007.pdf)

C2. Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Ordinance draft

===== start of the proposed Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Ordinance draft to be added in Company Act =======

Section - Wholly Owned by Indian Citizen (WOIC) Company

1. A company can register itself as WOIC i.e. Wholly Owned by Indian Citizens

2. If a company is registered as WOIC, then only Indian Citizens above 18 years, residents in India, who are not permanent resident or citizen in any other country can buy shares in that company. In addition, another WOIC company or a Government body may buy shares. But a non-citizen or non-WOIC company cannot buy share in that company.

3. Only an Indian citizen can be Director, Chairman, Partner of a WOIC

4. Non-WOIC companies cannot buy lands or lease for a period longer than 10 years, Non-WOIC companies cannot buy or lease mines or agricultural lands.

5. Non-WOIC companies cannot buy buildings or lease buildings for a period longer than 10 years.

6. No minister or govt employee will buy any share in non-WOIC company

7. If any shareholder in WOIC becomes permanent resident or citizen in foreign country, he must dispose all his shares within 3 months or Registrar will auction those shares and give him amount minus charges.

8. Only a WOIC company can file a patent in India.

9. In any tender submitted to a Govt body, the amount given by non-WOIC company must be 20% less than amount given by WOIC company to be at par.

10. In any tender submitted to a WOIC company, the amount given by non-WOIC company must be 10% less than amount given by WOIC company to be at par.

11. WOIC company will submit full ownership details to Registrar every month.

12. Every Minister, MP, MLA, officer, judge and every Govt employee will disclose how many shares he owns on which WOIC company

13. A banking company or any finance company which takes deposits from citizens of India in India must be WOIC company

14. Banks will give loans only to WOIC companies.

15. Only WOIC company can enter telecom, satellite and other strategic fields

16. Only WOIC company can enter into crude oil mining

17. Only WOIC company can manufacture edible non-medicine food products and “zero-technology” areas

18. Only WOIC company can own bandwidth and run newspapers

19. [Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit on PM’s website along with voter ID number of the citizen for Rs 20/- per page so that anyone can see the affidavit without any need to log-in.

20. [Instruction for Talati (= Patwari = Village Officer)]

If any citizen wants to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with citizen`s voter ID number.

============= end of WOIC draft ===================

C3. Right To Recall-Prime Minister (Common citizens` procedure to replace prime minister any day)

===== start of the proposed Right To Recall-Prime Minister Gazette draft =======

1. [General Information]

The word citizen would mean a registered voter.

The word may means may or need not, and clearly means “not binding”.

2. [Instruction for District Collector]

If a citizen of India above 30 years wishes to be PM, he can appear before Collector. Collector would issue a serial number for a filing fee same as deposit amount for MP election and put his name on the PM’s website.

3. [Instruction for Talati = Village Officer = Patwari = Lekhpal (or Talati’s Clerks)

(3.1) If a citizen comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the PM position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved. The fee shall be Rs 1 for those with BPL card.

(3.2) If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

(3.3) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter.

(3.4) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt.

(3.5) The PM may create a system where by citizens can register approvals via ATM using ATM-cards.

(3.6) PM may add means to enable citizens to register approvals via SMS

4. [Instruction for Talati]

The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5. [Instruction for District Collector]

On every Monday, the Collectors will publish Approval counts for each candidate.

6. [Instruction for PM]

The present PM may count his approval count as higher of the following two -

number of citizens who have approved him
sum of votes obtained by Loksabha MPs who have supported him

7. [Instruction for PM]

If a candidate gets approvals 1 crore more than approvals existing PM has, then PM may resign and may ask MPs to appoint approved person as new PM.

8. [Instruction for Lok Sabha MPs]

The MPs may elect the person stated in clause-7 as new PM.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit onto PM’s website along with voter ID number of citizen for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

============= end of draft ===================

C4. Right To Recall District Judge (Citizens` procedure to replace their Principal District judge anyday)

=== start of draft of the proposed RTR-Principal District-Judge===

The exact draft, which will come into effect when CM signs this law is as follows:

1. The word citizen means registered voter in the district.

2. (procedure for DC = District Collector) If any citizen above the age of 35 years and degree of LLB, India wishes to become Principal District Judge in a District he appears in person or via a lawyer with affidavit before the DC (or officer DC deputes), then DC (or officer he deputes) would accept his application to become Principal District Judge after taking filing fee same as deposit amount for MP election.

3. (procedure for Talati or Talati’s Clerks) If a citizen comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the Principal District Judge position, then the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

4. (procedure for Talati) The Talati will put the approvals of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and names of the persons he approved.

5. (procedure for Talati) If the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6. (procedure for DC ) On every 5th of month, the Collector or officer he deputes will publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.

7. (procedure for HCCj = High Court Chief judges) If a candidate gets approval of over 35% of ALL citizens (ALL, not just those who have filed their approval) in a district, and it is 5% (of total voters in district) more than approval existing Principal District Judge has, then HCCj may appoint him as Principal District Judge

8. (procedure for HCCj ) As long as a Principal District Judge has approvals of more than 34% citizens, HCCj need not replace him. But if a Principal District Judge’s approval goes below 34%, then the HCCj can replace him with the officer of his choice.

9. (procedure for Principal District Judge) The Principal District Judge may decide to use Jury System using the Jury System draft he has proposed, after getting approval of HCCj or citizens of state using Citizens` Voice (CV) (See clause no. 10 and 11) .

10. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit onto PM’s website along with voter ID number of citizen for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

11. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

==== end of draft ====

C5. Jury System in Lower Courts Gazette Notification

This will be implemented when the PM or CM signs it.

= start of the Gazette draft bring Jury System in Lower Courts in India ==

Section-1 : Appointment and replacement of Jury Administrator

1. (procedure for CM) Within 2 days after passing this law, the CMs shall appoint one Registrar for entire State and one JA (Jury Administrator) per District

If any citizen of India above 30 years wishes to become District Jury Administrator , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the district collector, the DC would accept his candidacy for District Jury Administrator (DJA) after taking filing fee same as deposit amount for MP election. DC or his clerk will put the names of candidates on CM website.

2. (procedure Talati, Talati’s clerk) A citizen residing in a District can present his voter ID and specify the serial numbers of (at most 5) candidates he Approves for the position of Jury Administrator in his District. The clerk will enter the requests in the systems and CM website along with voter ID number of citizen and give the receipt to the citizen. The citizen to change his choices any day. The clerk shall charge a fee of Rs 3/-

3. (procedure for CM) If any candidate is approved by highest number of citizen-voters and over 50% of ALL citizen-voters, the CM will appoint him as new JA for that District within 2 days. If any candidate is approved by over 25% of ALL citizen-voters and his approval count is 5% more than existing JA, the CM will appoint him as new JA within 2 days

4. (procedure for CM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in that State, the CM can cancel clause-2 and clause-3 and appoint his own JA for 5 years.

5. (procedure for PM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in India, the PM can cancel cluase-2, clause-3 and above clause-4 for entire state or some of the districts and appoint JA for 5 years.

Section-2 : Formation of Grand Jury

6. (procedure for JA) Using the voter list, the JA will, in a public meeting, randomly select 40 citizens from the voter-list of District, State or Nation as the Grand Jurors, from which he can exclude any 10 after interview so that finally there are 30 Grand Jurors. If the Jurors is appointed by CM or PM under clause-4 or clause-5 he may select up to 60 citizens and exclude 30.

7. (procedure for JA) In the first set of Grand Jurors, JA will retire the first 10 Grand Jurors every 10 days and select 10 more using random selection from voter list of District or State or Nation.

8. (procedure for JA) The JA cannot use any electronic device to select a number randomly. He will use the procedure detailed by CM. If CM has not specified the procedure, he will select as follows. Suppose JA has to choose a number between 1 and a four digit number - ABCD. Then JA will have 4 rounds of dice-throw for each digit. In a round if the digit he needs to select is between 0-5, then he will use only 1 dice and if the digit he needs to select is between 0-9, he will use 2 dices. The number selected will be 1 less than the number which comes in case of single-dice throw and 2 less in case of double-dice throw. If the throw of the dices exceeds the highest digit he needs, he will throw the dices again.. Example - Suppose JA needs to select a page in a book, which has 3693 pages. Then JA will execute 4 rounds. In the 1st round he will use 1 dice as he needs to select a number between 0-3.

If the dice shows 5 or 6, he will throw the dice again. If the dice show 3, the number selected is 3-1=2, and JA will proceed to second round. In the second round, he needs to select a number between 0-6. So he will throw two dices. If the sum exceeds 8, he will throw the dices again. If the sum is suppose 6, the second digit selected is 6 - 2 = 4. Like that, suppose the dices in 4 rounds show 3, 5, 10 and 2. Then JA will select digits as (3-1), (5 -2), (10-2), (2-1) i.e. page number 2381. The JA should use different citizens to throw dices. Suppose the voter-list has B books, the largest book has P pages and all pages have N entries. Then using above method or method described by CM, JA will select 3 random numbers between 1-B, 1-P and 1-N. Now suppose selected book has less than that many pages or the selected page has fewer entries. Then he will again select a numbers between 1-B, 1-P and 1-N.

9. (procedure for JA) The Grand Jurors will meet on every Saturday and Sunday. They may meet on more days if over 15 Grand Jurors approve. The number must be "over 15", even when less than 30 Grand Jurors are present. The meetings, if happen, must start at 11am and last till at least 5pm. The Grand Juror will get Rs. 200 per day he attends. The maximum payment a Grand Juror can get for his 1 month term will be Rs 2000. The JA will issue the checks 2 months after a Grand Juror completes the term. If the Grand Juror is out of district, he shall get Rs 400 per day of stay and if he is out state, he shall get Rs 800 per day of stay. In addition, they will get Rs 5 per kilometer of the distance between their home and court. The CM , PM may change the compensation as per inflation. All rupee amounts written in this clause and this law use WPI given by RBI in Jan-2008 and JA can change the amounts every six months using latest WPI.

10. (procedure for JA) If a Grand Juror is absent on a meeting, he will not get Rs 100 for that day and may loose up to thrice his amount to be paid. The individuals who are Grand Jurors 30 days later will decide the fine.

11. (procedure for JA) JA will start the meting at 11am. The JA arrive in the room before 10.30am. If a Grand Juror fails to arrive before 10:30am, JA will not allow him to attend the meeting and mark him absent.

Section 3: Charging a citizen

12. (procedure for JA) If any person, be a private person or District Prosecutor, has complaint against any other person, he can write to all or some Grand Jurors. The complainer must specify the remedy he wishes. The remedy can be· obtaining possession of a property· obtaining monetary compensation from the accused· imprisoning the accused for certain number of years/months.

13. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors, in a meeting, issue an invitation, the citizen may appear. The Grand Jurors may or may not invite the accused and complainer.

14. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors declare that there is some merit in the complaint, the JA will call a Jury consisting of 12 citizens from the district to examine the complaint. The JA will select more than 12 citizens randomly, and send them summons and of those who arrive, the JA will select 12 at random.

15. (procedure for JA) JA will ask the Chief District Judge to appoint one or more Judges to preside over the case. If the property in dispute is worth above Rs 25 lakhs or compensation claim is above Rs 100,000 and/or the maximum prison sentence is above 12 months, the JA will request Chief Judge to appoint 3 judges or else he will request Chief Judge to appoint 3 Judges for the case. The Chief Judge's decision on appointing number of Judges in the case will be final.

Section-4 : Conducting a trial

16. (procedure for Presiding Judge) The trial will go from 11am to 4pm. The trial will start only after all 12 Jurors and the complainer have arrived. If any party has not arrived, the parties who have arrived must wait till 4pm and then only they can go home.

17 . (procedure for Presiding Judge) The Judge will allow the complainer to speak for 1 hour, during which no can interrupt. Then Judge will allow the employee to speak for 1 hour during which no one can interrupt. Like this, the Judge will alternate case. The case will go on like this on every day.

18. (procedure for Presiding Judge ) The case will go for at least 2 days. On the 3rd or later, if over 7 Jurors declare that they have heard enough, the case will go on for 1 more day. If on the next day, over 7 out of 12 Jurors declare that they would like to hear more arguments, the case will go on till over 7 say that case should end.

19. (procedure for Presiding Judge) On the last day, after both parties have presented the case for 1 hour each, the Jurors will deliberate for at least 2 hours. If after 2 hours, over 7 Jurors say that they need no more deliberation, the Judge will ask each to declare his verdict.

20. (procedure for Grand Jurors) In case a Juror or a party does not show up or shows up late, the Grand Jurors after 3 months will decide the fine, which can be up to Rs 5000 or 5% of his wealth, whichever is higher.

21. (procedure for Presiding Judge) In case of fine, each Juror will state the fine he thinks is appropriate, and MUST be less than the legal limit. If it is higher than legal limit, the Judge shall take it as legal limit. The Judge will arrange the fine amounts stated in increasing order, and take the 3rd highest fine, i.e. fine that is approved by over 8 out of 12 Jurors, as the fine collectively imposed by the Jury.

22. (procedure for Presiding Judge) In case of prison sentence, the Judge will arrange the sentence lengths cited by Jurors which must be below the maximum sentence as stated in the Law accused is charged with breaking, in increasing order. And the Judge will take the 3rd highest sentence i.e. prison sentence approved by over 8 out 12 Jurors, as the prison sentence collectively decided by the Jury.

Section-5 : The judgment, execution and appeal

23. (procedure for District Police Chief) The District Police Chief or policemen designated by him will execute the fine and/or imprisonments as given by the Judge and approved by the Jurors.

24. (procedure for District Police Chief) If 4 or more Jurors do NOT ask for any confiscation or fine or prison sentence, the Judge will declare the accused as innocent and the District Police Chief will take no action against him.

25. (procedure for Accused, Complainer) Either party will have 30 days to appeal against the verdict in the State's High Court or the Supreme Court of India.

Section-6 : Protection of a Fundamental Rights of the Citizens .

26. (procedure for All Govt Employees) No Govt employee will impose any fine or prison sentence without consent of over 8 out of 12 Jurors of the Lower Courts, unless approved by the Jurors of High Courts or the Jurors of Supreme Court. No Govt employee will imprison any citizen for more than 24 hours without approval of over 15 out of 30 District or State Grand Jurors.

27. (procedure for To everyone) The Jurors will decide the facts as well as intentions, and shall also interpret the laws as well the Constitution.

28. This GN will come into force only after over 51% of all citizens in India have registered YES and every SCj has approved this GN.

29. (procedure for DC) If a citizen wants to propose any change in this law, then the citizen can submit an affidavit demanding the change to District Collector or his clerk who will post it on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20 per page along with voter ID number of the citizen.

30. (procedure for Talati aka Patwari) If a citizen wants to register his opposition to this law or any clause of this law or wants to register any support to affidavit filed in the above clause, then he may register his YES/No for a Rs 3 fee at Patwari’s office. The Patwari will note the citizen’s YES/NO and will also post the citizen’s YES/NO on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

============= end of draft ====

C6. FDI Repatriation Gazette Notification (Proposed)

This is the draft of proposed FDI Repatriation Act 2014 -

[ 1 ] Instruction for District Collector
If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit along with voter ID number of the citizen onto PM’s website for Rs 20/- per page so that anyone can see the affidavit without any need to log-in.

[ 2 ] Instruction for Talati (= Patwari = Village Officer)
If any citizen wants to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

[ 3 ] -- ALL --
Yes-No counts will not be binding on PM, MPs, Officers and judges.

[ 4 ] Definitions
The word company in this draft will include Indian citizen or Indian company or any Indian non-government entity such as trusts etc. or foreign companies or any foreign citizens or foreign government or foreign non-government trusts such as foreign trusts etc.
The word Indian company will include Indian citizen or Indian company or any Indian non-government entity.
The word Foreign company will include foreign companies or any foreign citizens or foreign government or foreign non-government trusts such as foreign trusts etc.

[ 5 ] -- ALL --
Indian citizens and companies will be allowed to keep dollars they have obtained from their exports or transfers in Indian Banks for any number of days. A Foreign company will be allowed to keep dollars obtained from its export or transfers in Indian or foreign banks for any number of days. Indian citizens will not be allowed to keep dollars in foreign banks without permission of RBI, except returning NRI can keep their accounts in foreign banks for up to 10 years.

[ 6 ] Instruction for RBI, Indian Banks
RBI and Indian Banks will not give dollars in exchange of rupees to any company or citizen except when GoI wishes to import. If the private citizens wish to import then they will have to obtain dollars from Indian or Foreign companies or citizens who have dollars in Indian or foreign banks.

[ 7 ] Instruction for Indian citizens
A Indian citizen or an Indian company which has obtained dollars from transfers or export will get income tax rebate equals to 30% of the amount of dollars they sell to RBI.

[ 8 ] -- ALL --
The imports will not be deductible expenses while calculating income tax.

[ 9 ] Instruction for Chairman, Customs Board
Import of diamond will not require Kimberley Process Certification Scheme (KPCS) or any other certificate.

[ 10 ] Instruction for Indian citizens
Any company which imports gold or silver will obtain gold import points or silver import points equal to grams of gold or silver they have imported. The points will be transferable. The account of points will be maintained by banks designated by RBI.

[ 11 ] Instruction for Indian citizens
Any person who is exporting gold or silver or mixed jewellery will be allowed to export only that much amount of gold or silver equal to import points he had obtained by importing gold or silver or transfer of points.

[ 12 ] -- ALL --
No Indian or Foreign company can export gold or silver or metals or metal ores without permission of PM or Officer appointed by the PM.

[ 13 ] Instruction for Chairman, Customs Board
If any finished commodity which is exported contains gold or silver, then the value of gold or silver cannot exceed 1% of the export value of the commodity. The customs duty for all finished goods containing metals shall be 30% of the exported material.

[ 14 ] -- ALL --
Export Income will be fully taxable except the income tax rebate equals to 30% of the amount of dollars if they sell dollar to RBI.

[ 15 ] Instruction for Indian citizens
Every last day of the month, Indian company which has forex will pay wealth tax equal to 0.1% of the forex it has.

[ 16 ] Instruction for Indian citizens
Every last day of the month, Indian company which has forex will pay capital gains tax of 30% on the profit in forex it has made and capital losses can be forwarded for up to 36 months.

C7. RTR-CM (Citizens` procedure to replace their CM anyday)

===== start of the proposed RTR-CM Gazette draft =======

1. [General Information]

The word citizen would mean a registered voter

The word may means may or need not, and clearly means “not binding”.

2. [Instruction for District Collector]

If any citizen of India above 30 years of age wishes to become CM, he can appear before Cabinet Secretary. Collector would issue him a serial number after taking filing fee same as deposit amount for MP election. Collector will put his name on CM’s website.

3. [Instruction for Village Officer = Talati = Patwari, (or Talati’s Clerks)]

If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the CM position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved. If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

4. [Instruction for Talati]

The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5. [Instruction for District Collectors]

On every Monday, the Collectors will publish approval counts for each candidate.

6. [Instruction for CM]

The present CM may count his approval count as higher of the following two -

  • number of citizens who have approved him
  • sum of votes obtained by the MLAs who have supported him

7. [Instruction for CM]

If a candidate gets approval 2% (of ALL registered voters) above the approval count the existing CM has, then existing CM may resign and may request MLAs to appoint the person approved by the citizens as new CM.

8. [Instruction for MLAs]

The MLAs may elect the person stated in clause-7 as new CM.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of citizen onto CM’s website for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on CM’s website along with voter ID number of the citizen.

11. [Instruction for PM]

With approval of 38 crore citizen-voters in India, PM may suspend this law-draft in the state for 5 years.

============= end of draft ===================

C8. RTR-MLA (Citizens` procedure to replace their MLA anyday)

===== start of the proposed RTR-MLA Gazette draft =======

# Officer
Procedure / instruction

1. —– (1.1) The word citizen would mean a registered voter.
(1.2) The word “may” does not imply any moral-legal binding. It clearly means “may” or “need not”.

2. [Instruction to District Collector (DC)]
PM orders DC, that if a citizen of India comes to DC and wishes to be candidate, then DC shall accept a fee equal to deposit of MLA election and register that person as a candidate for MLA. DC will issue a serial number and post his name on the website of PM.

3. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]

(3.1) PM orders Patwari (or Talati or Village officer) that if a citizen comes in person to Patwari’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for MP position, the Patwari would enter his approvals in the computer and would give receipt showing his voter-id#, date/time and the persons he approved.

(3.2) If Patwari does not have PC etc, then DC shall put this operation in office of Tahsildaar till the Talati gets PC etc to put this system.

(3.3) DC may create a system which gives SMS feedback to the citizen.


4. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]
The Talati will put the approvals of the voters on website of PM with citizen’s voter-ID number and names of the persons he approved.

5. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]
If a the voter comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6. [Instruction to MLA]
If an alternate candidate gets lesser of the following approval counts -

(6.1) 20% more approvals (of ALL the voters in that constituency) than the votes received by the present, sitting MLA

or

(6.2) Over 50% of ALL voters in that constituency and it is also 10% higher that approvals obtained by existing sitting MLA,

then the MLA may or need not resign in 7 days.

7. [Instruction to Speaker of Assembly, MLAs]
(7.1) If an alternate MLA in any MLA constituency gets approvals of over 50% of ALL voters and is 1% more than approvals obtained by existing MLA, and that MLA refuses to resign in 7 days, then the Speaker may or need not call a motion to expel that MLA in the Assembly. The decision of the Speaker will be final.

(7.2) The MLAs may or need not approve the motion to expel that MLA

8. [Instruction to Election Commission]
If MLA resigns, EC will conduct new election as per the norms.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of the citizen onto CM’s website for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on CM’s website along with voter ID number of the citizen.

11. [Instruction for PM]

With approval of 40 crore citizen-voters in India, PM may suspend this law-draft in the state for 5 years.

======== End of Proposed Right to Recall MLA Draft ==========


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