प्रजा अधीन राजा समूह | Right to Recall Group

अधिकार जैसे कि आम जन द्वारा भ्रष्ट को बदलने/सज़ा देने के अधिकार पर चर्चा करने के लिए मंच
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SR. No. Author Message
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PostPosted: Thu Jul 14, 2011 7:01 am 
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Joined: Sat Jun 25, 2011 6:50 am
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आतंकवादि मुंबई में बम विस्फोट करने में क्यू कामियाब हो गए ? क्यू की पुलिसवाले रिश्वतखोरी में व्यस्त थे | और उसका उपाय |

आतंकवादि मुंबई में बम विस्फोट करने में क्यू कामियाब हो गए ? क्यू की पुलिसवाले रिश्वतखोरी में व्यस्त थे | और मुंबई का पुलिस कमिश्नर नयी नयी योजना बनाने में व्यस्त हे की ज्यादा से ज्यादा घूस केसे इकट्ठी की जाये |

अगर आपने भारतीय पुलिस विभाग का अध्यन किया होगा तो आपको पता ही होगा के या तो पुलिस वाले नयी नयी योजना बनाने में व्यस्त हे की कैसे ज्यादा से ज्यादा घूस इकठ्ठी की जाये | यह घूस लेना नाकि उनकी जरूरियात हे बल्कि उनकी मज़बूरी भी हे | क्युकी उनको हर हप्ते घूस का एक भाग आगे कमिश्नर को देना पड़ता हे | जेसे कॉल सेंटर में कर्मचारी का लक्ष्य (टारगेट) होता हे वैसे ही कर पुलिस कमिश्नर आपने पुलिस वालो को हर हप्ते घूस इकठ्ठा करने का टारगेट देता हे | अगर पुलिस वाले यह टारगेट पूरा नहीं करते तो उनपे दबाव रेहता हे की उनका तबादला हो जायेगा और वो अपने बीवी-बच्चो के साथ नहीं रेह पाएंगे | पुलिस कमिश्नर पर भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का दबाव होता हे क्यू की ईसी घूस का एक हिस्सा उनको आगे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को देना पड़ता हे |

अगर आपने भारत के बहार विकसित देशो जेसे की अमेरिका, कनाडा, यूरोप में प्रवास किया होगा तो आपने निरीक्षण किया होगा की कोई भी विकसित देशो में पुलिस वाले भिखमंगो की तरह लाईसंस और पी.यु.सी जाँचने के लिए नहीं खड़े रहते | वो सिर्फ तभी लाईसंस जाँचते हे जभी आपने कोई कानून तोडा हो | अभी आप सारे विकासशील देश जेसे की भारत का अध्यन करे तो पता चलेगा की ज्यादातर बड़े शहरों में पुलिसवाले लाईसंस और पी.यु.सी जाँचने और नागरिको से भीख मांगने के लिए खड़े रहते हे | और अगर आप ध्यान से निरीक्षण करे तो पता चलेगा की वो सिर्फ लाईसंस और पी.यु.सी के नाम पर घूसखोरी करते हे | वो लोग कभी भी कोई भी वाहन का अंदर से निरिक्षण नहीं करते क्युकी उनके पास घूसखोरी करने के अलावा समय ही नहीं होता | पुलिस वाले उसी वक्त वाहन का अंदर से निरिक्षण करते हे जभी मुंबई बम धमाके जेसा कोई हादसा हो | ट्राफिक पुलिस एक केवल छोटा सा उदाहरण हे | कुछ पुलिसवाले गैरक़ानूनी बस्तियो से हप्ता लेने में व्यस्त हे | कुछ पुलिसवाले गैरक़ानूनी शराब के अड्डों और जुए खानों से हप्ता लेने में व्यस्त हे | कुछ पुलिसवाले बडे बिल्डर और व्यापारियो से पैसा लेते हे क्युकी उनको दावूद जेसे गुंडों से रक्षण चाहिए | कुछ पुलिस वाले मंत्रीओ, न्यायाधीशों और राजनितिक पक्ष के पड़े नेताओ को सुरक्षा देने में व्यस्त हे | लेकिन आम नागरिक को सुरक्षा देने के लिए किसी के पास समय ही नहीं हे क्यू की उनमे उनको पैसे नहीं मिलते |

मान लो की यादी कोई ईमानदार पुलिस वाला आ जाये तो क्या होगा ? उसका ग्रामीण इलाके में तबादला कर दिया जायेगा या तो उसे किसी मिनिस्टर या नेता की सुरक्षा के लिए लगा दिया जायेगा | अगर फिर भी कोई ईमानदार पुलिस वाला मिल जाये तो वो बडे शहरों में जी नहीं पाएंगा क्यू की भ्रष्ट राजनेताओ ने उसकी पगार या तनख़्वाह ही इतनी काम रखी हे की घूस खोरी के बिना उनका जीवन नहीं चलेगा और बादमे ईसी तरह पुलिस विभाग में एक भी ईमानदार पुलिस वाला नहीं बचता |

अगर आप ने भारत में दो पहिया या चार पहिया वाहन चलाया होगा तो आप जवाब दे की पिछले २५ (पच्चीस) सालो में आप के वाहन की कितनी बार तलासी हुई हे ? और आपसे लाईसंस और पी.यु.सी कितनी बार माँगा हे ? आपसे लाईसंस और पी.यु.सी बहत बार माँगा गया होगा लेकिन वाहन की तलाशी बहुत ही दुर्लभ चीज़ हे | अगर आपने भारत के बहार विकसित देशो में सफर किया हे तो आपको रोककर कितनी बार लाईसंस की मांग की हे ? मेने और मेरे दोस्तों ने मिलकर दुनिया के सभी विकसित देशो और उनकी व्यवस्थातंत्र का निरीक्षण किया हे | किसी भी विकसित देस में पुलिस वाले भिखमंगो की तरह लाईसंस का निरिक्षण करने के लिए नहीं खड़े रहते |

यदि आपको राजनीती का थोडा ही ज्ञान हे तो आपको पता होगा की कुछ २-३ साल पेहले भारतीय जनता पार्टी ने पार्लमेंट से वाल्क आउट कर दिया था क्यू की सी.बी.आई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेसन) सिर्फ कांग्रेस के दुश्मनों को परेसान करने में अपना समय व्यर्थ करती थी | भारतीय जनता पार्टी उसे कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेसन कहती थी | वैसे तो भारतीय जनता पार्टी भी साफ सूत्री नहीं हे वो भी जब पॉवर में होती थी तब उन्होंने भी ऐसा ही किया था | मतलब की सी.बी.आई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेसन) का मूल उद्देश्य ही काम नहीं आ रहा | सी.बी.आई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेसन) की नीति हे की वो भारत को तथा भारत के नागरिको को बहार से आने वाली मुसीबतों से बचाए | लेकिन जेसे ट्राफिक पुलिस यातायात देखने की बजाये भिखमंगी में लगी हुई हे वैसे हे सी.बी.आई आतंगी हमलों से सुरक्षा का प्रबंध करने की बजाये सोनिया गाँधी, एल.के.अडवाणी या अन्य नेता जिसके पर पावर हो उसकी चापलूसी करने में लाई हुई हे |

और एक संभावना यह भी के की खुद कांग्रेस ने यह बम विस्फोट किया हो ताकि कोगो का ध्यान मूल विषय भ्रस्टाचार से अलग हो जाये ? उससे भी इनकार नहीं किया जा सकता |

अमेरिका की पुलिस में भ्रष्टाचार भारत की पुलिस की तुलना में इतना कम क्यों है” इस प्रश्न का उत्तर अथर्ववेद और स्वामी दयानंद जी के शब्दों में देते हुए कहा जा सकता है कि इसका कारण है कि अमेरिका में पुलिस प्रमुख प्रजा के अधीन है जबकि भारत में कोई एक भी पुलिस प्रमुख प्रजा के अधीन बिलकुल नहीं है | अथर्ववेद और स्वामी दयानंद सरस्वती जी कहते है कि यदि राजा (राज कर्मचारी जैसे पुलिस प्रमुख) यदि प्रजा के अधीन नहीं है तो वह नागरिकों को लूट लेगा | जिसे आज हम भारत में हर कहीं देख रहे हैं |

अमेरिका में केवल जिला पुलिस प्रमुख / डिस्‍ट्रीक्‍ट पुलिस चीफ, राज्यपाल, जिला न्यायाधीश, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला लोक अभियोजक(District Public Prosecutor), इतना ही नहीं अमेरिका के कुछ राज्यों में उच्च न्‍यायालय के मुख्य न्‍यायाधीश तक प्रजा के अधीन है और इसलिए अमेरिका के ये सरकारी कर्मचारी कम लूट मचाते हैं।

और उसी अमेरिका में सीनेटर प्रजा के अधीन नहीं हैं और इसलिए सारे भ्रष्ट है I संघीय अधिकारियों द्वारा नियुक्त किये हुए राष्ट्रपति प्रजा के अधीन नहीं हैं इसलिए वे सारे भ्रष्ट है |

तो अथर्ववेद जो कहता है, वह अमेरिका में बिना किसी अपवाद के लागू किया गया है | और भारत में पटवारी से लेकर उच्‍चतम न्‍यायालय/सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्‍यायाधीश तक कोई भी प्रजा के अधीन नहीं है I और इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि उनमें से लगभग सभी भ्रष्ट हैं |

प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल का वर्णन अथर्ववेद में है I अथर्ववेद कहता है की सभी नागरिकों की जनसभा राजा को निकाल सकती है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अपनी पुस्‍तक सत्यार्थ प्रकाश के छठे अध्याय में राज धर्म का वर्णन किया है और प्रथम 5 श्लोकों में से एक में वे कहते हैं - राजा को प्रजा के अधीन होना चाहिए अर्थात वह हम आमलोगों पर आश्रित हो I कृपया ध्यान दीजिए - उन्होंने “अधीन” शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ होता है पूर्णत: आश्रित और अगले ही श्लोक में महर्षि दयानंद जी ने कहते हैं यदि राजा प्रजा के अधीन नहीं है तो वह राजा प्रजा को उसी तरह लूट लेगा जिस तरह एक मांसाहारी जानवर दूसरे जानवरों को खा जाता है। और इस प्रकार वैसा राजा (जो प्रजा के अधीन नहीं) राष्ट्र का विनाश कर देगा I और महर्षि दयानंद जी ने ये दोनों श्लोक वर्षों पहले लिखे गए अथर्ववेद से लिए हैं I और यहाँ राजा में प्रत्येक राज कर्मचारी सम्मिलित है अर्थात उच्‍चतम न्‍यायालय/सुप्रीम कोर्ट के न्‍यायाधीश से लेकर पटवारी तक सरकार के सभी कर्मचारी I सरकार का प्रत्येक कर्मचारी प्रजा के अधीन होना चाहिए अन्‍यथा वह नागरिकों को लूट लेगा I ऐसा ही वे महात्‍मा कहते हैं जिन्‍होंने अथर्ववेद लिखा और महर्षि दयानंद सरस्वती जी उन महात्‍माओं की बात से सहमत हैं। इस प्रकार प्रजा अधीन राजा/राइट टू रिकॉल भारतीय वेदों के मूल में है और इस प्रकार सारी भारतीय विचारधाराओं, भारतीय मत, पंत और धर्मों ने अपनी आधारभूत भावना वेदों से ही ली हैं I

और कृपया ध्यान दीजिए – दयानंद सरस्‍वती जी संविधान-अधीन राजा के बारे में नहीं कहते। वे प्रजा अधीन राजा/राइट टू हटाने/रिकॉल के बारे में कहते हैं। भारत में, 4 अंकों के स्‍तर के बुद्धिजीवियों ने हमेशा उस बात का विरोध किया जो अथर्ववेद और सत्यार्थ प्रकाश सुझाते हैं I 4 अंकों वाले स्तर के ये बुद्धिजीवी कहते हैं कि राजा और राज कर्मचारी अर्थात सरकारी कर्मचारियों को प्रजा के अधीन कदापि नहीं होना चाहिए बल्‍कि उन्हें केवल संविधान-अधीन अर्थात किताबों के अधीन जैसे संविधान के अधीन होना चाहिए। संविधान-अधीन राजा अर्थात संविधान-अधीन मंत्री, संविधान-अधीन अधिकारी, संविधान-अधीन पुलिसवाले और संविधान -अधीन न्‍यायाधीश की पूरी संकल्‍पना ही एक छल है क्‍योंकि तथाकथित संविधान की व्‍याख्‍या को न्‍यायाधीशों, मंत्रियों आदि द्वारा एक मोम के टुकड़े की तरह तोड़ा-मरोड़ा जा सकता हैI संविधान की पूरी संकल्‍पना एक राक्षसी विचार है जिसे केवल भ्रम पैदा करने के लिए ही सृजित किया गया है |

उपाय
इस समस्या का उपाय हल हमारी किताब के बीचे दिए गए अध्याय में हे यह किताब आप इस लिंक से डाउनलोड कर सकते हे


http://righttorecall.com/301.pdf (English)
http://rightorecall.com/301.h.pdf (हिंदी)

(1) राईट टू रिकोल पुलिस कमिश्नर
- उपरकी पी.डी.एफ. फाइल में अध्याय २२

(2) राईट टू रिकोल सी.बी.आई. डिरेक्टर
- उपरकी पी.डी.एफ. फाइल में अध्याय ६

(3) पुलिस वालो और सी.बी.आई पर ज्यूरी सिस्टम
- उपरकी पी.डी.एफ. फाइल में अध्याय २१

(4) राज्य के गृह मंत्री पर राईट टू रिकोल
- उपरकी पी.डी.एफ. फाइल में अध्याय ६

(5) देश के गृह मंत्री पर राईट टू रिकोल
- उपरकी पी.डी.एफ. फाइल में अध्याय ६


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