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PostPosted: Tue Jun 28, 2011 10:22 am 
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अमेरिका द्वारा लीबिया पर हवाई हमलों से सीख : क्या होगा अगर चाइना या अमेरिका ने भारत पर हमला किया या पाकिस्तान के द्वारा करवाया ? भारत के हर नागरिक को हथियार रखने व बनाने की छूट दे दो जितनी जल्दी हो सके

संक्षिप्त : एक संभावना यह है कि चीन , पाकिस्तान के द्वारा हमला करेगा | साउदी अरब पाकिस्तान को पैसा देगा, चीन अपने हथियार देगा और पाकिस्तान अपने सैनिक देगा | अगर यह दीवार जिसको हम भारतीय सेना कहते हैं, अगर तूट गयी तो भारतीय नागरिकों के पास पाकिस्तानी सेना को आसाम, चेन्नई तक पहुँचने से तथा वहा पर लूट मचाने से रोकने के लिए बंधूक या अन्य हथियार नहीं है | उस हालात में भारत के पास एक ही रास्ता होगा कि अमेरिका से भीख मांगे | अमेरिका मदद भी जरुर करेगा लेकिन बदले में भारत के सारे खनिज खानों और कच्चे तेल के कुओं की रोयल्टी अपनी अमेरिकी कंपनी को देने की शर्त रखेगा |

एक बार सारी खनिज खानों और कच्चे तेल के कुओं की रोयल्टी अपनी अमेरिकी कंपनी के पास चली गयी तो, वो लोग भ्रष्ट नेताओ को पैसे देकर भारत में गणित, विज्ञानं एवंम इंजीनियरिंग की शिक्षा का स्तर गिरा देंगे और यह स्थिति भारत तो पश्चिम के देशों पर और आश्रित बनाएगी |

धीरे धीरे यह परिस्थिति भारत के हिंदू नागरिकों को ईसाई धर्म में बदल देगी जैसे उन लोगों ने दक्षिण कोरिया में किया और फिर फिलीपींस जैसे देश की तरह जागीरदार/दास राज्य या अपने ऊपर आश्रित देश बना देगा |

समाधान –

एक कम समय के लिए उपयोगी ,समाधान यह है कि भारत में बंदूक का निर्माण करने की और उसे रखने का लाइसेंस दिया जाए जिससे भारत के काफी नागरिकों के पास बंदूक आ जाए और पाकिस्तानी सेना भारत में बहत अंदर तक घुसने में सफल ना होने पाए और हमें अपना बचाव करने की लिए पश्चिम के देशो से भीख ना मांगनी पड़े |

उदहारण –

(1) 1999 के कारगिल युद्ध में भारत के पास लेसर निर्देशित बोम (Laser Guided Bomb) नहीं थे भारत तो उसके लिए अमेरिका से भीख मांगनी पड़ी थी | फिर उसके बाद अमेरिका ने ये शर्त राखी कि भारत में विदेशी बीमा कंपनियो को काम करने की इजाज़त दी जाए और फिर बाद में उनको वो इजाज़त मिल गई और उन्होंने 2001 से भारत में आकार व्यापार करना शुरू कर दिया| |
- भारत में तो 1991 से वैश्वीकरण/ग्लोबलाईसेसन हो चूका था तो उन्हें 2001 तक प्रतीक्षा क्यूँ करनी पड़ी थी ? हालाँकि सभी और क्षेत्र में भारत में विदेशी कंपनिया आ चुकी थी ?
- भारत अमेरिका की भीख पर निर्भर नहीं था तो कारगिल युद्ध की समाप्ति के एलान के बाद आतंकवादियों को पाकिस्तान वापस जाने के लिए सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) क्यों दिया गया था ? और भारत के सेना उनका खात्मा नहीं कर सकी |
- और उसके तुरंत बाद में ही 2004 में दवाई बनाने का पेटंट कानून बदल डाला जिससे जीवन जरूरियात की कुछ दवाइयां 10 से 1000 गुना महंगी हो गयीं|
- कारगिल के युद्ध में इस्तमाल हुई बोफर्स तोप का खोल/आवरण का भी उत्पादन भारत में नहीं होता हे | उसके लिए भी भारत तो पश्चिमी देशों से भीख मांगनी पडती है |

(2) अगर भारत 1965 और 1997 का पाकिस्तान के साथ युद्ध अपने दम पर ही जीता था तो जीता हुआ इलाका पाकिस्तान को क्यूँ वापस दे दिया ? क्यूँ कि अमेरिका/रूस ने बता दिया था की अगर तुम पाकिस्तान को जमीन वापस नहीं करोगे तो फिर अमेरिका/रूस की सेना के साथ युद्ध करने के लिए तैयार रहना , जिसमें सैनिक तो पाकिस्तान के होंगे लेकिन हथियार और मदद अमेरिका/रूस से आयेगी | ईसी लिए भारत कश्मीर का भी कब्ज़ा नहीं ले सका, लाहोर और कराची की बात तो दूर हे |

(३) दुनिया का कोई भी विकसित देश इतना बेवकूफ नहीं हे की अपने देश के तेल के कूए विदेशी कम्पनी को दे दे | लेकिन बेवकूफ भारत सरकार ने अपने तेल के कूए कैर्न्स इंडिया (Cairn India Limited) नामकी बहुराष्ट्रीय कंपनि को दे दिये हे | क्या भारत में ओ.एन.जी.सी या बी.पी.सी.एल नहीं हे ?

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लीबिया के ऊपर आया हुआ संकट एक अलग, उलटा मोड़ ले चूका है | अगर हम राजनैतिक पहलुओं को अलग रखें ,तो लीबिया में हुए हमलों को देखकर भारत में किसी को भी यह सोचने पर मजबूर करेगा की क्या होगा अगर किसी दिन भारत-पश्चिमी देशों अथवा भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ तो | अगर पश्चिमी देशों और चीन, भारत के साथ अगर प्रत्यक्ष युद्ध नहीं करेगा तो फिर वो लोग पाकिस्तानी सेना का उपयोग करेंगे | भारतीय पत्रकारों और पाठ्यपुस्तक लेखकों को पश्चिमी देशो से पैसा मिला है ,इसी लिए उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया है की प्रत्येक भारतीय को हथियारों का महत्व और भारत की सेना की पश्चिमी देशों और चीन की सेना के मुकाबले में कमजोरी का पता कम से कम हो | कोई भी सामान्य अखबार के पाठक को ना तो हथियार के विवरण के बारे में पता नहीं बल्कि उसको हथियार के महत्व का भी पता नहीं जिससे हम हमारी जिंदगी और देश बचा सके | हमारे जैसे कुछ लोग जिनको पत्रकारों और पाठ्यपुस्तक लेखकों की बेईमानी का पता चला, तो उन्होंने काफी समय पहले समाचार पत्र और पाठ्यपुस्तकों को कचरे के डब्बे में डाल दिया और सिर्फ इंटरनेट के ऊपर ही जानकारी और विचार के लिए निर्भर रहते हैं और उन्हें लोगो तक पहुंचाना शुरू किया | लेकिन बाकी लोग, जो पत्रकारों और पाठ्यपुस्तक लेखकों पर भरोसा करते हैं ,वो लोग जानकारी और विचार के लिए इंटरनेट पर नहीं आते और इसी लिए उनको कुछ जानकारी नहीं होती है | हम सिर्फ आशा कर सकते हैं कि लीबिया के ऊपर हुए हवाई हमलों से उन्हें कुछ जानकारी मिली हो और वो आगे भी कुछ जानकारी लेने के लिए इन्टरनेट पर आगे आयें |

यहाँ लीबिया पर हुआ हवाई हमलों के बारे में और कुछ जानकारी है | लीबिया पर पश्चिमी देशो द्वारा उसके तेल के लिए हवाई हमले किये जा रहे हैं नाकि अन्य कोई कारण है | 1990 के आसपास हमने और श्री राजीव दीक्षीत जी ने यही कहा था की एक बार अगर इराक की बारी खतम हो गई तो इरान की बारी आएगी और फिर बाकी सब देशो की और उसमे भारत भी लाइन में ही है | भारत में भी कारपेट बोम्बिंग (हवाई जहाज़ द्वारा बम से व्यापक हमला) हो सकती है अगर भारत ने कब्ज़ा किये जाने का विरोध किया |
अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों का एक ही उद्देश्य है कि पूरी दुनिया में से सभी तेल के कुएं और खनिज खानों पर कब्ज़ा करना और पूरी दुनिया के हर इन्सान को ईसाई बनाना | पैसों से ख़रीदे गए पाठ्यपुस्तकों के लेखक इसकी बात भी नहीं करते | लेकिन ईस्ट इंडिया कम्पनी ने पूरे जोर से साम, दाम, दंड और भेद लगाकर ईसाई धर्म के प्रचार का प्रयास किया था | और इसीलिए उन्होंने भैंस की चरबी की जगह गाय और सूअर की चरबी का उपयोग उनकी बंधूक की गोली बनाने में किया जिससे वो भारतीय सैनिकों को अपने धार्मिक / सामाजिक समुदायों से बाहर निकाला जाये और फिर बाद में उनके लिए उन सैनिक को ईसाई बनाना आसान हो जाए | उनका मकसद सारे देशों को आफ्रिका और फिलीपींस की तरह जागीरदार/घुलाम राज्यों में रूपांतरित करना है | भारत उनकी सूची में पेहला नहीं है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वो सूची में है ही नहीं | इसीलिए 2004 में इराक पर हमला करने के बाद कुछ लोगों ने सोचा था की अब वो इरान पर हमला करेंगे लेकिन उन्होंने लीबिया पर हमला कर दिया | इसी साजिश को लागू करने के विवरण में एक छोटा सा परिवर्तन किया गया हे लेकिन साजिश तो वो ही है |
अब हमें क्या सीखना चाहिए ?

अगर भारत का पश्चिमी देशों के साथ युद्ध हुआ तो

मान लो की यदि भारत में ईसाई का धर्मपरिवर्तन बंध हो जाता है, बहुराष्ट्रीय कंपनियो को भारत की खनिज खानों मे कोई भी हिस्सा नहीं मिलता हे तो और पश्चिम विरोधी शासन या स्वदेशी चलन अपनाता है तो फिर भारत और पश्चिम के देशो के बीच में जंग एक वास्तविक संभावना है | जब लीबिया पर हमला हुआ तब हवाई जहाज़ की सूचना देने वाली लीबिया की रडार ने काम करना बंध कर दिया | रडार के बिना हवाई हमलों से सुरक्षा ऐसी है जैसे एक व्यक्ति आँख या कान बिना | अब भारत की रडार केसी हैं ? कुछ भी अलग नहीं है | सभी रडार का उत्पादन पश्चिमी देशों में हुआ है और वो लोग कभी भी “कील स्विच/रेडियो स्विच” का इस्तमाल करके उसे बंध कर सकते हैं | काफी सारे आम नागरिकों को यह पता नहीं है कि “कील स्विच/रेडियो स्विच” क्या है ? देखिये कोई भी आधुनिक हथियार या हथियार से रक्षण देने वाला यन्त्र एक जटिल “सॉफ्टवेर” और “हार्डवेर” के साथ आता है और उसमे “कील स्विच/रेडियो स्विच” का पता लगाना नामुमकिन है |

जो देश इस तरह के हथियार या हथियार से रक्षण देने वाले यन्त्र का उत्पादन करता है , वो इस बात का ध्यान रखता है कि उनका इस्तमाल उनके खिलाफ ही ना हो | इसी लिए वो उस हथियार या यन्त्र में “कील स्विच/रेडियो स्विच” रखते हे | कील स्विच और कुछ नहीं बस उस हथियार या हथियार से रक्षण देने वाले यन्त्र को बंध करना है रेडियो तरंगें द्वारा | वो देश जो हथियार बेचता है यदि उन देशो के खिलाफ ही उस हथियारों का इस्तमाल होने लगे तो वो “रेडियो स्विच” का इस्तमाल कर के उनको बंध कर देगा | उदाहरण के लिए अमेरिका से सारे विमान कील/रेडियो स्विच के साथ आते हैं जिससे अमेरिका के खिलाफ युद्ध होने की हालात में वो विमान काम में नहीं आयेंगे | इस तरह भारत और पश्चिमी देशों के बीच होने वाले युद्ध में भारत के पास अपना बचाव करने के लिए कुछ भी नहीं है | लेकिन पश्चिम भारत को भारत पर सीधा हमला करने की जरुरत नहीं है | वो पाकिस्तानी उच्च वर्ग जेसे की प्रधान मंत्री को पैसा देंगे, उनको हथियार और उपग्रह की जानकारी देंगे | साउदी अरब हमेशा पाकिस्तान को ऐसे हमलों के लिए पैसे देने के लिए तैयार है | पाकिस्तान की सेना के पास 5,00,000 (पांच लाख) सैनिक हैं और उनके लाखों आम नागरिको के पास हथियार हैं जैसे ऐ-के 47| पश्चिमी देशो की सहायता और साउदी अरेबिया के पैसे से वो भारतीय सेना को तोड़ देंगे | और इसके बाद पाकिस्तानी सेना और नागरिकों को भारत में आसाम और चेन्नई तक पहुँचने में और लूट मचाने से कोई रोक नहीं पाएगा | जिस तरह से भारत पाकिस्तान के बीच विभाजन से हिंसा हुई थी वेसी ही होगी और लूट 20 से 50 गुना बढ़ जायेगी |

आगे जाकर पश्चिमी देश पाकिस्तान को भारत पर कब्ज़ा करना नहीं देंगे | पश्चिमी देशो का मकसद भारत को और भारत के लोगों को तोड़ने के लिए पाकिस्तान का उपयोग करना है | इससे भारत पश्चिम के देशो से भीख मांगेगा और वो मदद भी जरुर करेंगे लेकिन बदले में वो भारत की सारी खनिज खानें तथा तेल पर अपनी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अधिकार जमा लेंगें | फिर बाद में, पश्चिमी देश भारत के गणित, विज्ञान और इंजीनियरिंग को कमजोर कर देंगे जिससे पूरी तरह से भारत उनपर तकनिकी के लिए निर्भर/आश्रित हो जाए |

अंत में पश्चिम देश वो ही करेंगे जो उन्होंने दक्षिण कोरिया और फिलीपिंस के साथ किया, देश के बड़े हिस्से को ईसाई बनाया और उनके आधीन भी | यदि भारत के आबादी के 5-10 % का नरसंहार कर के , बाकी के जन संख्या के बड़े हिस्से के लोगों को ईसाई धर्म अपनाने पर मजबूर कर देते हैं | ईसाईयों और गैर-ईसाईयों के बीच फूट डलवा सकते हैं और दोनों को लूट लेंगे | ऐसा ही दक्षिण कोरिया और फिलीपिंस में हुआ |

उपाय ? अगली समस्या के विवरण के बाद आपको उपाय बताऊंगा|

अगर भारत का चीन के साथ युद्ध हुआ तो

अगर भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो नतीजा तो वो ही निकलेगा. पश्चिमी देशो ने इराक पर हमला करके उन्हें पत्थर युग में पीछे धकेल दिया है और वो धीरे धीरे इराक के नागरिकों को ईसाई में धर्म-परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं | पाकिस्तान में भी ज्यादा से ज्यादा गरीब मुस्लिम ईसाई धर्म को अपना रहे हैं और इसमें दोष पाकिस्तान के भ्रष्ट पैसेवाले, विशिष्ट लोगों का है | उन्होंने ही यह गरीबी का पाकिस्तान में निर्माण किया था | इराक और लीबिया में हुए इस हमले के बाद पाकिस्तान का एक बड़ा वर्ग पश्चिमी देशो के खिलाफ हो गया और चीन के नजदीक आ गया है | चीन इसका लाभ उठा कर पाकिस्तान को हथियार दे सकता है जिससे पाकिस्तान भारत पर हमला करे | पाकिस्तान चीन के हथियार और साउदी अरब से मिले पैसों का इस्तमाल कर के बडी आसानी से भारत को हरा सकता हे अगर भारत अमेरिका से भीख ना मांगे | फिर से भारत के पास कोई रास्ता नहीं होगा और हमारे प्रधानमंत्री को तो पश्चिमी देशो से भीख मांगने के लिए जाना पड़ेगा | और मदद भी जरुर मिलेगी लेकिन उस शर्त के मुताबिक जिससे भारत को अपना तेल और खनिज खानें पश्चिम के देशों को सौपना पड़े | और इसके बाद , पश्चिमी देश भारत के गणित, विज्ञान और इंजीनियरिंग को कमजोर कर देंगे जिससे पूरी तरह से भारत उनपर तकनिकी लिए आश्रित/निर्भर हो जाए | अंत में पश्चिम देश वो ही करेंगे जो उन्होंने दक्षिण कोरिया और फिलीपिंस के साथ किया, देश के बड़े हिस्से तो ईसाई बनाया और उनके आधीन भी |ईसाईयों और गैर-ईसाईयों के बीच फूट डलवाया और दोनों को लूट लिया|

उपाय

इसका एक ही सिर्फ उपाय हे की भारत में ही हथियारों का निर्माण शुरू किया जाए जिससे हमें बहार से ख़रीदे गए हथियारों के ऊपर आधीन रेहना ना पड़े | हम किसी भी हालात में बहार से ख़रीदे गए हथियारों के ऊपर अधीन नहीं रह सकते क्यूंकि उनमें कही भी “कील/रेडियो स्विच” छुपा हो सकता है | भारत को बडी मात्रा में अपने देश में ही, अत्याधुनिक युद्ध विमान से लेकर सामान्य बंधूकें जैसे हथियारों का निर्माण करना होगा जितना जल्दी हम कर सकें उतना जल्दी |

युद्ध विमान जैसे अत्याधुनिक हथियार बनाने में भारत तो 5 से 10 साल लगेंगे अगर हम आज से ही बनाना चालू करते हैं और उसके लिए जरुरी राजपत्र हमें मिल जाते हैं तो | लेकिन क्या होगा अगर चीन या पश्चिमी देशो ने उन १० साल के बीच में ही हम पर हमला कर दिया तो ? सबसे जल्दी का रास्ता है कि बंधूक निर्माण करने और रखने के लिए लिसेंस की जरुरत को रद्द कर देना चाहिए | और जिसको बंधूक का निर्माण करना है या बंधूक रखना है , करने देना चाहिए| इस तरह से पाकिस्तानी सैनिकों और पाकिस्तानी नागरिकों को भारत के हर चौराहे, हर गली में जंग लड़नी होगी | जिससे वो भारत की सीमा तो तोड़ सकते हैं लेकिन भारत में अंदर घूस नहीं सकते | इतिहास में हमने कई बार ऐसा देखा हे की जहा नागरिकों के पास हथियार होते हैं, वहाँ सेना का जीतना और आगे जाना नामुमकिन हो जाता हे | जैसे कि हिटलर ने स्वीत्जेर-लैंड पर इसीलिए आक्रमण नहीं किया था क्यूंकि वहाँ हर नागरिक के पास बंधूक थी | आज भी स्वीटजर-लैंड में कायदे के अनुसार एक बंधूक रखना और १०० गोली रखना जरुरी है | स्वीटजर-लैंड के हर आम नागरिक के पास भारत के सैनिक या डी.वाय.एस.पी. से ज्यादा बंधूक की गोलियाँ होती हैं | एक दूसरा उदाहरण है आधुनिक अफघानिस्तान | अफघानिस्तान और 1938 के भारत की तुलना करें | 1938 में भारत को इंग्लेंड ने 38 करोड की आबादी को 80,000 सैनिक द्वारा नियंत्रित किया और राज किया | और आज अमेरिका के 2 लाख सैनिक अफघानिस्तान के 3 करोड नागरिकों को नियंत्रित नहीं कर सकते| ऊँची-नीची भूमि एक कारण है लेकिन मुख्य कारण है कि वहाँ हर औरत, हर बच्चे के पास बंधूक है और इसी लिए अमेरिका के लिए अफघानिस्तान में लूटना और आराम से वहाँ के लोगो को मारना आसान नहीं है |

भारत में कुछ 11 लाख सैनिक हैं, 10 लाख सह-सैनिक बल हैं और कुछ 15 लाख पुलिस वालों के पास बंधूकें हैं | भारत के आम नागरिको में सिर्फ २% नागरिकों के पास बंधूकें हैं | इतनी कम संख्या में लोगों के पास बंधूक होने से पाकिस्तानी सैनिक और नागरिको को खुल्ला मैदान मिल जाएगा अगर एक बार भारतीय सेना की नीव टूट गयी | भारत तो एसी हालत से बचाने के लिए एक ही तरीका हे की भारत के नागरिक को बंधूक रखने का अधिकार दिया जाए | हथियार रखना और उसका इस्तमाल करने का परवाना (लाईसंस) दिया जाए और हर नागरिक ज्यादा से ज्यादा 3 बंधूक रख सके, और फिर बाद में किसी भी मदद के बिना, भारत के 70% से 80% लोगो के पास खुद की बंधूक आ जाएगी | गरीब से गरीब आदमी भी खुद की बंधूक रखेगा क्यूंकि अमीर आदमी अपनी पुरानी बंधूक सस्ते में बेच देगा जैसे कि आज कल मोबाइल-फोन के साथ होता है |
अगर एक बार भारत के 50% से 80% लोगो के पास हथियार या बंधूक आ जाए तो हम लोग बड़ी आसानी से चीन और पाकिस्तान का मुकाबला, पश्चिम के देशो की मदद के बिना कर सकते हैं | हम नहीं कहते की आज के आज ही पश्चिम से हथियार खरीदना बंध कर देना चाहिए | आज हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, इसके अलावा कि हम बाहर से हथियार खरीदें | लेकिन एक बार सबके पास बंधूक आ गई और बंधूक का उत्पादन करना शुरू कर दिया, हम पश्चिम के हथियारों को चरणबद्ध तरीके से हटा सकते हैं क्यूँकि उनमें से लगभग सभी में कील/रेडियो स्विच होना निश्चित है |


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