प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Wed Nov 05, 2014 7:12 pm 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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प्रिय नागरिक,

भूमि को छुपाना नकद मुद्रा आदि को छुपाने जितना आसान नहीं है | इसीलिए, दूसरे टैक्स की तुलना में प्रभावशाली संपत्ति-कर टैक्स इकठ्ठा करने के लिए श्रेष्ठ है और दूसरे टैक्स से अधिक टैक्स इकठ्ठा करने के लिए अधिक प्रभावशाली है | संपत्ति-कर भूमि की जमाखोरी को भी कम करता है और भूमि का मूल्य कम करता है, विकास बढाता है और बेरोजगारी कम करता है | कैसे ?

मान लीजिए, एक व्यक्ति ने जमाखोरी के उद्देश्य से 10 फ्लैट ख़रीदे हैं | मान लीजिए, हर एक फ्लैट 20 लाख का है | तो फिर, प्रभावशाली संपत्ति-कर कानून के अनुसार, उसको 1 या 2 फ्लैट पर संपत्ति-कर देने से छूट मिल जायेगी, लेकिन बाकी फ्लैट पर उसको 1% दर से 1.6 लाख रुपये टैक्स देना होगा |

प्रभावशाली संपत्ति-कर भूमि की जमाखोरी रोकता है और भूमि का मूल्य कम हो जाता है | क्यूंकि किसी भी उद्योग या धंधे को शुरू करने के लिए, मुख्य तत्व भूमि होती है, भूमि के कम मूल्य के कारण छोटे-मोटे धंधे पनपते हैं और धंधों की संख्या बढती है और रोजगार भी बढ़ता है | दूसरे शब्दों में, प्रभावशाली संपत्ति-कर किसी प्रकार से भी नुकसानदायक नहीं है |

प्रभावशाली संपत्ति-कर उन व्यक्तियों को कोई भी हानि नहीं पहुंचाता जो भूमि और संपत्ति की जमाखोरी नहीं कर रहे हैं और अपनी संपत्ति का उद्योग, व्यापार के लिए उपयोग कर रहे हैं क्यूंकि दिए गए आय-कर और कर्मचारियों के लिए वेतन की संपत्ति-कर में से छूट होगी |

इस ड्राफ्ट के प्रतिस्पर्धात्मक संपत्ति के खरीदने-बेचने सम्बंधित धाराओं से भूमि के क्रय-विक्रय में उपयोग काले धन में भी कमी आएगी |

जो नागरिक गैर-कृषि भूमि और निर्माण पर प्रभावशाली संपत्ति-कर लागू करवाना चाहते हैं, वे कृपया अपने सांसद को एस.एम.एस. या ट्विट्टर द्वारा ये आदेश करें ---

"Kripya apne website, niji bill aadi dwara is draft - tinyurl.com/SampattiKar ka badhava karein aur adhyadesh paarit karvayein Nahi to aapki/apki party ko vote nahin karenge. Kripya smstoneta.com jaise public sms server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID ke saath sabhi ko dikhe"

अपने सांसद/विधायक को एस.एम.एस. भेजने के अलावा, अपनी मांग का प्रमाण अपने वोटर आई.डी. के साथ, पब्लिक एस.एम.एस. सर्वर पर दिखाएँ 2 एस.एम.एस. भेज कर | यदि आप गैर-कृषि भूमि और निर्माण पर प्रभावशाली संपत्ति-कर प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट चाहते हैं, तो http://www.smstoneta.com/hindi पर साईट पर रजिस्टर होने के बाद 0191 एस.एम.एस. करें | इससे ये मांग एक प्रमाणित तरीके से, वोटर आई.डी. के साथ दिखेगी और मांग का अधिक प्रभाव होगा | अधिक जानकारी के लिए http://www.smstoneta.com/hindi देखें |

और कृपया अन्य नागरिकों को भी विज्ञापन, पर्चों आदि द्वारा बताएं कि वे भी अपने विधायक को इस प्रकार का एस.एम.एस भेजें |

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प्रिय सांसद/विधायक,

अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है (न कि जिसने ये लेख लिखा है)

एस.एम.एस. भेजने वाला आपको निम्नलिखित कानून-ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निजी बिल आदि द्वारा बढ़ावा करने और प्रधानमंत्री से ये अध्यादेश पारित करवाने और राजपत्र छपवाने की मांग करने के लिए आदेश दे रहा है |

गैर-कृषि भूमि और निर्माण (बिल्डिंग) पर प्रभावशाली संपत्ति-कर का प्रस्तावित ड्राफ्ट

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सैक्शन-1 : केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष (वो विभाग जो संपत्ति-कर इकठ्ठा करेगा = सी.बी.डी.टी. = CBDT = Central Board Of Direct Taxes) उम्मीदवारों के लिए नागरिकों की स्वीकृति (अनुमोदन) को दर्ज करना

संख्या. [अफसर को निर्देश]
प्रक्रिया

1. [ सभी ]
नागरिक शब्द का अर्थ पंजीकृत मतदाता होगा |
शब्द “कर सकता है “ का मतलब कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं है | इस का मतलब “ कर सकता है “ या “करने की आवश्यकता / जरूरत नहीं है “ है |

2. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक ऐफिडेविट/हलफनामा जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ/पेज का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

3. [तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के धारा/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल देगा ।

4. [सभी]
हाँ-ना की संख्या प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अफसरों और जज पर बाध्य नहीं होंगे |

5. [सभी]
ये कानून `गैर-कृषि भूमि और निर्माण (बिल्डिंग) पर प्रभावशाली संपत्ति-कर` कहलायेगा | प्रधानमंत्री इस कानून का नाम बदल भी सकते हैं | आय-कर अधिनियम में जो सैक्शन और धाराएं इस कानून से मेल नहीं खाते, उनको निष्प्रभाव माना जायेगा और रद्द किया जायेगा | बाकी सभी कानून और धाराएं जो इस कानून से मेल नहीं खाते, उनको निष्प्रभाव माना जायेगा और रद्द किया जायेगा |

6. [प्रधानमंत्री को निर्देश]
इस कानून के अनुसार, प्रधानमंत्री केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को संपत्ति-कर इकठ्ठा करने के लिए अतिरिक्त प्रभार देगा |

7. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]
यदि कोई नागरिक केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष का उम्मीदवार बनना चाहता है, तो वो अपनी एफिडेविट के साथ जिला कलेक्टर के दफ्तर आएगा या अपने वकील के द्वारा भेजेगा | तब जिला कलेक्टर सांसद-चुनाव के जमा-राशि जितना फीस लेगा और केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष के लिए उसकी उम्मीदवारी को स्वीकार करेगा और उसे एक क्रमांक संख्या (सीरियल नंबर) भी देगा |

8. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]
जिले कलेक्टर धारा-7 में बताये गए कार्य के लिए किसी भी श्रेणी-1 अफसर को नियुक्त कर सकता है |

9. [तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क) को निर्देश]
कोई भी नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर, केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष के पद के लिए अधिक से अधिक 5 व्यक्तियों का अनुमोदन (पसंद) कर सकता है, 3 रुपये देकर | पटवारी या उसका क्लर्क उसके अनुमोदन कंप्यूटर में दर्ज करेगा और उसे उसके वोटर आईडी(मतदाता पहचान-पत्र), दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा ।

10. [पटवारी अर्थात तलाटी अर्थात लेखपाल (अथवा तलाटी का क्‍लर्क) को निर्देश]
वह तलाटी नागरिकों की पसंद को प्रधानमन्त्री के वेबसाइट या कोई अन्य केन्द्रीय सचिव द्वारा निर्धारित सरकारी वेबसाईट पर उनके वोटर आईडी और उसके पसंद के साथ डाल देगा । प्रधानमंत्री वेबसाइट पूर्व निर्धारित सरकारी वेबसाईट होगी |

11. [पटवारी अर्थात तलाटी अर्थात लेखपाल (अथवा तलाटी का क्‍लर्क) को निर्देश]
यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन(स्वीकृति) रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा ।

12. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]
प्रत्‍येक महीने की पांचवी तारीख को जिला कलेक्टर प्रत्‍येक उम्‍मीदवार की अनुमोदन-गिनती पिछले महीने की अंतिम तिथि की स्‍थिति के अनुसार प्रकाशित करेगा ।

सैक्शन-2 : केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष के पद का बदलाव

13. [प्रधानमंत्री को निर्देश]
यदि किसी उम्‍मीदवार को सभी दर्ज मतदाताओं के 34 प्रतिशत से ज्‍यादा नागरिक-मतदाताओं (केवल वे मतदाता ही नहीं जिन्‍होंने अपना अनुमोदन/स्वीकृति फाइल किया है बल्‍कि सभी दर्ज मतदाता) का अनुमोदन मिल जाता है वर्तमान केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष से 1% अधिक अनुमोदन मिले हैं, तो प्रधानमंत्री वर्तमान केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को हटा सकते हैं या उन्‍हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है और उस सर्वाधिक अनुमोदन प्राप्‍त उस उम्‍मीदवार को केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष के रूप में नियुक्‍त कर कर सकते हैं या उन्‍हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है ।

14. [प्रधानमंत्री को निर्देश]
यदि वर्तमान केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को 33% से कम अनुमोदन मिले हैं, तो प्रधानमंत्री उसे बदल सकते हैं या उन्हें ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं | लेकिन यदि वर्तमान केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को 33% से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त है, तो प्रधामंत्री को उसे बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है | प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा ।

सैक्शन-3 : जिला संपत्ति-कर विकास अधिकारी और जिला रजिस्ट्रार की नियुक्ति

15. [ केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को निर्देश]
केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष हर जिले में एक या अधिक संपत्ति-कर विकास अधिकारी नियुक्त करेगा |

16. [ केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को निर्देश]
केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड हर जिला में एक रजिस्ट्रार भी नियुक्त करेगा |

सैक्शन-4 : संपत्ति की मलिकी (स्वामित्व)

17. [ केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष को निर्देश]
केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड, अध्यक्ष जिला संपत्ति-कर विकास अधिकारी को निर्देश देगा जिले के सभी प्लाट और निर्माण की सूची बनाने के लिए, जिसमें प्लाट और निर्माण के मालिकों के नाम और उनके प्रतिशत मलिकी भी लिखी होगी |

सैक्शन-5 : सम्‍पत्तियों का पंजीकरण (रजिस्ट्री)

18. [सभी]
यदि किसी व्‍यक्‍ति की किसी हाउसिंग सोसाइटी में एक फ्लैट है, तो संपत्ति-कर के प्रयोजन के लिए उस व्‍यक्‍ति की जमीन, उसकी हाउसिंग सोसाइटी की स्‍वामित्‍व वाली जमीन तथा उस सोसाइटी में उस व्‍यक्‍ति द्वारा लिए गए शेयर को गुणा करने से जितना परिणाम आएगा, उतनी ही उस व्यक्ति की संपत्ति-कर की गणना करने हेतू जमीन मानी जायेगी ।

19. [सभी]
प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति/कम्‍पनी जिसके पास जमीन अथवा घर है, वह अपनी सम्‍पत्ति रजिस्‍ट्रार के पास दर्ज करवाएगा। जमीन/घर का मालिक इसका क्षेत्रफल, सही स्‍थान और रजिस्‍ट्रार द्वारा पूछे गए अन्‍य ब्यौरे भी दर्ज करवाएगा (अधिकांश शहरों में पहले से ही ऐसा हो रहा है, अधिकांश नगर निगमों के पास पहले से ही जमीन/मकान के रिकार्ड हैं)

20. [सभी]
ये धारा इस ड्राफ्ट के पारित होने के तीन साल बाद लागू होगा (स्पष्टीकरण - इस ड्राफ्ट के पारित होने के 2-3 साल के बाद, रोजगार बढ़ेगा और आम-नागरिक की खरीदने की शक्ति बढ़ेगी) -

यदि किसी व्‍यक्‍ति की गैर-कृषि जमीन 25 वर्ग मीटर से कम है और निर्माण क्षेत्र भी 50 वर्ग मीटर से कम है तो उसे प्रति वर्ष जमीन के लिए 10 रूपए प्रति वर्ग मीटर और हर निर्माण क्षेत्र के लिए 10 रूपए (प्रतिवर्ष) का टैक्‍स देना होगा । संपत्ति-कर के हिसाब के लिए गैर-कृषि भूमि 2 एकड़ ली जायेगी | भूमि या निर्माण क्षेत्र के मालिक को एक फार्म भरना होगा जिसमें उसे खरीद मूल्य, खरीद की तारीख और आज की तिथि तक उसके द्वारा कराए गए हर वर्ष के निर्माण में बदलाव का विस्‍तार से खुलासा करना होगा । निर्माण में 4 वर्ष से पहले के किए गए बदलाव के लिए कोई प्रमाण नहीं देना होगा ।

सैक्शन-6 : परिवारों का पंजीकरण (रेजिस्ट्री), परिवार के सदस्‍य बनने के लिए पात्रता

21. [सभी]
सम्‍पत्ति-कर के प्रयोजन (उद्देश्य) से कोई व्‍यक्‍ति स्‍वयं को `अकेला` (एकांतवासी) या परिवार का हिस्‍सा, जो उसके लिए सबसे ज्‍यादा उपयुक्‍त हो, के रूप में अपना पंजीकरण करा सकता है ।

22. [सभी]
7. परिवार में परिवार का मुखिया होगा जो 18 वर्ष से अधिक आयु का पुरूष हो सकता है या 18 वर्ष से अधिक आयु की महिला हो सकती है ।

23. [सभी]
मुखिया का पति/पत्‍नी परिवार का सदस्‍य बन सकता/सकती है ।

24. [सभी]
माता और पिता दोनों के सहमति से ही 18 वर्ष से कम आयु के बच्‍चे (संपत्ति-कर की गणना के प्रयोजन के लिए) परिवार का सदस्‍य बन सकते हैं ।

25. [सभी]
यदि बच्‍चों की उम्र 18 वर्ष से अधिक है, तो भी वे और उनके पति/पत्‍नी परिवार का सदस्‍य बन सकते हैं, यदि उन्‍होंने आय-कर विभाग में अलग परिवार के रूप में अपना पंजीकरण नहीं कराया हो और यदि एक पारिवारिक पैन कार्ड नहीं लिया हो ।

26. [सभी]
माता-पिता और सास-ससुर भी परिवार के सदस्‍य हो सकते हैं यदि उनके अलग से परिवार न हों । और बेटे या बेटी के पोते या पोती भी परिवार के सदस्‍य बन सकते हैं यदि पोते-पोती के माता-पिता दोनों उस परिवार के ही सदस्‍य हों ।

27. [सभी]
पोते-पोती के बच्‍चे संपत्ति-कर के मूल्यांकन के लिए `परिवार का सदस्‍य` नहीं हो सकते ।

28. [सभी]
परिवार मुखिया के अविवाहित या तालाकशुदा भाई-बहन परिवार के सदस्‍य हो सकते हैं, लेकिन विवाहित भाई-बहन परिवार के सदस्‍य नहीं हो सकते । मुखिया के भाई-बहन के पुत्र या पुत्री परिवार के सदस्य नहीं हो सकते हैं ।

29. [सभी]
एक व्‍यक्‍ति 2 परिवार का सदस्‍य नहीं बन सकता है ।

30. [सभी]
`अकेला` के रूप में दर्ज लोग `परिवार के सदस्‍य` नहीं हो सकते हैं ।

31. [सभी]
यदि किसी व्‍यक्‍ति के 3 से ज्यादा बच्‍चे हैं तो सम्‍पत्ति-कर के प्रयोजन (उद्देश्य) के लिए केवल 2 ही बच्‍चे परिवार का सदस्‍य हो सकते हैं ।

32. [सभी]
यदि कोई व्‍यक्‍ति सम्‍पत्ति-कर के (प्रयोजन) के लिए परिवार बनाना चाहता है तो उसे सदस्‍यों की सूची के साथ परिवार का पंजीकरण करवाने की जरूरत होगी । वयस्क सदस्‍यों के हस्‍ताक्षर की जरूरत होगी और बच्‍चों के माता-पिता के हस्‍ताक्षर की भी आवश्‍यकता होगी ।

सैक्शन-7 : छूट

33. [सभी]
अकेले व्‍यक्‍ति के लिए छूट की सीमा 25 वर्ग मीटर जमीन और 50 वर्ग मीटर निर्माण क्षेत्र होगी जबकि यह (छूट) परिवार के लिए [25 + 20 × (परिवार के सदस्‍यों की संख्‍या – 1)] वर्ग मीटर जमीन होगी और [50 + 40 × (परिवार के सदस्‍यों की संख्‍या -1)] वर्ग मीटर निर्माण क्षेत्र होगी ।

34. [सभी]
वरिष्‍ठ नागरिकों (बुजुर्गों) के लिए छूट सामान्‍य सीमा की दोगुनी होगी ।

सैक्शन-8 : सम्‍पत्ति का वर्गीकरण – `व्‍यक्‍तिगत`, `अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` और `गैर-व्‍यक्‍तिगत`

35. [सभी]
सम्‍पत्ति-कर के प्रयोजन के लिए, सम्‍पत्ति का मालिक अपनी सम्‍पत्ति को `व्‍यक्‍तिगत`, `अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` और `गैर-व्‍यक्‍तिगत` के रूप में परिभाषित कर सकता है (बता सकता है) जो इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सी मूल्‍यांकन योजना उसके लिए सबसे ज्‍यादा अनुकूल (फायदेमंद) हो सकती है ।

36. [सभी]
यदि कोई व्‍यक्‍ति `अकेला` है तो सम्‍पत्तियों का एक समूह उसके संपत्ति-कर गणना करने के लिए `व्‍यक्‍तिगत` हो सकता है यदि –
  • सम्‍पत्ति का कोई और संयुक्‍त-मालिक (सह-मालिक) न हो
  • यदि संपत्‍तियों के भूमि क्षेत्रफल का जोड़ 25 वर्ग मीटर से कम हो
  • यदि संपत्‍तियों के निर्माण क्षेत्रफल (का जोड़) 50 वर्ग मीटर से कम हो

37. [सभी]
यदि कोई व्‍यक्‍ति परिवार का मुखिया है तो सम्‍पत्तियों का एक समूह संपत्ति-कर गणना करने के लिए `व्‍यक्‍तिगत` हो सकता है यदि –
  • सम्‍पत्तियों के सभी मालिक उसके परिवार के भी सदस्‍य हों, और कोई भी परिवार से बाहर न हो
  • परिवार के प्रत्‍येक सदस्‍य को (सम्‍पत्ति) मालिक होने की जरूरत नहीं है
  • सम्‍पत्तियों के भूमि क्षेत्रफल का जोड़ [25 + 20 × (परिवार के सदस्‍यों की संख्‍या – 1)] वर्ग मीटर से कम हो
  • उसके निर्माण क्षेत्रफल का जोड़ [50 + 40 × (परिवार के सदस्‍यों की संख्‍या -1)] वर्ग मीटर से कम हो

38. [सभी]
किसी `अकेले` व्‍यक्‍ति के पास अधिक से अधिक एक `अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` सम्‍पत्ति हो सकती है यदि वह निम्‍नलिखित शर्तें पूरी करता है –
  • `अकेले` व्‍यक्‍ति ने किसी भी सम्‍पत्ति को `व्‍यक्‍तिगत` सम्‍पत्ति न बनाया हो
  • वह सम्‍पत्ति का एकमात्र (अकेला) मालिक हो
(उदहारण-यदि कोई संपत्ति 25 वर्ग मीटर से अधिक हो तो, और उसे अर्ध-व्यक्तिगत संपत्ति घोषित किया है तो 25 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, कर का हिसाब उससे लगेगा)

39. [सभी]
किसी परिवार के पास अधिक से अधिक एक `अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` सम्‍पत्ति हो सकती है यदि वह परिवार निम्‍नलिखित शर्तें पूरी करता है –
  • उस परिवार ने किसी भी सम्‍पत्ति को व्‍यक्‍तिगत सम्‍पत्ति न बताया हो
  • कम से कम एक सदस्य के पास कोई भी और `व्यक्तिगत` या `अर्ध-व्यक्तिगत` संपत्ति न हो

40. [सभी]
`अर्ध-व्यक्तिगत` संपत्ति में छूट की सीमा [20 * N] वर्ग मीटर होगी, जहाँ `N` परिवार के उन सदस्यों की संख्या है जिनके पास कोई भी `व्यक्तिगत` या `अर्ध-व्यक्तिगत` संपत्ति न हो |

संपत्ति में व्‍यक्‍तिगत हिस्‍सा छूट की सीमा भाग क्षेत्रफल (छूट की सीमा/क्षेत्र-फल) होगा और गैर-व्‍यक्‍तिगत हिस्‍सा (1- व्‍यक्‍तिगत हिस्‍सा) होगा ।

41. [सभी]
इस कानून के पारित होने के तीन साल तक, `हिंदू अविभक्त परिवार` एक परिवार सदस्य की तरह गिना जायेगा | 3 साल के बाद, `हिंदू अविभक्त परिवार` की मालिकी सभी परिवार सदस्य, पुरुष और महिला जिनकी आयु 3 वर्ष से अधिक है, उनमें बराबर-बराबर बांटी और सौंपी जायेगी | इस कानून के पारित होने के बाद, `हिंदू अविभक्त परिवार` कोई भी संपत्ति का खरीदार नहीं हो सकता |

42. [सभी]
यदि संपत्ति का 50% या अधिक भाग गैर-व्यक्तिगत इकाईयों जैसे कंपनी, भागीदारी, ट्रस्ट (न्यास), आदि का है, तो वो संपत्ति `गैर-व्यक्तिगत` मानी जायेगी | यदि संपत्ति के कुछ अंश पर भी गारी-व्यक्तिगत इकाईयों की मलिकी है, तो वो संपत्ति `व्यक्तिगत` नहीं मानी जायेगी, वो केवल `गैर-व्यक्तिगत` या `अर्ध-व्यक्तिगत` संपत्ति मानी जायेगी |

43. [सभी]
मालिक या मुखिया किसी भी साल संपत्ति का दर्जा (व्‍यक्‍तिगत , गैर-व्‍यक्‍तिगत या अर्ध-व्यक्तिगत ) को बदल सकता है तीन महीने का नोटिस देकर ।

सैक्शन-9 : संपत्तियों के मूल्‍यों का पंजीकरण

44. [सभी]
संपत्ति कर के प्रयोजन/उद्देश्‍य के लिए, प्रत्‍येक संपत्ति के दो मूल्‍य होंगे – मानक मूल्‍य (स्टैण्डर्ड मूल्य) और सर्किल दर (जंत्री) मूल्‍य।

45 [सभी]
किसी संपत्ति का स्टैण्डर्ड मूल्य (खरीद के समय का सर्किल दर मूल्‍य और प्रत्‍येक वर्ष किए गए निर्माण में बदलाव का जोड़) होगा । बदलाव वही माने जायेंगे जो मालिक द्वारा बताए गए हैं । मालिक को किए गए बदलाव का कोई भी प्रमाण नहीं देना होगा लेकिन उसे किए गए बदलाव के मूल्‍य का खुलासा आय-कर के विवरण (ब्यौरे) में भी करना होगा ।

46. [सभी]
किसी संपत्ति के सर्किल दर मूल्‍य का निर्धारण भूमि और के भवन-निर्माण के यूनिट (एकक) दरों पर आधारित होगा ।

47. [सभी]
सामान्य मार्गदर्शन ये है कि प्रति व्यक्ति 25 वर्ग मीटर (लगभग 250 वर्ग फीट) भूमि और 50 वर्ग मीटर (लगभग 500 वर्ग फीट) निर्माण क्षेत्र के लिए बहुत कम संपत्ति-कर होगा |

और प्रति व्यक्ति 25 वर्ग मीटर (लगभग 250 वर्ग फीट) से अधिक गैर-कृषि भूमि और 50 वर्ग मीटर (लगभग 500 वर्ग फीट) से अधिक निर्माण क्षेत्र के लिए 1% टैक्स लगेगा |

सैक्शन-10 : भूमि/मकान पर संपत्ति-कर

48. [सभी]
`व्‍यक्‍तिगत` संपत्तियों के रूप में बताई गई संपत्तियों पर संपत्ति-टैक्‍स प्रति वर्ष, प्रति वर्ग मीटर 10 रूपए होगा ।

49. [सभी]
`गैर-व्‍यक्‍तिगत` संपत्तियों के लिए, संपत्ति-कर की दर 1 प्रतिशत होगी | दोनों प्रकार के मूल्‍य – मानक मूल्य और सर्किल दर मूल्‍य में से जो अधिक है उसपर 1 प्रतिशत लगेगा ।

50. [सभी]
`अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` संपत्तियों के लिए, संपत्ति-कर, दोनों प्रकार के मूल्‍य – मानक मूल्‍यों और सर्किल दर मूल्‍य में से जो कम है, उसके 1 प्रतिशत को `गैर-व्यक्तिगत हिस्सा` से गुणा करने से प्राप्‍त परिणाम होगा ।

सैक्शन-11 : कर चुकाने की असमर्थता पर

51. [सभी]
यदि कोई व्‍यक्‍ति संपत्ति-कर नहीं चुकाता है तो वह टैक्‍स उस संपत्‍ति पर बकाया रहेगा और उस पर प्रति वर्ष 18 प्रतिशत का ब्‍याज लागू होगा ।

52. [सभी]
यदि संपत्ति `व्‍यक्‍तिगत` या `अर्ध-व्‍यक्‍तिगत` है तो मालिक की मौत हो जाने या संपत्ति के बिक जाने पर कर वसूला जाएगा । संपत्‍ति की कुर्की या जब्‍ती नहीं की जाएगी । इसके अलावा, यदि विरासत में मिली हुई संपत्ति `व्यक्तिगत` या `अर्ध-व्यक्तिगत` है और वारिस संपत्ति-कर देने में असमर्थ है, तो भी उस संपत्ति को जब्त नहीं किया जायेगा या उसकी कुर्की नहीं होगी |

53. [सभी]
यदि कोई संपत्ति `गैर-व्‍यक्‍तिगत` है तो बकाया राशि संपत्ति के मूल्‍य का 25 प्रतिशत से ज्‍यादा हो जाने पर उस संपत्ति की नीलामी कर दी जाएगी ।

संपत्ति-कर संपत्ति की बिक्री या विरासत में मिलने पर लिया जायेगा |

सैक्शन-12 : टैक्स का दोहरा भार कम करना

54. [सभी]
किसी एक वर्ष में `संपत्ति कर` के रूप में चुकाई गई धनराशि का 5 गुना अगले आने वाले वर्ष के आय-कर की में से कम कर दी जाएगी ।

उदाहरण - मान लीजिए, किसी व्यक्ति की वित्त वर्ष जो 2013 में समाप्त हो रहा है, उसमें संपत्ति-कर 1 लाख दिया गया | और मान लीजिए, 2014 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में छूट के बाद कुल आय 12 लाख रुपये थी | तब, उस व्यक्ति को 1 लाख x 5 = 5 लाख रुपयों की संपत्ति-कर में छूट मिलेगी | तब, उस व्यक्ति की कुल आय जिसपर आय-कर लगेगा होगी = 12 लाख रुपये - 5 लाख रुपये = 7 लाख रुपये

ये धारा संपत्ति-कर के लागू होने के 3 वर्ष के बाद निष्प्रभाव (अमान्य) हो जायेगा और उसके बाद अगली धारा लागू होगी |

55. [सभी]
ये धारा संपत्ति-कर के लागू होने के 3 वर्ष के बाद लागू होगी, जब इसके पहली वाली धारा रद्द हो जायेगी |

जो संपत्ति-कर दिया जाना है, उसमें से निम्नलिखित वस्तुओं को "संपत्ति कर छूट रकम" में जोड़ा जायेगा और संपत्ति कर से घटाया जायेगा -

  1. संपत्ति के मालिक द्वारा पिछले वर्ष दी गयी अपने कर्मचारियों को वेतन का 30 प्रतिशत
  2. संपत्ति के मालिक द्वारा पिछले 3 वर्ष भरा गया आय-कर
  3. संपत्ति-मालिक द्वारा पिछले वर्ष भरा गया ईंधन टैक्स, बिजली टैक्स, पानी टैक्स, संपत्ति-मालिक के टेलीफोन पर टेलीफोन बिल टैक्स

`संपत्ति-कर छूट रकम` आगे आने वाले वर्षों के संपत्ति-कर मूल्यांकन में भी गिनी जा सकती है लेकिन मालिक के मरने के बाद ये वारिस को हस्तांतरित नहीं की जा सकती |

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विरासत-कर

कोई भी विरासत-कर नहीं होना चाहिए क्यूंकि ये छोटे व्यापारियों के विरुद्ध है और इस प्रकार सभी को समान अवसर नहीं होगा | क्यूंकि बड़े व्यापारी अपना पैसा ट्रस्ट में डाल सकते हैं या विदेशी गुप्त खाते में जमा करवा सकते हैं और इस प्रकार टैक्स देने से बच जायेंगे |

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प्रतिस्पर्धात्मक संपत्ति का खरीदना-बेचना (संपत्ति खरीदने का मुकाबला)

संख्या. [अफसर को निर्देश]
प्रक्रिया

1. [ सभी ]
नागरिक शब्द का अर्थ पंजीकृत मतदाता होगा |
शब्द “कर सकता है “ का मतलब कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं है | इस का मतलब “ कर सकता है “ या “करने की आवश्यकता / जरूरत नहीं है “ है

2. [जिला कलेक्टर (डी सी) या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक ऐफिडेविट/हलफनामा जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पेज की फीस लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

3. [तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल या उसके क्लर्क को निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी क्‍लॉज/खण्‍ड के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के क्‍लॉज/खण्‍ड में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट/हलफनामा पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल देगा ।

4. [सभी]
हाँ-ना की संख्या प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अफसरों और जज पर बाध्य नहीं होंगे |

5. [सभी]
ये कानून `गैर-कृषि भूमि और निर्माण (बिल्डिंग) पर प्रभावशाली संपत्ति-कर` कहलायेगा | प्रधानमंत्री इस कानून का नाम बदल भी सकते हैं | आय-कर अधिनियम में जो सैक्शन और धाराएं इस कानून से मेल नहीं खाते, उनको निष्प्रभाव माना जायेगा और रद्द किया जायेगा | बाकी सभी कानून और धाराएं जो इस कानून से मेल नहीं खाते, उनको निष्प्रभाव माना जायेगा और रद्द किया जायेगा |

6. [सभी]
ये नियम उस फ्लैट पर नहीं लागू होगा, जब फ्लैट बेचने वाले के पास केवल एक ही फ्लैट हो और खरीदने वाले के पास भी एक ही फ्लैट हो और उस फ्लैट का सुपर-निर्माण (महा-निर्माण) क्षेत्र-फल 1500 वर्ग फूट से कम हो और उस फ्लैट की कीमत सर्किल दर (जंत्री मूल्य) के समान हो | ऐसे मामलों में, कलेक्टर संपत्ति के खरीदने के लिए कोई भी दूसरा प्रस्ताव नहीं लेगा (जो आगे के धाराओं में बताया गया है)

7. [सभी]
यदि कोई व्यक्ति ने `क` रुपयों का प्लाट/फ्लैट ख़रीदा है, तो उस संपत्ति के सारे विवरण और उसके बेचने का मूल्य अगले दिन सरकार की सार्वजनिक वेबसाइट पर डाला जायेगा |

8. [सभी]
30 दिन के अंदर, कलेक्टर (या उसके द्वारा नियुक्त आफ्सर) उस प्लाट/फ्लैट को प्राप्त कर सकता है खरीदने वाले व्यक्ति को (1.15 *`क`) रुपये देकर, केवल तभी जब कोई तीसरा दल (पार्टी) कलेक्टर को वो संपत्ति खरीदने के लिए (1.20*`क`) रुपयों का प्रस्ताव देता है |

9. [सभी]
यदि एक से ज्यादा खरीददार कलेक्टर के पास वो संपत्ति खरीदने का प्रस्ताव देता है, तो कलेक्टर उस खरीददार को चुनेगा जो उसे सबसे ज्यादा संपत्ति खरीदने का लिए प्रस्ताव देता है | मान लीजिए कि बोली लगाने वाले ने [(1.20 + `ख`) * `क`] रुपयों का प्रस्ताव किया वो संपत्ति खरीदने के लिए | तब खरीदने वाले को (1.15 * `क`) रुपये मिलेंगे, कलेक्टर सरकार को (0.05 + `ख`/2) रुपये देगा और उस संपत्ति के प्रारंभिक बेचने वाले को (`ख`/2 * `क`) रुपये मिलेंगे | [ ताकि उस संपत्ति के प्रारंभिक बेचनेवाले की भी रूचि हो काले धन के बारे में जानकारी देने के लिए ]

नोट -

ये ऊपर का प्रस्तावित भारतीय राजपत्र (सरकारी आदेश) अन्यायपूर्ण या जबरन बिक्री नहीं है | क्योंकि बेचने वाले ने अपनी संपत्ति बेची है , और वो अभी तक खरीदने वाले के नाम पर हस्तांतरित (बदली) नहीं हुई है , इसीलिए खरीदने वाले के अभी तक उसपर अधिकार नहीं है | और यदि संपत्ति की बिक्री में कोई काला धन का उपयोग नहीं हुआ है, तो खरीदने वाले को 30 दिनों के कम समय में 20% मुनाफा होगा — कोई भी वैध धंधा इतना लाभदायक नहीं होता |

धारा-1 ये सुनिश्चित करता है कि संपत्ति के छोटे खरीदने वाले और छोटे बेचने वालों को कोई कठिनाई नहीं होगी |

कोई भी भूमि का उपहार दे सकता है सरकार को उपहार-कर देने के बाद |


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PostPosted: Thu Nov 06, 2014 4:46 pm 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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Dear All,

Land cannot be easily hidden as compared to cash etc. So, Effective Wealth tax is more efficient to collect and gives more tax collection than income tax or other forms of tax. Wealth tax reduces land hoarding and decreases value of land, increases growth and reduces unemployment. How ?

Consider a person who has bought 10 flats for hoarding. Say each flat is worth Rs 20 lakhs. As per wealth tax law, he may be able to skip out 1 or 2 flats, but on the rest, he will have to pay 1% of Rs 1.60 cr as tax every year or pay.

The effective wealth tax stops hoarding of the land and thus brings down the land prices. Since land is main component required to start any business, due to the lower land prices, lower cost of land lowers the cost of land for entrepreneurs leading to flourishing of new businesses and thus number of business increase, and so does employment. In Other Words, Effective Wealth tax does not discourage.

Effective Wealth tax does not harm those who are not hoarding land and property and are utilising the property by using it for industry, business etc. since there will exemptions for income tax paid and salaries given to employees.

Those who want that Effective Wealth Tax on Non-Agricultural Land and Construction be passed, please send following order to your MP via SMS or twitter ---

"Please promote via website, private member bill etc. and get passed drafts in tinyurl.com/SampattiKar as ordinance. Or will not vote for you/your party. Also setup a public sms server on your site like smstoneta.com so that SMS-opinions of citizens are seen along with their voter IDs by all without need to login"

Besides sending sms to your MP, also display proof of your opinion along with voter id by sending 2 SMS-es to already existing public sms server. If you want to get implemented drafts for `Effective Wealth Tax on Non-Agricultural Land and Construction`, then please SMS 0191 to http://www.smstoneta.com after registering at the site. For more details, see http://www.smstoneta.com

And also inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send this SMS to their MP

==========================

Dear MP,

If you have received the internet link to this status via SMS etc. from your voter, then it is order to you, to promote the following draft via your website, private member bill etc. and order PM to pass these following drafts as Ordinance and print them in Gazette.

Effective Wealth Tax on Non-Agricultural Land and Construction - Proposed Draft

================================================

Section-1 : Registering citizens Approvals for Chairman, CBDT (Central Board of Direct Taxation) candidates to collect Wealth Tax

No. [Instruction to Officer]
Procedure

1. [ ALL ]
The word citizen would mean a registered voter
The word `may` means may or need not, and clearly means “no binding”.

2. [Instruction to District Collector]
If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit onto PM’s website for Rs 20/- per page, so that anyone can see the affidavit as it is, along with voter ID number of the citizen, without any need to log-in.

3. [Instruction to Talati (also known as Village officer or Patwari)]
If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

4. [ALL]
Yes-No counts will not be binding on PM, MPs, Officers and judges.

5. [ALL]
This law will be called as `Effective Wealth Tax on Non-Agricultural Land and Construction`. PM may change the name of law. All sections in Income Tax Act which conflict with this section will be deemed as void and deleted. All other laws and clauses which conflict with this law will be deemed as void and deleted.

6. [Instruction to PM]
PM would give additional authority to Chairman, CBDT = Central Board of Direct Taxation to collect wealth tax under this law.

7. [Instruction to DC (District Collector)]
If any citizen wishes to be Chairman, CBDT, he may appear in person or place affidavit before DC. The DC is hereby ordered to accept his candidacy for CBDT Chairman after taking fee same as deposit amount for MP election. DC will issue him a serial number.

8. [Instruction to DC (District Collector)]
The DC may assign above task to any class-1 officer.

9. [Instruction to Talati (also known as Village officer or Patwari)]
A citizen can come in person to Talati’s office, pay Rs 3 fee and approves at most five persons for CED (Chief, Enforcement Directorate) position. The Talati will enter his approvals in the computer and issue him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

10. [Instruction to Talati (also known as Village officer or Patwari)]
The Talati will put the preferences of the citizen on a Govt website as decided by the Cabinet Secretary or Collector with citizen’s voter-ID number and his preferences. By default the Government website will be PM website.

11. [Instruction to Talati (also known as Village officer or Patwari)]
If a citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

12. [Instruction to District Collector]
On every Monday, Collector may publish approval counts for each candidate.

Section-2 : Replacement of CBDT Chairman

13. [Instruction to PM]
If a candidate gets approval of over 35% of ALL registered citizen-voters (ALL, not just those who have filed their approval) in Nation and 1% more approvals than existing CBDT chairman, then PM may expel the existing CBDT Chairman and appoint the person with highest approval count as CBDT Chairman.

14. [Instruction to PM]
If the person’s approval is below 33%, then PM may or need not replace him with his appointee. But as long as approval is above 33% , PM need not replace him with his appointee. Discretion of PM will be final.

Section 3 : Appointment of DWTEO = District Wealth Tax Evolution Officer and District registrar

15. [Instruction to Chairman, CBDT]
Chairman, CBDT ( Central Board of Direct Taxation) will appoint one or more than one officer per district called as WTEO = Wealth Tax Evolution Officer.

16. [Instruction to Chairman, CBDT]
Chairman, CBDT ( Central Board of Direct Taxation) will appoint one registrar for every district.

Section 4 : Ownership of Wealth

17. [Instruction to Chairman, CBDT]
Chairman, CBDT (Central Board of Direct Taxation) will order WTEO to make list of plots and constructions in the district along with names of owners and their percentage ownership.

Section 5 : Registration of properties

18. [ALL]
If an individual owns a flat in a housing society, then land owned by him will be land owned by the housing society multiplied by % shares he owns in that society.

19. [ALL]
Each person/company with a land or house will register his property with the Registrar. The owner will also register its area, exact location and other details as asked by the Registrar (this is already done in most cities; most municipalities already have land/building records)

20. [ALL]
This clause will come into effect after three years of passing of this draft (Explanation - In 2-3 years of passing of this draft, employment will increase and purchasing power of commons will increase) -

If the individual owns non-agricultural land below 25 sq meter and construction area is also below 50 sq meters, then tax due on him will be Rs 10 per sqmt of land and Rs 10 per construction area per year. Equivalent agricultural land for wealth tax purpose calculations will be 2 acres per person. The owner does need to fill the form disclosing purchase price, purchase date and year wise alterations he has made till date. No proofs for alterations will be required for alterations made before 4 years.

Section 6 : Registration of families, eligibility for becoming member of family

21. [ALL]
For the purpose of wealth tax, an individual can register himself as solitaire (alone) or part of family. which ever suits him best.

22. [ALL]
Family will consist of Head of the family, who can be male or female above 18 years of age.

23. [ALL]
The spouse of Head can become member of the family.

24. [ALL]
The children below 18 can become member of family with approval of both parents

25. [ALL]
If the children are above 18, they as well their spouses can still become member family if they have not registered their own separate families with income tax department and obtain a Family PAN card.

26. [ALL]
The parents and parents-in-law too can be member of the family unless they have separate families. And grand children of son as well as daughter can become member of family if both parents of the grand-child are members of the family.

27. [ALL]
The great grand children cannot become member of family

28. [ALL]
Unmarried or divorced siblings of the Head can be member of family, but married siblings cannot become member of the family. The sons and daughters of siblings of the Head cannot become member of the family

29. [ALL]
One person cannot be member of two families.

30. [ALL]
Persons registered as solitaire cannot be part of family.

31. [ALL]
If a person has more than 3 kids, only 2 can be part of family for wealth tax purposes.

32. [ALL]
If a person wants to form family for wealth tax person, he will need to register the family with list of members. The signature of adult members will be required and signature of parents of children will also be required.

Section 7 : Exemption

33. [ALL]
The exemption limit for solitaire person will be 25 sq meter of land and 50 sq meter of construction, while that for family will be [25 + 20 * (number of family members-1) ] sq meter of land and [50 + 40 * (number of family members -1)] sq m of construction area

34. [ALL]
Exemption for senior citizen will be twice of the normal limit.

Section 8 : Classification of property – personal, semi-personal and impersonal

35. [ALL]
For the purpose of wealth tax, the owners can define the property as personal or impersonal or semi-personal depending on which valuation scheme suits him best.

36. [ALL]
If person is Solitaire, then a group of properties will qualify as personal if
  • the property has no co-owner
  • the sum of land area of properties is below 25 sqm
  • the sum construction area of properties is below 50 sqm

37. [ALL]
If person is Head of the family, then a group of properties will qualify as personal if
  • all owners of properties are family members, and none is outside the family
  • every family member need not be owner
  • sum of land area of properties is below [25 + 20 * (number of family members-1) ] sqm
  • sum of construction areas is below [50 + 40 * (number of family members -1)] sqm

38. [ALL]
There can at most one semi-personal property per solitaire person if it meets following requirement
  • the solitaire person has not labelled any property as personal property
  • he is the sole owner of the property

39. [ALL]
There can at most one semi-personal property for a family if it meets following requirement
  • the family has not labeled any property as personal property
  • atleast one member has no other personal or semi-personal property.

40. [ALL]
The exemption limit in semi-personal property will be [20 * N]sqm, where N is number of family members, who have no personal property or semi personal property.

The personal fraction in the property is Exemption Limit/Area and impersonal fraction will be (1 – personal fraction).

41. [ALL]
For 3 years after passing this law, Hindu Undivided Family (HUF) will be counted as 1 family member. After 3 years, owner-ship of HUF will be transferred equally amongst its male as well as female family members who are alive and over 3 years of age. After this law comes, HUF cannot be buyer of any property.

42. [ALL]
If 50% or more of a property is owned by non-personal entities such as Company, Partnership, Trusts, etc. will be taken as impersonal property. If property is even partially owned by non-personal entities, then it cannot be personal property and can only be impersonal or semi-personal property.

43. [ALL]
The owner or Head can change the label on property from personal to impersonal to semi-personal any year.

Section 9 : Registration of properties’ values

44. [ALL]
For the purpose of the wealth tax, there will be two values of each property --- standard value and circle rate (Jantri) value.

45 [ALL]
The standard value of a property will be (circle rate price at the time of purchase plus alterations made each year). The alterations will be as disclosed by the owner. The owner will not be required to provide any proof of alteration made, but must disclose the value of alteration made in the income tax statements as well.

46. [ALL]
The circle rate value of a property will be value based on unit rates of land and construction.

47. [ALL]
The general guideline is that there will be very low tax upto 25 sq meters (approx. 250 sq ft) and 50 sq meters (500 sq ft approx) of construction space per person.

And tax of 1% of market value above 25 sq meters (250 sq ft approx) of non-agricultural land and 50 sq meters (500 sq ft approx) of construction space will apply.

Section 10 : Tax on the land/house

48. [ALL]
The tax on properties which get labeled as personal properties will be Rs 10 per sqm per year.

49. [ALL]
On impersonal properties, the tax rate will be 1% of higher of the two values – standard value and circle rate value

50. [ALL]
On semi-personal properties, the tax rate will be 1% of lower of the two values - standard value and circle rate value multiplied by impersonal fraction

Section 11 : On inability to pay taxes

51. [ALL]
If a person does not pay wealth tax, the tax will be due on the property and an 18% per year interest will apply.

52. [ALL]
If the property is personal or semi-personal, and one wealth owner has not paid the tax then property will not be confiscated or auctioned. The property tax will be collected from the owner at the time of sale or inheritance. Also, if the property inherited is personal or semi-personal property and inheritance received is unable to pay then also property will not be confiscated or auctioned.

53. [ALL]
If the property is impersonal, the property will be auctioned when the due amount crosses 25% of the value of the property

Property tax will be collected upon sale or inheritance.

Section 12 : Reducing double burden (Removing Double Taxation)

54. [ALL]
Five times the amount paid in wealth tax in a given year will be deductible from the income of the next year while calculating income tax.

Example - Say In financial year ending 2013 wealth paid was Rs. 100,000. And Say in Financial year ending 2014 total income minus applicable deduction was rupees 12,00,000. Then the assesse will get deduction of Rs 100,000 X 5 = Rs. 500,000. So, his taxable income will be Rs 12,00,000 - Rs 5,00,000 = Rs. 7,00,000

This clause will be void after 3 years after this law has been passed and following clause will come into effect after that.

55. [ALL]
This clause will come into effect after 3 years after this law has been passed and above clause has been repealed.

From the wealth tax payable, following items will be calculated as Wealth Tax Credit (WTC) and will be deductible from wealth tax -

  1. 30% of the salaries paid in the previous year to the employees of wealth owner.
  2. Income tax paid by the wealth owner in the previous 3 years.
  3. Fuel Tax, Electricity Tax, Water Tax, Telephone Bill Tax paid by the wealth owner on connections owned wealth owner in the previous year.

Wealth Tax Credit can be forwarded to next Wealth Tax assessment years but cannot be transferred to the heir after death of the owner.
--------------------------------------

Inheritance Tax

There should be no inheritance tax since it generates a non-level playing field and is against Indian small businesses. Big businessmen can put their wealth in trusts and abroad and thus get away from being taxed.

--------------------------------------------

Deemed Auction on sale of Property = Competitive Buyout Act

No. [Instruction to Officer]
Procedure

1. [ALL]
The word citizen would mean a registered voter
The word may means may or need not, and clearly means “no binding”.

2. [Instruction to District Collector]
If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan affidavit along with voter ID number of the citizen onto PM’s website for Rs 20/- per page.

3. [Instruction to Talati (also known as Village Officer or Patwari)]
If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

4. [ALL]
Yes-No counts will not be binding on PM, MPs, Officers and judges.

5. [ALL]
This law will be called as Competitive Buyout Act. PM may or may not change the name of law. All sections in Income Tax act which conflict with this section will be deemed as void and deleted. All other laws which conflict with this law will be deemed as void and deleted.

6. [ALL]
The rule will not apply on a flat when seller owns only one flat and buyer too has less than 1 flat and area of the flat is below 1500 sqft super built up. This rule will not apply where both buyer and seller are private parties and none is a Govt entity . The Govt entity would mean any entity which is 51% or more owned by Central , State or District / Municipal Govts or PSUs owned by Govt. In such case, Collector shall not make any counter offer described in next clauses.

7. [Collector or person appointed by Collector]
If anyone has purchased a plot or flat for Rs X, the details of the property such as location of plot , area of plot , plot-id, construction area , construction description to the best of knowledge, picture of the plot , location of the plot on the map and the price at which the plot was sold will be put on the website next day by Collector or person appointed by Collector.

8. [ALL]
Within 30 days Collector (or officer deputed by him) can obtain that plot\flat by paying (1.15 * Rs X) to buyer, if and only when a third party Z comes and gives offer of (1.20 * Rs X) to the Collector. Collector will wait for another 30 days for another bid which must be 25% higher than the bid last made. No more bid will be considered after 60 days of the original sale. The final buyer will be declared as owner only after no more bid comes until 60 days of the original sale.

9. [ALL]
If more than one offer makers approach Collector, then the Collector will chose the buyer who offers highest price. Say bidder offers (1.20 + Y) * Rs X. Then buyer will get (1.15 * Rs X), the Collector will keep (0.05 + Y/2) * Rs X and the original seller will get (Y/2 * Rs. X)

-------------------------------------------------------------

Footnote-

The above proposed Gazette Notification is not unfair or forced sale. Because seller has sold the property, and it is yet to be transferred in the buyer’s name. So buyer has no rights over it as of yet. And the buyer is getting 25% extra in a short period of 30 days — no business can be so profitable.

The clause-6 ensures that small buyers and small sellers will not face any difficulty.

Anyone can still gift a property by paying Gift tax.

======= end of sms text ====

Dear MP,

If you have received the link to this law-draft then it is an order from YOUR voter (and NOT this author) to print the following law-draft in Gazette

===== start of the law-draft ====

// General comments
These comments are guidelines to Jurors and all , but not operative part of the law-draft. The law enables govt officer titled SLSSO to enable third party to give bids which are 25% higher than price buyer has paid for land within 30 days. If buyer has paid the market price, then such bid will rarely come in 30 days. So in very rare case only, the law will affect genuine buyer, but the law will not affect genuine buyer adversely. But if buyer has under-reported the price , then he may lose the plot. section-3 is the main section. The other sections are just generic sections. The law enables SLSSO to inform third parties to bid against a lower price reporting. But what will 'force' the SLSSO do carry out his job? The answer is --- the right to recall SLSSO clauses given in RTR-SLSSO section
/end of comments//

section-1 : Basic definitions

1.1 The word citizen in this draft would mean a registered voter

1.2 The word land in this draft will include all plots, agricultural land and flats, offices, buildings, all constructions that create ownership over a plot.

1.3 The word flat in this draft will include all construction --- apartments , bungalows , offices, buildings, warehouses, industrial shades and all other constructions, and also includes land on which ownership comes due to ownership of the flat.

1.4 This act will not cover sales where open fair auction was held before the sale. Whether auction held was open or fair will be decided by the Jurors in Jury Trial randomly chosen by SLSSO.

1.4 The word sale will include sale , gifts outside family as well as rental agreements over 20 years. The word sale will not cover inheritance. The gifts between close family members as defined in Income Tax Act will not be considered as sale. However , if a family member gifts away a gift received within 1 year, then it will be considered as a sale. If the plot / flat is owned by company or trust, then any transfer of name will be considered as sale.

section-2 : Main officers and their staff, offices

2.1 ( instruction to CM )

The CM will appoint an officer titled as SLSSO = State Land Sale Supervising Officer to reduce the use of unaccounted cash in the sale of plots and flats. The citizens of the state may replace him using Right to Recall SLSSO clauses listed in RTR-SLSSO section in this draft.

2.2 ( instruction to SLSSO, CM , MLAs , citizens )

SLSSO will prepare guidelines and give fund requirements for running his offices across the state. The guidelines will come into effect after CM prints them in Gazette or after MLAs pass them as legislation or after citizens approve them using clauses given in the TCP-section of this draft

2.3 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will recruit existing officers from State Govt , after approval of the respective heads. SLSSO will appoint one DLSSO = District Land Sale Supervising Officer per District, and one TLSSO = Tahsil Land Sales Supervising Officers per Tahsil. They will all work under State Govt under SLLSO.

2.4 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will also setup website to perform his tasks and tasks of DLSSO, TLSSO , land buyers, land sellers and land sale registration officers in State Govt

2.5 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will issue 2 newspaper advertisements of A4 size in each district on front page bottom left. The newspapers he will select will be the two of largest selling newspapers of the local language in that district as per Registrar of Newspapers. The rates will be as per the rates decided by Information and Broadcasting Ministry. The advertisement will have necessary instructions for the citizens.

2.8 ( instruction to SLSSO , all citizens , all land owners in India )

Each person , partnership, other companies , trusts , co-operative society , PSU , Govt entity, foreigner and all land / flat owners will register the details of all plots / constructions they partly or wholly own in India, within 90 days after newspaper advertisements are issued. The registration will be done with TLSSO designated by SLSSO. The land /flat owners will also register the shares they own in co-operative housing society or commercial complexes in which they own flats. All land / flat owners will also register the claims they have whether the claims are filed in court or not. SLSSO will enable citizens to file claims and ownership statements over net and also enable citizens to file claims and ownership statement at TLSSO = Tahsil Land Sales Supervising Officers in each Tahsil / Ward offices. SLSSO may impose a fine equal to 0.03% of value of property per week for delay in registration. The delay in filing will NOT remove the claim of a person.

2.8 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will put all claims and ownership records he has obtained on the net , along with name of owners , their parents’ names, their PAN card number, voter-id, aadhar card number , their parents id numbers, photographs of male owners but not the photograph of the female owners. In case of female owners, SLSSO will put picture and ids of any close male relative or any close male associate or lawyer that the female owner approves.

2.9 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will also obtain land / flat records , plots' boundaries records from all govt bodies such as collector's office , municipality records etc.

2.10 ( instruction to all land owners , SLSSO )

Whenever a seller sells a land / flat , both the buyer and seller will both separately register the details of the sale . Both will report plot-id, plot location , plot size , construction size , names and ids of buyers and sellers, and the price paid to the buyer within 7 days after the sale at SLSSO office or his website. The penalty for late-reporting will be 0.01% per day of the property price.

2.11 ( instruction to TLSSO )

Whenever the TLSSO = Tahsil Land Sale Supervising Officer comes know about sale of plot / flat , he will upload all details on website such as price , location of plot , area of plot , plot-id, construction area , construction description to the best of his knowledge , picture of the plot , location of the plot on the map , the id of the seller , name of the seller , picture if the seller only if the seller is male , picture of a male relative of the seller if the seller is female and same details of the buyers. And if the buyer is company / trust , then TLSSO will put names and ids of the trustees and the owners on the website. Except in case of public limited company , where only company name will be shown , with names of directors and principal share owners, but not all share-owners.

section-3 : Obtaining bids from third parties

3.1 ( instruction to SLSSO )

SLSSO will work to get bids for land or constructions / flats done 90 days AFTER SLSSO has given the advertisements in the newspaper described in later clause in this draft. SLSSO will not work to get bids over the older sale deeds. SLSSO will also cover rental agreements longer than 20 years, but not below or equal to 20 years. SLSSO will cover only those sales where both buyers are private parties and none is a Govt entity . The Govt entity would mean any entity which is 51% or more owned by Central , State or District / Municipal Govts or PSUs owned by Govt. SLSSO will also not cover sales where open fair auction was held before the sale. Whether auction held was open or fair will be decided by the Jurors in Jury Trial related clauses in this draft.

3.2 ( instruction to TLSSO )

Whenever a sale of land / flat is sold , the TLSSO = Tahsil Land Sale Supervising Officer comes know about sale of plot / flat , he will upload all details on website such as location of plot , area of plot , plot-id, construction area , construction description to the best of his knowledge , picture of the plot , location of the plot on the map and the price at which the plot was sold.

3.2 (instruction to SLSSO , DLSSO , TLSSO )

The SLSSO etc will try to obtain third party bids which are 25% higher than the price given by the buyer. If a third party comes within 30 days with over 25% more than the sale price, then SLSSO will give 120% of the sale price to the buyer, and put the name of third party as next potential owner. And after taking his bid, he will wait for another 30 days for another bid which must be 25% higher than the bid last made. The final buyer will be declared as owner only after no more bid comes.

Example-1

a) say A is the owner of a plot / flat . Say buyer B has paid Rs 1 crore and A reports at TLSSO that he has sold the plot to B

b) say within 30 days , say C comes and offers Rs 1.25 crore. Then TLSSO deposit Rs 1.2 crore in account of B and remove claim of B. And Rs 5 lakhs will be deposited in the account of State Govt

c) say within 30 days after A has sold, C1, C2 and C3 come with offer of Rs 1.25 crore , Rs 1.35 crore and Rs 1.50 crore. Then TLSSO will take claim of C3 , remove name of B, take Rs 1.50 crore , give Rs 1.20 crore to B and deposit the rest in account of State Govt

d) once the claim of C (or C3) is put for Rs 1.25 crore , then TLSSO wait for another 30 days. The next acceptable bid will be now 25% then final price i.e. Rs 1.25 * 125 %= Rs 1.56 crore .

e) so if D comes and makes a bid of say Rs 1.60 crore, then TLSSO will deposit will deposit Rs 1.56 crore in the account of C and wait for another 30 days

f) if no additional bid comes 30 days after final the sale request, then TLSSO will stop taking bid and transfer the plot / flat to the buyer or the last bidder.

3.3 ( instruction to SLSSO )

(3.3.1) SLSSO will apply the system on open land plot and land plots with one construction unit such as tenement / bungalows , with circle rate above Rs 2 crore within 90 days after said advertisement is given newspaper.

(3.3.2) For agricultural plots too, the limit will be Rs 2 crore of circle rate.

(3.3.3) For first year, SLSSO will not apply this system on smaller plots and construction units which share land

(3.3.4) After one year, SLSSO will apply this system on all open plots irrespective of value including agricultural plots and bungalows, but not on schemes which have construction units which share land and value is below Rs 2 crore

(3.3.5) After two years, SLSSO will apply this system on all plots and all construction units.

(3.3.6) After three years, the margin for open land will reduce from 20% to 5% and for construction units which do not share land will be also 10%. And after three years, the margin for construction unit which share land will be 15%.

section-4 : Right to Recall SLSSO

4.1 ( instruction to District Collector or officer he deputes )

If any citizen of India wishes to become SLSSO , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the District Collector, then the District Collector would accept his candidacy for SLSSO after taking filing fee same as deposit amount for MP election and put the name of the candidate on CM website.

4.2 (instruction to Talati , or Talati’s Clerks)

If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the SLSSO position, then the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

4.3 ( instruction to Talati )

The Talati will put the preferences of the citizen on CM's website with citizen’s voter-ID number and his preferences so that all can see the same without any need to log-in.

4.4 (instruction to Talati)

If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

4.5 (instruction to Cabinet Secretary)

On every 5th of month, the CS may publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.

4.6 (instruction to CM )

If a candidate gets approval of over 35% of ALL registered citizen-voters (ALL, not just those who have filed their approval) in the state and 2% more approvals than existing SLSSO, then CM may or need not expel the existing SLSSO and may or need not appoint the person with highest approval count as SLSSO . The decision of CM will be final.

section-5 : TCP-clauses

TCP.1 ( instruction to District Collector )

if any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at Collector’s office and Collector or his clerk will post the affidavit on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20/- per page.

TCP.2 (instruction to Talati or Patwari)

If any citizens want to register his opposition to this law-draft or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister.


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PostPosted: Sun Aug 16, 2015 10:49 pm 
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Wealth tax equals to 2% of land value MINUS income tax paid minus 15% of salaries paid minus electricity tax paid minus excise and other taxes paid MINUS wealth tax credit of previous year.

This will ensure that companies and individuals with huge VACANT and UNUSED lands will have to pay huge tax.


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PostPosted: Thu Feb 11, 2016 8:13 am 
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http://tinyurl.com/SampattiKarBharat

राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित संपत्ति कर का कानूनी ड्राफ्ट, जिसे गेजेट में प्रकाशित करने की हम मांग कर रहे है :
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सरकार चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है, यह धन जनता पर लगाए गए करो से आता है । एक अच्छी कर प्रणाली देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है, जबकि बुरी कर प्रणाली से शोषण और गरीबी को बढ़ावा मिलता है, अत: नागरिको को कर व्यवस्था में रुचि लेनी चाहिए, चाहे इन्हें पढना नीरस और समझना दुर्बोध ही क्यों न हो ।
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भारत में अधिकतर कर प्रतिगामी है तथा केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों ने मिलकर लगभग एक दर्जन अनुपयोगी कर लगा रखे है, जिससे छोटी उद्योग इकाइयों तथा करदाताओ को नुक्सान उठाना पड़ता है । राईट टू रिकाल ग्रुप एक्साइज, वेट, जीएसटी, एलबीटी, ओक्ट्रोय आदि करो के स्थान पर संपत्ति कर का प्रस्ताव कर रहा है, जिससे औद्योगिक इकाइयों तथा आम करदाताओ को राहत मिलेगी । प्रस्तावित संपत्ति कर के आने से जमीनों की कीमतें 5 से दस गुना तक कम हो जायेगी जिससे उद्योगों का विकास होगा, भू संसाधन का समान वितरण होगा, गरीबी कम होगी तथा सरकार को इतना राजस्व मिलने लगेगा कि हम भारत की सेना को मजबूत बना सके ।
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ड्राफ्ट का प्रारम्भ :
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सेक्शन -1. परिभाषाएं
(1.1) इस ड्राफ्ट में नागरिक शब्द का आशय भारत का पंजीकृत व्यस्क मतदाता है ।
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(1.2 ) इस ड्राफ्ट में भूमि शब्द में भूखंड, कृषि भूखंड, फ्लेट्स, इमारतें, कार्यालय, तथा किसी भूखंड पर निर्माण से प्राप्त हुआ स्वामित्व शामिल है । शब्द फ्लेट में सभी प्रकार के निर्माण, अपार्टमेन्ट, बंगले, कार्यालय, गोदाम, इमारते, औद्योगिक शेड्स तथा इनमे किये गए सभी प्रकार के निर्माण शामिल है ।
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सेक्शन -2. मुख्य अधिकारी तथा उनका स्टाफ, कार्यालय ।
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(2.1) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
प्रधानमन्त्री संपत्ति कर संग्रह के लिए राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी पदनाम से एक राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी की नियुक्ति करेंगे । नागरिको को यह अधिकार होगा कि वे ड्राफ्ट में वर्णित राईट टू रिकाल प्रावधानों का प्रयोग कर राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी को बदल सकेंगे ।
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(2.2) [राष्ट्रीय संपत्ति अधिकारी, प्रधानमन्त्री, सांसद तथा नागरिको के लिए निर्देश]
राष्ट्रीय भूमि अधिकारी गाइड लाइन तैयार करेगा, तथा पूरे देश में अपनी कार्यालयी गतिविधियों के संचालन के लिए आवश्यक धन का ब्यौरा प्रस्तुत करेगा । यह गाइड लाइन्स प्रभावी होगी, जबकि प्रधानमन्त्री इन्हें राजपत्र में प्रकाशित कर देते है, या संसद इन्हें स्वीकृत कर देती है, या इस ड्राफ्ट में वर्णित टी सी पी के प्रावधानों के अनुसार नागरिक इन्हें अनुमोदित कर देते है ।
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(2.3) [राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के लिए निर्देश]
राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी केंद्र अथवा राज्य सरकारों में कार्यरत कार्मिको में से प्रत्येक राज्य में एक राज्य संपत्ति कर अधिकारी, प्रत्येक जिले में एक जिला संपत्ति अधिकारी तथा प्रत्येक तहसील में तहसील संपत्ति कर अधिकारियों की नियुक्ति करेगा । ऐसी नियुक्तियों के लिए राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी अमुक कार्मिको के सम्बंधित उच्च अधिकारियों से अनुमति लेगा । ये सभी अधिकारी केंद्र सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के अधीन कार्य करेंगे ।
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सेक्शन -3. संपत्ति कर नियम बनाने तथा उनमें परिवर्तन करने के लिए निर्देश :
(3.1) संसद इन संपत्ति कर कानूनों में आवश्यकतानुसार संशोधन कर सकेगी, तथा प्रधानमन्त्री भी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से इन कानूनों में वांछित संशोधन कर सकेंगे या नये विनियम बना सकेंगे, जो कि इस अधिनियम के अंतर्गत अधिशासित हो ।
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(3.2) राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी संपत्ति कर की गणना तथा संग्रह के लिए आवश्यक कार्यालयी आदेश (सर्कुलर) जारी कर सकेगा ।
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(3.3) जब राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी कोई सर्कुलर जारी करेगा तो ऐसा सर्कुलर सभी जिलो के जिला संपत्ति कर अधिकारियों को भेजा जाएगा । जिला संपत्ति अधिकारी अमुक जिले की मतदाता सूची में से अक्रमत: विधि से 12 नागरिको की ज्यूरी बुलाएगा तथा ज्युरी सदस्यों के सामने इस सर्कुलर की व्याख्या करेगा । ज्यूरी किसी कर विशेषग्य या अन्य किसी नागरिक से इस सर्कुलर पर सलाह ले सकेगी । यदि पूरे देश के इन कुल ज्यूरी सदस्यों का बहुमत ऐसे किसी सर्कुलर का विरोध करता है, तो राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी इस्तीफा दे सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नही है, अथवा वह ऐसे सर्कुलर को रद्द कर सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नही है । इस विषय पर राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी का फैसला अंतिम होगा ।
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(3.4) नागरिक इस ड्राफ्ट में वर्णित टी सी पी प्रावधानों का उपयोग करते हुए कोई सर्कुलर जारी कर सकेंगे ।
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सेक्शन - 4. संपत्ति कर प्रतिवेदन (वेल्थ टेक्स रिटर्न) प्रस्तुत करना :
(4.1) ऐसे नागरिक जिनकी कुल संपत्ति कर मुक्त संपत्ति सीमा से कम है, को छोड़ते हुए सभी संपत्ति स्वामियों, सभी विदेशी इकाइयों, सभी ट्रस्टो तथा सभी कम्पनियों को संपत्ति कर प्रतिवेदन जमा करना अनिवार्य होगा ।
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(4.2) किसी वित्तीय वर्ष की समाप्ति के 210 दिवस के भीतर तथा आयकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के 30 दिनों के भीतर संपत्ति कर प्रतिवेदन जमा करना अनिवार्य होगा ।
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(4.3) संपत्ति कर प्रतिवेदन जमा करने के लिए करदाता अपने पेन कार्ड या आधार कार्ड का प्रयोग करेगा । यदि किसी करदाता के पास उपरोक्त दोनों कार्ड नही है, तो करदाता इस क़ानून को राजपत्र में प्रकाशित किये जाने के 3 महीने के भीतर इनमे से कोई एक पहचान पत्र बनवायेगा ।
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(4.4) कर्ता हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए अलग से कर प्रतिवेदन जमा कर सकेगा, जिसमे किसी प्रकार की मूल कटौतियां में छूट प्राप्त नही होगी, या अपनी संपत्ति को हिन्दू अविभाजित परिवार से संयुक्त करके भी कर प्रतिवेदन जमा कर सकेगा ।
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सेक्शन -5. संपत्ति कर से सामान्य छूट तथा राहतें :
(5.1) अवैयक्तिक इकाइयों जैसे कम्पनियाँ, ट्रस्ट तथा हिन्दू अविभाजित परिवार आदि के लिए सामान्य छूट तथा राहतें शून्य होगी ।
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(5.2) नागरिक जिनकी आयु 60 वर्ष से अधिक है, को सामान्य छूट एवं राहतों की नीचे दी गयी सूची में से दोगुना तथा 80 वर्ष से अधिक आयु होने पर छूटों का चार गुना लाभ मिलेगा । विधवाओं तथा विधुरों को भी सूचीगत सामान्य छूटों का दोगुना लाभ मिलेगा । यद्यपि 60 वर्ष से अधिक आयु की विधवाओं और विधुरो को छूटो में लाभ दोगुना ही होगा न कि चार गुना, तथा विधवाओं तथा विधुरो की आयु 80 वर्ष से अधिक होने पर भी छूट की तय सीमा आठ गुना के स्थान पर चार गुना ही रहेगी ।
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(5.3) उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्यों को किया जा सकेगा । पारिवारिक सदस्य होने की अर्हता के प्रावधान इसी ड्राफ्ट के अन्य सेक्शन में दिए गए है ।
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(5.4). प्रति व्यक्ति 25 वर्ग मीटर तक का अकृषि भूखंड तथा उपयोग में न ली गयी छूटें पारिवारिक सदस्यों को हस्तांतरित की जा सकेगी ।
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(5.5). प्रति व्यक्ति 50 वर्ग मीटर का निर्माण तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्यों को किया जा सकेगा ।
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(5.6). कृषि भूमि जो कि प्रति व्यक्ति दो एकड़ से कम हो तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्य को किया जा सकेगा ।
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(5.7). प्रति पुरुष 50,000 रू से कम मूल्य के तथा प्रति स्त्री 2,50,000 रू से कम मूल्य के स्वर्ण/चांदी/रत्न/कीमती पत्थर/जेवरात तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण परिवार के मुखिया को किया जा सकेगा ।
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(5.8). प्रति व्यक्ति 1 लाख रू मूल्य से कम का वाहन एवं उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्यों को किया जा सकेगा ।
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(5.9). सभी कंपनियों के ऐसे शेयर/बॉन्ड/ऋण पत्र जिन पर अमुक कंपनी संपत्ति कर चुका रही हो, तो इन प्रतिभूतियों को रखने वाले स्वामी को संपत्ति कर में छूट प्राप्त होगी ।
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(5.10). किसी व्यक्ति के स्वामित्व वाले एक लाख रू से कम मूल्य के शेयर/बॉन्ड/ऋण पत्र जिन पर अमुक कम्पनी संपत्ति कर चुका रही है जिसने इन्हें जारी किया है, ऐसी प्रतिभूतियों की कटौतियां/छूट अहस्तांतरणीय होगी ।
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(5.11). प्रति व्यक्ति, एक लाख रू से कम नकद राशि तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्य को किया जा सकेगा ।
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(5.12). प्रति व्यक्ति 3 लाख रू से कम के फर्नीचर, विद्युतीय इलेक्ट्रोनिक उपकरण, चित्र, कलाकृतियाँ तथा भारी साजो सामान हार्डवेयर आदि तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्य को किया जा सकेगा ।
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(5.13). भारत से बाहर स्थित संपत्ति पर कोई सामान्य छूट प्राप्त नही होगी। यदि व्यक्ति लौटा हुआ अप्रवासी भारतीय है, तो 10 लाख तक की संपत्ति तथा उपयोग में न ली गयी छूटों का हस्तांतरण पारिवारिक सदस्य को किया जा सकेगा ।
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(5.14). व्यक्ति तथा अवैयक्तिक इकाई को बौद्धिक संपदा जैसे सॉफ्टवेयर, पेटेंट्स, कॉपीराईट, ब्रांडनेम आदि पर संपत्ति कर से छूट होगी ।
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सेक्शन - 6. पूर्व वर्ष के लिए संपत्ति कर उपार्जन ( वेल्थ टेक्स क्रेडिट) का निर्धारण :
पिछले चार वर्ष के दौरान अदा किये गए विभिन्न कर तथा किये गए अन्य भुगतानों की गणना वेल्थ टेक्स क्रेडिट में की जा सकेगी ।
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(6.1). वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अलग से की जायेगी । इसे कर निर्धारण वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट लिखा जाएगा । किसी वित्तीय वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट अगले वर्ष के लिए होगा, जैसा कि नीचे दर्शाया गया है ।
WTC-AY-YYYY या WTC-FY-YYYY+1
( WTC - वेल्थ टेक्स क्रेडिट, AY - कर निर्धारण वर्ष, FY - वित्तीय वर्ष, YYYY - सम्बंधित वर्ष )
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(6.2). वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना संपत्ति कर लागू होने के 4 वर्ष पहले से की जायेगी ।
.
स्पष्टीकरण :
उदाहरण के लिए यदि वेल्थ टेक्स वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2016 - 31 मार्च 2017 से प्रारम्भ होता है, तो कर निर्धारण वर्ष 2017 से 2018 होगा ।
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अत: वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना पिछले 4 वर्षो के लिए निम्नलिखित तरीके से की जायेगी ।
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कर निर्धारण वर्ष 2013-2014 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना : वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2012 - 31 मार्च 2013 के लिए चुकाए गए करों के आधार पर कर निर्धारण वर्ष 31 मार्च 2013 - 1 अप्रेल 2014 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना की जायेगी ।
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कर निर्धारण वर्ष 2014-2015 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना : वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2013 - 31 मार्च 2014 के लिए चुकाए गए करो के आधार पर कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रेल 2014 - 31 मार्च 2015 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना की जायेगी ।
.
कर निर्धारण वर्ष 2015 -2016 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना : वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2014 - 31 मार्च 2015 के लिए चुकाए गए करो के आधार पर कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रेल 2015 - 31 मार्च 2016 के वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना की जायेगी ।
.
कर निर्धारण वर्ष 2016 - 2017 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना : वित्तीय वर्ष 1 अप्रेल 2015 - 31 मार्च 2016 के लिए चुकाए गए करो के आधार पर कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रेल 2016 - 31 मार्च 2017 के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना की जायेगी ।
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(6.3). किसी कर निर्धारण वर्ष में प्राप्त की गयी अवैतनिक आय पर चुकाया गया आयकर, तदनुसार उस कर निर्धारण वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट होगा ।
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(6.4). वैतनिक आय पर चुकाये गए आयकर का 50% वेल्थ टेक्स क्रेडिट होगा ।
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स्पष्टीकरण :
यदि वैतनिक आय X, अवैतनिक आय Y तथा चुकाया गया कुल आयकर T है तो वैतनिक आय पर चुकाया गया कर T×X ÷ X+Y , तथा अवैतनिक आय पर चुकाया गया आयकर T×Y ÷ X+Y का फलित होगा ।
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(6.5). कस्टम ड्यूटी के अलावा किसी कर निर्धारण वर्ष में केंद्र, राज्य, स्थानीय निकायों को चुकाए गए वेल्थ टेक्स, सर्विस टेक्स, वैट, सीएसटी, चुंगी, पे रोल टेक्स, प्रोफेशनल टेक्स, एल बी टी, मुन्सिपल प्रोपर्टी टेक्स तथा चुकाए गए अन्य करो को उस कर निर्धारण वर्ष में वेल्थ टेक्स क्रेडिट में शामिल किया जाएगा । चुकाई गयी कस्टम ड्यूटी को संपत्ति कर में शामिल नही किया जाएगा ।
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(6.6). प्रत्येक कर्मचारी को भुगतान किये गए वेतन के निर्दिष्ट भाग को वेल्थ टेक्स क्रेडिट में शामिल किया जाएगा ।
यदि वेतन 2 लाख से कम है तो 0%, यदि वेतन 2 लाख से 5 लाख के मध्य है तो 5%, यदि वेतन 5 लाख से 10 लाख के मध्य है तो 10% तथा 10 लाख से अधिक वेतन होने पर 15% ।
.
स्पष्टीकरण : यदि किसी नियोक्ता ने अपने चार कर्मचारियों को 1,50,000, 2,60,000, 6,00,000 तथा 12,000,000 का भुगतान किया है, तो कर्मचारियों के वेतन के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट क्रमश: 0, 3000, 25000 तथा 95000 होगा । इन चारो राशियों का योगफल ही कर्मचारियों के वेतन के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट होगा ।
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(6.7). नियोक्ता की और से चुकाए गए प्रोविडेंट फंड का 15% भाग नियोक्ता के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट होगा ।
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(6.8). नही चुकाए गए तथा विलम्ब से चुकाए गए करो पर धारित सभी जुर्मानो को शामिल किया जाएगा । नही चुकाए गए तथा विलम्ब से चुकाए गए भुगतानो पर अदा किये गए ब्याज का सिर्फ 50% ही शामिल किया जाएगा ।
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(6.9). किसी तिथि के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की राशि भुगतान योग्य नही है, बल्कि उस वित्तीय या सम्बंधित कर निर्धारण वर्ष के लिए देय राशि है ।
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(6.10). किसी कर निर्धारण वर्ष के वेल्थ टेक्स क्रेडिट में सुधार करने के लिए या दावा प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय सीमा अमुक वर्ष की समाप्ति से अगले दो वर्ष तक की होगी । पिछले चार वर्ष के वेल्थ टेक्स क्रेडिट के लिए यह समय सीमा इस अधिनियम के लागू होने के बाद के तीन वर्ष तक की होगी ।
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(6.11). वेल्थ टेक्स क्रेडिट राशि के सम्बन्ध में कोई विवाद होने पर अंतिम रूप से सरकारी रेकार्ड्स को ही प्रमाणिक और सही माना जाएगा । ज्यूरी वेल्थ टेक्स क्रेडिट की राशि को पुनर्निर्धारित कर सकेगी ।
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सेक्शन - 7. अगले वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना :
कर निर्धारण वर्ष के बाद वाले वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट की गणना निम्नानुसार की जायेगी ।
(7.1). अवैतनिक आय जिन पर आयकर का भुगतान किया गया है ।
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(7.2). वैतनिक आय पर अदा किये गए आयकर का 50% ।
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(7.3). कर निर्धारण वर्ष के लिए सीमा शुल्क को छोड़ते हुए केंद्र, राज्य तथा स्थानीय निकायों द्वारा लागू अन्य सभी देय कर । इनमें पेनल्टी, ब्याज तथा अदा किये गए अन्य जुर्मानों को शामिल नही किया जाएगा ।
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(7.4). भुगतान किये गए वेतन का 15%, यदि ऐसे भुगतान बेंक खातो में किये गए हो, या नकद दिए गए हो, यदि ऐसे नकद भुगतानो के अभिलेख वेतनभोगी बेंक के नकद खातो में या आयकर रिटर्न में व्यवस्थित रूप से दर्ज करता हो ।
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(7.5). नियोक्ता द्वारा अदा किये गए संचित निधियों (प्रोविडेंट फंड) का 15% ।
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(7.6). सेवाग्राहियों की संख्या का 500 से गुणनफल ।
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सेक्शन - 8. संपत्ति कर की गणना :
(8.1). भूमि तथा निर्माण के मूल्य का निर्धारण, सर्कल रेट तथा क्रय मूल्य में से जो राशि अधिक हो, पर किया जाएगा । भूमि पर किसी प्रकार का मूल्य ह्रास लागू नही होगा । मूल्यवृद्धि सूचकांक को समायोजित करते हुए, निर्माण पर 5% सालाना मूल्य ह्रास प्रभावी होगा ।
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(8.2) मशीनरी, वाहन तथा हार्डवेयर का मूल्य निर्धारण क्रय मूल्य पर किया जाएगा, जिन पर 10% सालाना की दर से मूल्य ह्रास प्रभावी होगा, किन्तु इन जिंसो पर मूल्यवृद्धी सूचकांक लागू नही होगा । फर्नीचर पर 5% सालाना मूल्य ह्रास लागू होगा तथा मूल्य वृद्धि सूचकांक को भी समायोजित किया जाएगा । फर्नीचर का मूल्य निर्धारण क्रय मूल्य पर होगा ।
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(8.3). स्वर्ण, चांदी, धातुएं, हीरे तथा कीमती पत्थरों का मूल्य निर्धारण लागू वर्ष के बाजार मूल्य पर किया जाएगा ।
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(8.4). अंश मूल्य : अ) यदि कंपनी अंशो पर संपत्ति कर चुका रही है तो अंशो का करयोग्य मूल्य लागू वर्ष में पूँजी बाजार का औसत होगा, जिसमें से भूमि, निर्माण, स्वर्ण, चांदी तथा कीमती पत्थरो का मूल्य घटाया जाएगा ।
ब) यदि अंशो पर संपत्ति कर अंश धारक चुका रहा है, तो यह मूल्य लागू वर्ष में रहे अंश मूल्य का औसत रहेगा ।
स) अंशो पर संपत्ति कर का भुगतान अंशधारक या कंपनी में से किसी एक को ही करना होगा । दोनो को नहीं ।
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(8.5) प्रत्येक मामले में निर्धारित सामान्य छूटें कटौती योग्य होगी ।
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(8.6). अनुच्छेद 8.1, 8.2, 8.3 तथा धारा 8.4 में वर्णित क्रमश: भूमि, निर्माण, मशीनरी, फर्नीचर, स्वर्ण, धातुएं तथा अंश मूल्यों का 1% संपत्ति कर देय होगा, जिसमे से प्राप्त सामान्य छूटें घटा दी जायेगी ।
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(8.7). यदि किसी कर निर्धारण वर्ष में संपत्ति कर नकारात्मक रहता है, तो यह उस वर्ष के लिए वेल्थ टेक्स क्रेडिट होगा ।
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(8.8). यदि किसी वर्ष के लिए संपत्ति कर सकारात्मक रहता है तो इसमें से सबसे पुराने वर्ष के वेल्थ टेक्स क्रेडिट को घटाया जाएगा । इस प्रक्रिया में जब सभी पुराने वर्षो के वेल्थ टेक्स क्रेडिट्स को समायोजित करने के बाद यदि वेल्थ टेक्स सकारात्मक रहता है, तब करदाता को इस कर का भुगतान करना होगा ।
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(8.9). यदि करदाता कर चुकाने में असमर्थ है तो वह सम्बंधित संपत्ति को स्तंभित (लॉकिंग) करने का आग्रह कर सकेगा । ऐसी सम्बंधित संपत्ति पर करदाता द्वारा 9% सालाना की दर से ब्याज देय होगा । किन्तु ऐसी संपत्ति का मूल्य बकाया राशि से कम से कम दोगुना अवश्य होना चाहिए ।
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सेक्शन - 9. परिवार का सदस्य बनने की अर्हताएं :
(9.1). संपत्ति कर निर्धारण के उद्देश्य के लिए कोई व्यक्ति अपनी सुविधानुसार स्वयं को एक परिवार या उसके सदस्य के रूप में पंजीकृत कर सकेगा ।
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(9.2). एक व्यक्ति दो परिवारों का सदस्य नहीं हो सकेगा । व्यक्ति जिसने स्वयं को परिवार के रूप में पंजीकृत किया है, वह अन्य किसी परिवार का सदस्य नहीं हो सकेगा । संपत्ति कर के उद्देश्य से कोई अवैयक्तिक इकाई या विदेशी परिवार का सदस्य नही हो सकेगा ।
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(9.3). किसी परिवार के अधिकतम सदस्यों की संख्या 12 से अधिक नही हो सकेगी । परिवार के किसी भी सदस्य की अधिकतम संपत्ति 25 तक ही हो सकेगी । इसमें भूमि तथा निर्माण मूल्य को शामिल नहीं किया जाएगा ।
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(9.4). परिवार का मुखिया परिवार में शामिल माना जाएगा, जो कि स्त्री या पुरुष कोई भी हो सकेगा, जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो ।
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(9.5). परिवार के मुखिया का जीवन साथी परिवार का सदस्य हो सकेगा ।
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(9.6). बच्चे परिवार के सदस्य हो सकेंगे ।
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(9.7). माता-पिता तथा सास-श्वसुर परिवार के सदस्य हो सकेंगे ।
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(9.8). पुत्र या पुत्री के बच्चे परिवार के सदस्य बन सकेंगे, लेकिन तब, जबकि ऐसे पुत्र तथा पुत्री अमुक परिवार के सदस्य हो ।
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(9.9). पोते-पोतियों के बच्चे परिवार के सदस्य नही हो सकेंगे ।
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(9.10). परिवार के मुखिया कि अविवाहित या तलाकशुदा बहिन परिवार की सदस्य हो सकेगी । भाई जो कि 18 वर्ष से कम आयु का है, परिवार का सदस्य हो सकेगा ।
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(9.11). भाई अथवा बहन के बच्चे परिवार के सदस्य नही हो सकेंगे ।
.
(9.12). उपरोक्त वर्णित व्यक्तियों के अलावा कोई भी परिवार का सदस्य नही हो सकेगा ।
.
(9.13). यदि किसी व्यक्ति के 4 संतानों से अधिक है तो सम्पति कर निर्धारण के लिए अधिकतम 4 संताने ही परिवार के सदस्य के रूप में पंजीकृत हो सकेगी ।
.
(9.14). यदि कोई व्यक्ति संपत्ति कर निर्धारण के उद्देश्य से परिवार का गठन करता है तो उसे पंजीयन के लिए पटवारी/तलाटी के कार्यालय में व्यक्तिश: रूप से उपस्थित होना होगा । परिवार के सदस्यों को भी देश के किसी पटवारी/तलाटी कार्यालय में उपस्थित होकर इसकी पुष्टि करनी होगी । बच्चो के पंजीयन के लिए उसके माता तथा पिता दोनों की सहमती आवश्यक होगी ।
.
(9.15). परिवार के सदस्य प्राप्त सामान्य छूटों का हस्तांतरण परिवार के अन्य सदस्यों को कर सकेंगे ।
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(9.16). परिवार के सदस्य वेल्थ टेक्स क्रेडिट किसी को भी हस्तांतरित नहीं कर सकेंगे ।
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सेक्शन - 10. सम्बद्धता :
[पटवारी/तलाटी, राष्ट्रीय संपत्ति अधिकारी तथा सभी नागरिको के लिए निर्देश]
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(10.1) कोई भी मतदाता अपने पेन कार्ड या आधार कार्ड के साथ पटवारी के कार्यालय में उपस्थित होकर यह घोषणा कर सकेगा कि वह किसी इकाई जैसे व्यक्ति, संस्था, कंपनी, ट्रस्ट, विदेशी इकाई आदि की सेवाएँ ग्रहण कर रहा है । मतदाता अमुक इकाई की आधार या पेन संख्या भी प्रस्तुत करेगा । संपत्ति कर के सन्दर्भ में इसे सम्बद्धता कहा जाएगा ।
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(10.2). पटवारी इस संबद्धता को नागरिक तथा अनुमोदित इकाई की आधार या पेन संख्या के साथ राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी की वेबसाईट पर दर्ज करेगा ।
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(10.3). पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर नागरिक अपनी सम्बद्धता को किसी भी दिन रद्द कर सकेंगे ।
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(10.4). नागरिक अधिक से अधिक पांच इकाइयों के साथ सम्बद्ध हो सकेंगे । यदि कोई नागरिक किसी एक इकाई को अपनी दो, तीन, चार या पांचो सम्बद्धताएं आवंटित करना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकेगा ।
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(10.5). कोई इकाई नागरिको से प्राप्त अपनी संबद्धताओ को अन्य इकाई को हस्तांतरित कर सकेगी । राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी इसके लिए आवश्यक कार्यलयी शुल्क वसूल कर सकेगा ।
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(10.6). इकाईयां ग्रहण की गयी प्रत्येक सम्बद्धता के लिए 500 रू के बराबर वेल्थ टेक्स क्रेडिट प्राप्त करेगी ।
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(10.7). 18 वर्ष से कम आयु के बच्चो की सम्बद्धता को आवंटित करने का अधिकार उसकी माता के पास होगा । यदि ऐसे अवयस्क की माता की मृत्यु हो चुकी हो तो उसके पिता इस अधिकार का उपयोग कर सकेंगे ।
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सेक्शन - J. ज्यूरी ट्रायल
संपत्ति कर के विवादों के निपटान के लिए जूरी ट्रायल प्रावधान :
(J.1). [राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी तथा सभी करदाताओं के लिए निर्देश]
यदि राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी या उसके अधिकारियों और करदाता के मध्य कोई विवाद खड़ा होता है, तो राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी अंकेक्षको की एक कमिटी तथा नागरिको की ज्यूरी का गठन करेगा । यह सेक्शन ऐसी अंकेक्षक कमिटी तथा ज्यूरी के गठन के विनियमों से सम्बंधित है ।
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(J.2). [राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के लिए निर्देश]
राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी प्रत्येक जिले में एक जिला ज्यूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य में एक राज्य ज्यूरी प्रशासक तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय ज्यूरी प्रशासक की नियुक्तियां करेगा ।
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(J.3). [राष्ट्रीय ज्यूरी प्रशासक, राज्य ज्यूरी प्रशासक, जिला ज्यूरी प्रशासक, सभी संपत्ति कर अधिकारियों और करदाताओं के लिए निर्देश]
(J.3.1) कर अधिकारी तथा करदाता के बीच किसी प्रकार का विवाद होने पर मामला उस जिले में दर्ज किया जाएगा जिस जिले में करदाता मतदाता है या निवास निवास करता है या जहाँ करदाता का पंजीकृत कार्यालय है । यदि करदाता या कर अधिकारी किसी मामले की सुनवाई को उसी राज्य के अन्य जिले में स्थानांतरित करना चाहते है तो उन्हें ऐसा करने के लिए अमुक राज्य के राज्य ज्यूरी प्रशासक अथवा राज्य के उच्च न्यायलय से अनुमति लेनी होगी । यदि ऐसा जिला राज्य के बाहर स्थित है तो ऐसी अनुमति राष्ट्रीय ज्यूरी प्रशासक या उच्चतम न्यायलय से ली जानी चाहिए ।
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(J.3.2). करदाता तथा कर अधिकारी के बीच किसी विवाद की सुनवाई के लिए अमुक जिले का जिला ज्यूरी प्रशासक अंकेक्षक सूची में से रेंडम/अक्रमत: विधि से 3 से 7 अंकेक्षको का चयन करेगा, यदि ये अंकेक्षक अपनी सेवा देने के लिए उपलब्ध रहने की सहमती देते है । ऐसे अंकेक्षको की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के मध्य होनी चाहिए तथा उन्हें अंकेक्षण कार्यो का 5 वर्षो का अनुभव हो ।
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(J.3.3). ज्यूरी के गठन के लिए जिला ज्यूरी प्रशासक भारत की मतदाता सूची में से अक्रमत: विधि से 30 से 55 आयु वर्ग के नागरिको का चयन करेगा । किन्तु ऐसे नागरिक पिछले 10 वर्ष में किसी ज्यूरी सभा के सदस्य न रहे हो, तथा न ही उन्हें किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो ।
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(J.3.4). ज्यूरी सदस्यों की संख्या : किसी ज्यूरी के लिए ज्यूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 तथा अधिकतम संख्या 1500 तक हो सकेगी । यदि संपत्ति कर अधिकारी द्वारा की गयी दावा राशि 10 लाख से तक है तो ज्यूरी सदस्यों की संख्या 12 होगी तथा दावा राशि 10 लाख से अधिक होने पर प्रति 10 लाख पर एक ज्यूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा, किन्तु यह संख्या 1500 से अधिक नही बढाई जा सकेगी ।
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(J.3.5). ज्यूरी सदस्यों का चयन उन जिलों से किया जाएगा, जिन जिलो के जिला न्यायलय वीडियो कोंफ्रेंसिंग के जरिये उस जिले के न्यायलय से जुड़े हुए है, जिस जिले में सुनवाई की जा रही है । यदि मामला ऐसे जिले में दर्ज किया गया है, जिसके न्यायलय में वीडियो कोंफ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध नही है, तो सभी ज्यूरी सदस्यों का चयन उसी जिले की मतदाता सूची में से किया जाएगा ।
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(J.3.6). संपत्ति के मूल्य निर्धारण सम्बन्धी विवाद : यदि विवाद सिर्फ संपत्ति के मूल्य निर्धारण को लेकर है, तो विवाद के निपटान के लिए उसी जिले की मतदाता सूची से ज्यूरी सदस्यों का चयन किया जा सकेगा । 10 लाख तक के मूल्य निर्धारण के लिए ज्यूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 होगी, तथा सम्पत्ति का मूल्य प्रति 10 लाख बढ़ने पर एक ज्यूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा, किन्तु ज्यूरी सदस्यों की अधिकतम संख्या 1500 तक सीमित रहेगी । यद्यपि राष्ट्रीय, राज्य या जिला संपत्ति कर अधिकारी मामले की सुनवाई अन्य स्थान पर स्थानान्तरण करने के लिए पूछ सकते है ।
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(J.3.7). ज्यूरी द्वारा दिए गए फैसलों के लिए अपील प्रवृत अन्य कानूनों के अनुसार ज्यूरी और उच्च न्यायलय, तथा बाद में ज्यूरी और उच्चतम न्यायलय में की जा सकेगी ।
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सेक्शन - RTR. राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के लिए राईट टू रिकाल प्रक्रिया :
(RTR.1). [केबिनेट सचिव, केंद्र सरकार या उनके द्वारा नियुक्त किये गए अधिकारी के लिए निर्देश]
यदि कोई नागरिक मतदाता राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी बनना चाहता है तो वह केबिनेट सचिव के समक्ष उपस्थित होकर या अपने वकील के माध्यम से शपथपत्र प्रस्तुत करेगा । केबिनेट सचिव सांसद के चुनाव के लिए निर्धारित राशि के बराबर राशि जमा कर ऐसे शपथपत्र को दर्ज कर लेगा ।
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(RTR.2). [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
यदि अमुक जिले का मतदाता पटवारी कार्यालय में अपने मतदाता पहचान पत्र के साथ उपस्थित होकर राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के लिए अनुमोदन दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू शुल्क लेकर उसे कम्पूटर में दर्ज करेगा तथा बदले में एक रसीद देगा, जिस पर उसकी मतदाता पहचान संख्या, अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम, समय तथा दिनांक अंकित करेगा । मतदाता अधिक से अधिक पांच उम्मीदवारों को अनुमोदित कर सकेगा ।
.
(RTR.3). [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
पटवारी नागरिक द्वारा दर्ज करायी गयी उम्मीदवारों की प्राथमिकता के अनुसार अनुमोदनों को प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर उसकी मतदाता संख्या के साथ दर्ज करेगा ।
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(RTR.4). [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
यदि कोई मतदाता अपने किसी अनुमोदन को रद्द करवाता है तो पटवारी बिना कोई शुल्क लिए उसे रद्द कर देगा, तथा इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा ।
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(RTR.5). [केबिनेट सचिव के लिए निर्देश]
पिछले महीने के अंतिम दिन तक उम्मीदवारों को प्राप्त नागरिको के अनुमोदनों की संख्या को केबिनेट सचिव हर महीने की 5 तारीख को प्रकाशित करेगा ।
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(RTR.6). [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
यदि किसी उम्मीदवार को कुल मतदाताओं के 51% अनुमोदन प्राप्त हो जाते है, ( कुल पंजीकृत मतदाताओं के 51%, न कि उन मतदाताओं के जिन्होंने अनुमोदन किया है ) तो प्रधानमन्त्री उसे राष्ट्रीय संपत्ति कर अधिकारी के पद पर नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है अथवा प्रधानमन्त्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है । इस सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
.
सेक्शन - TCP. टी सी पी - जनता की आवाज के प्रावधान :
(TCP.1). [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में कोई संशोधन करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा और बदले में छपी हुयी रसीद देगा ।
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(TCP.2). [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
यदि कोई मतदाता इस अधिनियम के किसी सेक्शन, अनुच्छेद या धारा में संशोधन चाहता है या टी सी पी की धारा एक के तहत दर्ज किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ या ना दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू लेकर उसे दर्ज करेगा तथा प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा ।
.
(TCP.3). [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
यदि किसी शपथपत्र पर कुल पंजीकृत मतदाताओं के 51% मतदाता हाँ दर्ज कर देते है ( कुल पंजीकृत मतदाताओं के 51%, न कि उनके 51% जिन्होंने अनुमोदन किया है ), तो प्रधानमन्त्री उस पर कार्यवाही कर सकते है या अपना इस्तीफा दे सकते है, अथवा उन्हें ऐसा करने की जरुरत नही है ।


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PostPosted: Thu Feb 11, 2016 8:22 am 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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The proposed WT = wealth law draft is to collect a wealth tax on land, construction, gold, shares, bonds, cash holdings etc . The wealth tax will be about (1% per year of value of (wealth minus basic wealth deductions) ) minus income tax paid, minus other taxes paid minus other contributions and minus wealth tax credit accumulated over past years).
.
Dear citizens of India ,
.
My claim is that the proposed WT-MITMSC = Wealth Tax Minus Income Tax paid Minus Several Credits , will reduce the land prices, and will also reduce speculation in share markets. Reduction in land prices will reduce the amount a person has to spend in buying house or rents, and will increase his incomes minus rent. Reduction in land price will increase business and factories and will reduce unemployment. And it will increase income tax. And the reduction in land price will also reduce the problem of land acquisition.
=====
Pls take a look at the proposed law-draft. For explanation, you can search on FB for Right to Recall Group activists in your city. You can call \ meet them and they will explain the clauses to you. After explanations , if you support this law-draft, then please send following order to MP via SMS.
.
=========== start of order to be sent to MP via SMS ==========
.
Dear MP , I order you to print the law-draft mentioned in http://tinyurl.com/WealthTaxIndia
.
======= end of sms text ====
.
Dear MP,
.
If you have received the link to this law-draft then it is an order from YOUR voter , and NOT this author, to print the following law-draft in Gazette
.
===== start of the law-draft ====
.
section-1 : Basic definitions
.
(1.1) The word citizen in this draft would mean a registered adult voter
.
(1.2) The word land in this draft will include all plots, agricultural land and flats, offices, buildings, ownership over a plot created by owning a consutruction. And the word flat in this draft will include all construction --- apartments , bungalows , offices, buildings, warehouses, industrial shades and all other constructions.
.
section-2 : Main officers and their staff , offices
.
(2.1) ( instruction to PM )
.
The PM will appoint an officer titled as NWTO = National Wealth Tax Officer to collect wealth tax. The citizens of India may replace him using Right to Recall NWTO clauses listed in RTR-NWTO section
.
(2.2) ( instruction to NWTO . PM , MPs , citizens )
.
NWTO will prepare guidelines and give requirements of funds for running his offices across India. The guidelines will come into effect after PM prints them in Gazette or after MPs pass them as legislation or after citizens approve them using clauses given in the TCP-section of this draft
.
(2.3) ( instruction to NWTO )
.
NWTO will recruit existing officers from Central Govt or any State Govt , after approval of their respective heads. NWTO will appoint one SWTO = State Wealth Tax Officer , one DWTO = District Wealth Tax Officer per District, and appoint one TWTO = Tahsil Wealth Tax Officer per Tahsil. They will all work under Central Govt under NWTO .
.
section-3 : Guidelines to make wealth tax rules and change wealth tax rules
.
(3.1) Parliament may amend this wealth tax laws as necessary. PM too may make rules and amend the rules under this law using GNs as needed.
.
(3.2) NWTO may issue circulars to calculate and collect wealth tax as needed.
.
(3.3) When a circular is issued by NWTO, it will be sent to all DWTO across India who will summon 12 Jurors at random. DWTO will explain the circular to the Jurors and Jurors may ask any CA or any person to present his views on the circular. And if majority of Jurors across India oppose the circular, then NWTO may or need not resign , and may or need not cancel the circular. His decision will be final.
,
(3.4) The citizens may issue a circular using TCP-clauses given in TCP-section of this draft.
.
section-4 : Filing wealth tax return
.
(4.1) Each wealth owner , except Indian citizens who have wealth below basic deductions. All foreign entities, all companies and all trust must file wealth tax returns.
.
(4.2) The wealth tax return must be filed within 210 days after closing of financial year, and must be filed within 30 days after income tax return is filed.
.
(4.3) The tax payer can use his PAN-ID or Adhar-ID to file his wealth disclosure. If he doesn’t have any of the two IDs, then he must obtain one ID within 3 months after this law is printed in Gazette.
.
(4.4) For HUF, the Karta can file separate return for HUF in which HUF will get no basic deductions, or can add HUF’s wealths with his wealth, and file a return.
.
section-5 : Basic deduction from wealth tax
.
This section has basic deduction of human entities below age of 60 years. .
.
(5.1) The basic deductions for all non-person entities , such as companies, trusts, HUFs etc will be zero. The basic deductions for foreigner persons will be zero.
.
(5.2) The basic deductions for persons above age of 60 years will be twice than basic deductions listed below. And for those above age of 80 years will be 4 times the basic deductions. The basic deductions of widows and widowers will be also twice. However, for widows or widowers of above age of 60 years, it will be only 2 times and not four times; and for widows or widowers of above age of 80 years, it will be only 4 times and not eight times.
,
(5.3) Unused deductions can be transferred to a family member. For definition and eligibility of family members, please see later sections
(5.4) the non-agricultural plots - 25 sqmt per person, and unused deductions can be transferred to a family member .
.
(5.5) construction above 50 sqmt per person, and unused deduction can be transferred to a family member.
.
(5.6) agricultural land below 2 acres per family member ; and unused deduction can be transferred to a family member
.
(5.7) gold \ silver \ diamonds \ precious stones \ jewelry worth below Rs 50000 per male person and below Rs 2.5 lakh per female person ; and unused deduction can be transferred head of family.
.
(5.8) vehicles worth below Rs 1 lakh per person ; and unused deduction can be transferred to a family member.
.
(5.9) all shares \ bonds \ debentures owned in companies , in which companies are paying wealth tax on their shares \ bonds \ debentures , will be exempt from share owner
.
(5.10) shares \ bonds \ debentures worth below Rs 100,000 , owned in companies , in which companies are paying wealth tax on their shares \ bonds \ debentures ; this deduction isn’t transferable
.
(5.11) cash-in-hand below Rs 1 lakh per family member ; ; and unused deduction can be transferred to a family member.
.
(5.12) furniture, electrical items, electronic items, hardware, painting, art forms below Rs 3 lakhs per family member; ; and unused deduction can be transferred to a family member
.
(5.13) wealth outside India is not exempt unless person is returning NRI in which case wealth of Rs 10 lakhs per person will be exempt ; and unused deduction can be transferred to family member
.
(5.14) intellectual property such software, brandname, patents, copyrights, will be exempt from wealth tax for person as well as non-person entities
.
section-6 : WTC = Wealth tax credits for previous years
.
Several taxes and other payments made in past 4 years will become wealth tax credit.
.
(6.1) WTC will be calculated for each financial year separately. It will be labeled as WTC-AY-YYYY-(YYYY+1) i.e. WTC for Financial Year starting 1-apr-YYYY to 31-mar-(YYYY+1).
.
(6.2) WTC will be calculated for 4 years before this wealth tax law starts.
.
{ Explanation :
.
FY = Financial Year , AY = Assessment Year.
.
Say wealth tax starts from FY 1-apr-2016 to 31-mar-2017 i.e. AY-2017-2018. and onwards.
.
Then WTC will be calculated for four previous years
.
WTC-AY-2013-2014 : wealth tax credit generated out of taxes paid for FY 1-apr-2012 to 31-mar-2013 i..e AY 1-apr-2013 to 31-mar-2014
.
WTC-AY-2014-2015 : wealth tax credit generated out of taxes paid for FY 1-apr-2013 to 31-mar-2014 , AY 1-apr-2014 to 31-mar-2015
.
WTC-AY-2015-2016 : wealth tax credit generated out of taxes paid for FY 1-apr-2014 to 31-mar-2015 , AY 1-apr-2015 to 31-mar-2016
.
WTC-AY-2016-2017 : wealth tax credit generated out of taxes paid for FY 1-apr-2015 to 31-mar-2016 , AY 1-apr-2016 to 31-mar-2017
}
..
(6.3) pro-rata income tax paid on non-salary income in an AY will be WTC for that AY
.
(6.4) pro-rata 50% income tax paid on salary income will be WTC
.
{ Explanation : if salary income is say Rs X and non salary income is say Rs Y and total tax paid was Rs T, then of tax from salary income will be Rs T * X / (X + Y) and tax paid from non-salary income will be Rs T * Y / (X + Y)
}
.
(6.5) wealth tax \ service tax \ excise \ vat \ octroi \ cst \ local body taxes \ pay roll tax\ professional tax\ municipal property tax and all taxes paid to central govt (except customs) , state govt or local govt in that AY as stated in the return will become WTC for that AY. Customs duty paid will not be counted towards WTC.
.
(6.6) for every employee , (0% of salary below Rs 2 lakhs, 5% of salary between Rs 2 lakhs and Rs 5 lakhs, 10% of salary between Rs 5 lakhs and Rs 10 lakhs ; and 15% of salary over Rs 10 lakhs) will be added to WTC
.
{ Explanation :
Say an employer had 3 employees and salaries paid in an AY were Rs 150,000/- , Rs 260,000/-, Rs 600,000/- and Rs 1200,000/- . The WTC from employee’s salaries will be Rs 0, Rs 3000 , Rs 25000 , Rs 95000/- respectively . Total WTC from employees’ salary will be sum of these four numbers.
}
.
(6.7) for every employer, 15% of the employer side PF paid by the employer will be added to WTC of employer
.
(6.8) The penalties on unpaid or late-paid taxes will be fully included. Only 50% of the interest paid due to non-payment or late-payment will be included.
.
(6.9) WTC will not consider actual date of payment but only the amount due in each FY or corresponding AY
.
(6.10) To claim and correct WTC of a year, a person will have at most 2 years after ending of that AY. For first 4 years’ WTC, it will be till 3 years after the wealth tax law implementation starts.
.
(6.11) In case of dispute on WTC amount, the govt records will be deemed final in case of discrepancy. The Jurors may revise the amount after a trial
.
section-7 : Wealth tax credits for subsequent years
.
For the years after passing the law, the Wealth Tax Credits for an AY consist of following
.
(7.1) income tax paid on non-salary income
.
(7.2) 50% of income tax on salary income
.
(7.3) all other taxes due to central govt (except customs), state govt and local govt , such as in that AY ; penalties and interest paid, and fines paid on taxes will not be included
.
(7.4) 15% of salaries paid by payee a/c cheque , or cash , if employee enters cash salary his cashbook maintained at the bank or mentions in his income tax return
.
(7.5) 15% of PF paid by the employer
.
(7.6) number of service takers multiplied by Rs 500
.
section-8 : Calculation of wealth tax
.
(8.1) LC = Land and construction will be valued at circle rate or purchase price, which ever is higher. There will be no depreciation on land and depreciation on construction will be 5% a year and indexation increase would apply.
.
(8.2) M = Machinery , vehicles, hardware will be valued at purchase price. and 10% annual depreciation and no indexation will apply. Furniture will be valued at purchase price and 5% annual depreciation and indexation will apply
.
(8.3) GS = Gold, silver, metals, diamonds and precious stone will be valued at annual average market price
.
(8.4) SP = (a) If company is paying wealth tax on shares, then taxable share price will be average market capitalization during the year minus value of land, construction, precious metals gold, precious stones (b) if owner is paying wealth tax then it will be average share price across the year (c) either company or owner but not both will pay wealth tax on share
.
(8.5) In each case, applicable basic deductions can be subtracted.
.
(8.6) Wealth tax payable will be 1% of (LC + MF + GS + SP ) minus applicable basic deductions.
.
(8.7) If wealth tax is negative then it will become wealth tax credit for that AY
.
(8.8) if wealth tax payable for that year is positive, then oldest WTC will be used to lower it. And when all WTC are exhausted , the tax payer will be required to pay the wealth tax.
.
(8.9) In case of inability to pay, the tax payer can request locking of his property, and in that case interest of 9% per year will apply. However, the value of property must be at least twice the outstanding tax
.
section-6 : Eligibility to become family member
.
(6.1) For the purpose of wealth tax, an individual can register himself as solitaire i.e. alone or part of family. which ever suits him best.
.
(6.2) One person cannot be member of two families. Persons registered as solitaire cant be member of any family. Non-person entity or foreigner cant be member of family for wealth tax purposes.
.
(6.3) A family cannot have more than 12 members. The family member must not have wealth above Rs 25 crore , not counting land and constructions.
.
(6.4) Family will consist of Head of the family, who can be male or female above 18 years of age.
.
(6.5) The spouses of Head can become member of the family.
.
(6.6) The children can become member of the family
.
(6.7) The parents and parents-in-law can become member of the family
.
(6.8) Children of son / daughter can become member of family , but only if son / daughter is also member of the family.
.
(6.9) The children of grand children cannot become member of the family
.
(6.10) Unmarried or divorced sister of the Head can be member of family. Brother below 18 years can become member of the family.
(6.11) Children of brother or sister cannot become member of family
.
(6.12) No one except above can become member of family
.
(6.13) If a person has more than 4 children, then only 4 can be part of family for wealth tax purposes.
.
(6.14) If a person wants to form family for wealth tax purpose, then he will need to register his family members by personally appearing at Patwari = Talati = Village Officer. And the members too will have too appear at office of any Patwari in India and acknowledge it. For minors, permission of both parents will be needed.
.
(6.15) The family members can transfer their basic deductions amongst themselves
.
(6;.15) The family members cannot transfer their WTC to anyone
.
section-Jury-Trial : Jury Trial for wealth tax disputes
.
(J.1) ( instruction to NWTO , all tax payers)
.
Wherever there is dispute between NWTO or his officer and tax payer, NWTO or his officers will form a CCA = Committee of Chartered Accountants and form a Jury to decide the case. This section gives rules of formation of CCA and the Jury.
.
(J.2) ( instruction to NWTO )
.
NWTO will appoint a Jury Administrator for each District called as DJA = District Jury Administrator, and one Jury Administrator for each State called as SJA = State Jury Administrator, and one Jury Administrator for India called as NJA = National Jury Administrator
.
(J.3) ( instruction to NJA , SJA , DJA, all WT officers , all tax payers)
(J.3.1) A tax dispute between a tax payer and tax officer will be filed in district in which tax payer is voter of or is resident of or has registered offices, in that order. If the tax payer or tax officer wants to change the venue to a district in same state, then may get order from SJA or State High Court. And if either of the two wish to change venue to a district in India outside the State , then he may get order from NJA or Supreme Court.
.
(J.3.2) For every tax dispute in district, the DJA = District Jury Administrator will randomly select 3 to 10 CAs from a list of CAs who have agreed to provide assistance in cases. The CAs selected must be between the age of 30 years and 55 years, and must have 5 years of experience as CA.
.
(J.2.3) DJA will randomly select voters from voter list of India between age of 30 and 55 years. The person must not have appeared in any Jury in past 10 years and must not have faced any conviction in past.
.
(J.3.3) Number of Jurors – The number of Jurors will be at least 12 and at most 1500. The Jurors . number Jurors will be 12, if the wealth tax evasion as claimed by WTO = Wealth Tax Officer is below Rs 10 lakh. And there will 1 extra Jurors for every Rs 10 lakhs of wealth tax evasion as claimed by WTO. The highest size will be 1500 Jurors
.
(J.3.4) Location of Jurors --- The Jurors will be selected from Districts whose District Courts are linked via video conferencing to districts where trial is being run. In the district isn’t connected with any district via video conferencing, then all Jurors will be from District where the case is filed.
.
(J.3.5) Disputes of valuation of wealth – if the dispute is only over valuation of land, then dispute will resolved by the Jurors in that district. The number of Jurors will be 12 + plus 1 Juror per Rs 10 lakh of difference in valuation , with maximum of 1500 Jurors. However , DWTO, SWTO or NWTO may ask for change of venue to decide the valuation of the land.
.
(J.3.6) Appeal against judgment of of District Jurors can be filed with Jurors or Judges in State High Court and later with Jurors or Judges in Supreme Court as decided by other prevailing laws
.
section-RTR-NWTO : Right to Recall NWTO
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(RTR.1) ( instruction to Cabinet Secretary , Union Govt or officer he deputes )
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If any citizen of India wishes to become NWTO , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the Cabinet Secretary, then the Secretary would accept his candidacy for NWTO after taking filing fee same as deposit amount for MP election.
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(RTR 2) (instruction to Talati , or Talati’s Clerks)
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If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the NWTO position, then the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.
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(RTR.3) ( instruction to Talati )
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The Talati will put the preferences of the citizen on PM's website with citizen’s voter-ID number and his preferences
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(RTR.4) (instruction to Talati)
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If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee
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(RTR.5) (instruction to Cabinet Secretary)
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On every 5th of month, the CS may publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.
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(RTR.6) (instruction to PM )
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If a candidate gets approval of over 51% of ALL registered citizen-voters (ALL, not just those who have filed their approval) in a district, then PM may or need not expel the existing NWTO and may or need not appoint the person with highest approval count as NWTO . The decision of PM will be final
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section-TCP : TCP-clauses
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(TCP.1) ( instruction to District Collector )
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if any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at Collector’s office and Collector or his clerk will post the affidavit on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20/- per page.
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(TCP.2) (instruction to Talati or Patwari)
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If any citizens want to register his opposition to this law-draft or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister.
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(TCP.3) (instruction to Talati or Patwari)
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If any citizens want to register his opposition to this law-draft or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister.
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PostPosted: Thu Mar 10, 2016 4:27 am 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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क्या आप जानते हैं कि रियल-एस्टेट का डिमांड कैसे बनावटी तरीकों से बढाया जाता है? इस वीडियो में देखिये और समझिये कि वेल्थ-टैक्स(संपत्ति-कर) किस प्रकार से भारत की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है.
https://www.youtube.com/embed/QiQ5hCGswPQ
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Our claim is that the proposed LALD = land acquisition law draft , is less bad than land acquisition drafts proposed by other parties / govt etc.
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Any LALD = land acquisition law draft , works with two set of law drafts namely (a) law drafts on taxation on plots and (b) law drafts to resolve cases of cheatings in land sales etc. And all these law drafts have to FIRST answer two central question --- (a) how do these drafts give us military strength to stop the enemy countries from “acquiring” the plots in India using their Militaries !!? (b) how do these drafts create process to stop the local criminals from “acquiring” the plots in India !!?
And any critique of any LALD should give in writing the alternate LALD law drafts he proposes.
========
We request reader to see following proposed LALD = land acquisition law draft , in context of
(a) proposed Right to Recall Ministers law-draft at http://tinyurl.com/RtrMantri
(b) proposed draft to reduce use of cash in land sales (Competitive Buyout Act) at http://tinyurl.com/SampattiKar and
(c) proposed WT = wealth law draft at http://tinyurl.com/SampattiKar
The above 3 law-drafts reduce need for acquisition as well as reduce problem of determining market price that land acquisition often face.
(a) will ensure that Revenue Minister is forced to put all land ownership records on net. This will give clearer picture to activists and citizens on who is owning how much land in which areas, and will enable them to trace out if there is nefarious reason behind land acquisition proposal and / or there is any nefarious reason behind opposition to land acquisition proposal.
(b) will ensure that use of black money in real estate markets reduces, and so determining real market price and deciding compensation becomes easy.
(c) is to implement a wealth tax on land, construction, gold, shares, bonds, cash holdings etc . The wealth tax will be about (1% per year of value of (wealth minus basic wealth deductions) minus income tax paid, minus other taxes paid minus other contributions and minus wealth tax credit accumulated over past years). It will reduce land prices, and make land market liquid. This law will drastically bring down the requirement of “forceful” acquisition.
Together , these drafts reduce land prices, and so manufacturing and weapon manufacturing will increase and so Military will strengthen.
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Information to MPs etc:-
Please order your MP/MLA/Minister/PM/President to print above laws-draft in gazette of India like this via your SMS/Email/Postcard etc like: -
"Hon'ble MP/MLA/PM/Minister/President,this is my constitutional duty to order you to print laws-draft in Indian-gazette so that our situation in India can be good. If you have received the link to above laws-draft (a) proposed Right to Recall Ministers law-draft at http://tinyurl.com/RtrMantri
(b) proposed draft to reduce use of cash in land sales (Competitive Buyout Act) at http://tinyurl.com/SampattiKar and
(c) proposed WT = wealth law draft at http://tinyurl.com/SampattiKar
law-drafts then it is an order from YOUR voter xyz , and NOT the author of this status post, to print the following law-draft in Gazette. Thanks.:
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Jai Hind.


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