प्रजातन्त्र हत्या क्रान्ति

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Aryaveer
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Joined: Sat Jul 30, 2011 12:12 am

प्रजातन्त्र हत्या क्रान्ति

Post by Aryaveer » Sun Aug 07, 2011 10:22 pm

प्रजातन्त्र विद्या पर रोक है, उन्नति पर रोक है। शिक्षा क्षेत्र में क्षमता होने पर भी, समय होने पर भी आदमी दो परीक्षाएं न दे सके तथा अधिक कमाने पर दंड़ भुगतान पड़े यह प्रजातन्त्र है।
डेढ़ घण्टे या एक घण्टे लम्बी धरती पर इतने देश, इतनी सीमाएं, पासपोर्ट, वीसा आदि-आदि प्रजातन्त्र की ही रोगी थूकें हैं। धरती संस्था के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है प्रजातन्त्र।
प्रजातन्त्र व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था शान्ति के लिए युद्धक सेना रखती है, युद्धों की इजाजत देती है। इतना घटिया प्रजातन्त्र इसकी तत्काल हत्या आवश्यक है। शान्ति भी शान्तिकर हो सूत्र कहता है कि शान्ति के लिए युद्ध करते ही शान्ति भंग हो जाती हैं।
धरोहरखोर ही नहीं है प्रजातन्त्र, लाशखोर भी है। हर मर गया व्यक्ति, हर बीत गया व्यक्ति लाश होता है। इस प्रजातन्त्र में दल या समूह अपने हाथों में अतीत के प्रजनानों की लाशें लेकर घूम रहे हैं-और उन लाशों को ही खा रहे हैं तथा उन्हें ही खाने का नाटक कर रहे हैं। सड़क पर लाश धर भीख मांगना कितना घिनौना काम है। और ये जो लोग सरे आम हाथों में लाशें उठाए-लाशों पर बड़े-बड़े बाजार सजाए भारत में प्रजा को अस्थियां बेच-बेच वोट खरीद रहे हैं क्या उन लाश-धर भिखमंगों से कम हैं? नहीं; कहीं अधिक हैं। इस घिनौने पन के बीज प्रजातन्त्र में ही हैं। प्रजातंत्र की हत्या आवश्म्भावी है।
(साभार प्रजातन्त्र हत्या क्रान्ति)

kmoksha
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Joined: Sun Sep 12, 2010 2:49 pm

Re: प्रजातन्त्र हत्या क्रान्ति

Post by kmoksha » Mon Aug 08, 2011 10:02 am

आर्यवर जी,
ये सब प्रजातंत्र के वजह से नहीं, प्रजातान्त्रिक प्रक्रियाओं की कमी से हो रहा है |
आज हमारे देश में कोई भी प्रजातान्त्रिक प्रक्रिया नहीं है | केवल संसद, विधायक और सरपंच/कॉर्पोरटर का चुनाव कर सकते हैं लेकिन उन्हें निकाल नहीं सकते जिससे ये प्रक्रियाएँ भी अधूरी हैं |
इसीलिए हमें प्रजत्रन्त्रिक प्रक्रियाएँ लानी होंगी |
भ्रष्ट को निकालने की प्रक्रियाओं का ड्राफ्ट चैप्टर 6 ,www.righttorecall.info/301.pdf
में देखें |

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