प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Sat Apr 04, 2015 6:57 pm 
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm
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प्रिय नागरिक,

महिलाओं के विरुद्ध अपराध में सबसे बड़ी समस्या है कम अपराध सिद्धि दर और सबूतों का अभाव | नए अपराधियों को शायद ही कभी सजा होती है, जिसके कारण उनका हौंसला बढ़ जाता है और वे बाद में बड़े अपराध करते हैं और उनके आस-पास दूसरे लोगों का भी बढ़े अपराध करने का हौंसला बढ़ जाता है | इन समस्याओं को कम करने के लिए, हमें नागरिक-प्रामाणिक सिस्टम की आवश्यकता है, जिनके द्वारा नागरिक सच और झूठ का स्वयं पता लगा सके और बलात्कार, यौन अत्याचार और झूठी शिकायतें को रोक सकते हैं |

यदि आप भारत में बलात्कार, यौन अत्याचार और झूठी शिकायतें को कम करना चाहते हैं, तो अपने सांसद को एस.एम.एस. या ट्विट्टर के द्वारा ये आदेश भेजें - :

" Kripya Yaun Atyachar, Jhuthi skikayatein rokne ke draft ka badhava va maang website, niji bil aadi dwara karein. Draft - tinyurl.com/SurakshitMahila varna apko aur apki party ko vote nahin karenge. Kripya smstoneta.com jaise public sms server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID ke saath sabhi ko dikhe"

अपने सांसद को एस.एम.एस. भेजने के अलावा, अपनी मांग का प्रमाण अपने वोटर आई.डी. के साथ, पब्लिक एस.एम.एस. सर्वर पर दिखाएँ 3 एस.एम.एस. भेज कर | यदि आप बलात्कार, यौन अत्याचार और झूठी शिकायतों को कम करने हेतू प्रभावशाली प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट चाहते हैं तो, 08141277555 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया तीन एस.एम.एस. भेजें –
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• पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में
अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)
.
*आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*
.
• दूसरा एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. (rtrg.in/tcpsms.h) का समर्थन कोड है –
.
0011
.
• तीसरा एस.एम्.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो बलात्कार और यौन अत्याचार और झूठी शिकायतें कम करने के लिए कानूनों का समर्थन कोड है –
.
0211
.
आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा –
.
http://smstoneta.com/tcp |
.
यदि पर्याप्त संख्या में ये इन्टरनेट वोटर आई.डी. समर्थन प्राप्त हो गया, तो ये कानून आ जायेंगे |
.

और कृपया अन्य नागरिकों को भी विज्ञापन, पर्चों आदि द्वारा बताएं कि वे भी अपने सांसद को इस प्रकार का एस.एम.एस भेजें |

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प्रिय सांसद,

यदि आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है (न कि जिसने ये लेख लिखा है)

एस.एम.एस. भेजने वाला आपको लेख के `C` सैक्शन में कानून-ड्राफ्ट को अपने वेबसाईट, निजी बिल आदि द्वारा बढ़ावा करने और प्रधानमंत्री को सरकारी आदेश में उन ड्राफ्ट को छपवाने की मांग करने के लिए आदेश दे रहा है |

A. समाधान-ड्राफ्ट संक्षिप्त में

हम, आम-नागरिक मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, जज आदि को मजबूर कर सकते हैं निम्नलिखित कानून भारतीय राजपत्र में डालने के लिए | हमें अपने नेताओं को केवल चुनना ही नहीं चाहिए, लेकिन ये भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे सत्ता में आने के बाद, प्रभावशाली तरीके से काम करें |

A1. बलात्कार और झूठी शिकायतें कम करने के प्रशासनिक तरीके

A1.1. नागरिक-प्रामाणिक, पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रक्रिया - ताकि शिकायतों / सबूत को दबाया नहीं जा सके

आज के सिस्टम से आम-नागरिक की दुर्दशा-

आज यदि किसी के पास बलात्कार या झूठी शिकायत करने वाले के विरुद्ध सबूत है और वो सबूत सरकार द्वारा बताये दफ्तर में जमा करता है, तो जमा करने के बाद वो स्वयं अपनी अर्जी देख नहीं सकता | इसलिए, उन सबूत वाली अर्जी को दबाना / छेड़-छाड करना बहुत आसान है | क्योंकि एक बार अर्जी जमा हो जाये तो, हम या दूसरे नागरिक अपनी ही अर्जी को देख नहीं सकते |

सरल सा उपाय -

इसीलिए, हमने ये प्रस्ताव किया है कि नागरिक-मतदाता को ये विकल्प होना चाहिए कि यदि वो चाहे, तो वो किसी भी दिन, कलेक्टर आदि सरकारी दफ्तर जाकर अपनी अर्जी, 20 रुपये प्रति पन्ने के एफिडेविट के रूप में प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ स्कैन करवा सकेगा जिससे सभी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन शब्द-शब्द पढ़ सकेंगे |

संक्षिप्त में, ये मांग केवल एक लाइन की है कि किसी भी नागरिक के पास ये विकल्प हो कि वो अपनी एफिडेविट प्रधानमंत्री वेबसाईट पर, अपने वोटर आई.डी नंबर के साथ, स्कैन करवा सके ताकि उस एफिडेविट को सभी बिना लॉग-इन किये देख सकें | यदि ये सरकारी आदेश लागू हो जाता है, तो कोई बाबू, कोई मीडिया या अफसर उनकी अर्जी दबा नहीं सकता क्योंकि अर्जी दबाने का प्रयास करने पर, लाखों नागरिकों के समक्ष उसकी पोल प्रमाण सहित खुल जायेगी |

कृपया पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली का पूरा ड्राफ्ट आगे सैक्शन C1 में देखें |

A1.2. जूरी मुकदमा – न्यायपूर्ण और थोड़े समय में फैसलों के लिए

जूरी सिस्टम में जज के बदले क्रम-रहित (लॉटरी द्वारा) चुने गए 15 से 1500 नागरिक मामले का फैसला करते हैं और हर मामले के बाद नए लोग चुने जाते हैं |

जज मुकदमों का फैसला दशकों तक लटकाते रहते हैं क्यूंकि वे अमीर, आरोपित पक्ष के हाथों बिक जाते हैं | इसीलिए, बलात्कार के मुकदमों का फैसला लॉटरी द्वारा (क्रमरहित तरीके से) चुने गए 15 से 1500 नागरिकों को करना चाहिए जिसे जूरी सदस्य कहते हैं | ये नागरिक 30 और 55 वर्ष के बीच की आयु के होंगे और हर मामले के बाद नए लोग फैसला करेंगे | जूरी सदस्य को `जिला जूरी प्रशासक` नामक अफसर चुनेगा और ये जिला जूरी प्रशासक को मुख्यमंत्री नियुक्त करेंगे और जिला जूरी प्रशासक को उस जिले के नागरिक बदल सकते हैं |

जज सिस्टम में, केवल कुछ गिनती के जज ही सभी कोर्ट के फैसले करते हैं जबकि जूरी सिस्टम में फैसले करने वाले व्यक्ति 12-15 गुना अधिक नहीं बल्कि हजारों गुना अधिक होते हैं | कैसे ? जज सिस्टम में, मान लीजिए कि एक जज 30 वर्ष के लिए कार्य करता है और एक वर्ष में 100 मुकदमों का फैसला करता है ; यानी अपने पूरे कार्यकाल में एक जज लगभग 3000 मुकदमों का फैसला करता है | जूरी सिस्टम में इन मुकदमों का फैसला कुछ 36,000 लोग करेंगे | तो फैसला करने वाले व्यक्तियों की संख्या 36000 गुना बढ़ी, ना कि केवल 12 गुना !!

तो जज सिस्टम में, भ्रष्ट को लाभ होता है क्यूंकि उनको केवल कुछ सौ लोगों को ही रिश्वत देनी होती है या उन्हें संभालना होता है ( उन लोगों के रिश्तेदारों को अपना वकील बनाकर) | जूरी सिस्टम में, भ्रष्ट को जिन लोगों को रिश्वत देनी है, उनकी गिनती करोड़ों में जायेगी; इतने लोगों को संभाल पाने की संभावना लगभग शून्य है |

इसीलिए, हम ये समाधान बताते हैं कि जज सिस्टम को समाप्त करके निचली अदालत, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी जूरी सिस्टम का प्रयोग करना चाहिए | जूरी सिस्टम यदि लागू है तो भ्रष्ट के लिए कोर्ट में रिश्वत या उपहार देकर अपना कार्य निकालना असंभव हो जायेगा | इसके अलावा, जूरी सिस्टम प्रशासन में अन्याय और भ्रष्टाचार को भी कम करेगा और इससे भी बलात्कार, यौन अत्याचार और झूठी शिकायतें में कमी आएगी |

कृपया जूरी सिस्टम का पूरा ड्राफ्ट नीचे सैक्शन C5 में देखें |

A1.3. जूरी की सहमति से पब्लिक में नारको जांच झूठे शिकायतों की सम्भावना कम करती है –

नारको जांच एक सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर की देख-रेख में, थोड़ी सोडियम पेंटा-थेनोल की दवा दी जाती है व्यक्ति के दिमाग के योजना बनाने वाले केन्द्र को थोड़ी देर दबाने के लिए, ताकि व्यक्ति योजना बनाकर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर न दे | अन्य जांच के साथ नारको जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिलते हैं, जिससे और जांच करने पर सबूत मिल सकते हैं | ये सिद्ध करने के लिए कि बलात्कार या यौन अत्याचार किया गया था कि नहीं, जूरी के सहमति से बलात्कार आरोपी पर पब्लिक में नारको होना चाहिए | जूरी पब्लिक में नारको करवाने के लिए अपनी सहमति / असहमति कुछ प्रथम दृष्टया (पहली दृष्टि के) सबूत देखने के बाद करेगी |

1. बलात्‍कार के सभी मामलों में सुनवाई जूरी और केवल जूरी द्वारा ही की जाएगी । जूरी में जिलों से क्रमरहित तरीके से चुने गए 30 वर्ष और 60 वर्ष के बीच के उम्र के 15 से 1500 नागरिक होंगे । इन चुने गए नागरिकों में से कम से कम 50% महिलाएं होंगी |

2. यदि आरोपी चाहता हो या बहुमत जूरी सदस्‍य यदि जरूरी समझते हों कि आरोपी पर सच्‍चाई सीरम जांच (नार्को जाँच) की जानी चाहिए, तो जांच अधिकारी मुलजिम पर सच्‍चाई सीरम जांच करेगा ।

3. यदि शिकायतकर्ता चाहता हो या बहुमत जूरी सदस्‍य यदि जरूरी समझते हों कि शिकायतकर्ता पर सच्‍चाई सीरम जांच की जानी चाहिए, तो जांच अधिकारी शिकायतकर्ता पर सच्‍चाई सीरम जांच करेगा ।

पब्लिक में नार्को जांच के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया आगे सैक्शन C3 देखें और ये लिंक देखें -

https://www.facebook.com/notes/right-to ... 3124088361

बलात्‍कार की सुनवाई में सच्‍चाई सीरम जांच अनिवार्य (जरूरी) है क्‍योंकि दोनों में से कोई भी पक्ष झूठ बोल सकता है और ज्‍यादातर सबूत ज्यादातर अधूरे होते हैं । वे ज्‍यादा से ज्‍यादा यह बता सकते हैं कि (शारीरिक) संबंध बने हैं लेकिन जोर जबरदस्‍ती या धमकी के प्रयोग को प्रमाणित नहीं करते । वर्तमान कानूनों में सच्‍चाई सीरम जांच के लिए जज की अनुमति की जरूरत होती है और चूंकि जज अनुमति नहीं भी दे सकते हैं इसलिए अपराधी अकसर छूट जाते हैं |

इसलिए, सच्‍चाई सीरम जांच का निर्णय जूरी पर छोड़ दिया जाना चाहिए । यह वर्तमान कानून गलत है कि महिला की गवाही ही अंतिम मानी जायेगी और इसे बदलकर इसके स्‍थान पर सच्‍चाई सीरम जांच (नार्को जांच) को अनिवार्य (जरूरी) किया जाना चाहिए । भारत में बलात्‍कार के मामलों और झूठी शिकायतों को रोकने में तकनीकी साधन और सच्‍चाई सीरम जांच का प्रयोग मजबूत साधन बनेगा ।

A1.4. महिलाओं के विरुद्ध अपराध के लिए जिला पोलिस कमिश्नर और जिला प्रधान जज के ऊपर राईट टू रिकॉल :

नौकरी जाने के डर से 99% अफसर अपना व्यवहार और काम सुधार देते हैं और बाकी 1% अफसर जो अपना व्यवहार और कार्य नहीं सुधारते, तो आम-नागरिक उन अफसरों को अधिक अच्छे अफसरों से बदल देंगे |

हर जिले में एक सहायक (डिप्टी) पुलिस कमिश्नर होना चाहिए जो महिलाओं के विरुद्ध अपराध मामलों का प्रभारी हो और उस जिले की महिलाओं को उस डिप्टी पुलिस कमिश्नर को बदलने का अधिकार होना चाहिए |

हर जिले में 3 जज के पास महिलाओं के विरुद्ध मामले होने चाहिए और उस जिले के महिलाओं के पास उन जज को बदलने का अधिकार होना चाहिए |

कृपया इन प्रस्तावित ड्राफ्ट की अधिक जानकारी आगे सैक्शन C4 और C5 में देखें |

A1.5. हर मामले की रोज की करवाई को, गुप्त जानकारी हटाकर, इन्टरनेट पर डालना चाहिए :

इस प्रकार नागरिक को ये पता चलेगा कि जज कितनी तेजी से या धीमे से कोर्ट मामले का फैसला करते हैं | अक्सर जज उन मामलों में तेजी करते हैं, जिनका मीडिया में प्रचार होता है और बाकी सब मामलों में देरी करते हैं | मीडिया सारे मामलों का प्रचार नहीं कर सकता और मीडिया तो बिकाऊ होता है | जब आरोपी धनी होता है, तो मीडिया अक्सर प्रचार नहीं करता | लेकिन यदि सभी मामले इन्टरनेट पर आयें, तो जजों की जान-बूझ कर मामलों का लटकाना सबको प्रमाण के साथ पता चलेगा |

A2. बलात्कार और झूठी शिकायतें कम करने के तकनीकी साधन

ये निम्नलिखित तकनीकी साधन बलात्कार, झूठी शिकायतें आदि को कम करने के लिए तभी पर्याप्त होंगे जब पहले बताये गए प्रशासनिक साधन लागू किये गए हों ; बिना नागरिक-प्रामाणिक प्रशासनिक तरीकों के ये तकनीकी साधन फेल हो जायेंगे |

A2.1. जितनी ज्‍यादा सार्वजनिक जगहों पर संभव हो सके, उतनी जगहों पर कैमरे लगाना चाहिए :

जितना अधिक संभव हो सके उतने कैमरे लगाकर हम बलात्‍कार और बस अड्डों / स्टॉपों बसों के भीतर और अन्‍य भीड़-भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर छेड़छाड़ की घटनाओं को कम कर सकते हैं । एक उदहारण चीन का बेजिंग है | ओलम्पिक खेल के समय, चीनी सरकार ने आतंकवाद को रोकने के लिए पूरे बेजिंग शहर में कोने-कोने में दस लाख कैमरे लगाये थे | ये कैमरे लगाने से यौन अत्याचार और यातायात नियम तोडना भी कम हुआ | गुजरात में मोदी सरकार ने भी दंगे वाले जगहों में और उन जगह में घूमती पूलिस जीपों में भी कैमरे लगवाये थे. जिससे उन जगहों पर दंगों में कमी आई थी |

A2.2. हरेक महिला को खतरे का संकेत देने वाले, बटन वाला मशीन देना :

हरेक महिला को एक ऐसी मशीन दी जा सकती है जिसका बटन दबाने पर लगातार महिला के आस-पास की आवाज किसी कंट्रोल स्टेशन पर भेजी जायेगी और वो मशीन शुरू होने के बाद तब तक बन्‍द नहीं की जा सकेगी जब तक उसे तोड़ा नहीं जाये | इसके अलावा, इस मशीन में खतरे का (पैनिक) बटन लगाया जा सकता है। जब इस बटन को दबाया जाएगा तो यह खतरा का (पैनिक) बटन नजदीक के किसी फोन टावर के साथ-साथ पुलिस स्‍टेशनों को खतरे का संकेत भेजेगा । तकनीकी तरीकों से उस स्थान का भी पता लगाया जा सकता है कि महिला किस जगह पर है, जिससे कि पुलिस को कम समय में पहुँचने और मदद करने में आसानी हो ।

A2.3. महिलाओं और आम-नागरिकों को अपनी सुरक्षा के लिए बंदूकें देना :

महिलाओं को बंदूकें और दूसरे हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए । सुरक्षा के लिए हथियार रखने के लिए कोई लाइसेंस की जरुरत नहीं होनी चाहिए, केवल पंजीकरण करवाना जरुरी होना चाहिए | और उन्‍हें इन हथियारों आदि को चलाने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए | हथियार चलाने की ट्रेनिंग होने के बाद महिलाओं को एक पंजीकृत सुरक्षा के लिए हथियार दिया जाये । शुरुआत में, स्कूल की बारवीं कक्षा समाप्त होने के बाद एक साल की आवश्यक / अनिवार्य सैनिक ट्रेनिंग होनी चाहिए और ये सैनिक ट्रेनिंग किसी भी कोलेज में भर्ती होने के लिए आवश्यक होनी चाहिए | बाद में, दूसरे नागरिकों के लिए हथियार चलाने के ट्रेनिंग के केन्द्र शुरू किये जा सकते हैं |

इसके पर्याप्त सबूत हैं कि बंदूकें अपराध कम करते हैं और `बंदूकों पर रोक` जानलेवा है | और इसके विपरीत दावों के लिए कोई भी ठोस प्रामाण नहीं है | इसकी अधिक जानकारी के लिए इस लिंक का सैक्शन D देखें -

viewtopic.php?f=22&t=1141

A2.4. राष्‍ट्रीय डी.एन.ए. आंकड़ा कोष (डाटाबेस) :

सभी पुरूषों के डी.एन.ए. का आंकड़ा कोष (डाटाबेस) तैयार करना बलात्‍कार के आरोपियों को कम लागत में और तेज गति से पकड़ने/खोज निकालने में उपयोगी होगा । पकड़े/खोज निकाले जाने का डर आरोपियों को बलात्‍कार करने से रोकेगा ।

B. बलात्कार, यौन उत्पीडन, झूठी शिकायतों की समस्याओं की अधिक जानकारी और कुछ मिथ्यों (झूठी बात) की सच्चाई

B1. दिल्ली बस रेप काण्ड –

यदि कोई भी व्यक्ति दिसम्बर 2102 में हुए “दिल्ली बस रेप काण्ड” के मुख्य आरोपी राम आधार सिंह के आपराधिक इतिहास की ओर देखेगा, तो उसे पता चलेगा कि वह पहले भी कई छोटे-बड़े हिंसक अपराध कर चुका था और उसके कुछ अपराधों की शिकायत भी दर्ज की गई थी | लेकिन वह अपने पिछले सभी मामलों से बच निकला था जिससे उसकी और उसके साथियों की और अधिक अपराधो को करने की हिम्मत बढ़ गई थी |

यदि अदालतें उसके पहले के आपराधिक मामलों को लेकर सीरियस (गंभीर)) रहते, तो उसे (राम आधार सिंह को) जरूर कुछ महीने या वर्षो की कैद की सजा होती |

अब यदि पीड़ित पैसे-वाला न हो तो आजकल अदालतें छोटे अपराधो में सजा देती ही नहीं हैं और मामले को रफा-दफा करने में लगी रहती हैं | इसका मुख्य कारण यही है कि – जज भ्रष्ट है, सरकारी वकील भ्रष्ट है और जांच-कर्ता (पुलिस) भी भ्रष्ट हैं | और हाई कोर्ट के जज तो और भी अधिक भ्रष्ट हैं, जिन्हें सिर्फ उन्हीं मामलों में दिलचस्पी होती है जिनसे उन्हें या उनके रिश्तेदार वकील को पैसा मिल सके या उन्हें नौकरी में प्रमोशन मिल सके और उन्हें निचली अदालतों के बुनियादी ढ़ाचे सुधारने में बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं होती है |

कानून मंत्रालय में भ्रष्टाचार होने से समस्या और भी बिगड़ गई है | कानून मंत्री और कानून मंत्रालय के आई.ए.एस (IAS) अधिकारियों को भी निचली अदालतों की संख्या बढ़ाने और न्यायिक फैसलों की गति, न्याय और पारदर्शिता बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है | और कोई भी मुख्यमंत्री अपनी इच्छा से कोर्ट के फैसलों में हो रहे देरी और अदालतों की व्यवस्था सुधारना नहीं चाहता |

B2. आज सच्चाई यही है : पुलिस सिर्फ नेताओं के लिए है, आम नागरिकों के लिए नहीं

कार्यकर्ताओं और आम लोगों को अब यह चुनाव करना है कि क्या वे नेताओं की अंधभक्ति चालू रखना चाहते हैं या कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे नागरिक मजबूत हों - जैसे नागरिकों को छोटी-मोटी बन्दूक रखने का अधिकार हो ताकि वह अपराधियों से अपनी सुरक्षा कर सकें | अपराधियों के पास पहले से ही बन्दूके हैं | आज के हथियार रखने के कानून अपराधियों को बन्दूके रखने से नहीं रोकते बल्कि आम नागरिकों को अपनी आत्म-रक्षा करने से रोकते हैं |

पुलिस सिर्फ नेताओं की ही सुरक्षा करती है, वह नागरिकों की सुरक्षा न करती है और न कर सकती है | जबकि अपराधियों के पास ए.के.-47 है, ज्यादातर नेता और उनके अंधभक्त इस बात पर ज़ोर देते हैं कि आम नागरिकों' के पास अपनी आत्म-रक्षा के लिए देसी कट्टा रखने का भी अधिकार नहीं होना चाहिए |

B3. बिना जूरी प्रणाली और जूरी की सहमती से अपराधियों का पब्लिक में नारको टेस्ट किए बिना, कोई भी `सख्त` कानून का बुरा प्रभाव होगा

जज ऐसे कानून का दुरूपयोग करके आरोपी से पैसा निकालने में लग जाएँगे भले ही वह दोषी हो या निर्दोष |

हमें गंभीर मामलों में अपराधियों को फांसी या सख्त सज़ा देनी चाहिए परन्तु जूरी के सहमति द्वारा आरोपी का पब्लिक में नारको टेस्ट करवाने और जूरी के फैसले के बाद ही सजा होनी चाहिए |

हमें किसी को फांसी या सख्त सजा की अनुमति सिर्फ इस आधार पर नहीं देनी चाहिए क्योंकि किसी जज ने ऐसा निर्णय लिया है | क्योंकि निचली अदालत, हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के 99% जज भ्रष्ट होते हैं | यदि फांसी या सख्त सज़ा देने का अधिकार हम जजों पर छोड़ देते हैं, तो यह जज अपने वकीलों के माध्यम से आरोपी से पैसा ऐंठेंगे, भले ही वह दोषी हो या बेगुनाह | जज फर्जी मुकदमों को बढ़ावा देंगे और लोगों को चारों तरफ से लूटेंगे |

उदाहरण – 498A का कानून देखें | इन मामलों में जज और उनके रिश्तेदार वकील सीधे तौर पर आरोपियों को ठगते हैं, भले ही वह दोषी हो या बेगुनाह और हर साल हजारों करोड़ आरोपियों को ठग लेते हैं | और 498A में सजा भी 3 से 7 साल तक की कैद है, अब सोचिये यदि सजा फांसी तक की होती, तो जज और उनके रिश्तेदार वकील आरोपियों से कितना पैसा बना लेते ?

इसलिए हमें सख्त कानूनों को बढ़ावा देना चाहिए लेकिन जूरी की अनुमति द्वारा आरोपी का पब्लिक में नारको टेस्ट लेने के बाद सजा का निर्णय होना चाहिए, नाकि सिर्फ भ्रष्ट जजों पर निर्भर होकर सजा होनी चाहिए |

B4. जूरी मुकदमा / ट्रायल की जरुरत है बजाए “फास्ट ट्रैक कोर्ट” की –

हमें जूरी द्वारा किए गए मुकदमों की आवश्यकता है यदि हम चाहते हैं कि मुकदमें तेज़ गति व अन्याय किए बिना निपट सके | क्योंकि जूरी के पास केवल एक ही मुकदमा होता है, इसलिए बिना किसी अन्य मुक़दमे के अवरोध के मुकदमा सुबह 10 बजे से श्याम 5 बजे तक चलता है |

इसके अलावा, हमें सांसदों को मोबाइल द्वारा सन्देश (एस.एम.एस) भेजना चाहिए कि वह आई.पी.सी (IPC) में बदलाव करें और ऐसे मामलों में अधिकतम सजा (मृत्यु दंड का प्रावधान) रखें जहाँ – (1) हिंसा (मार-धार) से गंभीर, जान ले सकने वाली चोटें आई हों, और (2) बलात्कार के साथ हत्या करने का प्रयास किया गया हो | और साथ ही सभी मामलों में नाबालिकों की उम्र 18 से 16 साल करने के लिए कहें |

B5. चरित्र निर्माण के उपदेश - बिना अच्छे कानूनों और अच्छे सिस्टम की मोजूदगी में उपदेश बलात्कार और योन अत्याचार के मामले काम नहीं करेंगे –- समाज में नैतिकता (इमानदारी) के लिए पहला कदम है नैतिक (ईमानदार) कानूनों का होना

1. क्यों आज हमें नैतिक (ईमानदार) सिस्टम की ज़रूरत है और केवल नैतिकता (इमानदारी) पर उपदेश पर्याप्त नहीं है –

ऐसा कहा जाता है कि हज़ारों साल पहले, माहावीर आदि जैसी पुन्य आत्माएं रहा करती थीं | जिनकी उपस्तिथि से मांसाहारी प्राणी भी हिंसा (मार-धार) नहीं करते थे | लोग कभी अपने दरवाजों पर ताला नहीं लगाते थे, चोरी नहीं किया करते थे आदि | मतलब सम्पूर्ण नैतिकता थी |

अब समय के साथ, जनसँख्या बढ़ने से जीवन में परिवर्तन और अन्य कारणों (जो इस लेख के विषय से परे (बाहर) हैं) से लोगों में नैतिकता का लैवल कम होने लगा था | अब, जब नैतिकता बड़े स्तर पर गिरने लगी, तो अनैतिक (बेईमान) प्राणियों ने नैतिक (ईमानदार) प्राणियों को लूटना शुरू कर दिया और नैतिक प्राणी अनैतिक प्राणियों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने में असफल रहे | अनैतिक प्राणी ताकत हासिल करने में सफल रहे और सांठ-गांठ, भाई-भतीजावाद द्वारा, सच्चाई छुपा कर, नागरिकों का मत दबा कर और हथियारों द्वारा दूसरों को शारीरिक नुक्सान पंहुचा कर सत्ता के सबसे ऊंचे पद हासिल करने लगे |

इसलिए, नैतिक (ईमानदार) प्राणियों ने नैतिक (ईमानदार) सिस्टम / व्यवस्थाओं को बनाया जैसे दरवाजों पर ताले लगा कर स्वयं की रक्षा करना आदि | क्योंकि यदि 1% अनैतिक प्राणियों का भी अस्तित्व होगा (मौजूदगी होगी), तो वह सांठ-गांठ करेंगे और नैतिक प्राणियों को लूटेंगे |

पुरातन काल (पुराने जमाने) में, अन्य ईमानदार सिस्टम द्वारा राष्ट्र के सबसे ऊंचे पदों पर बैठे अनैतिक (बेईमान) प्राणियों को सजा दी जा रही थी और नैतिक (सामान्य) प्राणियों द्वारा अनैतिक लोगों को बदला जा रहा था (अर्थात वेदों में बताये गए प्रजा आधीन राजा) | दूसरे प्रक्रियाओं जैसे जनता के बीच पोल खोलना और हथियारों द्वारा आत्म-रक्षा करना, ऐसी प्रक्रियाएँ द्वारा भी नैतिक (ईमानदार) लोगों ने अनैतिक लोगों को अनैतिकता से रोका |

इसलिए, जब तक हम स्वयं और सभी अनैतिक (बेईमान) जीवों में नैतिकता (इमानदारी) नहीं भर देते, तब तक हमें नैतिक व्यवस्थाओ (ईमानदार सिस्टम) की ज़रूरत पड़ेगी | हम अपने दरवाज़े बिन ताले के खुला नहीं छोड़ सकते और ईमानदार लोगों को आत्म-रक्षा के लिए हथियार की भी आवश्यकता पड़ेगी | एक ऐसे सिस्टम की आवश्यकता है जिससे सांठ-गांठ, भाई-भतीजावाद, पक्षपात को प्रजा आधीन राजा द्वारा कम किया जा सके, मतलब ऐसी व्यवस्था जिससे प्रशासकों को नागरिकों द्वारा बदला जा सके, सजा दी जा सके | ऐसे सिस्टम को हम कहते हैं – सेंसर बोर्ड प्रमुख, जज, मुख्यमंत्री, विधायक आदि पर राईट टू रिकॉल और जूरी द्वारा मुकदमा |

और, हमें ऐसी नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रियाएँ भी चाहिए जिसमें नागरिक स्वयं सच और झूठ का पता लगा सके, जिसमें नागरिकों के पास विकल्प हो कि वह सबूतों को एफिडेविट के रूप में, अपने मतदाता पहचान पत्र नंबर के साथ प्रधानमंत्री वेबसाईट पर स्कैन करा सकें ताकि वो एफिडेविट सब लोगों को दिखाई दे सके बिना लॉग-इन किए | इससे नागरिक बेईमान लोगों को सबूतों को दबाने से रोक सकेंगे, ऐसे सिस्टम को हम कहते – नागरिक-प्रामाणिक, पारदर्शी शिकायत प्रणाली (टी.सी.पी.)

इस प्रस्तावित प्रणाली का प्रक्रिया-ड्राफ्ट आगे सैक्शन – C में देखें |

हम नैतिकता (इमानदारी) पर उपदेश देने का विरोध नहीं करते लेकिन यह उम्मीद करना कि उपदेशों से ईमानदार प्राणियों की बेईमान प्राणियों से सुरक्षा हो जाएगी, दिन में सपने देखने जैसा होगा | जब तक हमारे पास ऐसी प्रक्रियाएँ न हों जिनसे हम अनैतिक (बेईमान) लोगो की जनसँख्या 1% या उससे भी कम, या इस हद तक कम नहीं कर देते कि अनैतिक प्राणी सांठ-गांठ करके नैतिक प्राणियों को ना लूट सकें, केवल उपदेश पर्याप्त नहीं हैं |

इसलिए आज हमारा तुरंत और पहला नैतिक (ईमानदार) कदम यह होना चाहिए कि अनैतिक लोगों से नैतिक सिस्टम द्वारा सुरक्षा करना – जनता को ताकतवर बनाना इन साधनों द्वारा - नागरिकों को बन्दूक से लेकर भ्रष्ट लोगों को बदलने / सज़ा देने का अधिकार देकर और नागरिक द्वारा जमा किये गए सबूत जनता देख सके और जांच सके बिना सबूतों से छेड़-छाड़ किए या उन्हें दबाए बिना |

मुख्य बात यह है कि लोग अनैतिक या बेईमान हो सकते हैं लेकिन व्यवस्था को ईमानदार और न्याय वाला बनाया जा सकता है | क्या हम ईमानदार सिस्टम को बढ़ावा दे रहे है ? यदि नहीं, तो एक तरह से हम जाने / अनजाने में आज के बेईमान सिस्टम, अन्याय को बढ़ावा दे रहे हैं |

2. आज के भ्रष्ट सिस्टम नागरिकों को गलत सीख और शिक्षा देते हैं -- उपाय

आज के भ्रष्ट सिस्टम से नागरिकों को ये शिक्षा मिलती है कि गलत कार्य लो और आसानी से सबूत दबवा दो तो किसी को भी पता नहीं चलेगा | आज ये शिक्षा मिलती है कि गलत कार्य करने पर सांठ-गांठ बना कर कोई भी सजा से बच सकता है और उसकी नौकरी भी सुरक्षित रहेगी |

आज गवाह को सालों-साल कोर्ट-कचेहरी के चक्कर काटने पड़ेंगे और फिर भी न्याय नहीं होगा और वो अपना परिवार के प्रति धर्म सही से नहीं निभा पायेगा | इसिलए बहुत कम लोग गवाह बनने के लिए तैयार होते हैं |

उपाय ये ही है कि हम एक ईमानदार, नागरिक-प्रमाणिक सिस्टम लायें जो सही शिक्षा दे कि गलत कार्य करने पर टी.सी.पी. के द्वारा उसके खिलाफ सबूत डाला जा सकता है और वो समाज में बदनाम होगा | राईट टू रिकॉल की प्रक्रिया होगी तो उसकी नौकरी जायेगी और जूरी सिस्टम होने पर आम-नागरिक उसको कुछ ही समय में सजा भी देंगे यदि नागरिक गलत कार्य करता है | इसीलिए, हमें ईमानदार सिस्टम की मांग करके उन्हें लागू करवाना चाहिए |

3. क्यों अश्लीलता (बेशर्मी) पर प्रतिबन्ध लगाने से यौन अत्याचार के मामलों में कमी नहीं आएगी –

हम अश्लीलता पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध नहीं करते | तकनीकी तौर पर ऐसा करना आसान भी नहीं है क्योंकि अर्ध-नग्न तसवीरें आदि आसानी से शेयरिंग वेबसाइट, इन्टरनेट, डी.वी.डी, पेन-ड्राइव आदि द्वारा साझा की सकती है | कोई भी देश ऐसी सामग्री पर प्रतिबन्ध लगाने में सफल नहीं हो पाया है और यदि किसी तरह से इसपर प्रतिबन्ध लग भी जाता है और यदि मुजरिम को सज़ा नहीं दी जाती है, तो यौन अत्याचार के मामलों में कमी नहीं आने वाली |

अच्छे, इमानदार सिस्टम के बिना नैतिक मूल्यों को खड़ा नहीं किया जा सकता | यदि आज हम अच्छे, इमानदार व्यवस्थाओं का प्रचार नहीं करते जिससे नागरिकों को भ्रष्ट लोगों को बदला जा सके / भ्रष्ट को सज़ा दे सके, तो उच्च लेवल के भ्रष्टाचारी ईमानदार लोगों को रोकने का हर तरह का प्रयास करेंगे | क्यों ? नैतिक (ईमानदार) लोगों की मौजूदगी में बेईमान लोगों को अपने काले कारनामों को करने में सफलता नहीं मिल पाएगी, ऐसे में बेईमान लोग हर तरह का प्रयास करेंगे ताकि वह ईमानदार लोगों को हटा / दबा सके |

चलिए, मान लेते हैं कि किसी तरह कोई ईमानदार व्यक्ति सत्ता हासिल करने में सफल हो जाता है लेकिन सिस्टम यदि भ्रष्ट है, ऐसे में भ्रष्टाचारी आसानी से उसे दबाने, हटाने या उसकी हत्या करवाने में सफल हो जाएँगे | जैसे - लाल बहादुर शास्त्री आदि |

4. मोदी साहेब द्वारा लागू किया गया जुवेनाइल क़ानून 2015 देश के साथ धोखा है

अधिक उम्र के अपराधी को सिर्फ तब वयस्क माना जाएगा, जब जुवेनाइल बोर्ड उसे वयस्क माने अन्यथा उसे नाबालिग ही माना जाएगा और बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध के बावजूद उसे ज्यादा से ज्यादा सिर्फ 3 वर्ष तक की सजा ही दी जा सकेगी।

दरअसल मोदी साहेब दबी जुबान में यह कह रहे है कि, "यदि आप किसी रईस या उच्च पदाधिकारी या राजनेता की किशोर संतान है या आपके परिजनों के लव जिहाद को बढ़ावा देने वाली सऊदी अरब की लॉबी से अच्छे संपर्क है, या भ्रष्ट जजो तक आपकी पहुँच है या पीड़ित लड़की जिस पर आपने बलात्कार किया है, गरीब तबके से है तथा पेड मिडिया अमुक मामले को कवरेज नहीं देता है , तो आप आसानी से जुवेनाइल बोर्ड के इन तीन सदस्यों के सामने पैसा फेंक कर, खुद को जुवेनाइल घोषित करवा सकते है" !!!

कार्यकर्ताओ को देश में ज्यूरी प्रथा के कानूनी ड्राफ्ट को गैजेट में छपवाने के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि नागरिको की जूरी यह फैसला करे कि अपराधी को किशोर माना जाए या वयस्क। इससे मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष ढंग से की जा सकेगी और न्याय होगा।

C. बलात्कार, यौन अत्याचार और झूठी शिकायतें कम करने के लिए सरकारी आदेश छपवाने के लिए ड्राफ्ट

C1. पारदर्शी शिकायत प्रणाली - (ट्रांसपेरेंट कंप्लेंट प्रोसीजर-टी.सी.पी.)

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

1.

[कलेक्टर (और उसके क्लर्क) के लिए निर्देश ]

कोई भी नागरिक मतदाता, यदि खुद हाजिर होकर, एफिडेविट पर अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी / भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद / कोई प्रस्ताव या कोई अन्य एफिडेविट कलेक्टर को देता है और प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर रखने की मांग करता है, तो कलेक्टर (या उसका क्लर्क) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर, सीरियल नंबर देकर, एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ, ताकि सभी बिना लॉग-इन के वे एफिडेविट देख सकें ।

2.

[पटवारी (तलाटी, लेखपाल)]

(2.1) कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, 3 रुपये का शुल्क (फीस) लेकर, तो पटवारी नागरिक का मतदाता कार्ड संख्या, नाम, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा ।
नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएगी । गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए फीस 1 रूपये होगी ।

(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क (फीस) के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है ।

(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप को रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |

(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |


3.

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ये कोई रेफेरेनडम (जनमत-संग्रह) नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक, अदि पर अनिवार्य (जरूरी) नहीं होगी । लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, कोई एक अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं । उनका निर्णय अंतिम होगा ।

विस्तृत जानकारी के लिए, कृपया ये लिंक देखें - http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.htm (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/tcpsms.h.pdf)

प्रश्नोत्तरी के लिए देखें - http://www.righttorecall.info/007.h.htm (डाउनलोड लिंक - http://www.righttorecall.info/007.h.pdf)

C2. निचली कोर्ट में जूरी सिस्टम सरकारी आदेश

ये तभी लागू होगा जब प्रधानमंत्री इसपर हस्ताक्षर करेंगे |

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया

सैक्शन – 1 : जूरी प्रशासक की नियुक्‍ति (नौकरी पर रखना ; भर्ती ; बहाली) और उन्‍हें बदलने की प्रक्रिया

1.

[मुख्‍यमंत्री ; जिला कलेक्टर]

इस कानून के पारित/पास किए जाने के 2 दिनों के भीतर, सभी मुख्‍यमंत्री अपने-अपने पूरे राज्‍य के लिए एक रजिस्‍ट्रार की नियुक्‍ति करेंगे (नौकरी पर रखेंगे) और हर जिले के लिए एक जूरी प्रशासक की भी नियुक्‍ति करेंगे कोई भी भारत का नागरिक जो 30 साल या अधिक का हो, जिला कलेक्टर के दफ्तर में जा कर, सांसद के जितना शुल्क जमा कर के अपने को जूरी प्रशाशक के लिए प्रत्याशी दर्ज करा सकता है और जिला कलेक्टर प्रत्याशी का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डालेगा |

2.

[तलाटी = पटवारी = लेखपाल (या तलाटी का क्लर्क) ]

किसी जिले में रहने वाला कोई नागरिक अपना मतदाता पहचान-पत्र दिखा कर अपने जिले में जूरी प्रशासक के पद के लिए (ज्‍यादा से ज्‍यादा) पांच उम्‍मीदवारों के क्रमांक नंबर बताएगा जिन्हें वो अनुमोदन/स्वीकृति करता है । क्‍लर्क उनके अनुमोदनों को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ कंप्यूटर और मुख्यमंत्री वेबसाईट पर डाल देगा और उस नागरिक को रसीद दे देगा। नागरिक अपनी पसंदों को किसी भी दिन बदल सकता है। क्‍लर्क तीन रूपए का शुल्‍क (फीस) लेगा ।

3.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि किसी उम्‍मीदवार को सबसे अधिक नागरिक-मतदाताओं द्वारा और जिले के सभी नागरिक-मतदाताओं के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर उस जिले के नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे (नौकरी पर रख लेंगे)। यदि किसी उम्‍मीदवार को सभी नागरिक-मतदाताओं के 25 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं द्वारा अनुमोदित कर दिया जाता है और उसके अनुमोदनों की गिनती वर्तमान जूरी प्रशासक की गिनती से 5 प्रतिशत अधिक हो तो मुख्‍यमंत्री उसे दो ही दिनों के भीतर नए जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर देंगे ।

4.

[मुख्‍यमंत्री]

उस राज्य में सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से ज्‍यादा मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, मुख्‍यमंत्री धारा (खण्‍ड) 2 और धारा 3 को रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

5.

[प्रधानमंत्री]

भारत के सभी नागरिक-मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से, प्रधानमंत्री धारा (खण्‍ड) 2, धारा 3 और ऊपर लिखित धारा 4 को पूरे राज्‍य के लिए या कुछ जिलों के लिए रद्द कर सकते हैं और पांच वर्षों के लिए अपनी ओर से जूरी प्रशासक नियुक्‍त कर सकते हैं ।

सैक्शन – 2 : महा-जूरीमंडल का गठन

6.

[जूरी प्रशासक]

मतदाता-सूची का उपयोग करके, जूरी प्रशासक किसी आम बैठक में, क्रमरहित तरीके से / रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 40 नागरिकों का चयन महा-जूरीमंडल के सदस्‍य के रूप में करेगा, जिसमें से वह साक्षात्‍कार के बाद किन्‍हीं 10 नागरिकों को उस सूची से हटा देगा और शेष 30 लोग/नागरिक महा-जूरीमंडल के सदस्य होंगे। यदि जूरीमंडल की नियुक्‍ति मुख्‍यमंत्री अथवा प्रधानमंत्री द्वारा धारा 4 अथवा धारा 5 के तहत की गई है तो वे 60 नागरिकों तक को चुन सकते हैं और उनमें से तीस तक को हटाकर महा-जूरीमंडल बना सकते हैं ।

(स्पष्टीकरण-
ये पूर्व चयनित महा-जूरी के लिए नागरिकों की संख्या बढ़ाने का आशय मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री, जो राज्य और राष्ट्र के प्रतिनिधि हैं, उनके अधिकार बढ़ाने के लिए है स्थानीय लोगों के बनिस्पत)

7.

[जूरी प्रशासक]

महा-जूरीमंडल के पहले समूह (सेट) में से, जूरी प्रशासक हर 10 दिनों में महा-जूरीमंडल के किन्‍हीं 10 सदस्‍यों को सेवा-निवृत्ति दे देगा/रिटायर कर देगा और क्रमरहित तरीके से/रैंडमली उस जिले की मतदाता-सूची में से 10 नागरिकों का चयन कर लेगा ।

8.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक किसी यांत्रिक उपकरण (मशीन) का प्रयोग नहीं करेगा किसी संख्‍या को क्रमरहित तरीके से/रैण्‍डमली चुनने के लिए। वह मुख्‍यमंत्री द्वारा विस्‍तार से बताए गए तरीके से प्रक्रिया का प्रयोग करेगा। यदि मुख्‍यमंत्री ने किसी विशिष्‍ठ/खास प्रक्रिया के बारे में नहीं बताया तो वह निम्‍नलिखित तरीके से चयन करेगा। मान लीजिए, जूरी प्रशासक को 1 और चार अंकों वाली किसी संख्‍या `क ख ग घ“ के बीच की कोई संख्‍या चुननी है।

तब जूरी प्रशासक को हर अंक के लिए चार दौर/राउन्‍ड में डायस/गोटी/पांसा फेंकनी होगी। किसी राउन्‍ड में यदि अंक, 0-5 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह केवल एक ही डायस का प्रयोग करेगा और यदि अंक, 0-9 के बीच की संख्‍या से चुना जाना है तो वह दो डायसों का प्रयोग करेगा। चुनी गई संख्‍या उस संख्‍या से 1 कम होगी जो एक अकेले डायस के फेंके जाने पर आएगी और दो डायसों के फेंके जाने की स्थिति में यह 2 कम होगी। यदि डायसों/गोटियों के फेंके जाने से आयी संख्या उसके जरूरत की सबसे बड़ी संख्‍या से बड़ी है तो वह डायस को दोबारा/फिर से फेंकेगा— उदाहरण – मान लीजिए, जूरी प्रशासक को किसी किताब में से एक पृष्‍ठ/पेज का चुनाव करना है जिस किताब में 3693 पृष्‍ठ हैं। वह जूरी प्रशासक चार राउन्‍ड चलेगा। पहले दौर/राउन्‍ड में वह एक ही पांसा का प्रयोग करेगा क्‍योंकि उसे 0-3 के बीच की एक संख्‍या का चयन करना है।

यदि पांसा 5 या 6 दर्शाता है तो वह पांसा फिर से/ दोबारा फेंकेगा। यदि पांसा 3 दर्शाता है तो चुनी गई संख्‍या 3-1 = 2 होगी और वह जूरी प्रशासक दूसरे दौर में चला जाएगा। दूसरे दौर में उसे 0-6 के बीच की एक संख्‍या चुनने की जरूरत होगी। इसलिए वह दो पांसे फेंकेगा। यदि उनका योग 8 से अधिक हो जाता है तो वह दोबारा डायसों/पांसों को फेंकेगा। यदि योग / जोड़ मान लीजिए, 6 आता है तो चुनी गई दूसरी संख्‍या 6-2 = 4 होगी। इसी प्रकार मान लीजिए, चार दौरों/राउन्‍ड्स में पांसा 3, 5, 10 और 2 दर्शाता है तो जूरी प्रशासक (3-1), (5-2), (10-2) और (2-1) अर्थात पृष्‍ठ संख्‍या 2381 चुनेगा। जूरी प्रशासक को चाहिए कि वह अलग-अलग नागरिकों को पांसा फेंकने के लिए दे। मान लीजिए, मतदाता-सूची में ख किताबें हैं, और सबसे बड़ी किताब में पृष्‍ठों/पेजों की संख्‍या `प` है और सभी पृष्‍ठों में प्रविष्‍ठियों (एंट्री) की संख्‍या `त` है तो उपर लिखित तरीके या मुख्‍यमंत्री द्वारा बताए गए तरीके का प्रयोग करके जूरी प्रशासक 1-ख, 1-प और 1-त के बीच की तीन संख्‍याओं को क्रमरहित/रैंडम तरीके से चुनेगा। अब मान लीजिए, चुनी गई किताब में उतने अधिक पृष्‍ठ नहीं हैं अथवा चुने गए पृष्‍ठ में बहुत ही कम प्रविष्‍टियां (एंट्री) हैं। तो वह 1-ख, 1-प और 1-त के बीच एक संख्‍या फिर से चुनेगा ।

9.

[जूरी प्रशासक]

महा–जूरीमंडल प्रत्‍येक शनिवार और रविवार को बैठक करेंगे। यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य अनुमोदन/स्वीकृति करें तो वे अन्‍य दिनों में भी मिल सकते हैं। यह संख्‍या “15 से ज्‍यादा” उस स्‍थिति में भी होनी चाहिए जब महा-जूरीमंडल के 30 से भी कम सदस्‍य मौजूद हों। यदि बैठक होती है तो यह 11 बजे सुबह अवश्‍य शुरू हो जानी चाहिए और कम से कम 5 बजे शाम तक चलनी चाहिए। महा-जूरीमंडल के सदस्‍य जिस दिन बैठक में उपस्‍थति रहेंगे, उस दिन उन्‍हें 200 रूपए प्रति दिन की दर से वेतन मिलेगा। महा-जूरीमंडल का एक सदस्‍य एक महीने के अपने कार्यकाल में अधिकतम 2000 रूपए वेतन पा सकता है।

जूरी प्रशासक महा-जूरीमंडल के किसी सदस्‍य के कार्यकाल/अवधि पूरी कर लेने के 2 महीने के बाद उसे चेक जारी करेगा(स्पष्टीकरण-आंकने के लिए समय देने के लिए इतना समय की जरुरत है) । यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य जिले से बाहर जाता है तो उसे वहां रहने का हर दिन 400 रूपए की दर से पैसा मिलेगा और यदि वह राज्‍य से बाहर जाता है तो उसे वहां ठहरने के 800 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलेगा। इसके अतिरिक्‍त, उन्‍हें अपने घर और कोर्ट/न्‍यायालय के बीच की दूरी का 5 रूपए प्रति किलोमीटर की दर से पैसा मिलेगा ।

मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री मुद्रास्‍फीति/महंगाई की दर के अनुसार क्षतिपूर्ति (मुआवजा) की रकम में परिवर्तन कर सकते हैं। सभी रकम इस कानून में जनवरी, 2008 में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए `थोक मूल्य सूचकांक` के अनुसार हैं। और जूरी प्रशासक नवीनतम थोक मूल्य सूचकांक का प्रयोग करके प्रत्‍येक छह महीनों में धनराशि को बदल सकता है ।

10.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य किसी बैठक से अनुपस्‍थित रहता है तो उसे उस दिन का 100 रूपया नहीं मिलेगा और उसे अपनी भुगतान की जाने वाली राशि से तिगुनी राशि की हानि भी हो सकती है। जो व्‍यक्‍ति 30 दिनों के बाद महा-जूरीमंडल के सदस्‍य होंगे, वे ही जुर्माने के संबंध में निर्णय लेंगे ।

11.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक बैठक 11 बजे सुबह शुरू कर देगा। जूरी प्रशासक (बैठक के) कमरे में सुबह 10.30 बजे से पहले आ जाएगा। यदि महा-जूरीमंडल का कोई सदस्‍य सुबह 10.30 बजे से पहले आने में असफल रहता है तो जूरी प्रशासक उसे बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं देगा और उसकी अनुपस्‍थिति दर्ज कर देगा ।

सैक्शन – 3 : किसी नागरिक पर आरोप तय करना

12.

[जूरी प्रशासक]

कोई व्‍यक्‍ति, चाहे वह निजी (आम) आदमी हो चाहे जिला दण्‍डाधिकारी (प्रोजिक्‍यूटर), यदि वह किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति के खिलाफ कोई शिकायत करना चाहता है तो वह महा-जूरीमंडल के सभी सदस्‍यों या कुछ सदस्‍यों को शिकायती पत्र लिखेगा। शिकायतकर्ता से उसे यह भी अवश्‍य बताना होगा कि वह क्‍या समाधान चाहता है। ये समाधान इस प्रकार के हो सकते हैं –

    किसी सम्‍पत्ति पर कब्‍जा/स्‍वामित्‍व प्राप्‍त करना
    आरोपी व्‍यक्‍ति से आर्थिक क्षतिपूर्ति या मुआवजा प्राप्‍त करना
    आरोपी व्यक्‍ति को कुछ महीने/साल के लिए कैद की सजा दिलवाना

13.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्‍यादा सदस्‍य किसी बैठक में आने के लिए बुलावा भेजते हैं तो वह नागरिक उपस्‍थित होगा। महा-जूरीमंडल आरोपी और शिकायतकर्ता को बुला भी सकते हैं या नहीं भी बुला सकते हैं ।

14.

[जूरी प्रशासक]

यदि महा-जूरीमंडल के 15 से ज्यादा सदस्‍य यह स्‍पष्‍ट कर देते हैं कि शिकायत में कुछ दम (मेरिट) है तो जूरी प्रशासक शिकायत की जांच कराने के लिए एक जूरी बुलाएगा जिसमें उस जिले के 12 नागरिक होंगे। जूरी प्रशासक 12 से अधिक नागरिकों का क्रमरहित (रैंडम) तरीके से चयन करेगा (खंड-8 में महा-जूरीमंडल के चुनाव के सामान ही जूरीमंडल का चयन होगा) और उन्‍हें बुलावा भेजेगा। आनेवालों में से जूरी प्रशासक क्रमरहित तरीके से 12 लोगों का चयन कर लेगा।

[मान लीजिए एक जिले में सौ मामले दर्ज हुए हैं | तो कोई 3000 या अधिक लोगों को बुलावा भेजा जायेगा जब तक उनमें से 2600 लोग न आ जायें, क्योंकि उनमें कुछ मर गए होंगे, कुछ शहर से बहार गए होंगे | ये 2600 लोग क्रमरहित तरीके से 26-26 के 100 समूहों में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे , एक मामले के लिए एक समूह | दोंनो पक्ष के वकील उन 26 लोगों में से हरेक व्यक्ति को 20 मिनट इंटरव्यू (साक्षात्कार) लेगा और हर पक्ष का वकील 4 लोगों को बाहर निकाल देगा (इस तरह किसी भी पक्ष को पूर्वाग्र/पक्षपात का बहाना नहीं मिलेगा ) | इस तरह 18 लोगों का जूरी-मंडल होगा जो 12 मुख्य जूरी सदस्य और 6 विकल्प जूरी सदस्य में क्रमरहित तरीके से बांटे जाएँगे |]

15.

[जूरी प्रशासक]

जूरी प्रशासक मुख्‍य जिला प्रशासक से कहेगा कि वह मुकदमे की अध्‍यक्षता करने के लिए एक या एक से अधिक जजों की नियुक्‍ति कर दे। यदि विवादित संपत्‍ति का मूल्‍य लगभग 25 लाख से अधिक है अथवा दावा किए गए मुआवजे की राशि 1,00,000 (एक लाख) रूपए से अधिक है अथवा अधिकतम कारावास का दण्‍ड 12 महीने से अधिक है तो जूरी प्रशासक 24 जूरी-मंडल सदस्य का चुनाव करेगा और उस मुकदमे के लिए मुख्‍य जज से 3 जजों की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा, नहीं तो वह मुख्‍य जज से 1 जज की नियुक्‍ति करने का अनुरोध करेगा। विवादित संपत्ति का मूल्य 50 करोड़ से अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य और 5 जज होंगे |

यदि मुलजिम के खिलाफ 10 से कम मामले हैं तो, जूरी-सदस्य 12, 10-25 मामले हों तो 24 जूरी सदस्य चुने जाएँगे और 25 से अधिक मामले होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे| यदि मुलजिम श्रेणी 4 का अफसर है तो 12 जूरी सदस्य, श्रेणी 2 या 3 का होगा तो , 24 जूरी सदस्य होंगे और श्रेणी 4 या अधिक होने पर 50-100 जूरी सदस्य होंगे | इस मामले में नियुक्‍त किए जाने वाले जजों की संख्‍या के संबंध में मुख्‍य न्यायाधीश का फैसला ही अंतिम होगा |

सैक्शन – 4 : सुनवाई/फैसला आयोजित करना

16.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

सुनवाई 11 बजे सुबह से लेकर 4 बजे शाम तक चलेगी। सभी 12 जूरी-मंडल (जूरी समूह) और शिकायतकर्ता के आ जाने के बाद ही सुनवाई शुरू की जाएगी । यदि कोई पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है तो जो पक्ष उपस्‍थित है उसे 3 से 4 बजे शाम तक इंतजार करना होगा और तभी वे घर जा सकते हैं । यदि तीन दिन बिना कारण दिए, कोई पक्ष उपस्थित नहीं होता, तो उपस्थित पक्ष अपनी दलीलें देगा और जूरी तीन दिन और इंतजार करेगी, अनुपस्थित पक्ष को बुलावा देने के पश्चात | यदि फिर भी अनुपस्थित पक्ष बिना कारण दिए नहीं आती, तो जूरी अपना फैसला सुनाएगी |

17.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

यह जज शिकायतकर्ता को 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य बीच में नहीं बोलेगा । वह जज प्रतिवादी (वह जिसपर मुकदम्मा चलाया जा रहा है) को भी 1 घंटे बोलने की अनुमति देगा जिसके दौरान कोई अन्‍य व्‍यक्‍ति बोलने में बाधा (व्‍यावधान) पैदा नहीं करेगा। इसी तरह, बारी-बारी से दोनों पक्षों को बोलने देगा | मुकदमा हर दिन इसी प्रकार चलता रहेगा ।

18.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

मुकदमा कम से कम 2 दिनों तक चलेगा। तीसरे दिन या उसके बाद यदि 7 से अधिक जूरी सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि उन्‍होंने काफी सुन लिया है तो वह मुकदमा एक और दिन चलेगा। यदि अगले दिन 12 जूरी सदस्‍यों में से 7 से ज्‍यादा सदस्‍य यह घोषित कर देते हैं कि वे और दलीलें सुनना चाहेंगे तो यह मुकदमा तब तक चलता रहेगा जब तक 7 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍य यह नहीं कह देते कि (अब) मुकदमा समाप्‍त किया जाना चाहिए ।

19.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

अंतिम दिन जब दोनों पक्ष/पार्टी अपनी-अपनी दलील 1 घंटे रख देंगे तो जूरी-मंडल (जूरी समूह) कम से कम 2 घंटे तक विचार-विमर्श करेंगे। यदि 2 घंटे के बाद 7 से ज्‍यादा जूरी-मंडल (जूरी समूह) कहते हैं कि और विचार-विमर्श की जरूरत नहीं है तो जज (जूरी-मंडल के) प्रत्येक सदस्‍य से अपना-अपना फैसला बताने के लिए कहेगा ।

20.

[महा-जूरीमंडल]

यदि कोई जूरी सदस्‍य अथवा कोई एक पक्ष उपस्‍थित नहीं होता है या देर से उपस्‍थित होता है तो महा-जूरीमंडल 3 महीने के बाद जुर्माने पर फैसला करेंगे जो अधिकतम 5000 रूपए अथवा अनुपस्‍थित व्‍यक्‍ति की सम्‍पत्ति का 5 प्रतिशत, जो भी ज्‍यादा हो, तक हो सकता है ।

21.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

जुर्माने (अर्थदण्‍ड) के मामले में, हर जूरी सदस्‍य दण्‍ड की वह राशि बताएगा जो वह उपयुक्‍त समझता है। और यह कानूनी सीमा से कम ही होनी चाहिए। यदि यह कानूनी सीमा से ज्‍यादा है तो जज उस राशि या दंड को कानूनी सीमा जितनी ही मानेगा। वह जज दण्‍ड की राशियों को बढ़ते क्रम में सजाएगा और चौथी सबसे छोटी दण्‍डराशि को चुनेगा अर्थात उस राशि को जूरी मंडल द्वारा सामूहिक रूप से लगाया गया जुर्माना माना जाएगा जो 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से ज्‍यादा सदस्‍यों ने (उतना या उससे अधिक) अनुमोदित किया हो |

उदहारण - जैसे जूरी-मंडल द्वारा लगायी हुई दण्ड-राशि यदि बदते क्रम में 400,400,500,600,700,700,800,1000,1000,1200,1200 रुपये हैं तो चौथी सबसे छोटी दण्ड-राशि 600 है और बाकी 8 जूरी-मंडल के लोगों ने इससे अधिक दण्ड-राशि का अनुमोदन (स्वीकृति) किया है |

22.

[अध्‍यक्षता करने वाला जज]

कारावास की सजा के मामले में जज, जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी गई सजा की अवधि को बढ़ते क्रम में सजाएगा जो उस कानून में लिखित सजा से कम होगा, जिस कानून को तोड़ने का वह आरोपी है। और जज चौथी सबसे छोटी सजा-अवधि को चुनेगा यानि कारावास की वह सजा जो 12 जूरी-मंडल में से 8 से ज्‍यादा जूरी सदस्‍यों द्वारा अनुमोदित हो को `कारावास की सजा जूरी-मंडल द्वारा मिलकर तय किया गया` घोषित करेगा ।

सैक्शन – 5 : निर्णय/फैसला, (फैसले का) अमल और अपील

23.

[जिला पुलिस प्रमुख]

जिला पुलिस प्रमुख या उसके द्वारा बताया गया पुलिसवाला, जुर्माना अथवा कारावास की सजा जो जज द्वारा सुनाई गई है और जूरी-मंडल (जूरी समूह) द्वारा दी की गई है, पर अमल करेगा/करवाएगा ।

24.

[जिला पुलिस प्रमुख]

यदि 4 या इससे अधिक जूरी सदस्‍य किसी कुर्की (जब्ती) अथवा जुर्माने अथवा कारावास की सजा की मांग नहीं करते तो जज आरोपी को निर्दोष घोषित कर देगा और जिला पुलिस प्रमुख उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा ।

25.

[आरोपी, शिकायतकर्ता]

दोनो ही पक्षों को राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालय अथवा भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिनों का समय होगा ।

सैक्शन – 6 : नागरिकों के मौलिक / बुनियादी (मूल/प्रमुख) अधिकारों की रक्षा

26.

[सभी सरकारी कर्मचारी]

निचली अदालतों के 12 जूरी सदस्‍यों में से 8 से अधिक की सहमति के बिना किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा तब तक कोई अर्थदण्‍ड अथवा कारावास की सजा नहीं दी जाएगी जब तक कि हाई-कोर्ट अथवा सुप्रीम-कोर्ट के जूरी-मंडल (जूरी समूह) इसका अनुमोदन/स्वीकृति नहीं कर देते। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी नागरिक को जिला अथवा राज्‍य के महा-जूरीमंडल के 30 में से 15 से ज्‍यादा सदस्‍यों की अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक से लिए जेल में नहीं डालेगा ।

27.

[सभी के लिए]

जूरी सदस्‍य तथ्‍यों के साथ-साथ इरादे (मंशा) के बारे में भी निर्णय करेंगे और कानूनों के साथ-साथ संविधान का भी मतलब निकालेंगे ।

28.



यह सरकारी अधिसूचना (सरकारी आदेश) तभी लागू (प्रभावी) होगी जब भारत के सभी नागरिकों में से 51 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इस पर हां दर्ज किया हो और उच्‍चतम न्‍यायालय के सभी न्‍यायाधीशों ने इस सरकारी अधिसूचना (आदेश) का अनुमोदन/स्वीकृति कर दिया हो ।

29.

[जिला कलेक्‍टर]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन (बदलाव) का प्रस्‍ताव करता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क से परिवर्तन की मांग करते हुए एक एफिडेविट जमा करवा सकता है। नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क इसे 20 रूपए प्रति पृष्‍ठ का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा ताकि कोई भी उस एफिडेविट को बिना लॉग-इन के पढ़ सके ।

30.

[तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इस कानून के किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है अथवा ऊपर बाताई धारा के अनुसार दिए किए गए ऐफिडेविट पर कोई समर्थन दर्ज कराना चाहता है तो वह पटवारी के कार्यालय में 3 रूपए का शुल्‍क (फीस) जमा करके अपना हां/नहीं दर्ज कर सकता है। पटवारी नागरिकों के हां/नहीं को लिख लेगा और नागरिकों के हां/नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डाल देगा ।

======================

C3. ज्यूरी सदस्यों के आदेश पर बलात्कार और यौन सम्बंधित शिकायतों का पब्लिक में नार्को टेस्ट का ड्राफ्ट

========= कानूनी ड्राफ्ट ========

ये राजपत्र मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर के बाद लागू होगा

सैक्शन - बहुमत जूरी की सहमति द्वारा नार्को जांच

1)
नागरिक का मतलब यहाँ भारत में पंजीकृत नागरिक-वोटर है, जो 25 साल से अधिक है और 65 साल से नीचे है | जिला जूरी प्रशासक का मतलब यहाँ जिला जूरी प्रशासक जो मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त (भर्ती) होगा या जिला जूरी प्रशासक के द्वारा इन कार्यों के लिए नियुक्त किया गया हो | जिला जूरी प्रशासक नागरिकों के द्वारा बदला जा सकता है (जिला जूरी प्रशासक को बदलने की प्रक्रिया को आगे देखें )

2) जिला जूरी प्रशासक के लिए निर्देश -

निम्नलिखित व्यक्ति अपनी इच्छा से, अपने पर पब्लिक में नार्को जांच करवाने की मांग कर सकते हैं -

. जिले का कोई नागरिक जो किसी अपराध का आरोपी है जिसमें सजा 3 साल से अधिक है
या
कोई नागरिक जो श्रेणी-2 अफसर के पद या उससे ऊपर के पद पर है
या
. कोई नागरिक जो सांसद या विधायक का चुनाव लड़ रहा है
. कोई नागरिक जो सांसद, विधायक या मंत्री रह चूका है

3) जिला जूरी प्रशासक के लिए निर्देश -
यदि ऊपर दिए गए श्रेणी में कोई भी कोई नागरिक अपने ऊपर पब्लिक में नारको जांच की मांग करता है और बहुमत जूरी ने इसके लिए स्वीकृति दे दी है, तो जिला जूरी प्रशासक उस नागरिक का नारको जांच करने के लिए, नागरिक के निवास स्थान वाले राज्य में क्रमरहित तरीके से (रैनडमली) एक न्यायिक प्रयोगशाला को आदेश देगा | कोई भी कोर्ट मामले में बहुमत जूरी के सहमति से नार्को, ब्रेन-मैपिंग, पोली-ग्राफ किया जा सकता है |

4) जिला जूरी प्रशासक के लिए निर्देश -
जिला जूरी प्रशासक 35 और 55 वर्ष के बीच के आयु में, 24 नागरिकों को क्रमरहित तरीके से चुनेगा और बुलाएगा और उन्हें 12 जूरी सदस्यों के दो समूह में बंटेगा | जिला जूरी प्रशासक एक श्रेणी-2 या उससे ऊपर के अफसर को भी नारको जांच करने के लिए नियुक्त करेगा |

5) नारको जांच के प्रभारी के लिए निर्देश -
जब नारको की दवाई का इंजेक्शन लग जाये, तो समूह-क के लोंग प्रश्न बनायेंगे, और यदि समूह-ख में 7 से अधिक लोंग उसको स्वीकृति दे देते हैं ,तो फिर नार्को प्रभारी वो प्रश्न पूछेगा | समूह-क के हरेक व्यक्ति को प्रश्न पूछने के लिए केवल 5 मिनट मिलेंगे |

6) (जूरी सदस्यों के लिए निर्देश) -
जूरी सदस्य ये निर्णय करेंगे कि नार्को जांच निजी हो या सार्वजनिक हो | यदि किसी महिला पीड़ित का नाम गुप्त रखना है, तो फिर पोलीग्राफ, ब्रेन-मैपिंग, नार्को जांच निजी होनी चाहिए और जूरी सदस्य उसे सार्वजानिक नहीं कर सकते | इसके अलावा, नारको जांच सार्वजनिक की जा सकती है |

7) (जूरी सदस्यों के लिए निर्देश) -
यदि समूह-क में कोई व्यक्ति अपना स्थान समूह-ख में किसी व्यक्ति से बदलना चाहता है, तो वो ऐसा कर सकता है | जूरी सदस्यों का बहुमत, जिला जूरी प्रशासक द्वारा बनाये गए विशेषज्ञ (माहिर) दल में से किसी विशेषज्ञ को नार्को जांच के लिए प्रश्न बनाने की स्वीकृति दे सकते हैं | प्रश्नों के बनाने का कार्य केवल दोनों समूहों में जूरी सदस्यों द्वारा किया जायेगा और गुप्त रूप से किया जायेगा | प्रश्न के बनाने के समय जज, वकील, आदि उपस्थित नहीं हो सकते | प्रश्न बनाने का सत्र तब समाप्त होगा जब बहुमत जूरी सदस्य सहमत हों कि प्रश्न बनाने का कार्य अब समाप्त हो |

8) जूरी सदस्यों के लिए निर्देश -
जूरी सदस्यों का बहुमत ये निर्णय करेगा कि कौन से विशेषज्ञ पोलीग्राफ, ब्रेन-मैपिंग और नार्को-जांच का कार्य करवाएंगे | वे इन विशेषज्ञों को जिला जूरी प्रशासक द्वारा चुने गए विशेषज्ञ दल में से चुनेंगे |

9) (जूरी सदस्यों के लिए निर्देश) -
पोलीग्राफ या ब्रेन-मैपिंग या नार्को-जांच में प्रश्नों के प्राप्त उत्तर के आधार पर, समूह-क में कोई जूरी सदस्य या जूरी द्वारा निश्चित विशेषज्ञ नया प्रश्न भी बना सकता है और यदि समूह-ख उस प्रश्न को स्वीकृत करता है, तो जांच प्रभारी उस प्रश्न को पूछेगा | कोई भी प्रश्न समूह-ख के बहुमत जूरी सदस्यों की स्वीकृति के बिना नहीं पूछा जायेगा |

10) (जूरी सदस्यों के लिए निर्देश) -
पोलीग्राफ, नार्को जांच और ब्रेन-मैपिंग - तीनों तरह के जांच में प्राप्त उत्तर को सबूत के रूप में नहीं लिया जायेगा |

11) (पुलिस जांच अफसर के लिए निर्देश) -
मामले की जांच-पड़ताल करने वाला पुलिस अफसर इस जांच में प्राप्त उत्तर के आधार पर आगे जांच करके और सबूत प्राप्त कर सकता है |

12) (नार्को जांच प्रभारी के लिए निर्देश) -
जूरी की स्वीकृति से, नार्को जांच प्रभारी जूरी मुकदमा शुरू होने से पहले भी पोलीग्राफ, ब्रेन-मैपिंग या नारको जाँच करवा सकता है | वो जांच की प्रक्रिया भी पिछले धाराओं में बताई गयी प्रक्रिया के सामान होगी |

13)
बिना जूरी की स्वीकृति से, नार्को जांच नहीं किया जा सकता | यदि आरोपित अपनी सहमति भी दे दे, तो भी नारको-जांच करवाने के लिए बहुमत जूरी सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक होगी |

14) नारको जांच प्रभारी के लिए निर्देश -
मीडिया को लाइव प्रसारण के लिए आमंत्रित किया जाएगा यदि जूरी ये निर्णय करती है कि नारको-जांच सार्वजानिक होगा | इस नार्को जांच को रिकॉर्ड किया जाएगा और लाइव प्रसारण और रिकोर्डिंग सरकारी वेबसाईट पर दिखाई जायेगी |

सैक्शन - राइट-टू-रिकॉल जिला जूरी प्रशासक

1.

-
नागरिक शब्‍द का मतलब (अर्थ) रजिस्टर्ड वोटर (मतदाता) है ।

2.

[जिला कलेक्‍टर]

यदि भारत का कोई भी नागरिक जिला जूरी प्रशासक बनना चाहता हो और जो 30 वर्ष से अधिक हो, तो वह जिला कलेक्‍टर के समक्ष, कार्यालय स्‍वयं अथवा किसी वकील के जरिए एफिडेविट लेकर जा सकता है। जिला कलेक्‍टर सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर जिला जूरी प्रशासक पद के लिए उसकी दावेदारी स्‍वीकार कर लेगा और उसका नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रख देगा ।

3.

[तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क)]

यदि उस जिले का नागरिक तलाटी (पटवारी) के कार्यालय में स्‍वयं जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को जिला जूरी प्रशासक के पद के लिए अनुमोदित (पसंद) करता है तो तलाटी उसके अनुमोदन (स्वीकृति) को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसके मतदाता पहचान-पत्र संख्या, दिनांक-समय और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा ।

4.

[तलाटी]

वह तलाटी नागरिकों की पसंद (प्राथमिकता) को जिले की वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी (मतदाता पहचान-पत्र संख्या) और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा ।

5.

[तलाटी]

यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन (स्वीकृति) रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क (फीस) लिए बदल देगा ।

6.

[मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त (भर्ती) अफसर]

प्रत्‍येक महीने की पांचवी तारीख को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त अफसर प्रत्‍येक उम्‍मीदवार की अनुमोदन (स्वीकृति)-गिनती पिछले महीने की अंतिम तिथि की स्‍थिति के अनुसार प्रकाशित करेगा (छपेगा) ।

7.

[मुख्यमंत्री]

यदि किसी उम्‍मीदवार को जिले के सभी दर्ज मतदाताओं के 35 प्रतिशत से ज्‍यादा नागरिक-मतदाताओं (केवल वे मतदाता ही नहीं जिन्‍होंने अपना अनुमोदन (स्वीकृति) फाइल किया है बल्‍कि सभी दर्ज मतदाता) का अनुमोदन (स्वीकृति) मिल जाता है और वर्तमान जिला जूरी प्रशासक के अनुमोदन से उम्मीदवार के अनुमोदन जिले के कुल मतदाता संख्या के 5% से अधिक है, तो मुख्यमंत्री वर्तमान जिला जूरी प्रशासक को हटा सकते हैं या उन्‍हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है और उस सर्वाधिक अनुमोदन (स्वीकृति) प्राप्‍त उस उम्‍मीदवार को जिला जूरी प्रशासक के रूप में नियुक्‍त कर कर सकते हैं या उन्‍हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा ।

सैक्शन-सी.वी. (जनता की आवाज़)

CV1. (जिला कलेक्टर को निर्देश) यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिला कलेक्टर को एक एफिडेविट (शपथ पत्र) 20 रुपये प्रति पन्ने की फीस के साथ देगा | क्लर्क उस एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधान मंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा, ताकि सभी उसे बिना लॉग-इन के देख सकें |

CV2. (तलाटी उर्फ़ पटवारी उर्फ लेखपाल को निर्देश ) यदि कोई नागरिक इस कानून के मसौदे या इस कानून के किसी धारा के खिलाफ विरोध दर्ज करवाना चाहता है या समर्थन करना चाहता है या उपरोक्त धारा के अनुसार दर्ज एफिडेविट पर विरोध या समर्थन करना चाहता है, तो वह अपनी हाँ या ना 3 रुपये फीस देके पटवारी के ऑफिस में रजिस्टर करवा सकता है | पटवारी उस नागरिक की हाँ / ना दर्ज करेंगे और प्रधान मंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डालेंगे |

नोट ----- मसौदे के आखिर में CV1. और CV2. देखें | इन धाराओं को प्रयोग करके कार्यकर्ता नार्कोटेस्ट कानून में बदलाव ला सकता है | इसके अलावा जिला जूरी प्रशासक अपने विवेक-अधिकार उपयोग कर सकते है | अगर वह अपनी विवेक-अधिकार का दुरूपयोग करे तो नागरिक राइट टू रिकॉल-जिला जूरी प्रशासक की प्रक्रिया का प्रयोग करके नागरिक जिला जूरी प्रशासक को बदल सकते है | इस प्रकार नारको-जांच अधिकारीयों और जिला जूरी प्रशासक को गलत करने से रोक सकते हैं |

===========ड्राफ्ट का अंत ===========

C4. राइट-टू-रिकॉल-जिला पुलिस कमिश्नर (अपने पुलिस-कमिश्नर को किसी भी दिन बदलने का नागरिकों की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया-ड्राफ्ट)

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया/अनुदेश

1.

—-

मुख्‍यमंत्री सरकारी अधिसूचना(आदेश) पर हस्‍ताक्षर करेंगे ।

2.

[राज्‍य चुनाव आयुक्‍त/इलेक्शन-कमिश्नर]

मुख्‍य मंत्री और नागरिक , राज्‍य चुनाव आयुक्‍त से जिला पुलिस प्रमुख का सह-मतदान करवाने की विनती (अनुरोध) करेंगे, जब कभी भी किसी जिले में जिला पंचायत, तहसील पंचायत, ग्राम पंचायत अथवा नगर निगम अथवा जिला भर में जिला स्‍तर का कोई भी आम चुनाव चल रहा हो।

3.

[राज्‍य चुनाव आयुक्‍त]

यदि कोई भारतीय नागरिक पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख नहीं रहा हो, 30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक जिसने 5 वर्षों से अधिक समय तक सेना में काम किया हो, पुलिस में एक भी दिन काम किया हो, सरकारी कर्मचारी के रूप में 10 वर्षों तक काम किया हो अथवा उसने राज्‍य लोक सेवा आयोग या संघ लोक सेवा आयोग की लिखित परीक्षा पास की हो, अथवा सिर्फ विधायक या सांसद या पार्षद या जिला पंचायत के सदस्‍य का चुनाव जीता हो, वह जिला पुलिस प्रमुख के उम्‍मीदवार के रूप में अपने को दर्ज करवा सकेगा |

4.

[राज्‍य चुनाव आयुक्‍त]

राज्‍य चुनाव आयुक्‍त जिला पुलिस प्रमुख के चुनाव के लिए एक मतदान पेटी रखवा देगा ।

5.

[नागरिक]

कोई भी नागरिक–मतदाता उम्‍मीदवारों में से किसी को भी वोट दे सकता है ।

6.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि कोई उम्‍मीदवार जिले के सभी दर्ज नागरिक-मतदाताओं (सभी, न कि केवल उनका जिन्‍होंने वोट दिया है) के 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का मत/वोट प्राप्‍त कर लेता है तो मुख्‍यमंत्री त्‍यागपत्र (इस्‍तीफा) दे सकते हैं अथवा सबसे अधिक मत प्राप्‍त करने वाले उस व्‍यक्‍ति को उस जिले में अगले 4 वर्ष के लिए नया जिला पुलिस प्रमुख नियुक्‍त (भर्ती) कर सकते हैं ।

7.

[मुख्‍यमंत्री]

मुख्‍यमंत्री एक जिले में अधिक से अधिक एक व्‍यक्‍ति को जिला पुलिस प्रमुख बना सकते हैं ।

8.

[मुख्‍यमंत्री]

यदि कोई व्‍यक्‍ति पिछले 3000 दिनों में 2400 से अधिक दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख रह चुका हो तो मुख्‍यमंत्री उसे अगले 600 दिनों के लिए जिला पुलिस प्रमुख के पद पर रहने की अनुमति नहीं देंगे ।

9.

[मुख्‍यमंत्री, राज्य के नागरिकगण]

राज्‍य के सभी नागरिक मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से मुख्‍यमंत्री किसी जिले में इस कानून को 4 वर्षों के लिए हटा (निलंबित कर) सकते हैं और अपने विवेकाधिकार (मर्जी) से उस जिले में जिला पुलिस प्रमुख की नियुक्‍ति कर सकते हैं (रख सकते हैं) ।

10.

[प्रधानमंत्री, भारत के नागरिक]

भारत के सभी नागरिक मतदाताओं के 51 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के अनुमोदन/स्वीकृति से प्रधानमंत्री किसी राज्‍य में इस कानून को 4 वर्षों के लिए हटा सकते हैं और अपने विवेक/अधिकार से उस राज्‍य के सभी जिलों में जिला पुलिस प्रमुख की नियुक्‍ति कर सकते हैं।

11. जनता की आवाज़ (सी वी ) 1

[जिला कलेक्टर (डी सी)]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक एफिडेविट जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पेज का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

12. जनता की आवाज़ (सी वी ) 2

[तलाटी यानि पटवारी/लेखपाल]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह ऊपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट (हलफनामा) पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क (फीस) देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी डाल देगा ।

C5. राइट-टू-रिकॉल – जिले का प्रधान जज (अपने जिले के प्रधान जज को किसी भी बदलने का नागरिकों की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया-ड्राफ्ट)

धारा संख्या #

[अधिकारी जिसके लिए निर्देश]

प्रक्रिया/अनुदेश

1. `नागरिक` शब्द का अर्थ जिले का पंजीकृत मतदाता होगा |

2. [कलेक्टर के लिए निर्देश] यदि भारत का कोई नागरिक जो 35 साल से अधिक हो और जिसके पास एल.एल.बी की शैक्षिक उपाधि ((डिग्री) हो और जिले का प्रधान जज बनना चाहता है, तो वो स्वयं या उसके वकील द्वारा एफिडेविट के साथ जिला कमिश्नर (या उसके द्वारा नियुक्त (रखा) अफसर) के दफ्तर आये, तो जिला कमिश्नर (या उसके द्वारा नियुक्त अफसर) सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर, उसकी जिले का प्रधान जज उम्मीदवार बनने की अर्जी को स्वीकार करेगा | जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क उम्मीदवारों के नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रखेगा |

3. [तलाटी या तलाटी के क्लर्क के लिए निर्देश] यदि उस जिले का नागरिक तलाटी (पटवारी) के कार्यालय में स्‍वयं जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को जिला सरकारी वकील के पद के लिए अनुमोदित (पसंद) करता है तो तलाटी उसके अनुमोदन (पसंद) को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसका मतदाता पहचान-पत्र, दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा ।

4. [तलाटी के लिए निर्देश] वह तलाटी नागरिकों की पसंद को जिले के वेबसाइट पर उनके मतदाता पहचान-पत्र और उनकी प्राथमिकताओं (पसंद) के साथ डाल देगा ।

5. [तलाटी के लिए निर्देश] यदि कोई नागरिक अपनी स्वीकृति (पसंद) रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों (पसंद) को बिना कोई शुल्‍क (फीस) लिए रद्द कर देगा ।

6. [कलेक्टर के लिए निर्देश] प्रत्‍येक महीने की पांचवी तारीख को जिला कलेक्टर प्रत्‍येक उम्‍मीदवार की अनुमोदन (स्वीकृति)-गिनती पिछले महीने की अंतिम तिथि की स्‍थिति के अनुसार प्रकाशित करेगा ।

7. [हाई कोर्ट प्रधान जजों के लिए निर्देश] यदि किसी उम्मीदवार को जिले के सभी मतदाताओं के 35% से अधिक अनुमोदन (पसंद) मिलते हैं (सभी, न कि केवल जिन्होंने अपने अनुमोदन दिए हैं), और वे अनुमोदन वर्तमान जिला प्रधान जज के अनुमोदनों से जिले के मतदाता संख्या के 5% से अधिक है, तो हाई कोर्ट के प्रधान जज उसे जिले का प्रधान जज नियुक्त (भर्ती) कर सकते हैं |

8. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश] जब तक जिला सरकारी वकील के पास जिले के 34% से अधिक मतदातों का अनुमोदन (पसंद ; स्वीकृति) है, मुख्यमंत्री उसको बदलेगा नहीं | लेकिन यदि जिला सरकारी वकील के अनुमोदन 34% से कम हो जाते हैं, तो मुख्यमंत्री उसको अपने पसंद के अफसर से बदल देगा |

9. (जिले के प्रधान जज के लिए निर्देश) जिले का प्रधान जज, हाई कोर्ट के प्रधान जज की स्वीकृति (समर्थन) से या पारदर्शी शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली का उपयोग करके उस राज्य के नागरिकों की स्वीकृति से, अपने प्रस्तावित जूरी सिस्टम के ड्राफ्ट को लागू करने का निर्णय कर सकता है | (देखें धारा 10 और 11)

10. जनता की आवाज़ (सी वी ) 1

[जिला कलेक्टर (डी सी)]

यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी परिवर्तन का प्रस्ताव करना चाहता है तो वह नागरिक जिला कलेक्‍टर अथवा उसके क्‍लर्क के पास इस परिवर्तन की मांग करने वाला एक एफिडेविट जमा करवा देगा । जिला कलेक्‍टर अथवा उसका क्‍लर्क 20 रूपए प्रति पेज का शुल्‍क लेकर एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन सब उसको देख सकें ।

11. जनता की आवाज़ (सी वी ) 2

[तलाटी यानि पटवारी (लेखपाल)]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसके किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट (हलफनामा) पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क देकर हां/नहीं दर्ज करवा सकता है । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उस नागरिक के हां–नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर भी डाल देगा ।

C6. राइट-टू-रिकॉल-सेंसर बोर्ड अध्यक्ष (सेंसर बोर्ड अध्यक्ष, जो फिल्म आदि में काट-छांट करता हैं) को किसी भी दिन बदलने का नागरिकों की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया)

========= ड्राफ्ट की शुरुआत =======

1. नागरिक शब्द एक पंजीकृत मतदाता होगा।

2. ( जिला कलेक्टर को निर्देश ) … अगर कोई मतदाता सेंसर बोर्ड अध्यक्ष (चैयरमेन) बनाना चाहता है तो वह व्यक्ति जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से एफिडेविट (शपथ पत्र) के साथ उपस्थित होगा | कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त (रखा हुआ) व्यक्ति अर्जी स्वीकार करके जमा राशि लेगा और उसका नाम `सेंसर बोर्ड अध्यक्ष (चैयरमेन) उम्मीदवार` के रूप में प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा | जमा राशि सांसद के चुनाव के लिए दी जाने वाली राशि के सामान होगी |

3. ( तलाटी (= लेखपाल = पटवारी) या तलाटी के क्लर्क को निर्देश ) … उस जिले का नागरिक अगर तलाटी के कार्यालय में आकर, 3 रूपया शुल्क (फीस) देकर, सेंसर बोर्ड चैयरमेन के उम्मीदवारों में से अधिकतम 5 नामों के लिए मंजूरी देगा तो तलाटी उन नागरिक की राय कंप्यूटर में दर्ज करके उस मतदाता को एक रसीद देगा जिसमें नागरिक की वोटर आईडी, समय-तारीख और पसंद किये गए उम्मीदवारों के नाम होंगे | बाद में, इस सिस्टम में एस.एम.एस. भेजने का सिस्टम डाला जा सकता है, जिससे एक बार राय देने का खर्च नागरिक को 10 पैसे होगा |

4 (तलाटी को निर्देश ) … तलाटी नागरिकों की राय जिले की वेबसाइट पर उनके मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा |

5 ( तलाटी को निर्देश ) … अगर नागरिक किसी स्वीकृति को रद्द करने आता है तो तलाटी बिना कोई फीस लिए उसकी मंजूरी में से एक या अधिक नाम रद्द कर देगा |

6 . ( कैबिनेट सचिव को निर्देश ) ... हर महीने की 5 तारीख को कैबिनेट सचिव नागरिकों की राय प्रधानमंत्री वेबसाइट पर जारी करेगा | यह राय पिछले महीने की आखिरी तारीख तक की होगी |

7. ( प्रधान मंत्री को निर्देश ) … अगर किसी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री वेबसाइट पर सभी नागरिकों के 35 % समर्थन मिलते हैं (सभी, न कि केवल जिन्होंने अपना अनुमोदन दिया है) और वर्तमान अध्यक्ष से 1% अधिक समर्थन मिलते हैं, तो प्रधान मंत्री चाहे तो वर्तमान सेंसर बोर्ड अध्यक्ष को हटाकर, नागरिकों द्वारा चुने गए उम्मीदवार को सेंसर बोर्ड अध्यक्ष बना सकते हैं या प्रधानमंत्री को ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं | प्रधान मंत्री का फैसला अंतिम होगा |

8. जनता की आवाज धारा 1 ( जिला कलेक्टर को निर्देश ) … अगर कोई नागरिक इस कानून या इसकी कोई धारा में बदलाव चाहता है तो वह अपना 20 रुपये प्रति पन्ने के एफिडेविट (शपथ पत्र/हलफनामा) को जिला कलेक्टर के सामने रखेगा | क्लर्क उस एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधान मंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करेगा ताकि उसको बिना लॉग-इन के सभी देख सकें |

9. जनता की आवाज धारा 2 ( पटवारी ( = लेखपाल = तलाटी ) को निर्देश ) … अगर कोई नागरिक इस क़ानून पर या इस क़ानून के किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहता है या इससे पहले वाले धारा के अनुसार दर्ज एफिडेविट के किसी धारा पर अपनी हाँ या ना दर्ज करवाना चाहता है, तो वह तलाटी के ऑफिस में वोटर आई.डी के साथ आएगा, 3 रूपया फीस देगा और अपनी हां ना दर्ज करवाएगा | तलाटी उसे एक रसीद देगा और नागरिक की हाँ / ना को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर, नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ डालेगा |

======= ड्राफ्ट का अंत ===============

C7. राइट-टू-रिकॉल – मुख्यमंत्री का कानून-ड्राफ्ट (अपने मुख्यमंत्री को किसी भी दिन बदलने का आम-नागरिकों की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया)

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-मुख्यमंत्री राज्य राजपत्र ड्राफ्ट का आरम्भ =====

1. [सामान्य जानकारी]

नागरिक शब्‍द का मतलब रजिस्टर्ड वोटर (मतदाता) है।

2. [जिला कलेक्टर को निर्देश]

30 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक जो मुख्‍यमंत्री बनना चाहता हो वह जिला कलेक्टर के सामं, कलेक्टर के कार्यालय जा सकता है। जिला कलेक्टर विधायक के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धनराशि के बराबर शुल्‍क लेकर उसे एक सीरियल नम्‍बर जारी करेगा और उस उम्मीदवार का नाम मुख्यमंत्री वेबसाईट पर रखेगा ।

3. [तलाटी अर्थात लेखपाल अर्थात पटवारी (अथवा तलाटी का क्‍लर्क)]

भारत का कोई भी नागरिक पटवारी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्‍यक्‍तियों को मुख्‍यमंत्री के पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। तलाटी उसके अनुमोदन (स्वीकृति) को कम्‍प्‍युटर में डाल देगा और उसे उसके वोटर आईडी (मतदाता पहचान-पत्र), दिनांक और समय, और जिन व्‍यक्‍तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, उनके नाम, के साथ रसीद देगा । (गरीबी रेखा से नीचे) बी पी एल कार्डधारकों के लिए शुल्‍क/फीस 1 रूपया होगी। यदि कोई नागरिक अपने अनुमोदन (स्वीकृति) रद्द करने के लिए आता है तो तलाटी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्‍क लिए रद्द कर देगा।

4. [तलाटी के लिए निर्देश]

वह तलाटी नागरिकों की पसंद (प्राथमिकता) को मुख्यमंत्री के वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी नंबर (मतदाता पहचान-पत्र संख्या) और उसकी प्राथमिकताओं के साथ डाल देगा ।

5. [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]

हर सोमवार को हर जिला का कलेक्टर हरेक उम्‍मीदवार की अनुमोदन (स्वीकृति)-गिनती को प्रकाशित करेगा। .

6. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]

आज का मुख्‍यमंत्री अपनी अनुमोदन (स्वीकृति) – गिनती को निम्‍नलिखित दो से जो ज्यादा है, उसको मान सकता है –

- नागरिकों की संख्‍या जिन्‍होंने उसका अनुमोदन (स्वीकृति) किया है
- मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायकों द्वारा प्राप्‍त किए गए मतों का योग

7. [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश]

यदि किसी व्‍यक्‍ति को मौजूदा मुख्‍यमंत्री के मुकाबले (सभी रजिस्‍टर्ड मतदाताओं के) 2 प्रतिशत ज्‍यादा अनुमोदन (स्वीकृति) प्राप्‍त है तो वर्तमान (आज का) मुख्‍यमंत्री इस्‍तीफा दे सकता है और विधायकों से कह सकता है कि वे सबसे अधिक अनुमोदन (स्वीकृति) प्राप्‍त व्‍यक्‍ति को नया मुख्‍यमंत्री बना दें ।

8. [विधायकगण के लिए निर्देश]

विधायकगण धारा 7 में बताये गए व्‍यक्‍ति मत्लाग्ब सबसे अधिक अनुमोदन (स्वीकृति) प्राप्‍त मुख्यमंत्री उम्मीदवार को नया मुख्‍यमंत्री बना सकते हैं।

सैक्शन- सी.वी. (जनता की आवाज)

9. सी वी – 1 [जिला कलेक्‍टर के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून में कोई बदलाव चाहता है तो वह जिलाधिकारी (डी सी) के कार्यालय में जाकर एक एफिडेविट जमा करा सकता है और डी सी या उसका क्लर्क उस एफिडेविट को 20 रूपए प्रति पेज का शुल्‍क (फीस) लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन कर देगा ताकि बिना लॉग-इन उसको कोई भी देख सके ।

10. सी वी – 2 [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल के लिए निर्देश]

यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहे अथवा वह उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी एफिडेविट पर हां – नहीं दर्ज कराना चाहे तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ तलाटी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्‍क (फीस) देगा । तलाटी हां-नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा। पटवारी या उसका क्लर्क हां – नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर डाला जाएगा ।

===== प्रस्तावित राइट-टू-रिकॉल-मुख्यमंत्री भारतीय राजपत्र ड्राफ्ट समाप्त =====

C8. राइट-टू-रिकॉल – विधायक का कानून-ड्राफ्ट (अपने विधायक को किसी भी दिन बदलने का आम-नागरिक की नागरिक-प्रामाणिक प्रक्रिया

=== राइट-टू-रिकॉल विधायक प्रस्तावित ड्राफ्ट का आरम्भ ====

1. (1.1) शब्द `नागरिक` का मतलब रजिस्ट्रीकृत मतदाता है |

(1.2) शब्द “कर सकता है “ का मतलब कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं है | इस का मतलब “ कर सकता है “ या “करने की जरूरत नहीं है “ है |

2. [जिला कलेक्टर को निर्देश]
प्रधानमंत्री जिला कलेक्टर को निर्देश देते हैं कि यदि भारत का कोई नागरिक जिला कलेक्टर के दफ्तर आता है और विधायक के लिए उम्मीदवार बनना चाहता है, तब जिला कलेक्टर , विधायक-चुनाव के जमा-राशि जितना शुल्क (फीस) लेगा और उस व्यक्ति को `विधायक उम्मीदवार` घोषित करेगा | जिला कलेक्टर एक सीरियल नंबर (क्रम संख्या) देगा और उसका नाम प्रधान मंत्री के वेबसाइट पर डालेगा |

3. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]

(3.1) प्रधानमंत्री पटवारी (या तलाटी या गाँव का अधिकारी ) को निर्देश देगा कि नागरिक यदि खुद पटवारी के दफ्तर आता है, रु. 3 शुल्क (फीस) देता है, और कम से कम पांच व्यक्तियों को अनुमोदन देता है विधायक के पद के लिए, तो पटवारी उसके पसंद (अनुमोदन) कंप्यूटर में डालेगा और उसको एक रसीद देगा, जिसमें लिखा होगा - उसकी वोटर आई.डी संख्या, तारीख-समय और जिन उम्मीदवारों को उसने पसंद किया है |

(3.2) यदि पटवारी के पास कंप्यूटर आदि नहीं है, तब जिला कलेक्टर इस कार्य को तहसीलदार के दफ्तर को देगा, जब तक कि पटवारी को कंप्यूटर, आदि नहीं मिलता इस कार्य को करने के लिए |

(3.3) जिला कलेक्टर एक एस.एम.एस फीडबैक सिस्टम बना सकता है जो `क्रेडिट कार्ड लेन-देन` के फीडबैक सिस्टम के समान होगा |

(3.4) जिला कलेक्टर उपकरण (मशीन) पटवारी को देगा, जो फोटो और अंगुली की छाप लेगा और रसीद देगा नागरिक के अंगुली की छाप और फोटो के साथ |

4. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]
पटवारी नागरिकों के अनुमोदन (पसंद) प्रधानमंत्री के वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर और उन उम्मीदवारों के नाम, जिनको उसने अनुमोदन (पसंद) किया है |

5. [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल या (उसके क्लर्क) को निर्देश]
यदि वोटर अपने अनुमोदन रद्द करने आता है, तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन (पसंद) को बिना कोई फीस लिए रद्द कर देगा |

6. [विधायक को निर्देश]

यदि कोई दूसरा (वैकल्पिक) उम्मीदवार को अनुमोदन (स्वीकृति) मिल जाती हैं जो इन में से कम है -

(6.1) वर्तमान (आज के) विधायक के वोटों की गिनती से (सभी मतदाताओं के ) 20% अनुमोदन (स्वीकृति) से अधिक है

या

(6.2) उस चुनाव-क्षेत्र के सभी मतदाताओं के 50% से ज्यादा अनुमोदन (स्वीकृति) हों , और साथ ही में वर्तमान विधायक के प्राप्त अनुमोदन से (मतदाता की कुल संख्या का) 10% अनुमोदन/स्वीकृति ज्यादा हों |

तो, वर्तमान (आज का) विधायक अपना इस्तीफा 7 दिन में दे सकता है या उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है |

7. [विधानसभा अध्यक्ष, विधायक को निर्देश]
(7.1) यदि वर्तमान (आज का) विधायक 7 दिनों में इस्तीफा नहीं देता है, तो लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव बुला सकता है संसद में, उस विधायक को निकालने के लिए या ऐसा करना उसके लिए नहीं जरूरी है | विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अंतिम होगा |

(7.2) दूसरे विधायक, उस विधायक को निकालने के लिए प्रस्ताव स्वीकृत कर सकते हैं या उन्हें ऐसा करने के लिए कोई जरूरत नहीं है |

8. [चुनाव आयोग(देश में चुनाव कराने वाली सरकारी संस्था ) को निर्देश]
(8.1) यदि विधायक इस्तीफा देता है या निकाला जाता है, तो चुनाव आयोग नया चुनाव करवायेगी, कायदे के अनुसार | अगले चुनाव में, जो विधायक निकाला गया है, वो चुनाव लड़ सकता है |

(8.2) धारा-6 के प्रयोजन के लिए, मतदाताओं के अनुमोदन (स्वीकृति) जिन्होनें चुनाव के घोषित होने के बाद अपना नाम दर्ज (रेजिस्टर) किया है , वे नहीं गिने जाएँगे | हर चुनाव-क्षेत्र की मतदातों की सही संख्या चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित की जायेगी और चुनाव-आयोग का फैसला आखरी होगा |

9. जनता की आवाज़-1 (सी वी – 1) [जिला कलेक्टर को निर्देश]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून में बदलाव चाहता हो तो वह जिला कलेक्‍टर के कार्यालय में जाकर एक ऐफिडेविट (शपथपत्र) दे सकता है और जिला कलेक्टर या उसका क्‍लर्क इस ऐफिडेविट को 20 रूपए प्रति पन्ने की फीस लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करेगा ।

10. जनता की आवाज़-2 (सी वी – 2) [तलाटी अर्थात पटवारी अर्थात लेखपाल को निर्देश]

यदि कोई भी नागरिक इस कानून अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा उपर के धारा में प्रस्‍तुत किसी भी ऐफिडेविट (शपथपत्र) पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचानपत्र (वोटर आई डी) लेकर तलाटी के कार्यालय में जाकर 3 रूपए की फीस जमा कराएगा। तलाटी हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे इसकी रसीद देगा। इस हां/नहीं को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ डाल दिया जाएगा ।

11. [प्रधानमंत्री के लिए निर्देश]

यदि भारत के कम से कम 40 करोड़ नागरिक-मतदाता सहमति देते हैं, तो प्रधानमंत्री राज्य में इस कानून-ड्राफ्ट को 5 वर्ष के लिए हटा सकता है |

=== राइट-टू-रिकॉल विधायक प्रस्तावित ड्राफ्ट का अंत ====


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PostPosted: Mon Apr 06, 2015 8:10 pm 
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Dear Citizens,

The most important problem in Crime against Women is low conviction rate and no evidences. The new time offenders are seldom punished due to which they are encouraged and they subsequently commit bigger crimes and other people around them are also encouraged to commit bigger crimes. To reduce these problems, we need citizen-verifiable system(s) in place, using which citizens can themselves find out what is true and what is false and prevent rapes, sexual assaults and false complaints.

Those who want that Rapes, Sexual assaults and false complaints in India should reduce in the country, please send following order to your MP via SMS or twitter ---

"Please promote via website, private member bill etc. and get printed drafts in tinyurl.com/SurakshitMahila in Gazette. Or will not vote for you/your party. Also setup a public sms server on your site like smstoneta.com so that SMS-opinions of citizens are seen along with their voter IDs by all without need to login"

Besides sending sms to your MP, also display proof of your opinion along with voter id by sending 3 SMS-es to already existing public sms server. If you want to reduce sexual assaults and false complaints, then please send from your mobile inbox, send to 08141277555 these 3 SMS-es –
.
• First sms will be in this format (meaning that you have to put your voter ID number between two star symbols and send sms)
.
*YourVoterIDNumber*
.
• Second SMS will have only 4 numbers for support of TCP (righttorecall.info/tcpsms ; This issue promotes all issues) which is the support code of TCP -
.
0011
.
Third SMS will have only 4 numbers for support for reducing sexual assaults and false complaints –
.
0211
.
Your support will come on this link – http://smstoneta.com/tcp
.
If sufficient internet voter id support is received, these pro-common laws will come.

And also inform other citizens via ads, pamphlets etc. to send this SMS to their MP

======================

Dear MP,

If you have received the internet link to this status via SMS etc. from your voter, then it is order from the citizen to you, to promote the following drafts in Section `C` via your website, private member bill etc. and order PM to print those DRAFTs in Gazette.

===============================

A. Solution-Drafts in Short

We, common-citizens need to demand and force the CM/PM/ judges to get printed the following laws in Gazette Notification. We should not only elect our netas but also ensure that they work efficiently once they come to power.

A1. Administrative means to reduce rapes and false complaints

A1.1. Citizen-Verifiable, Transparent Complaint/Proposal Procedure – So that complaints/evidences are not suppressed

Pathetic condition of common citizens in today`s system - Today, if anyone has any evidence against a sexual assault or a false complaint and goes to a government office to submit them, then after submitting application having evidences, citizens cannot see their own application once it is submitted. And so, it is easy to suppress / destroy evidences as of today.

A simple solution - That is why, we have proposed that citizens should have the option, that if he/she wishes, then they can visit the specified government office, submit the application on a Rs.20 per page affidavit and get affidavit scanned along with voter ID number of the citizen onto PM, CM or any specified website, so that all can see the affidavit without logging-in.

In short, this demand is only of one line that any citizen should have the option to get affidavit scanned onto PM website along with his / her voter ID number so that all can see the same without any need to log-in. Due to this procedure, no official, no media or official can suppress the evidences and applications of commons without the suppressing person being exposed to masses with proof.

Please see the full draft of TCP below in section C1.

A1.2. Jury trial – For quick, fair judgements

In Jury system 15 to 1500 randomly chosen citizens decide court cases instead of judges and the jurors change after every case.

Judges delay the cases for ages since they sell out to the rich accused party. The trial of rape must be decided by Jury of 15 to 1500 randomly chosen citizens, between 30 years and 55 years. The Jury members will change after every case. The Jury will be formed by an officer titled as District Jury Administrator who will be appointed by CM and can be recalled\replaced by citizen-voters of that district.

In judge system, handful of judges give all verdicts, where as in Jury System the number of verdict givers is not 12-15 times more but 1000s of times more. How? In judge system, say one judge works for 30 years in his life and give judgments in 100 important cases a year i.e. say Judge gives judgement in 3000 cases in his whole life. In Jury System, the cases will go to some 36000 citizens. So number of verdict givers increase by 36000 times, not just by 12 times !!

So in judge system, corrupt benefit because number of people they have to bribe (via hiring their relatives as lawyers) are few hundred only. In Jury System, the numbers will run into crores and makes it unmanageable to delay the cases or bribe. So solution we propose is to end the judge system, and use Jury System in Supreme Court, High Courts and Lower Courts as well. This will make it impossible for corrupt to bribe their way in courts. Further, Jury System reduces unfairness and corruption in administration and this will reduce sexual assaults and false complaints.

See full procedure of proposed Jury Trial in section C2 below.

A1.3. Narco Test in Public by Jury approval reduces possibility of false cases –

Narco test is a safe procedure where few ml of sodium pentathenol is injected to temporarily depress planning center of brain of person under medical supervision, so that the person cannot reply to questions with planning. Narco test along with other investigations helps to get leads which can help to get evidences. To prove or disprove whether rape was committed, narco tests on rape accused should be conducted in public after Jury has seen reasonable incriminating evidences.

1. All rape cases will be tried by Jury and Jury only. The Jury will consist of 15 to 1500 citizens between 30 years and 55 years of age chosen at random from the district, and at least 50% will be women.

2. If the accused himself wants or if majority of Jurors deem necessary to have truth serum test on the accused, then the investigating officer will conduct truth serum test on the accused.

3. If complainer wants, then the investigating officers will conduct truth serum test on the complainer. The complainer will not be asked to take truth serum test against her will unless majority jurors deem it necessary.

For details about Narco Test in Public by Jury, Please see section C3 below and this link -

https://www.facebook.com/notes/right-to ... 8393168501

The truth serum test is must in case of rape trials as either party may lie, and evidences often fail to prove use of force or threat. The existing laws require permission of judge for truth serum test and since judges may not give permission, the aggressor often walks away.

So decision of truth serum test should be left to Jurors. The existing law-draft that female’s testimony be taken as final word is flawed and should be replaced with compulsory truth serum test in case of rape and sexual assault accusations and cases. The means and use of truth serum tests will create a powerful deterrent in reducing rapes, sexual assaults and false complaints in India.

A1.4. Right to Recall over District Police Commissioner for crimes against women and Right to Recall over District Judge for crimes against women :

Due to fear of loosing job and power, 99% of the officials improve their behavior and work and rest 1%, who do not improve their behavior and work, are replaced by better officials.

Every district must have a Deputy Police Commissioner (or DySP) in-charge of crimes against women and women in the district should have right to recall that Deputy Police Commissioner or DySP .

Every district must have 3 judges in-charge of crimes against women, and women of district should have right to recall them.

Please see detailed proposed drafts in section C4 and C5 below.

A1.5. Every case's daily proceedings should be put on net, after removing names necessary to hide identities :

This way citizens can monitor how slow/fast a judge has been. The judges are fast in cases followed up by media and slow in all other cases. And media can`t follow all cases, and media is after all a paid-media ... when accused is wealthy, media often conveniently forgets to follow-up. If all cases' daily proceedings come on net, then judges` deliberate slow speed will become known with proof.

A2. Technical means to reduce rapes and false complaints

The following technical means will only be sufficient to prevent sexual assaults and false complaints if the previously mentioned administrative means are in place, otherwise they will fail.

A2.1. Putting cameras at as many public places as possible :

By putting as many cameras as possible, we can reduce rapes as well as molestations such as at bus stands, inside buses and other crowded public places. An example is Beijing. During Olympics, due to fear of terrorism, Government of China installed over one million cameras in Beijing covering every corner of city. The crimes of molestations (as well as traffic violations) reduced. Modi government of Gujarat had installed cameras in riot-sensitive public places and in police vans patrolling those areas. This had lead to reduction in riots in those areas.

A2.2. Providing voice linked equipment with panic button to every women :

Every women can be given an equipment which cannot be turned off (unless broken), and the equipment will send the voice around her continuously to some control station. Further, the equipment can have panic button which when pressed will send panic signal to near by cell phone towers as well as police stations.

The location can be obtained using known technical methods. This will enable the policemen to locate woman who is being victimized in least possible time.

A2.3. Providing guns to women and commons:

Women should be allowed and encouraged to keep guns and other weapons with them all the time. No licence should be required for that, only registration should be done for that. And they should be trained to use these weapons etc. After successful training, these women should be given a registered firearm. Initially, compulsory military training for one year after school should be introduced and this should be a requirement for further college education. Later weapons training centres for other citizens can also be started.

There is enough proof that Guns reduce crime and Gun control kills and no proof to the contrary claims.

Please see this section D in this link for more details - viewtopic.php?f=22&t=1194&p=1729#p1730

A2.4. National DNA database :

Building database of DNA of all males will be useful in tracking down rape suspects with lower costs and with speed. The fear that you will get tracked down speedily will deter criminals from committing rapes.

B. Problem in Detail and clearing some misconceptions

B1 Delhi Bus Rape –

If one looks at crime-history of main accused Ram Aadhaar Singh in recent "Delhi bus rape" case, one can see that he committed several small-large violent crimes in past and some crimes even got reported. But he got away in all previous cases. This increased his courage, as well as courage of his colleagues and they resorted to more severe crimes.

If courts had been even remotely sincere in past cases, then he (Ram Aadhaar Singh) would have suffered prison sentences of few months to years for past small offenses.

The courts don`t punish small crimes at all these days, unless victim is wealthy and does a follow up. The main reasons being --- judges are corrupt, public prosecutors are corrupt and so are investigators i.e policemen. And High Court judges are more corrupt, and only interested in cases which can fetch them money or fetch money to their relative lawyers or fetch them promotions, and do not give a damn about improving infrastructure of lower courts. The corruption in Law Ministry has further worsened the problem. The Law Minister and IAS in Law Ministry are also not interested in increasing number of Lower Courts and improving their speed, fairness and transparency. And no CM wants to do anything to reduce the delay and disorder in the courts willingly.

B2. Fact as of today, Police is ONLY for the politicians, not for the commons

The activists and commons now have to choose whether they will continue to follow leaders blindly or do something which will empower the commons such as minimal firearms to protect themselves from criminals. Criminals already have guns. Gun laws do not stop criminals from having guns but deprive the commons from protecting themselves.

Police have to only protect the politicians, they do not and cannot protect the commons. While the criminals as of today have AK47s, most of the leaders and their blind followers insist that the commons must not have even desi kattas to protect themselves.

B3. Without Jury system and narco in public by Jury approval, any `strict` law will be a disaster

The judges will use that law to extort all the wealth or accused, be guilty or innocent.

We MUST hang extreme case criminals or give high punishments, but AFTER Narco-test in public followed by decision of Jury.

We must not allow hanging or high punishments merely because a judge says so. Because over 99% judges in lower court, high court and supreme court are corrupt. If execution or high punishment by corrupt judges is allowed, then these judges via lawyers will extort every penny from accused whether he is innocent or guilty. The judges will promote false case-filing and further rob people left, right and center. Example - see 498A. In these cases, the judges and relative lawyers literally rob accused, be innocent or guilty and extort 1000s of crores of rupees every year from accused. And in 498A, punishment is only 3 years to 7 years. Imagine, how much money will judges and relative lawyers will rob if sentence is death penalty?

So we should promote strict laws AFTER Narco-test in public by Jury approval and not merely by whim of corrupt judges.

B4. Jury trials are needed for quick justice rather than so called "Fast Track Courts" -

We should have Jury trials if we would like fast and fair trials. Because the jury has ONLY one case, and so case goes on from 10 am to 5 pm with no interruption from other cases. Next we should order MPs via SMS to amend IPC and raise maximum punishment in cases --- where (1) violence has caused potentially fatal injuries, and (2) rape is accompanied by attempt to murder --- to death sentence. And also ask to reduce age of minor from 18 years to 16 years.

B5. Morality Sermons without laws and systems to protect the commons will not reduce sexual assaults -- The first step for morality in society is to have MORAL LAWS

1. Why we need moral systems today and only sermons on morality are insufficient -

It is said that hundreds of thousands of years ago, there lived super beings like Mahavir etc. in whose presence carnivorous beings became tame. People never used to put locks on their doors, never stole etc., meaning there was perfect morality.

Now, with changing time due to increase in population, change in the genes (gene mutation) and other factors (which is outside scope of discussion of this article), morality in beings began to diminish. Now, when morality dropped below a certain point, the immoral beings started to loot the moral beings. And the moral beings failed to teach morality to the immoral beings. The immoral beings managed to seize power and occupy top posts by means of favoritism, nexuses, nepotism, hiding of the truth and suppressing the opinions of the masses and making the proofs unavailable to the masses, bodily harm by means of weapons.

So, the moral beings invented MORAL SYSTEMS like protecting themselves with locks on their doors, etc. Because if even 1% immoral beings existed, they formed nexuses and looted the moral beings.

Other moral systems were replacing / punishing the immoral beings at top positions of service in the country by the moral ones (commons) (Praja Adhin Rajaa mentioned in the vedas), other deterrents such as exposure in front of the masses and protection by means of weapons.

So, unless we are able to develop ourselves and morality in ALL IMMORAL BEINGS, we need moral systems. We cannot keep our doors open and unlocked. Also, the moral beings need weapons to protect themselves from immoral beings. There is a need for a system to reduce the nexuses, nepotism, favoritism by means of PRAJAA ADHIN RAJAA, meaning that systems by which the administrators can be replaced/punished by the commons. We call these systems – Right to recall over Censor Board Chairman, Judges, CM, MLAs etc. and Jury trial.

Also, we need a citizen-verifiable procedure by which citizens have option to get scanned and display the evidences etc. as affidavit on PM website along with their voter ID so that the affidavit is visible to all without any need to login. This will prevent the immoral beings from suppressing the evidences given by the commons. We call this system – Citizen-verifiable, Transparent Complaint / Opinion/Proof system. (TCP)

See drafts of these proposed systems below in section C.

We do not oppose sermons of morality but expecting them to protect the moral beings from the immoral beings is a day dream unless we have methods to reduce the population of the immoral beings of the world to 1% or less, to a critical level where the immoral beings cannot form nexuses to loot the moral masses.

So, the first and immediate step today to have morality is to protect the masses from the immoral beings by means of moral systems- to empower the masses by means of guns/power to punish/replace the corrupt and public to see citizen-verifiable proof submitted by common citizens without the proof being suppressed or manipulated.

Point is that the people can be immoral but the systems can be made moral and just. Are we promoting a moral system ? If not, indirectly, we are promoting today`s unjust, immoral system knowingly/ unknowingly.

2. Today`s corrupt systems give wrong moral education to the citizens -- Solution

Today, the citizens learn that even if they do a wrong deed, they can easily get the evidences suppressed and noone will come to know about their bad deeds. Today`s system teaches that influential can do a bad deed and with their connections get away and not be punished and not loose their job.

Today, the witness has to run around in courts for years and years and then also there will be no justice and witness cannot do his duty towards family in such circumstances. That is why very few people get ready to become witness to crimes etc.

Solution is that we need a honest, citizen-verifiable system which gives correct teaching that on doing bad deeds, via TCP others can show to public the evidences and he will be defamed in society. Via recall procedures, his job will be lost and if Jury system is in place, he will be punished by commons in short time. That is why we must demand and get implemented good systems.

3. Why banning of obscenity is not sufficient to decrease sexual assaults -

Although we are not against banning of obscenity, it is not technically easy to do so since semi-nudity pictures, etc. can be shared via scores of sharing sites, internet, DVDs, pen-drives etc. No country has been successful in banning of such material. And even if somehow this is implemented and the offenders are not punished, sexual assaults will not reduce.

Moral values cannot be built without foundation of a good, honest system. If we do not NOW promote a good, honest system by which commons can replace/punish the corrupt, the corrupt top will do everything to stop moral people in their folds. Why ? Because with the moral people in place, the immoral people can then no longer carry on their black ways and so the immoral people try to expel/suppress the moral people.

Say, somehow a `moral` person attains power. But the system is corrupt, the corrupt will successfully supress, remove or kill the `moral` person. Example - Lal Bahadur Shashtri etc.

4. Narendra Modi's juvenile bill 2015 amendment is fraud with the country people

Criminal over 16 years will be treated as adult ONLY if a committee says so --- otherwise he will be treated as juvenile and max punishment even for serious crime against women, murder etc will be 3 years ONLY.

So if a juvenile is rich, or well connected with some lobby like Saudi Arabia's love jihad lobby, and if the victim is poor and the case didnt get paidmedia highlight, then juvenile board members will quietly take bribes and declare the criminal as juvenile and impose max punishment of 3 years ONLY !!

Activists should work to bring Jury System in India, where Jurors will TRY all cases --- juvenile or non-juvenile. That will reduce the problem of corrupt judges and ensure that punishments of juvenile is fair,

C. Detailed Drafts for the main demands to reduce rape, sexual assualts and false complaints

C1. Transparent Complaint-Proposal Procedure


== start of draft of the proposed TCP GN ===

The draft of proposed Transparent Complaint-Proposal Gazette Notification

1. [ order to Collector or his clerk ] The President hereby orders Collector that : if ANY citizen-voter in his district submits a Right to Information application or complaint against corruption or any affidavit to the Collector and requests to be put on the website of Prime Minister, the Collector or his designated clerk will issue a serial number and SCAN that affidavit along with voter ID number of the citizen onto the website of the Prime Minister for a fee of Rs 20 per page so that anyone can see the affidavit without logging-in.

2. [ order to Talati, Patwari, Village Officer or his clerk ] The President orders Patwari that :

(.2.1) if ANY citizen-voter comes with voter ID, and specifies Yes-No on an RTI application, complaint or any affidavit submitted in clause-1, the Patwari will enter his Yes-No on the PM’s website with his voter-ID and give a printed receipt for Rs 3 fee.

(2.2) The Patwari will also allow citizen to change his Yes-No for Rs 3 fee.

(2.3) The fee will be Re 1 for BPL card holder

(2.4) The Collector may create a system of sending SMS feedback to the voter’

(2.5) The Collector may create a system of taking finger-print and picture of the voter and putting it on the receipt

(2.6) The PM may create a system where by citizens can register YES/NO via ATM using ATM-cards for a fee of 50 paise

(2.7) PM may add means to enable citizens to register YES/NO via SMS for 10 paise

3. [note to all Citizens, Officers, Ministers, judges]

(3.1) This TCP Gazette Notification is not a referendum procedure. The Yes-No count will not be a binding on PM, CMs, officers, judges etc. If over 37 crore women voters, dalit voters, senior citizen voters, poor voters, farmer voters or ANY 37 crore citizen-voters register Yes on a given affidavit, then the PM may or need not take necessary action on the RTI application affidavit ; or the PM may or need not resign. PM’s decision will be final.

(3.2) Further, the Collector may design and propose a system to collect Yes-No in clause-2 over secured SMS, and implement that system after approval of PM.

==== end of the proposed GN ====

We summarize the TCP (Transparent Complaint Procedure) law as -

1. If a citizen wants, he can visit Collector’s office and get his complete affidavit SCANNED onto PM’s website along with voter ID number of the citizenfor Rs. 20 per page fee, so that it is visible to all without any need to log-in.

2. If a citizen wants to give his opinion on a previously filed affidavit., then he visits Talati’s (Lekhpal, Patwari, V.O. etc) office, registers his YES (Support) or NO (opposition) for the affidavit & displays it on PM’s website for Rs 3 fee along with voter ID number of the citizen. The cost of giving one opinion for the citizen will be 10 paise when the system comes on SMS. Citizen can change his opinion any day, making procedure immune to money-buyout, media power & gangster power.

3. The YES-count is not a binding on PM etc.

For detailed explanation, please see http://www.righttorecall.info/tcpsms.htm (download link - http://www.righttorecall.info/tcpsms.pdf)

For FAQs, see http://www.righttorecall.info/007.htm (download link - http://www.righttorecall.info/007.pdf)

C2. Jury System in Lower Courts Gazette Notification

This will be implemented when the PM signs it.

= start of the Gazette draft bring Jury System in Lower Courts in India ==

Section-1 : Appointment and replacement of Jury Administrator

1. (procedure for CM, District Collector) Within 2 days after passing this law, the CMs shall appoint one Registrar for entire State and one JA (Jury Administrator) per District

If any citizen of India above 30 years wishes to become District Jury Administrator , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the district collector, the DC would accept his candidacy for District Jury Administrator (DJA) after taking filing fee same as deposit amount for MP election. DC or his clerk will put the names of candidates on CM website.

2. (procedure Talati, Talati’s clerk) A citizen residing in a District can present his voter ID and specify the serial numbers of (at most 5) candidates he Approves for the position of Jury Administrator in his District. The clerk will enter the requests in the systems and CM website along with voter ID number of citizen and give the receipt to the citizen. The citizen to change his choices any day. The clerk shall charge a fee of Rs 3/-

3. (procedure for CM) If any candidate is approved by highest number of citizen-voters and over 50% of ALL citizen-voters, the CM will appoint him as new JA for that District within 2 days. If any candidate is approved by over 25% of ALL citizen-voters and his approval count is 5% more than existing JA, the CM will appoint him as new JA within 2 days.

4. (procedure for CM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in that State, the CM can cancel clause-2 and clause-3 and appoint his own JA for 5 years.

5. (procedure for PM) With approval of over 51% of ALL citizen voters in India, the PM can cancel cluase-2, clause-3 and above clause-4 for entire state or some of the districts and appoint JA for 5 years.

Section-2 : Formation of Grand Jury

6. (procedure for JA) Using the voter list, the JA will, in a public meeting, randomly select 40 citizens from the voter-list of District, State or Nation as the Grand Jurors, from which he can exclude any 10 after interview so that finally there are 30 Grand Jurors. If the Jurors is appointed by CM or PM under clause-4 or clause-5 he may select up to 60 citizens and exclude 30.

7. (procedure for JA) In the first set of Grand Jurors, JA will retire the first 10 Grand Jurors every 10 days and select 10 more using random selection from voter list of District or State or Nation.

8. (procedure for JA) The JA cannot use any electronic device to select a number randomly. He will use the procedure detailed by CM. If CM has not specified the procedure, he will select as follows. Suppose JA has to choose a number between 1 and a four digit number - ABCD. Then JA will have 4 rounds of dice-throw for each digit. In a round if the digit he needs to select is between 0-5, then he will use only 1 dice and if the digit he needs to select is between 0-9, he will use 2 dices. The number selected will be 1 less than the number which comes in case of single-dice throw and 2 less in case of double-dice throw. If the throw of the dices exceeds the highest digit he needs, he will throw the dices again.. Example - Suppose JA needs to select a page in a book, which has 3693 pages. Then JA will execute 4 rounds. In the 1st round he will use 1 dice as he needs to select a number between 0-3.

If the dice shows 5 or 6, he will throw the dice again. If the dice show 3, the number selected is 3-1=2, and JA will proceed to second round. In the second round, he needs to select a number between 0-6. So he will throw two dices. If the sum exceeds 8, he will throw the dices again. If the sum is suppose 6, the second digit selected is 6 - 2 = 4. Like that, suppose the dices in 4 rounds show 3, 5, 10 and 2. Then JA will select digits as (3-1), (5 -2), (10-2), (2-1) i.e. page number 2381. The JA should use different citizens to throw dices. Suppose the voter-list has B books, the largest book has P pages and all pages have N entries. Then using above method or method described by CM, JA will select 3 random numbers between 1-B, 1-P and 1-N. Now suppose selected book has less than that many pages or the selected page has fewer entries. Then he will again select a numbers between 1-B, 1-P and 1-N.

9. (procedure for JA) The Grand Jurors will meet on every Saturday and Sunday. They may meet on more days if over 15 Grand Jurors approve. The number must be "over 15", even when less than 30 Grand Jurors are present. The meetings, if happen, must start at 11am and last till at least 5pm. The Grand Juror will get Rs. 200 per day he attends. The maximum payment a Grand Juror can get for his 1 month term will be Rs 2000. The JA will issue the checks 2 months after a Grand Juror completes the term. If the Grand Juror is out of district, he shall get Rs 400 per day of stay and if he is out state, he shall get Rs 800 per day of stay. In addition, they will get Rs 5 per kilometer of the distance between their home and court. The CM , PM may change the compensation as per inflation. All rupee amounts written in this clause and this law use WPI given by RBI in Jan-2008 and JA can change the amounts every six months using latest WPI.

10. (procedure for JA) If a Grand Juror is absent on a meeting, he will not get Rs 100 for that day and may loose up to thrice his amount to be paid. The individuals who are Grand Jurors 30 days later will decide the fine.

11. (procedure for JA) JA will start the meting at 11am. The JA arrive in the room before 10.30am. If a Grand Juror fails to arrive before 10:30am, JA will not allow him to attend the meeting and mark him absent.

Section 3: Charging a citizen

12. (procedure for JA) If any person, be a private person or District Prosecutor, has complaint against any other person, he can write to all or some Grand Jurors. The complainer must specify the remedy he wishes. The remedy can be· obtaining possession of a property· obtaining monetary compensation from the accused· imprisoning the accused for certain number of years/months.

13. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors, in a meeting, issue an invitation, the citizen may appear. The Grand Jurors may or may not invite the accused and complainer.

14. (procedure for JA) If over 15 Grand Jurors declare that there is some merit in the complaint, the JA will call a Jury consisting of 12 citizens from the district to examine the complaint. The JA will select more than 12 citizens randomly, and send them summons and of those who arrive, the JA will select 12 at random.

15. (procedure for JA) JA will ask the Chief District Judge to appoint one or more Judges to preside over the case. If the property in dispute is worth above Rs 25 lakhs or compensation claim is above Rs 100,000 and/or the maximum prison sentence is above 12 months, the JA will request Chief Judge to appoint 3 judges or else he will request Chief Judge to appoint 1 Judge for the case. The Chief Judge's decision on appointing number of Judges in the case will be final.

Section-4 : Conducting a trial

16. (procedure for Presiding Judge) The trial will go from 11am to 4pm. The trial will start only after all 12 Jurors and the complainer have arrived. If any party has not arrived, the parties who have arrived must wait till 4pm and then only they can go home.

17. (procedure for Presiding Judge) The Judge will allow the complainer to speak for 1 hour, during which no can interrupt. Then Judge will allow the employee to speak for 1 hour during which no one can interrupt. Like this, the Judge will alternate case. The case will go on like this on every day.

18. (procedure for Presiding Judge ) The case will go for at least 2 days. On the 3rd or later, if over 7 Jurors declare that they have heard enough, the case will go on for 1 more day. If on the next day, over 7 out of 12 Jurors declare that they would like to hear more arguments, the case will go on till over 7 say that case should end.

19. (procedure for Presiding Judge) On the last day, after both parties have presented the case for 1 hour each, the Jurors will deliberate for at least 2 hours. If after 2 hours, over 7 Jurors say that they need no more deliberation, the Judge will ask each to declare his verdict.

20. (procedure for Grand Jurors) In case a Juror or a party does not show up or shows up late, the Grand Jurors after 3 months will decide the fine, which can be up to Rs 5000 or 5% of his wealth, whichever is higher.

21. (procedure for Presiding Judge) In case of fine, each Juror will state the fine he thinks is appropriate, and MUST be less than the legal limit. If it is higher than legal limit, the Judge shall take it as legal limit. The Judge will arrange the fine amounts stated in increasing order, and take the 4th lowest fine, i.e. fine that is approved by over 8 out of 12 Jurors, as the fine collectively imposed by the Jury.

22. (procedure for Presiding Judge) In case of prison sentence, the Judge will arrange the sentence lengths cited by Jurors which must be below the maximum sentence as stated in the Law accused is charged with breaking, in increasing order. And the Judge will take the 4th lowest sentence i.e. prison sentence approved by over 8 out 12 Jurors, as the prison sentence collectively decided by the Jury.

Section-5 : The judgment, execution and appeal

23. (procedure for District Police Chief) The District Police Chief or policemen designated by him will execute the fine and/or imprisonments as given by the Judge and approved by the Jurors.

24. (procedure for District Police Chief) If 4 or more Jurors do NOT ask for any confiscation or fine or prison sentence, the Judge will declare the accused as innocent and the District Police Chief will take no action against him.

25. (procedure for Accused, Complainer) Either party will have 30 days to appeal against the verdict in the State's High Court or the Supreme Court of India.

Section-6 : Protection of a Fundamental Rights of the Citizens .

26. (procedure for All Govt Employees) No Govt employee will impose any fine or prison sentence without consent of over 8 out of 12 Jurors of the Lower Courts, unless approved by the Jurors of High Courts or the Jurors of Supreme Court. No Govt employee will imprison any citizen for more than 24 hours without approval of over 15 out of 30 District or State Grand Jurors.

27. (procedure for To everyone) The Jurors will decide the facts as well as intentions, and shall also interpret the laws as well the Constitution.

28. This GN will come into force only after over 51% of all citizens in India have registered YES and every SCj has approved this GN.

29. (procedure for DC) If a citizen wants to propose any change in this law, then the citizen can submit an affidavit demanding the change to District Collector or his clerk who will post it on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20 per page along with voter ID number of the citizen.

30. (procedure for Talati aka Patwari) If a citizen wants to register his opposition to this law or any clause of this law or wants to register any support to affidavit filed in the above clause, then he may register his YES/No for a Rs 3 fee at Patwari’s office. The Patwari will note the citizen’s YES/NO and will also post the citizen’s YES/NO on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

============= end of draft ====

C3. Law-draft for narcotest in crimes like murder, rape, corruption, gohatya etc.

==== start of draft ====

Government Order to be signed by CM

Section - Procedure of Narco by Jury approval

1)
Citizen here will mean citizen-voter registered in India. above the age of 25 years and below 65 years DJA would mean Jury Administrator appointed by the CM for a district or any officer deputed by him for tasks in this Act. The Jury Administrator can be recalled/replaced by the citizens. (See Right to Recall-Jury Administrator procedure ahead)

2) District Jury Administrator (DJA)-

Following persons can demand voluntary narco test in public on themselves -

. any citizen in the district who is accused of a crime which carries punishment of over 3 years
OR
any citizen who is occupying post of class-II officer or above OR
. any citizen who is contesting election of MLA or MP
. any citizen who has been MP, MLA or Minister

3) DJA
If any citizen in above category demands a truth serum test on himself and majority of the Jury gives their approval, the DJA will order a forensic laboratory at a randomly chosen location in the State where he resides where a truth serum test on him will be conducted. With majority vote, the Jurors will decide if polygraph, brainmapping or narcotest should be conducted on an accused in any court case.

4) DJA-
The DJA will summon 24 citizens between age 35 and 55 years at random, and will divide them randomly into two groups of 12 Jurors each, and allocate an officer of class-II or above to conduct the truth serum test.

5) Officer-in charge of the test-
After truth serum is injected, a person in Group-A will frame a question, and if over 7 persons in Group-B approve of that question, then the officer will ask that question. Each person in Group-A will get exactly 5 minutes.

6) (instruction for Jurors) -
The Jurors will decide if the test are to be conducted in private or public. If the name of a female victim has to be withheld, then the polygraph, brainmapping and narcotest must be done in private and Jurors cant make it public, Otherwise, it may be done in public

7) (instruction for Jurors) -
If a person in Group-A wants to swap his position with a person in Group-B, then they may do so. The Jurors with majority approval, can also allow an expert in the panel of experts made by District Jury Administrator to frame questions. The framing of questions will be done by Jurors in both Groups only, and will be done confidentially. The judge, lawyers etc cannot be there during their meetings.The question framing session will end when majority Jurors agree that question framing is over.

8) Jurors -
The Jurors with majority approval will decide which experts will conduct polygraph, brainmapping and narcotest. They will select the experts from panels approved by the District Jury Administrator.

9) (instruction for Jurors) -
Based on answers given during the polygraph or brainmapping or narcotests, a Juror in Group-A or the expert can prepare a new question, and if majority in Group-B approve the question, then the expert will ask that question. The question will NOT be asked without approval of majority in Group-B

10) (instruction for Jurors) -
The Jurors will not take the statements made in all three tests as evidences.

11) (instruction for Police Investigating Officer) -
The policemen investigating the case may gather more evidences based on the statements made during these tests

12) (instruction for Narco test Officer incharge) -
With permission of Jurors, the narco test incharge officer may take polygraph or brainmapping or narcotest, before the Jury Trial begins. In such case also, the procedure of the test will be the same as described in previous clauses

13)
Narcotest will not be taken without consent of Jurors. Even if accused consents, then also narcotest will require consent of Jurors.

14) Officer-in charge of the test-
The mediamen will be invited for live telecast if the Jurors decide that the narco-test will be in public. The serum test will be recorded and will be also put on GoI website as live feed as well as recorded

Section - Right to Recall - District Jury Administrator

1.

-

The word citizen would mean a registered voter

2.

[District Collector (DC)]

If any citizen of India who is more than 30 years wishes to become District Jury Administrator , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the district collector, the DC would accept his candidacy for District Jury Administrator (DJA) after taking filing fee same as deposit amount for MP election. DC or his clerk will put the names of candidates on CM website.

3.

[Talati = Village Officer = Patwari (or Talati’s Clerks)]

If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the District Jury Administrator position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

4.

[Talati]

The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5.

[Talati]

If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6.

[Officer appointed by CM]

On every 5th of month, the officer appointed by CM may publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.

7.

[CM]

If a candidate gets approval of over 35% of ALL registered citizen-voters of the district (ALL, not just those who have filed their approval) in the country and 5% (of total voters of the district) more than the approvals of the present District Jury Administrator, then CM may or need not expel the existing District Jury Administrator and may or need not appoint the person with highest approval count as District Jury Administrator. The decision of CM will be final.

Section - Citizens Voice

Citizens Voice 1 (CV. 1) - Instructions for DC-
If any citizen wants a change in this law, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of the citizen onto the website of Prime Minister for a fee of Rs 20/- per page, so that all can see the same without logging-in

Citizens Voice 2 (CV.-2) - Instructions for Tatalati/Patwari/lekhpal/Village officer-
If any citizen wants to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister along with voter ID number of the citizen.

Note ---- Please see CV.1 and CV.2 clauses at the end of the draft. Using these two clauses, the activists, if needed, can bring the changes in the narcotest procedures. Also, District Jury Administrator (DJA) can use his discretion. And if he misuses the discretion, then the citizens can replace the DJA. Thus the citizens can stop the experts in charge of narcotest and DJA from doing wrong.

===== end of draft =====

C4. Right To Recall District Police Commissioner (Citizens` procedure to replace their District Police Commissioner anyday)

== start of draft of the proposed RTR-DPC GN ===

1. (General instruction) The CM will get this Gazette Notification printed.

2. (instruction to SEC = State Election Commissioner) The CM and citizens hereby request SEC to hold co-election of DPC = District Police Chief , whenever a District is undergoing general election of District Panchayat, Tahsil Panchayat, Gram Panchayat or City Corporation or any District wide election

3 (order to SEC) If any citizen has been NOT been DPC for more than 2400 days in past 3000 days, is above 30 years, who has worked in Military for over 5 years, worked in Police for even 1 day, as Govt Servant for 10 years or has cleared GPSC or UPSC written exam, or ever won the election of MLA or MP or Corporator or District Panchayat Member will be able register himself as candidate for DPC..

4. (instruction to SEC) SEC will put a separate ballot box for DPC

5. (instruction to the Citizen) A citizen-voter may vote for any of the candidates

6. (instruction to CM) If any candidates obtains votes of over 50% of ALL registered citizen-voters (all, not just those who voted), then CM may resign or may appoint the person with highest votes as the new DPC in the District for next 4 years

7 (instruction to CM) CM will make one person DPC in one District at most

8 (instruction to CM) If a person has been DPC for more than 2400 days in past 3000 days, then CM will not allow him to remain as DPC for next 600 days.

9 (instruction to CM , Citizens of the State) With approval of over 51% of ALL citizen voters in the State, the CM can suspend this law for a district for 4 years and appoint District Police Chief in that District as per his discretion.

10 (instruction to PM, Citizens of India ) With approval of over 51% of ALL citizen voters in India, the PM can suspend this law-draft for a State for 4 years and appoint District Police Chief in all districts in that State as per his discretion.

11. (instruction to District Collector) If a citizen wants to propose any change in this law, then the citizen can submit an affidavit demanding the change to District Collector or his clerk who will post it along with voter ID number of citizen on the website of Prime Minister for a fee of Rs 20 per page.

12. (instruction for Talati aka Patwari ) If a citizen wants to register his opposition to this law-draft or any clause of this law-draft or wants to register any support to affidavit filed in the above clause, then he may register his YES/No for a Rs 3 fee at Patwari’s office. The Patwari will note the citizen’s YES/NO and will also post the citizen’s YES/NO along with their voter ID number on PM’s website.

==== end of the draft ====

C5. Right To Recall District Judge (Citizens` procedure to replace their Principal District judge anyday)

=== start of draft of the proposed RTR-Principal District-Judge===

The exact draft, which will come into effect when CM signs this law is as follows:

1. The word citizen means registered voter in the district.

2. (procedure for DC = District Collector) If any citizen above the age of 35 years and degree of LLB, India wishes to become Principal District Judge in a District he appears in person or via a lawyer with affidavit before the DC (or officer DC deputes), then DC (or officer he deputes) would accept his application to become Principal District Judge after taking filing fee same as deposit amount for MP election.

3. (procedure for Talati or Talati’s Clerks) If a citizen comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the Principal District Judge position, then the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved.

4. (procedure for Talati) The Talati will put the approvals of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and names of the persons he approved.

5. (procedure for Talati) If the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6. (procedure for DC ) On every 5th of month, the Collector or officer he deputes will publish Approval counts for each candidate as on last date of the previous month.

7. (procedure for HCCj = High Court Chief judges) If a candidate gets approval of over 35% of ALL citizens (ALL, not just those who have filed their approval) in a district, and it is 5% more than approval existing Principal District Judge has, then HCCj may appoint him as Principal District Judge

8. (procedure for HCCj ) As long as a Principal District Judge has approvals of more than 34% citizens, HCCj need not replace him. But if a Principal District Judge’s approval goes below 34%, then the HCCj can replace him with the officer of his choice.

9. (procedure for Principal District Judge) The Principal District Judge may decide to use Jury System using the Jury System draft he has proposed, after getting approval of HCCj or citizens of state using Citizens` Voice (CV) (see clause no. 10 and 11)

10. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit onto PM’s website along with voter ID number of citizen for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

11. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on PM’s website along with voter ID number of the citizen.

==== end of draft ====

C6. Right To Recall Censor Board Chairman (Citizens` procedure to replace their Censor Board Chairman anyday)

===== start of draft ==========

1. The word citizen would mean a registered voter

2. ( instruction to District Collector ) .... If any citizen of India wishes to become CBD (Censor Board Chairman) , and he appears in person or via a lawyer with affidavit before the District Collector, the Collector would accept his candidacy for CBD after taking filing fee same as deposit amount for MP election and put his name as CBD candidate on PM website.

3. (instruction to Talati (= Village officer = Patwari = Lekhpal), or Talati’s Clerks) .... If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the CBD position, the Talati would enter his approvals in the computer and would give him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved. Later the system can be extended to sms after which cost of giving an opinion will be 10 paise for the citizen.

4. ( instruction to Talati ) ..... The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5. (instruction to Talati) ...... If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one or more of his approvals without any fee.

6. (instruction to Cabinet Secretary) ...... On every 5th of month, the CS may publish Approval counts on PM website for each candidate as on last date of the previous month.

7. (instruction to PM ) ...... If a candidate gets approval of over 35% of ALL registered citizen-voters (ALL, not just those who have filed their approval) and 1% more approvals than present chairman, then PM may or need not expel the existing CBD and may or need not appoint the person with highest approval count as CBD. The decision of PM will be final.

8. Citizens` Voice 1 (CV 1) ( instruction to District Collector ) ...... if any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at Collector’s office and Collector or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of the citizen onto the website of Prime Minister for a fee of Rs 20/- per page, so that all can see the same without logging-in.

9. Citizens` Voice 2 (CV 2) (instruction to Talati or Patwari) ..... If any citizens want to register his opposition to this law-draft or any section or wants to register YES-NO to any affidavit submitted in above clause, and he comes to Talati’s office with voter-ID and pays Rs 3 fee, Talati will enter YES/NO and give him a receipt. The YES-NO will be posted on the website of the Prime Minister along with voter ID number of the citizen.

===== end of draft ==========

C7. Right To Recall CM (Citizens` procedure to replace their CM anyday)

===== start of the proposed RTR-CM Gazette draft =======

1. [General Information]

The word citizen would mean a registered voter

The word may means may or need not, and clearly means “not binding”.

2. [Instruction for District Collector]

If any citizen of India above 30 years of age wishes to become CM, he can appear before Cabinet Secretary. Collector would issue him a serial number after taking filing fee same as deposit amount for MP election. Collector will put his name on CM’s website.

3. [Instruction for Village Officer = Talati = Patwari, (or Talati’s Clerks)]

If a citizen of that district comes in person to Talati’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for the CM position, the Talati would enter his approvals in the computer and would him a receipt with his voter-id#, date/time and the persons he approved. If a the citizen comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

4. [Instruction for Talati]

The Talati will put the preferences of the citizen on district’s website with citizen’s voter-ID number and his preferences.

5. [Instruction for District Collectors]

On every Monday, the Collectors will publish approval counts for each candidate.

6. [Instruction for CM]

The present CM may count his approval count as higher of the following two -

  • number of citizens who have approved him
  • sum of votes obtained by the MLAs who have supported him

7. [Instruction for CM]

If a candidate gets approval 2% (of ALL registered voters) above the approval count the existing CM has, then existing CM may resign and may request MLAs to appoint the person approved by the citizens as new CM.

8. [Instruction for MLAs]

The MLAs may elect the person stated in clause-7 as new CM.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of citizen onto CM’s website for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on CM’s website along with voter ID number of the citizen.

11. [Instruction for PM]

With approval of 38 crore citizen-voters in India, PM may suspend this law-draft in the state for 5 years.

============= end of draft ===================

C8. Right To Recall MLA (Citizens` procedure to replace their MLA anyday)

===== start of the proposed RTR-MLA Gazette draft =======

# Officer
Procedure / instruction

1. —– (1.1) The word citizen would mean a registered voter.
(1.2) The word “may” does not imply any moral-legal binding. It clearly means “may” or “need not”.

2. [Instruction to District Collector (DC)]
PM orders DC, that if a citizen of India comes to DC and wishes to be candidate, then DC shall accept a fee equal to deposit of MLA election and register that person as a candidate for MLA. DC will issue a serial number and post his name on the website of PM.

3. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]

(3.1) PM orders Patwari (or Talati or Village officer) that if a citizen comes in person to Patwari’s office, pays Rs 3 fee , and approves at most five persons for MLA position, the Patwari would enter his approvals in the computer and would give receipt showing his voter-id#, date/time and the persons he approved.

(3.2) If Patwari does not have PC etc, then DC shall put this operation in office of Tahsildaar till the Talati gets PC etc to put this system.

(3.3) DC may create a system which gives SMS feedback to the citizen.


4. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]
The Talati will put the approvals of the voters on website of PM with citizen’s voter-ID number and names of the candidates he approved.

5. [Instruction to Talati also known as Village Officer or Patwari (or his clerks)]
If a the voter comes to cancel his Approvals, the Talati will cancel one of more of his approvals without any fee.

6. [Instruction to MLA]
If an alternate candidate gets lesser of the following approval counts -

(6.1) 20% more approvals (of ALL the voters in that constituency) than the votes received by the present, sitting MLA

or

(6.2) Over 50% of ALL voters in that constituency and it is also 10% higher that approvals obtained by existing sitting MLA,

then the MLA may or need not resign in 7 days.

7. [Instruction to Speaker of Assembly, MLAs]
(7.1) If an alternate MLA candidate in any MLA constituency gets approvals of over 50% of ALL voters and is 1% more than approvals obtained by existing MLA, and that MLA refuses to resign in 7 days, then the Speaker may or need not call a motion to expel that MLA in the Assembly. The decision of the Speaker will be final.

(7.2) The MLAs may or need not approve the motion to expel that MLA

8. [Instruction to Election Commission]
If MLA resigns, EC will conduct new election as per the norms.

9. [Citizens` Voice (CV) 1 ; Instruction for District Collector]

If any citizen wants a change in this law-draft, he may submit an affidavit at DC’s office and DC or his clerk will scan the affidavit along with voter ID number of the citizen onto CM’s website for Rs 20/- per page, so that all can see the affidavit without any need to log-in.

10. [Citizens` Voice (CV) 2 ; Instruction for Talati (= Village Officer = Patwari)

If any citizen want to register his opposition to this law or any section or wants to register YES-NO to affidavit submitted in above clause, Talati will enter YES/NO and give him a receipt for Rs 3 fee. The YES-NO will be posted on CM’s website along with voter ID number of the citizen.

11. [Instruction for PM]

With approval of 40 crore citizen-voters in India, PM may suspend this law-draft in the state for 5 years.

======== End of Proposed Right to Recall MLA Draft ==========


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