Request to read full Jan-Lokpal Draft, not 2 page summary

यहाँ पूरे जन्लोक्पल ड्राफ्ट पर चर्चा करें (केवल 2 पेज के पर्चे पर नहीं) ; Please discuss here on FULL Janlokpal draft (not just the 2 page pamphlet)

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Request to read full Jan-Lokpal Draft, not 2 page summary

Post by admin » Thu Apr 14, 2011 12:04 pm

I would request you to please read the full draft because that is what is to be passed and not the summary.

The summary is inconsistent with the full bill. What is written in summary is altogether different than what is written in the proposed LokPal Bill.

I will give few instances-

I will quote the column of `Proposed system`-
1)"Lokpal at centre and Lokayukta at state level will be independent bodies."
Please see section 6 of proposed LokPal Bill-`Appointment of the Chairperson and members`.
"4. A selection committee consisting of the following shall be set up:
a. Two senior most judges of Supreme Court
b. Two senior most Chief Justices of High Courts. c. All Nobel Laureates of Indian Origin
d. Last three Magsaysay Award winners
e. Comptroller and Auditor General of India f. Chief Election Commissioner
g. After the first set of selection process, the outgoing members and Chairperson of
5. The seniormost judge of Supreme Court shall act as the Chairperson of the selection committee."


As you see the selection committee is chaired by Supreme Court judge and the committee also consists of mostly judges. Now 80% judges are known to be corrupt. Do you think a corrupt person can select a honest person?
How is the LokPal independent body when the corrupt judge is selecting the LokPal? If an MNC agent becomes Lokpal by bribing Rs 20cr to majority of
Lokpal Selection Committee Members, then India will be become MNC- heaven and Dwadeshi HellHole in 2 years. We have PM who is MNC agent and last thing we can risk is a Lokpal who is also MNC agent. Such MNC agent Lokpal will finish careers of every honest/swadeshi IAS, IPS,
judges in India and whole administration will become MNC puppet.


2)"Lokpal & Lokayukta shall have powers to investigate and prosecute
any judge without needing anyone’s permission."

Please read section 7 of LokPal bill-
"(3) The following process shall be followed for the removal of any member or
(a) Any person may move an application/petition before the Supreme Court seeking removal of
one or more of the members of Chairperson of Lokpal alleging one or more of the grounds for removal
and providing evidence for the same.
(b) Supreme Court will hear the matter by a bench of three or more Judges on receipt of such petition"


The LokPal shall be under huge influence of judges since they have power to remove the LokPal. Then how can the LokPal investigate and prosecute the judge??


3)"Lokpal & Lokayukta will have to enquire into and hear every complaint."

4)"All investigations in Lokpal & Lokayukta shall be transparent. After completion of investigation, all case records shall be open to public. Complaint against any staff of Lokpal & Lokayukta shall be enquired and punishment announced within two months."

Please see section 11 of proposed LokPal bill -

"Reports of Lokpal, etc. (1) The Chairperson of Lokpal shall present annually a consolidated report in prescribed format on its performance to the President.

(2) On receipt of the annual report, the President shall cause a copy thereof together with an explanatory memorandum to be laid before each House of the Parliament.

(3) The Lokpal shall publish every month on its website the list of cases disposed with brief details of each such case, outcome and action taken or proposed to be taken in that case. It shall also publish lists of all cases received by the Lokpal during the previous month, cases disposed and cases which are pending."


As you see the LokPal is giving only the summary and brief details and NOT the FULL DETAILS and if the lokPal wants he can say that he has enquired the case even if he has not. This is because he has discretion power to do so. It may happen that Lokpal gives no hearing to a big complaint that matters to crores of people who dont have access to wealthy lawyers and media. Lokpal can simply delay action on that complaint by calling it small and "too few people want action on it". We must have a mechanism that would at least ensure that Lokpal can dismiss complaints that matter to crores of commons.


5)"Politicians will have absolutely no say in selections of Chairperson and members of Lokpal & Lokayukta. Selections will take place through a transparent and public participatory process."

Please see sectiion 6.6(i)-
"i. Public feedback shall be invited on the shortlisted names by putting these names on the website."


There is no procedure given by which public will give its feedback and especially which is transparent.
Also, since politicians and MNCs have control over the judges, they can have control over the LokPal also via the judges as the judges control the selection and removal of LokPal.


Now these are some of the flaws mentioned. Please give your comments also.

The summary is not going to get passed but the FULL BILL is going to get passed. Then why is summary being distributed?

And that too in english?
The Hindi version should be distributed. you may download the hindi version at-

And the english version is at-

Vande Mataram.


प्रस्तावित लोकपाल बिल के Pamphlet में जो गलत लिखा है उसके कुछ उदाहरण मैं प्रस्तुत करता हूँ|

IAC के लोकपाल बिल में और इसके सारांश में बहुत अंतर है| जो सारांश में लिखा है वास्तविकता में बिल के अंदर वो नहीं है बल्कि इसका उलट है| पूरा बिल पढ़ने के लिए यहाँ से download करें| ... ujhaav.pdf


1. हाँगकाँग में भ्रष्टाचार, “भ्रष्टाचार के खिलाफ स्वतंत्र आयोग”(ICAC) की वजह से नहीं बल्कि Jury System की वजह से कम हुआ है| Jury System में आम जनता अपराधी को सज़ा दे सकती है|

2. आपने कहा “प्रस्तावित कानून के बाद केंद्र में लोकपाल और राज्य में लोकायुक्त सरकार के अधीन नहीं होंगे” लेकिन लोकपाल बिल का 6th सेक्शन(अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति) देखिये जिसमे साफ लिखा है की:

“4.एक चुनाव समिति जिसमे की निम्नलिखित शामिल हो गठित की जाएगी|

(क) उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ दो न्यायाधीश|

(ख) उच्च न्यायालय के दो सबसे वरिष्ठ न्यायमूर्ति|

(ग) सभी नोबले पुरस्कार विजेता (भारतीय मूल के)|

(घ) पिछले तीन मेगसेसे पुरस्कार विजेता|

(ङ) भारत का नियंत्रक महालेखपरीक्षक(Comptroller and Auditor General of India)

(च) मुख्य चुनाव आयुक्त|

(छ) चुनावी प्रक्रिया के प्रथम चरण के पश्चात बाहर निकालने वाले लोकपाल के सदस्य और अध्यक्ष|

5.उच्चतम न्यायालय के सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीश चुनाव समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे|”


जैसे आप देख सकते है की लोकपाल नियुक्ति समिति का अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय का सर्वाधिक वरिष्ठ न्यायाधीश है| लेकिन उच्चतम न्यायालय के 80% न्यायाधीश भ्रष्ट पाये गए है| क्या आपको लगता है की एक भ्रष्ट व्यक्ति एक ईमानदार लोकपाल का चुनाव करेगा? तो लोकपाल फिर स्वतंत्र कैसे हुआ? जब भ्रष्ट न्यायाधीश उसकी नियुक्ति करेगा|

यदि बहुराष्ट्रीय कंपनी का एजेंट लोकपाल बन जाता है करोड़ो रुपये रिश्वत देकर लोकपाल नियुक्ति समिति के सदस्यों को फिर भारत बहुराष्ट्रीय कंपनी का गुलाम बन जाएगा 2-3 सालों में| हमारे प्रधानमंत्री बहुराष्ट्रीय कंपनी के एजेंट है और हमको अब लोकपाल को भी बहुराष्ट्रीय एजेंट नहीं बनाना है| ऐसा बहुराष्ट्रीय कंपनी का एजेंट “लोकपाल” सभी ईमानदार/स्वदेशी भारतीय IAS, IPS, न्यायाधीशों का भारत में भविष्य खत्म कर देगा और सारा प्रशासन बहुराष्ट्रीय कंपनी की कठपुतली बन जाएगा|

3. आपने कहा है की “लोकपाल और लोकायुक्तों को किसी न्यायाधीश के खिलाफ जांच करने व मुकदमा चलाने के लिए किसी को इजाजत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी” लेकिन लोकपाल बिल का 7th सेक्शन देखे जिसमे साफ लिखा है की:

“3.किसी भी सदस्य अथवा अध्यक्ष को हटाने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा:

(क) कोई भी व्यक्ति उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिका/प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकता है लोकपाल के अध्यक्ष के किसी भी एक या अधिक सदस्य को हटाने के लिए जो की एक या अधिक आधारों पर आरोपों के आधार पर हो उन आरोपों का सबूत देते हुए|

(ख) उच्चतम न्यायालय उस विषय की सुनवाई करेगा एक तीन सदस्यीय अथवा अधिक न्यायाधीशों की पीठ द्वारा ऐसी किसी याचिका की प्राप्ति पर|

लोकपाल न्यायाधीशों के भारी प्रभाव में रहेगा क्योंकि उनको लोकपाल को निकालने का अधिकार है| तो फिर लोकपाल न्यायाधीश के खिलाफ स्वतंत्र जांच एवं मुकदमा कैसे कर सकेगा|

4. आपने कहा है की “लोकपाल और लोकायुक्त किसी की शिकायत को खुली सुनवाई किए बिना खारिज नहीं कर सकेंगे| आयोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे” और “लोकपाल और लोकायुक्त का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा| किसी भी मामले में जाच के बाद सारे रिकॉर्ड जनता को उपलब्ध होंगे| इनके किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच करने व उस पर जुर्माना लगाने का काम अधिकतम दो महीने में पूरा करना होगा|” लेकिन लोकपाल बिल के 11th सेक्शन में साफ लिखा है की:

“11.लोकपा का विवरण/रिपोर्ट इत्यादि

(1) लोकपाल का अध्यक्ष प्रत्येक वर्ष एक संगठित विवरण प्रस्तुत करेगा जो की निर्दिष्ट स्वरूप में होगा और राष्ट्रपति के प्रति उसके प्रदर्शन को दर्शायेगी|

(2) वार्षिक विवरण की प्राप्ति पर, राष्ट्रपति उस विवरण के साथ उसको समझाने वाली विज्ञप्ति संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखेगा|

(3) लोकपाल हर माह वैबसाइट पर निपटारा किए गए मामलों को प्रदर्शित करेगा और साथ में उन मामलों का संक्षिप्त विवरण भी देगा, उन नतीजों और प्रक्रियाओं को जो की उस विषय में लिए गए अथवा साबित हुए| वह पिछले माह में लोकपाल द्वारा प्रपट सभी मामलों की सूची भी प्रदर्शित करेगा, जो की या तो निपटा दिये गए है या जिनका निपटना बाकी है|”

जैसे आप देख सकते है की लोकपाल केवल शिकायतों का सारांश और संक्षिप्त विवरण ही देगा और पूरा विवरण नहीं देगा| और यदि लोकपाल चाहे तो कह सकता है की उसने मामले की जांच की है भले ही उसने नहीं की हो| ऐसा इसलिए है क्योंकि लोकपाल के पास सर्वाधिकार रहेगा| ऐसा हो सकता है की किसी बढ़ी शिकायत की सुनवाई ना करे जो करोड़ों लोग चाहते हो और जिनके पास महंगे/बड़े वकील ना हो| लोकपाल उस शिकायत की कार्यवाही में विलंब भी कर सकता है उसे महत्वहीन बताते हुए और बहुत कम व्यक्ति इस पर कार्यवाही चाहते है| हमारे पास ऐसा तंत्र होना चाहिए जो सुनिश्चित करे की लोकपाल करोड़ों आम आदमी की शिकायतों को खारिज ना कर सके|

5.लोकपाल और लोकायुक्तों की नियुक्ति में नेताओं की कोई भूमिका नहीं होगी| इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके और जनता की भागीदारी से होगी|

लेकिन लोकपाल बिल के 6th सेक्शन के 6th पॉइंट(झ) में:

“6.6(झ) जनमत विचार को उन चिन्हित प्रत्याशियों के लिए आमंत्रित किया जाएगा, उन नामों को वैबसाइट पर रख कर|”

ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं दी गयी है जिसके द्वारा जनता लोकपाल अध्यक्ष/सदस्य के चुनाव में अपना सुझाव दे सके या भागीदारी कर सके और जो पारदर्शी हो| राजनीतिज्ञों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का न्यायाधीशों पर नियंत्रण होता है और उसके द्वारा वे लोकपाल पर भी नियंत्रण रख सकते है क्योंकि न्यायाधीश ही लोकपाल की नियुक्ति और निष्कासन करेंगे|

आप को यह कमियाँ बताई है प्रस्तावित लोकपाल बिल में, कृपया अपने भी सुझाव और उपाय दीजिएगा| ... ujhaav.pdf


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